💗💗💗 हुक्म और हसरत 💗💗💗
#Arsia
"अब आगे..."
कमरे में कुछ पल के लिए ऐसा सन्नाटा छा गया था, मानो वक्त भी वहीं ठहर गया हो। सिर्फ मॉनिटर की बीप... बीप... की आवाज़ उस खामोशी को चीर रही थी।
विवेक अंदर आया — और सामने का नज़ारा देखकर उसके कदम वहीं थम गए।
महल का सबसे ठंडा और रहस्यमयी आदमी... जो कभी किसी को छूने तक नहीं देता था... आज एक टूटती हुई लड़की को अपनी गोद में समेटे बैठा था। उसकी उंगलियाँ सिया के सिर पर बेहद नर्मी से फिर रही थीं, जैसे ज़रा-सी लापरवाही उसे फिर दर्द दे देगी।🥺❤️
अर्जुन की आँखों की कठोरता पूरी तरह टूट चुकी थी। उनमें पहली बार बेबसी साफ दिखाई दे रही थी।😞
विवेक ने कुछ कहने के लिए होंठ खोले, लेकिन शब्द गले में ही अटक गए।
अर्जुन ने बिना उसकी तरफ देखे, भारी आवाज़ में कहा—😓
"किचन के हर शख्स का बैकग्राउंड चेक कराओ... आज की रात... कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए।" 🔥
उसकी आवाज़ धीमी थी... मगर उसमें ऐसा गुस्सा था जिसने विवेक की रीढ़ तक सिहरन दौड़ा दी।
"जी... बॉस।" इतना कहकर विवेक तुरंत बाहर निकल गया।
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कुछ ही देर बाद डॉक्टर ने अर्जुन के सामने ब्लड रिपोर्ट रखी।
उन्होंने गहरी साँस ली और गंभीर स्वर में कहा—
"ये बेहद रेयर केमिकल है... पहले आर्मी के बायो वॉरफेयर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होता था। इसे कोई आम इंसान हासिल नहीं कर सकता।"
अर्जुन की मुट्ठियाँ धीरे-धीरे भींच गईं। उसकी नसें साफ उभर आई थीं।😑
उसने रिपोर्ट से नज़र हटाए बिना कहा—
"मतलब... कोई बहुत करीब का है... जो इस महल के अंदर तक पहुँच चुका है।"
डॉक्टर ने गंभीरता से सिर हिला दिया।कमरे में फिर वही डरावनी खामोशी फैल गई।लकिन इस बार अर्जुन की आँखों में डर नहीं था...
वहाँ एक शिकारी जाग चुका था।🤨🔥
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हर स्टाफ की तलाशी ली जा रही थी। पहचान पत्र, बैग, कमरे... सबकी बारीकी से जाँच हो रही थी। सीसीटीवी फुटेज एक-एक सेकंड पीछे करके देखी जा रही थी।
उधर...
आकाश हमेशा की तरह शांत चेहरे के साथ सबके बीच खड़ा था।😌
उसके पास हर सवाल का जवाब था...क्योंकि उसके सारे दस्तावेज़ नकली थे।उसके चेहरे पर मासूमियत थी...
लेकिन आँखों के पीछे एक बेहद खतरनाक राज़ छिपा था।😈
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दूसरी तरफ...
अर्जुन हर कुछ मिनट बाद सिया के कमरे में आ जाता।
वो अब भी बेहोशी और हल्की चेतना के बीच झूल रही थी। उसकी साँसें धीमी थीं, चेहरा पूरी तरह पीला पड़ चुका था।🥺💔
हर साँस जैसे उसके सीने में चुभ रही थी...
और सिर का दर्द उसे भीतर तक तोड़ रहा था।
फिर भी उसके काँपते होंठों पर बस एक ही नाम था—
"अ... अर्जुन..." 😴
ये सुनते ही अर्जुन तुरंत उसके पास बैठ गया।
उसने बहुत सावधानी से उसकी ठंडी हथेली अपने दोनों हाथों में ली... और धीरे से अपने होठों से छू लिया।🥺❤️
उसकी आँखें नम हो चुकी थीं।
वो फुसफुसाया—
"मुझे माफ़ कर देना... मैं तुम्हें बचा नहीं पाया..."
उसने एक पल के लिए अपनी आँखें बंद कीं... फिर दृढ़ स्वर में बोला—
"लेकिन अब... कोई भी साया तुम तक नहीं पहुँचेगा।"
"ये मेरा वादा है... राजकुमारी।" 🔥
उसी पल...
