चांदनी - 2 Vandna Sharma द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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चांदनी - 2



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*चांदनी*  
_लेखिका: वंदना शर्मा_

इस आजादी का फायदा उठा चांदनी घर में सबका अपमान करती। कहती - "जब मेरे पति को कोई दिक्कत नहीं, तो तुम कौन होते हो मुझे कुछ कहने वाले।"

घर में सब चांदनी के व्यवहार से दुखी थे। सोहन की जॉब अगले ही महीने दूसरे शहर में लग गई। शुरू में सोहन अकेले ही शहर गया। उसने सोचा मैं पहले खुद वहां पैर जमा लूं फिर ले जाऊंगा अपनी बीवी को।

लेकिन चांदनी का शातिर दिमाग कद और साजिश करने में व्यस्त था। उसने अपने सास-ससुर से झूठ बोला कि सोहन ने उसका टिकट बुक करा दिया है और उसे कल ही अपने पास बुलाया है। अपने ससुर से झूठ बोलकर अकेले ही बैग पैक कर सोहन के पास दूसरे शहर पहुंच गई। सोहन उसे देखकर खुश हुआ। एक बार भी उसने नहीं समझाया कि पिताजी से झूठ बोलकर आने की क्या जरूरत थी।

चांदनी तो झूठ बोलने व अभिनय करने में पारंगत हो गई थी। अब तो उसके पर निकल आए। छोटे शहर की लड़की बड़े शहर की चका-चौंध से प्रभावित हो गई। सोहन की चुप्पी और लापरवाही ने उसे बेशर्म, ढीठ बना दिया। 

दूसरे शहर जाकर उसने छोटे कपड़े पहनकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया। अब वो कहीं भी सड़क पर, बाजार में, सबके सामने वीडियो बनाने लगी। घर के काम के लिए कामवाली रख ली और सारा दिन फोन पर वीडियो बनाती।

चांदनी का लगभग 1 साल बाद अपने ससुराल में पुनः आगमन हुआ। अपनी छोटी ननद के विवाह के अवसर पर। इन दो महीनों में चांदनी ने अपनी साजिशों से ननद सुमन को बहुत दुखी कर दिया। कोई भी नुकसान होता तो नाम सुमन का लगा देती। सुमन के पिता गुस्सा सुमन पर उतारते। छोटी-छोटी बातों पर घर में कलेश हो जाता। 

सुमन बेचारी इतनी दुखी हो गई कि उसने सोच लिया - "शादी के बाद कभी मायके नहीं आऊंगी।"

सुमन की शादी के बाद ससुर ने सोहन से कहा - "अपनी बीवी को साथ ले जा। हमारी शांति खराब मत कर।" यही चांदनी चाहती थी। उसने सोहन के कान भरकर उसे परिवार से अलग कर दिया।

अब चांदनी का पूरा दिन मोबाइल में बीतता। घंटे लाइव आकर वीडियो बनाती। उसकी वीडियो वायरल भी होने लगीं। अब चांदनी ने पूरे दिन मोबाइल में व्यस्त रहना शुरू कर दिया। घंटे भर लाइव आकर आभासी दोस्तों से बाते करती। वीडियो बनाती और झूठी तारीफ सुनकर घमंडी हो गई। अब चांदनी को अपने ससुराल वाले दुश्मन लगते और आभासी दुनिया अच्छी लगती।

चांदनी की एक बेटी सौम्या भी थी जो प्राइवेट स्कूल में पढ़ती थी। सौम्या पढ़ने में बहुत होशियार थी और हर प्रतियोगिता में प्रथम आती। सोहन उसे रोज 2 घंटे पढ़ाता। 

एक बार स्कूल के समारोह में चांदनी कैमरा लेकर वीडियो बनाने लगी। अध्यापिकाओं ने टोका तो उसने इग्नोर कर दिया। जब प्राचार्य को पता चला तो उन्होंने सोहन और चांदनी को बुलाया।

"देखिए आपकी बेटी बहुत होनहार है। पर आप उसकी क्लास, टीचर, रोज की रूटीन सब पब्लिक कर रही हैं। ये उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है। अच्छे टॉपिक पर वीडियो बनाइए। अपनी निजी जिंदगी का तमाशा मत बनाइए। वरना हमें सौम्या को स्कूल से निकालना पड़ेगा।"

प्राचार्य की बात सुनकर चांदनी का घमंड टूट गया। पहली बार उसकी आंखों में आंसू आए। उसने हाथ जोड़कर कहा - "मेरी गलती की सजा सौम्या को मत दीजिए। मैं अब ऐसी वीडियो नहीं बनाऊंगी।"

उस दिन के बाद चांदनी बिल्कुल बदल गई। उसने वीडियो बनाना बंद कर दिया और एक डांस अकादमी खोल ली। अब वह आसपास की लड़कियों को डांस और अच्छे संस्कार सिखाने लगी। 

कुछ महीने बाद सोहन के साथ वह ससुराल गई। सबके पैर छूकर अपने दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगी। ससुराल वालों का दिल पिघल गया। उन्होंने उसे गले लगाकर माफ कर दिया। 

ससुर ने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया - "बेटी, देर से ही सही, तुम्हें अकल आ गई। अब अपने सत्कर्मों की चांदनी सर्वत्र फैलाओ। घर में फिर से रौशनी ले आओ।"

उस दिन के बाद चांदनी का घर फिर से हंसने लगा। सौम्या को मम्मी-पापा दोनों का समय मिलने लगा। अब लोग उसे "रील्स वाली चांदनी" नहीं, "संस्कारी चांदनी दीदी" कहकर बुलाते।

*सीख:*  
आजादी का मतलब मनमानी नहीं होता। शोहरत से पहले संस्कार जरूरी हैं। और गलती मानकर सुधर जाना ही इंसान की सबसे बड़ी जीत है। क्योंकि रिश्ते तोड़ना आसान है, पर उन्हें जोड़ने के लिए बड़ा दिल चाहिए।

*समाप्त*  
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली