हुक्म और हसरत - 21 Diksha mis kahani द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हुक्म और हसरत - 21

💗💗💗 हुक्म और हसरत 💗💗💗

एपिसोड 21 — एक पिता का डर ❤️
#Arsia

"अब आगे…”



किसी के कदमों की आहट पूरे कमरे में गूँज उठी।

अर्जुन तुरंत अपनी जगह से उठकर सिया के बेड के सामने आकर खड़ा हो गया, जैसे दुनिया की हर मुसीबत से उसे अपनी ढाल में छिपा लेना चाहता हो। 😑🛡️

सिया ने दरवाज़े की तरफ़ देखा...

और उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। 🥹

"आप... आ गए?" ❤️

दरवाज़े पर खड़ा वह शख्स कुछ पल तक सिया को देखता रहा।

उसके चेहरे पर चिंता साफ़ झलक रही थी।

अगले ही पल उसकी आँखों में छिपा डर साफ़ दिखाई देने लगा।

वो कोई अजनबी नहीं था...

वो सिया के पिता थे। 🥺

अर्जुन एक तरफ़ हट गया।

सिया के पिता तेज़ कदमों से उसके पास पहुँचे और बिना कुछ कहे उसकी हथेली अपने हाथों में ले ली।

उनकी उँगलियाँ काँप रही थीं।

उन्होंने सिया के हाथ को अपने होंठों से लगाया और फिर उसके माथे पर बेहद प्यार से एक चुम्बन दिया। ❤️

"मेरी बच्ची..."

बस दो शब्द...

लेकिन उन दो शब्दों में एक पिता की पूरी दुनिया समाई हुई थी।

सिया की आँखों के कोने भीग गए।

"पापा..."

"हाँ बेटा... मैं आ गया।"

उन्होंने उसके बालों पर हाथ फेरा।

"अब कैसी हो?"

सिया ने मुस्कुराने की कोशिश की।

"पहले से... थोड़ी ठीक हूँ।"

पिता ने उसकी मुस्कान को ध्यान से देखा।

वो मुस्कान उन्हें तसल्ली देने की कोशिश कर रही थी...

लेकिन एक पिता अपनी बेटी की आँखों का दर्द कैसे नहीं समझेगा?

उनकी नज़र उसके पीले पड़े चेहरे पर गई।

"तुम्हें इतना कुछ सहना पड़ा और हमें खबर तक नहीं..."

सिया ने धीरे से उनकी उँगलियाँ दबाईं।

"पापा... अर्जुन मेरे साथ था।" 🥺

कमरे में खड़े अर्जुन की आँखें एक पल के लिए सिया पर टिक गईं।

सिया के पिता ने पहली बार उसकी तरफ़ देखा।

कुछ पल दोनों की नज़रें मिलीं।

उनकी आँखों में सवाल भी था...

और एक पिता का आभार भी।

लेकिन उससे पहले कि वो कुछ कहते—

दरवाज़ा फिर खुला।

"सिया!" 😭❤️

रोशनी लगभग दौड़ती हुई अंदर आई।

उसकी आँखों में अब भी आँसुओं के निशान थे।

उसके पीछे काव्या भी थी, जो आते ही सिया के पास पहुँच गई।

रोशनी ने सिया का हाथ पकड़ लिया।

"तूने हमें कितना डरा दिया था..." 🥺

सिया ने कमजोर-सी मुस्कान दी।

"मैं इतनी आसानी से नहीं जाने वाली..." 😌

रोशनी की आँखों से फिर आँसू निकल पड़े।

"पागल है तू! ऐसी बातें मत कर।"

काव्या ने आँसू रोकते हुए कहा—

"मैडम, आप बीमार होकर भी attitude नहीं छोड़ रही हैं।" 😭😂

सिया ने उसकी तरफ़ देखा।

"तुम मेरी assistant हो... या मेरी दुश्मन?"

कमरे में पहली बार हल्की-सी हँसी गूँजी। ❤️

कुछ पल के लिए कमरे का डर जैसे कम हो गया।

लेकिन अर्जुन चुपचाप सब देख रहा था।

उसकी नज़र सिया पर थी...

और उसके चेहरे पर एक हल्की-सी राहत थी।

कम से कम...

वो मुस्कुरा तो रही थी। ❤️

---


कुछ देर बाद रानी माँ भी कमरे में आ गईं।

उन्होंने सिया के पिता की तरफ़ देखा और धीमे से कहा—

"आप उससे मिल लीजिए... हम सब यहीं हैं।"

सिया के पिता ने सिर हिलाया।

लेकिन उनकी नज़र बार-बार अर्जुन पर जा रही थी।

उन्होंने धीरे से कहा—

"अर्जुन... क्या तुम मेरे साथ बाहर चलोगे?"