कमरे के बाहर भागते हुए एक गार्ड की आवाज़ सुनाई दी—
"सर... सीसीटीवी में कुछ मिला है!" 😮
अर्जुन ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।
वो तेज़ कदमों से कंट्रोल रूम की तरफ बढ़ गया... उसकी आँखों में अब सिर्फ एक ही लक्ष्य - सिया पर हमला करने वाले को ढूँढना। 🔥
कंट्रोल रूम की बड़ी स्क्रीन पर रात की सीसीटीवी फुटेज बार-बार चलाई जा रही थी। पूरे कमरे में सन्नाटा पसरा था। हर किसी की नज़र उसी स्क्रीन पर टिकी हुई थी।
अचानक...
एक परछाईं किचन की तरफ बढ़ती दिखाई दी। उसने चारों ओर नज़र दौड़ाई, जैसे यकीन कर रहा हो कि कोई उसे देख नहीं रहा। फिर उसने जेब से एक छोटी-सी शीशी निकाली... और कुछ मसालों में एक तरल पदार्थ मिला दिया।
चेहरा कैमरे में साफ़ नहीं दिख रहा था...
लेकिन उसकी चाल...वो चाल अर्जुन को कहीं न कहीं जानी-पहचानी लगी। 🤨अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।
उसने स्क्रीन के बिल्कुल पास जाकर फुटेज रोक दी।
"यही है..." उसने धीमे लेकिन बेहद ठंडे स्वर में कहा।
"यहीं से शुरुआत करनी होगी।" 😑🔥
कमरे में मौजूद सभी लोग समझ चुके थे—
अब ये सिर्फ़ जाँच नहीं...शिकार शुरू हो चुका था।
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उसी समय...
महल के दूसरे सिरे पर...
आकाश अपने कमरे में अकेला खड़ा था। उसने धीरे से दरवाज़ा बंद किया और किसी को फोन मिलाया।
उसकी आवाज़ पहले जैसी शांत थी,लेकिन शब्द ज़हर से भरे हुए थे।
"वो लड़की अभी भी ज़िंदा है... लेकिन अब ज़हर उसकी नसों में बह रहा है। हर धड़कन के साथ..." 😈
फोन के दूसरी तरफ़ से ठंडी आवाज़ आई—
"अगली खेप... पहले से ज़्यादा असरदार होनी चाहिए।"
आकाश की आँखों में खतरनाक चमक उभर आई।
उसने जेब से वही छोटी नीली शीशी निकाली। कमरे की हल्की रोशनी उस लिक्विड पर पड़ रही थी।
वो उसे घूरते हुए धीमे से मुस्कुराया...
"इस बार... सिर्फ़ शरीर नहीं... उसकी याददाश्त भी टूटनी चाहिए।" 😈
लेकिन...
उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था...
कि कमरे के बाहर अँधेरे में खड़ी एक परछाईं उसकी हर हरकत पर नज़र रखे हुए थी।
**
सिया के कमरे के बाहर सुरक्षा पहले से कई गुना बढ़ा दी गई थी। हर तरफ़ गार्ड्स तैनात थे और महल के गलियारों में भी अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही थी।
लेकिन महल के दूसरे हिस्से में...
राजमाता और रोशनी बैठे-बैठे कब एक-दूसरे के सहारे सो गईं, उन्हें पता ही नहीं चला। 🥺
रोशनी के गाल पर अब भी आँसू की एक पतली-सी लकीर थी।
उसी वक्त रानी माँ वहाँ पहुँचीं।
उन्होंने कमरे में कदम रखा और कुछ पल अपनी बेटी और राजमाता को देखा।
उनके चेहरे पर अपने आप एक हल्की-सी मुस्कान आ गई। ❤️
उन्होंने धीरे से रोशनी के पास जाकर उसके माथे को चूमा। 😘
फिर उनकी नज़र कमरे के कोने में रखे सोफे पर गई।
काव्या वहीं बैठी-बैठी सो गई थी। उसका सिर एक तरफ़ हल्का-सा झुका हुआ था।
रानी माँ ने दीवार पर लगी घड़ी की तरफ़ देखा।
रात के बारह बज चुके थे।
उन्होंने पहले रोशनी और राजमाता के ऊपर प्यार से कंबल डाला।
फिर काव्या के पास जाकर उसे धीरे से सही तरह लिटाया और उसके ऊपर भी कंबल उड़ा दिया।
एक पल के लिए उन्होंने तीनों को देखा...
