हवेली की विशाल संगमरमर की दीवार पर टंगी प्राचीन घड़ी ने जैसे ही शाम के सात बजने का ऐलान किया, हर एक टिक-टिक की आवाज़ के साथ माया के दिल की धड़कनें बेकाबू होकर सीने से बाहर आने को बेताब होने लगीं। पूरा दिन इस आलीशान, बंद कमरे में घुट-घुट कर बिताने के बाद अब वह वक्त बेहद करीब आ चुका था जिसका खौफ़ माया को सुबह से सता रहा था। कमरे का विशाल ड्रेसिंग शीशा उसके ठीक सामने था, जिसमें लाल सिल्क की भारी साड़ी में लिपटी वह खुद को बेबसी से देख रही थी। सुबह जाते-जाते आर्यन के कहे कड़क और बेपरवाह शब्द—"उम्मीद करता हूँ कि तब तुम इस नफ़रत की जगह थोड़ा सा समर्पण लेकर मेरा इंतज़ार करोगी"—उसके कानों में किसी पिघले हुए शीशे की तरह बार-बार गूँज रहे थे। माया ने अपनी बंद आँखों से आँसू छलकने दिए। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस कैद से कभी आज़ाद हो भी पाएगी या आर्यन का यह जुनूनी जाल उसे हमेशा के लिए मिटा देगा।
तभी सन्नाटे को चीरती हुई भारी और कड़क कदमों की आहट गलियारे में गूँजी। माया का शरीर डर के मारे अचानक सुन्न पड़ गया। कमरे का ऑटोमैटिक दरवाज़ा एक मद्धम सी आवाज़ के साथ धीरे से खुला और भारी कदमों से आर्यन अंदर दाखिल हुआ। उसका महँगा कोट उसके हाथ में था, सफ़ेद शर्ट का ऊपर का बटन खुला हुआ था, टाई की गाँठ नीची हो चुकी थी और उसकी गहरी भूरी आँखों में दिन भर की थकान के साथ-साथ एक अजीब सा, खतरनाक और जुनूनी नशा साफ़ तैर रहा था।
आर्यन ने पीछे मुड़कर दरवाज़े को अंदर से लॉक किया। भारी लॉक लगने की उस कड़क आवाज़ ने माया की बची-खुची हिम्मत को भी तोड़कर रख दिया। आर्यन ने बिना कोई शब्द बोले, अपनी कोट को पास रखी कुर्सी पर फेंका और धीमे, सधे तथा आक्रामक कदमों से सीधे माया की तरफ़ बढ़ना शुरू कर दिया। उसकी नज़रों का भारीपन और मालिकाना हक़ इतना गहरा था कि माया को अपनी नाज़ुक त्वचा पर एक अजीब सी जलन महसूस होने लगी। माया घबराकर दो कदम पीछे हटने ही वाली थी कि आर्यन ने बिना कोई मौका दिए, एक ही झटके में अपनी मज़ाबूत और चौड़ी बांह को माया की पतली कमर के गिर्द लपेट लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया।
माया का पूरा नाज़ुक शरीर आर्यन के चौड़े, गठीले और गर्म सीने से ज़ोर से जा टकराया। दोनों की साँसें एक-दूसरे में उलझने लगीं और हवा में एक अजीब सा सुलगता हुआ नशा घुल गया।
"पूरा दिन..." आर्यन ने माया की नाज़ुक गर्दन के पास अपना चेहरा झुकाते हुए, उसकी त्वचा पर अपनी गर्म और भारी साँसें छोड़ते हुए फुसफुसाया, "पूरा दिन बिज़नेस की बड़ी-बड़ी डील्स और मीटिंग्स के बीच सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारे इस खुशबूदार जिस्म, तुम्हारी इन कांपती हुई साँसों और तुम्हारी इन ख़ामोश चीखों का ख़याल मुझे पल-पल बेचैन करता रहा। मैं एक पल के लिए भी काम पर ध्यान नहीं लगा सका, माया।"
माया ने तड़पकर और घबराकर अपने कांपते हाथों को आर्यन के चौड़े सीने पर रखा और पूरी ताकत लगाकर उसे पीछे धकेलने की एक और नाकाम कोशिश की, "छोड़िए मुझे... आर्यन, ईश्वर के लिए मुझे छोड़ दीजिए! प्लीज... मुझसे यह ज़बरदस्ती मत कीजिए!"