अर्जुन ने तुरंत सिर हिलाया।

दोनों कमरे से बाहर निकल गए।

गलियारे में कुछ दूर जाकर सिया के पिता रुक गए।

कुछ पल तक वो चुप रहे।

फिर उन्होंने सीधे अर्जुन की आँखों में देखा।

"सच बताओ... मेरी बेटी के साथ हुआ क्या है?"

अर्जुन के चेहरे की सारी नरमी गायब हो गई।

उसने धीमे स्वर में पूरी बात बतानी शुरू की।

ज़हर...किचन...
रेयर केमिकल...ससीटीवी...

और महल के अंदर छिपे किसी शख्स का शक। 😑

सिया के पिता की मुट्ठियाँ कसती चली गईं।

"और वो इंसान अभी भी इस महल में है?"

अर्जुन ने बिना झिझके जवाब दिया—

"हाँ।"

कुछ पल सन्नाटा रहा।

फिर उसके पिता ने पूछा—

"तुम उसे ढूँढ लोगे?"

अर्जुन की आँखों में एक ठंडी चमक उभरी।

"मैं उसे ढूँढकर रहूँगा।" 🔥

"मेरी बेटी को कुछ हो जाता तो..."

उनकी आवाज़ भर्रा गई।

अर्जुन ने पहली बार उनकी तरफ़ पूरी तरह देखा।

"मैं भी खुद को कभी माफ़ नहीं करता।"

सिया के पिता कुछ पल उसे देखते रहे।

फिर उन्होंने धीमे स्वर में कहा—

"आज मैंने अपनी बेटी की आँखों में तुम्हारे लिए भरोसा देखा है।"

अर्जुन चुप रहा।

"उस भरोसे की कीमत समझते हो?"

अर्जुन की आँखें गंभीर हो गईं।

"उसकी जान से बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं।"

सिया के पिता ने लंबी साँस ली।

उन्होंने अर्जुन के कंधे पर हाथ रखा।

"तो फिर उसे बचाकर रखना। सिर्फ़ दुश्मनों से नहीं... इस पूरे खेल से।"

अर्जुन ने सिर झुका दिया।

"जी।"

तभी पीछे से तेज़ कदमों की आवाज़ आई।

विवेक वहाँ पहुँचा।

उसके चेहरे पर गंभीरता थी।

"अर्जुन... हमें कुछ मिला है।"

अर्जुन तुरंत उसकी तरफ़ मुड़ा।

"क्या?"

विवेक ने मोबाइल आगे बढ़ाया।

"आकाश के बारे में।"

अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।

---


विवेक ने फोन पर एक फोटो खोली।

"ये देखो।"

फोटो में आकाश महल के पीछे वाले हिस्से में खड़ा था।

लेकिन समस्या उसकी मौजूदगी नहीं थी...

समस्या उसके हाथ में पकड़ी चीज़ थी।

वही छोटी-सी नीली शीशी। 

अर्जुन का चेहरा पत्थर जैसा हो गया।

सिया के पिता ने भी तस्वीर देखी।

उनकी आँखों में गुस्सा उतर आया।

"यही है वो?"

अर्जुन ने कुछ नहीं कहा।

विवेक बोला—

"हमें अभी तक ये साबित नहीं हुआ कि उसने सिया को ज़हर दिया। लेकिन उसके कमरे की तलाशी में कुछ नकली दस्तावेज़ मिले हैं। और—"

वो अचानक रुक गया।

"और क्या?"

विवेक ने धीमे स्वर में कहा—

"उसके फोन से एक नंबर बार-बार संपर्क में था।"

"किसका नंबर?"

विवेक ने सिर हिलाया।

"नाम सेव नहीं है। लेकिन पिछले तीन दिनों में उसी नंबर से कई कॉल हुई हैं।"

अर्जुन ने फोन अपने हाथ में लिया।

"नंबर ट्रेस करो।"

"कोशिश कर रहा हूँ।"

तभी...

अर्जुन के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। 

उसने स्क्रीन खोली।

सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी—

«"जिसे तुम ढूँढ रहे हो... वो तुम्हारे बहुत करीब है।"»

अर्जुन की आँखें ठहर गईं।

विवेक ने पूछा—

"क्या हुआ?"

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।

तभी दूसरा मैसेज आया।

इस बार उसके चेहरे की कठोरता और बढ़ गई।

«"और अगली बार निशाना सिर्फ़ सिया नहीं होगी।"»

अर्जुन की मुट्ठी फोन पर कस गई। 🔥

उसी पल...

सिया के कमरे से अचानक एक चीख सुनाई दी—

"डॉक्टर को बुलाइए!" 😱

तीनों एक साथ पलटे।

अर्जुन बिना एक पल गंवाए सिया के कमरे की तरफ़ दौड़ा।

दरवाज़ा खुला था।

अंदर रोशनी घबराई हुई खड़ी थी...