फिर धीमे कदमों से सिया के कमरे की तरफ़ चल पड़ीं।
सिया के कमरे के बाहर पहुँचते ही रानी माँ कुछ पल के लिए रुक गईं।
सुरक्षा सचमुच बहुत बढ़ा दी गई थी।
दो गार्ड दरवाज़े के पास खड़े थे और गलियारे में भी निगरानी थी। हर आने-जाने वाले पर नज़र रखी जा रही थी।
रानी माँ ने अंदर देखा...
और उनकी नज़र सीधे अर्जुन पर जाकर ठहर गई। ❤️
अर्जुन सिया के पास बैठा था।
उसकी नज़र लगातार सिया के चेहरे पर टिकी हुई थी।
उसका एक हाथ सिया के हाथ में था...
और उसकी उँगलियाँ अब भी सिया की उँगलियों को थामे हुए थीं।
रानी माँ कुछ पल दूर से ही उन्हें देखती रहीं।
उनकी आँखों में एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान उतर आई। 🥹❤️
शायद एक माँ की नज़र से वो देख पा रही थीं कि अर्जुन के दिल में सिया के लिए क्या था...
वो बात, जिसे अर्जुन खुद भी शायद अभी पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रहा था।
रानी माँ ने धीरे से दरवाज़े पर दस्तक दी।
ठक... ठक...
अर्जुन तुरंत चौकन्ना होकर खड़ा हो गया।
दरवाज़े पर रानी माँ को देखकर उसके चेहरे की कठोरता थोड़ी नरम पड़ गई।
"रानी माँ..."
रानी माँ ने मुस्कुराते हुए उसे बैठने का इशारा किया।
"बैठो, अर्जुन।"
अर्जुन वापस बैठ गया।
रानी माँ धीरे-धीरे सिया के पास पहुँचीं।
उन्होंने उसके पीले पड़े चेहरे को देखा...
उनकी आँखों में चिंता उतर आई।
बहुत प्यार से उन्होंने सिया के माथे को चूमा। 🥺❤️
फिर उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कुछ पल उसे देखती रहीं।
इसके बाद उन्होंने अर्जुन की तरफ़ देखा।
"अब आप भी जाइए... कुछ देर आराम कर लीजिए। हम हैं यहाँ।"
अर्जुन ने तुरंत सिर हिलाया।
"नहीं रानी माँ, मैं ठीक हूँ। मैं यहीं—"
रानी माँ ने उसकी बात बीच में ही काट दी।
उनकी आवाज़ में माँ वाली सख्ती थी।
"अपनी हालत देखी है आपने?"
अर्जुन चुप हो गया।
रानी माँ ने उसकी तरफ़ देखते हुए कहा—
"खाना तक नहीं खाया आपने। कब से यहीं बैठे हैं...?"
अर्जुन ने नज़रें झुका लीं।
रानी माँ ने हल्की-सी नाराज़गी से कहा—
"जाइए... पहले खाना खाइए। थोड़ा आराम कीजिए।"
फिर उन्होंने सिया की तरफ़ देखा।
"एक बेटी को अपनी माँ की ज़रूरत होती है... और आज सिया के पास हम हैं।" ❤️
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
वो रानी माँ की बात टालना चाहता था...
लेकिन उनकी आँखों में जो ममता थी, उसके आगे उसके शब्द ही नहीं निकले।
आखिरकार उसने धीमे से कहा—
"जी..."
वो उठा और कमरे से बाहर निकल गया।
लेकिन...
रानी माँ जानती थीं कि अर्जुन इतनी आसानी से आराम करने वाला नहीं है। 😌
और सच भी यही था।
कमरे से बाहर निकलते ही अर्जुन के कदम खाने या आराम करने की तरफ़ नहीं बढ़े...
बल्कि सीधे उस जगह की तरफ़ बढ़ गए जहाँ से वो इस पूरे षड्यंत्र की जड़ तक पहुँच सकता था।
उसे आराम नहीं चाहिए था।
उसे जवाब चाहिए था।
उसे सिया के साथ ऐसा करने वाले का नाम चाहिए था। 🔥
कुछ देर बाद...
महल की बालकनी में ठंडी हवा चल रही थी।
अर्जुन रेलिंग के पास खड़ा था।
ब्लैक शर्ट की बाँहें कोहनी तक चढ़ी हुई थीं और उसका चेहरा अँधेरे की तरफ़ था।
लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही आग थी।
पीछे से विवेक की धीमी पदचाप सुनाई दी।
विवेक उसके पास आकर रुक गया।
कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर अर्जुन ने बिना उसकी तरफ़ देखे पूछा—
"तुम्हें शक है किसी पर?" 😑
विवेक ने गहरी साँस ली।
"आकाश नाम का नया शेफ... कुछ न कुछ छुपा रहा है।"
अर्जुन ने धीरे से सिर घुमाया।
उसका चेहरा अब बिल्कुल पत्थर जैसा कठोर था।
"उसे छूने से पहले... उसे हज़ार बार सोचना चाहिए था।"
उसकी मुट्ठी कस गई।
"मैं खुद देखूँगा उसे।" 🔥
सिया के लिए रानी माँ ने उसे आराम करने भेजा था...
