रात का सन्नाटा कमरे की चार दीवारों के भीतर और गहराता जा रहा था। मद्धम पीली रोशनी में आर्यन का साया माया पर पूरी तरह छाया हुआ था। दीवार से सटी खड़ी माया की साँसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आर्यन की सख्त और गर्म उंगलियों की पकड़ उसकी कमर पर और गहरी हो गई। माया ने अपनी बंद आँखों को खोलने की हिम्मत की, तो सीधे आर्यन की उन कड़क और गहरी आँखों से टकराई, जिनमें एक अजीब सा जुनून और अधिकार का नशा तैर रहा था।
"छोड़िए मुझे... आप ऐसा नहीं कर सकते," माया की आवाज़ डर से कांप रही थी, लेकिन उसमें एक हल्की सी बगावत भी थी। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर आर्यन के सीने पर दबाव बनाया, मगर आर्यन किसी चट्टान की तरह अपनी जगह डटा रहा।
आर्यन के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान तैर गई। उसने माया की बेबसी को बहुत करीब से महसूस किया। उसने माया के दोनों हाथों को उसके सिर के ऊपर दीवार से सटा दिया और उसके बेहद करीब आते हुए फुसफुसाया, "मैं क्या कर सकता हूँ और क्या नहीं, यह तय करने का हक़ तुमने खुद मुझे बेचा है, माया। 1 करोड़ रुपये की बोली यूँ ही नहीं लगी थी।"
यह सुनते ही माया की आँखों से आँसू छलक कर आर्यन के हाथ पर जा गिरे। आँसुओं की वह गर्म बूंद जैसे ही आर्यन की त्वचा से टकराई, आर्यन के चेहरे का कठोर भाव एक पल के लिए थमा। उसकी नज़रों में एक अनजानी सी उलझन उभरी। उसने माया के गालों पर ढलते आँसुओं को देखा, जो उसकी बेबसी की गवाही दे रहे थे।
आर्यन ने धीमे से माया की कलाइयों को छोड़ दिया, लेकिन उसे अपने जिस्म के घेरे से पूरी तरह आज़ाद नहीं किया। उसने अपनी उंगलियों के पोरों से माया के आँसू पोंछे। उसकी इस छुअन में अब ज़बरदस्ती से ज़्यादा एक अजीब सा अधिकार और आकर्षण था। माया का दिल तेज़ी से धड़क रहा था—यह डर था या आर्यन की इस अनचाही नज़दीकी का असर, वह खुद समझ नहीं पा रही थी।
"रोने से सच नहीं बदलेगा," आर्यन ने अपनी कड़क आवाज़ को थोड़ा धीमा करते हुए कहा। "आज रात तुम इस कमरे से बाहर नहीं जा सकती। तुम मेरी हो, और तुम्हें मेरे नियमों के मुताबिक ही चलना होगा।"
आर्यन ने माया को बाहों में उठाकर बेड की तरफ़ कदम बढ़ाए। माया ने घबराकर उसके गले को कसकर पकड़ लिया। बेड पर माया को लिटाकर आर्यन उसके ऊपर झुका। माया ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, यह सोचकर कि अब उसकी बर्बादी का अगला अध्याय शुरू होने वाला है। लेकिन आर्यन ने सिर्फ़ उसके माथे पर अपने गर्म होंठ टिका दिए—एक ऐसा स्पर्श, जिसमें ज़बरदस्ती का जूनून भी था और एक अनजाना संरक्षण भी।
"सो जाओ," आर्यन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा और खुद बेड के दूसरे तरफ़ जाकर लेट गया, लेकिन उसकी एक बांह माया की कमर पर कसकर लिपटी रही ताकि वह दूर न जा सके।
पूरी रात माया आर्यन की बाहों के घेरे में कैद रही। उसकी गर्म साँसें माया की गर्दन पर पड़ती रहीं, जिससे माया को पूरी रात नींद नहीं आई। सुबह की पहली किरण जब खिड़की के भारी पर्दों को चीरकर कमरे में दाखिल हुई, तो माया ने देखा कि आर्यन गहरी नींद में सो रहा था। उसका सख्त चेहरा अब शांत दिख रहा था।
माया ने धीरे से उसकी बांह हटाने की कोशिश की, लेकिन आर्यन ने नींद में ही अपनी पकड़ और कस ली। उसने अपनी आँखें खोले बिना ही भारी आवाज़ में कहा, "भागने की कोशिश भी मत करना माया... तुम इस जाल से कभी बाहर नहीं निकल सकती।"