काव्या की आँखों में आँसू थे...

और डॉक्टर सिया के पास झुके हुए थे।

अर्जुन की धड़कन जैसे रुक गई।

"सिया को क्या हुआ?"

डॉक्टर ने उसकी तरफ़ देखा...

उनके चेहरे पर ऐसी गंभीरता थी कि अर्जुन के भीतर एक अनजाना डर उतर गया।

उन्होंने धीरे से कहा—

"सर... उसकी हालत अचानक फिर बिगड़ गई है।"

और उसी क्षण...

सिया की उँगलियाँ अचानक काँपीं।

उसकी बंद पलकों के नीचे आँखें तेजी से हिलने लगीं।

फिर उसके होंठों से बेहद धीमी आवाज़ निकली—

"वो... यहाँ है..." 😨

अर्जुन जम गया।

"कौन, सिया?"

सिया ने मुश्किल से आँखें खोलीं...

और दरवाज़े की तरफ़ देखने लगी।

उसकी आँखों में डर था।

"वो..."

लेकिन अगले ही पल उसकी आँखें फिर बंद हो गईं।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

अर्जुन ने धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ़ देखा।

वहाँ...

कुछ ही दूरी पर...

एक परछाईं खड़ी थी। 

जारी रहेगा... 💗🔥

© Diksha 

प्रिय पाठकों,

यह भाग लिखने में मुझे बहुत समय, मेहनत और प्यार लगा है। यदि आपको यह अध्याय पसंद आया हो, तो कृपया इसे रेटिंग दें और अपने रिव्यू ज़रूर साझा करें।

Follow me for the next episode…

✨ मेरी रचनाएँ ✨

 1. अनुबंध (Anubandh) — ✅ Completed

 2. वो जो चुपके से देखा करता था — ✅ Completed

3. अनचाही मोहब्बत (Anchahi Mohabbat) — ✅ Completed

4. हुक्म और हसरत (Hukm Aur Hasarat) — ✍️ 
Running... 🌸

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💗 मेरी “घूंघट वाली दुल्हन” का एक छोटा-सा सीन… सिर्फ आप लोगों के लिए! 
मेरी प्यारी Matrubharti family,
आज सोचा कि आपको अपनी कहानी का एक छोटा-सा sneak peek दूँ। ❤️

ये रहा “घूंघट वाली दुल्हन” का एक छोटा-सा सीन, जो शायद आपको नंदिनी और हर्षवर्धन के रिश्ते की एक झलक दे पाए—

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हर्षवर्धन कुछ पल तक नंदिनी को खामोशी से देखता रहा।

नंदिनी ने नजरें झुका लीं।

“आप मुझसे कुछ कहना चाहते हैं?” उसने धीमे से पूछा।

हर्षवर्धन उसके करीब आया।

“हाँ।”

नंदिनी की उंगलियां अपने घूंघट के किनारे को कसकर पकड़ने लगीं।

“आप हर बार मुझसे कुछ न कुछ छुपा लेती हैं।”

नंदिनी चुप रही।

हर्षवर्धन ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—

“लेकिन मैं आपका पीछा नहीं कर रहा, नंदिनी…”

वह एक पल के लिए रुका।

“मैं बस आपको समझना चाहता हूँ।”

नंदिनी की आंखों में नमी उतर आई।

“अगर मुझे समझने की कोशिश में आपको मेरे बारे में कुछ ऐसा पता चल गया… जो आपको मुझसे नफरत करने पर मजबूर कर दे तो?”
हर्षवर्धन की आंखों में एक अजीब-सी गंभीरता उतर आई।

“तो मैं उस दिन फैसला करूंगा।”

“आज नहीं।”

नंदिनी ने पहली बार उसकी तरफ देखा।

और हर्षवर्धन धीमे से बोला—

“क्योंकि जब तक आप खुद मुझे अपना सच नहीं बताएंगी… तब तक मैं आपके बारे में कोई फैसला नहीं करूंगा।”

नंदिनी की आंखों से एक आंसू गिर पड़ा।

लेकिन अगले ही पल—

दरवाजे के बाहर किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी।

दोनों की नजरें दरवाजे की तरफ उठ गईं।

और बाहर खड़ा शख्स...

उन दोनों की ये बातचीत सुन चुका था। 👀🔥

---

कैसा लगा आपको ये छोटा-सा sneak peek? ❤️

अगर आप “घूंघट वाली दुल्हन” को Pocket FM पर सुन रहे हैं, तो अपना प्यार जरूर बनाए रखिए। 🥹💗

आपकी एक छोटी-सी rating, review और follow मेरे लिए बहुत मायने रखता है। ✨

आपकी लेखिका-
Diksha” मिस कहानी “