लेकिन अर्जुन के लिए ये रात आराम की नहीं थी।
ये रात उस शख्स की तलाश की थी... जिसने उसकी सिया को छूने की हिम्मत की थी। 🔥❤️
रात गहरा चुकी थी।
महल के ज़्यादातर लोग सो चुके थे, लेकिन अर्जुन की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था।
वो अपने प्राइवेट रूम में बैठा था। सामने टेबल पर सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट्स और पूरे महल का एक बड़ा नक्शा फैला हुआ था। हर कागज़ पर उसकी नज़र बार-बार जा रही थी, जैसे कोई छोटी-सी गलती भी उससे छूटनी नहीं चाहिए।
कुछ पल सोचने के बाद उसने अपना मोबाइल उठाया और एक नंबर डायल किया।
फोन उठते ही अर्जुन ने शांत लेकिन आदेश भरे स्वर में कहा—
"वीर... राज... और यश। अब वक्त आ गया है। मुझे तुम तीनों की ज़रूरत है। ये खेल अब सिर्फ़ दिल का नहीं... जान का हो चुका है।" 😑🔥
दूसरी तरफ़ से वीर की आवाज़ आई—
"हमेशा तैयार हैं, बॉस। बस आपका आदेश चाहिए।"
अर्जुन ने कॉल काट दी।
उसकी आँखों में फिर वही ठंडा आत्मविश्वास लौट आया था।
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अगली सुबह...
महल के एक गुप्त कमरे में अर्जुन की पूरी टीम मौजूद थी।
वीर – हैकिंग और टेक एक्सपर्ट।
राज – पूर्व जासूस, जिसकी नज़र से कोई झूठ नहीं बचता था।
यश – अंडरकवर फील्ड मास्टर, जो भीड़ में रहकर भी किसी की नज़र में नहीं आता था।
अर्जुन ने सबकी तरफ़ देखा और बोला—
"हमें आकाश की असलियत जाननी है। उसके फोन, उसके कमरे, उसकी हर हरकत... सब पर नज़र रखो। एक भी गलती नहीं होनी चाहिए।"
"जी बॉस!" तीनों ने एक साथ जवाब दिया। 🔥
कुछ ही देर बाद...
वीर कंट्रोल रूम में बैठकर सीसीटीवी सिस्टम और सर्वर की हर फ़ाइल खंगाल रहा था।
राज स्टाफ से ऐसे सवाल पूछ रहा था कि सामने वाला सच छिपा ही नहीं पा रहा था।
और यश...
वो दूर खड़ा, बिना किसी को शक हुए, आकाश की हर हरकत पर नज़र रखे हुए था।
जाल बिछ चुका था...
बस शिकार को इसकी भनक नहीं थी।
उधर… रानी मां के जाने के बाद ,सिया के कमरे में गहरा सन्नाटा था। अर्जुन उसके सिरहाने बैठा था।
उसकी नज़र एक पल के लिए भी सिया के चेहरे से नहीं हट रही थी।
वो धीरे-धीरे उसके माथे पर हाथ फेर रहा था, जैसे उसके दर्द को अपने हाथों से मिटा देना चाहता हो। 🥺❤️
तभी...
सिया की पलकों में हल्की-सी हरकत हुई।
उसकी उँगलियाँ काँपीं।
होंठ मुश्किल से हिले—
"अ... अर्जुन..." 🥺
अर्जुन तुरंत उसके और करीब झुक गया।
"सि... अम्म... राजकुमारी... मैं यहीं हूँ। आप बिल्कुल ठीक हो जाएँगी।" 🌸
सिया ने बड़ी मुश्किल से आँखें खोलीं।
सब कुछ धुँधला था।
हर साँस उसके सीने में चुभ रही थी। सिर का दर्द उसे भीतर तक तोड़ रहा था।
कमज़ोर आवाज़ में उसने कहा—
"मुझे... ठंड लग रही है... अर्जुन..." 🥺
अर्जुन ने बिना एक पल गँवाए उसे कंबल अच्छी तरह ओढ़ा दिया और उसकी हथेली अपने हाथों में ले ली। ❤️
"कुछ नहीं होगा आपको, राजकुमारी। जब तक मैं हूँ... कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।" 😔
सिया ने धीरे से आँखें बंद कर लीं।
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा...