आर्यन के चेहरे पर एक सख्त, कुटिल लेकिन मदहोश कर देने वाली मुस्कान तैर गई। उसने माया की मिन्नतों का कोई जवाब नहीं दिया। उसने अपनी बड़ी हथेली को माया की पीठ पर और कस लिया, जिससे दोनों के बीच की बची-खुची दूरी भी हमेशा के लिए खत्म हो गई। आर्यन ने अपने दूसरे हाथ की उंगलियों को माया के लंबे, मुलायम बालों में कसकर फंसाया और उसका चेहरा ऊपर उठाकर सीधे उसकी कांपती हुई, भीगी आँखों में अपनी तीखी नज़रें गड़ा दीं।
"कब तक दूर भागोगी माया?" उसकी आवाज़ में एक कड़क मिठास और अटूट हुक्म था। "तुम जितना पीछे हटने की कोशिश करोगी, मैं उतनी ही शिद्दत से तुम्हारे वजूद में समाता जाऊँगा। तुम्हारी यह नफ़रत, तुम्हारा यह डर और तुम्हारी यह बेबसी ही तो मुझे तुम्हारा दीवाना बनाती है। आज रात... कोई शर्त नहीं होगी, कोई पैसों का सौदा नहीं होगा और न ही तुम्हारे पिता का कोई ज़िक्र होगा। आज रात सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम होगी और मेरा यह बेकाबू जुनून होगा।"
इतना कहते ही आर्यन ने माया को बोलने का कोई मौका नहीं दिया। उसने अपने गर्म होंठ माया के कांपते, भीगे हुए गुलाबी होंठों पर रख दिए। यह स्पर्श सुबह की तरह केवल सख्त या डरावना नहीं था, बल्कि इसमें एक बेहद गहरा, सुलगता हुआ और बेपनाह आकर्षण छुपा हुआ था। माया का पूरा जिस्म एक पल के लिए पूरी तरह सुन्न पड़ गया। उसने अपनी पूरी ताकत जमा करके आर्यन के चौड़े कंधों को धकेलना चाहा, मगर आर्यन का हाथ उसकी कमर पर किसी फौलादी घेरे की तरह कसता चला गया।
माया की बंद आँखों की कोरों से दो गर्म आँसू छलक कर आर्यन के गाल पर जा गिरे। आँसुओं की उस गर्म छुअन को महसूस करते ही आर्यन पल भर के लिए रुका। उसने अपनी आँखें खोलीं, माया के गालों पर ढलते आँसुओं को अपनी उंगलियों से धीरे से पोंछा और माया की कांपती पलकों को देखते हुए बेहद धीमी, भारी लेकिन रूह को छू लेने वाली आवाज़ में कहा:
"अपने इस डर और नफ़रत को मुझे सौंप दो, माया। मैं तुम्हें मिटाने नहीं आया हूँ, मैं तुम्हें पूरी तरह से अपना बनाने आया हूँ। तुम्हें मुझ पर हक़ जताने के लिए मेरी बाहों में आना ही होगा।"
आर्यन ने बिना कोई देर किए माया को अपनी दोनों मजबूत बाहों में एक छोटे बच्चे की तरह उठा लिया और धीमे कदमों से विशाल किंग-साइज़ बेड की तरफ़ बढ़ गया। माया का दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था मानो सीना फाड़कर बाहर आ जाएगा। घबराहट और अनजाने डर के मारे उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। आर्यन ने उसे बेहद नज़ाकत और नरमी से मखमली बेड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया।
माया ने यह सोचकर अपने हाथों को सीने से सटा लिया कि अब उसकी बर्बादी का अंतिम अध्याय पूरा होने वाला है। लेकिन इस बार, जब आर्यन ने उसकी गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं और उसके चेहरे को सहलाया, तो माया के कांपते हाथों ने आर्यन को धकेलने के बजाय, अनजाने में और बिना अपनी मर्जी के, उसकी सफ़ेद शर्ट के कपड़े को कसकर भींच लिया।
यह उसकी नफ़रत की पहली हार थी या आर्यन के उस खौफ़नाक, ज़बरदस्ती भरे और सम्मोहक खिंचाव के आगे माया का पहला मौन समर्पण, वह खुद भी समझ नहीं पा रही थी। कमरे का सन्नाटा अब दोनों की तेज़ चलती साँसों और सुलगते हुए जुनून से भर चुका था।