फिर इंटरकॉम उठाकर ठंडे स्वर में कहा—
"आकाश की हर हरकत की रिपोर्ट चाहिए... हर सेकंड की।"
उसकी आवाज़ पहले से भी ज़्यादा कठोर हो चुकी थी।
"अब ये लड़ाई सिर्फ़ बचाने की नहीं... खत्म करने की है।" 🔥😑
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कमरा हल्की धूप से भर गया था।
अर्जुन अब भी वहीं बैठा था। पूरी रात जागने की थकान उसकी आँखों में साफ़ दिखाई दे रही थी।
सिया ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।
कमज़ोर आवाज़ में पूछा—
"तुम... यहीं थे?" 😴
अर्जुन के होंठों पर बहुत हल्की मुस्कान आई।
वो मुस्कान... जो शायद सिर्फ़ सिया के लिए थी। 🥺
"जहाँ आप हों... वहीं हूँ, राजकुमारी।" ❤️
सिया की आँखों में नमी उतर आई।
इस बार उसमें डर नहीं था...
सिर्फ़ भरोसा था। 💔
उसने हल्के से मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन शरीर का दर्द उसे फिर से चुप करा गया।
तभी...
ठक... ठक...
दरवाज़ा धीरे से खुला।
किसी के कदमों की आहट पूरे कमरे में गूँज उठी।
अर्जुन तुरंत अपनी जगह से उठकर सिया के बेड के सामने आकर खड़ा हो गया, जैसे दुनिया की हर मुसीबत से उसे अपनी ढाल में छिपा लेना चाहता हो। 😑
सिया ने दरवाज़े की तरफ़ देखा...
और उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। 🥹
"आप... आ गए?" ❤️
दरवाज़े पर खड़ा वह शख्स कुछ पल तक सिया को देखता रहा।
उसके चेहरे पर चिंता साफ़ झलक रही थी...
और कमरे का माहौल एक बार फिर रहस्यमयी खामोशी में डूब गया।
जारी(..)
© Diksha
प्रिय पाठकों,
यह भाग 2000+ शब्दों का है। इसे लिखने में मुझे बहुत समय, मेहनत और प्यार लगा है। यदि आपको यह अध्याय पसंद आया हो, तो कृपया इसे रेटिंग दें और अपने रिव्यू ज़रूर साझा करें।
Follow me for next episode…
✨ मेरी रचनाएँ ✨
1. अनुबंध (Anubandh) — ✅ Completed
2. वो जो चुपके से देखा करता था — ✅ Completed
3. अनचाही मोहब्बत (Anchahi Mohabbat) — ✅ Completed
4. हुक्म और हसरत (Hukm Aur Hasarat) — ✍️
Running... 🌸
💗 मेरे प्यारे Parahearts( readers) के नाम:-----
मेरे प्यारे Parahearts ❤️
अगर आपको मेरी दोनों कहानियों के नए एपिसोड का इंतज़ार रहता है, तो मैं आपसे एक छोटी-सी बात शेयर करना चाहती हूँ। 🥹✨
एक साथ दो कहानियाँ लिखना और उन्हें नियमित रूप से पब्लिश करना थोड़ा समय ले रहा है, क्योंकि इन दिनों मैं Pocket FM के लिए अपनी ऑडियो स्टोरी “घूँघट वाली दुल्हन” पर भी लगातार काम कर रही हूँ।
इसलिए अगर कभी किसी कहानी का एपिसोड थोड़ा देर से आए, तो प्लीज़ मेरा साथ बनाए रखिएगा। ❤️ मैं चाहती हूँ कि दोनों कहानियों को पूरा समय और मेहनत देकर आप तक पहुँचाऊँ।
और अगर आप Pocket FM पर हैं, तो एक छोटी-सी गुज़ारिश है—
“घूँघट वाली दुल्हन” ज़रूर सुनिएगा और अगर कहानी आपको पसंद आए तो उसे ⭐ रेटिंग और अपना प्यारा-सा रिव्यू हिंदी में ज़रूर दीजिएगा। 🥺❤️
आपका एक छोटा-सा रिव्यू और रेटिंग मेरे लिए बहुत मायने रखता है और मुझे आगे लिखने की motivation देता है।
ढेर सारा प्यार,
आपकी writer ❤️
और मेरे प्यारे Parahearts हमेशा खास रहेंगे। ✨
— Diksha "मिस कहानी" 🌸💗