अनामिका - 2 Vandna Sharma द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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अनामिका - 2




पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि विनीता की शादी तय हो गई थी। अनामिका बहुत खुश हुई थी और उसने अपनी दोस्त के लिए खूब शॉपिंग कराई थी।

विनीता की शादी दिल्ली में धूमधाम से हो गई। शादी के बाद वो अपनी गृहस्थी में रम गई। धीरे-धीरे अनामिका से उसकी बातें भी कम होने लगी थीं। 

एक दिन विनीता दोपहर में घर पर बैठी पत्रिका पढ़ रही थी। तभी रिया का फोन आया। रिया की शादी के बाद वो गुड़गांव में बस गई थी, पर अनामिका से उसका संपर्क अब भी था।

"विनीता," रिया ने घबराई हुई आवाज में कहा, "तुम्हें अनामिका की कोई खबर है क्या? पिछले तीन दिन से उसका फोन बंद आ रहा है। मैंने बहुत बार किया। लगता है वो किसी बड़ी मुसीबत में है। हमें उसकी मदद करनी चाहिए।"

रिया की बात सुनकर विनीता की आंखें भर आईं। अनामिका की वो हंसी, वो मेहनत सब याद आ गया। दोनों ने तुरंत फैसला किया - "कल सुबह ही विजयनगर जाएंगे और उसे ढूंढेंगे।"

अगली सुबह दोनों ट्रेन से विजयनगर पहुंचीं। सीधे अनामिका के घर गईं। घर का माहौल देखकर ही उनका दिल बैठ गया। अनामिका की मां ने रोते हुए बताया, "बेटा, अनामिका ने जहर खा लिया था। बड़ी मुश्किल से जान बची है। अभी हॉस्पिटल में है।"

ये सुनते ही रिया और विनीता के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए दोनों हॉस्पिटल पहुंचीं। 

बेड पर लेटी अनामिका बहुत कमजोर लग रही थी। चेहरे पर न वो रौनक थी न वो हिम्मत। विनीता ने उसे देखते ही अपने आंसू रोकने की कोशिश की, पर रोक नहीं पाई। उसने अनामिका का हाथ अपने हाथों में ले लिया और फूट-फूट कर रो पड़ी।

रिया ने विनीता को संभाला और अनामिका के पास बैठकर कहा, "उठ मेरी शेरनी। हमारी अनामिका इतनी कमजोर नहीं हो सकती। तूने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है। एक धोखेबाज के लिए अपनी जान देगी?"

अनामिका ने धीरे से आंखें खोलीं। उसकी आंखों में दर्द था, शर्म थी और टूटन भी। उसने धीमी आवाज में पूरी बात बताई। कैसे डॉ. शिरीष ने झूठे प्यार और शादी के वादों में फंसाया। कैसे एक साल तक लिव-इन में रखा। और कैसे ऑफिस की फाइल में उसकी बीवी की फोटो देखकर सच्चाई सामने आई। उस दिन हॉस्पिटल के फंक्शन में जब वो अपनी बीवी के साथ आया तो अनामिका के अंदर सब खत्म हो गया।

विनीता ने उसका हाथ कसकर पकड़ा और कहा, "अनु, सुन। कभी भी इतनी देर नहीं होती कि नई शुरुआत न की जा सके। तू गिर गई तो क्या? उठ। एल.एल.बी कर। वकील बन। अपने लिए लड़ और अपनी जैसी हजारों लड़कियों के लिए ताकत बन जो इस तरह के धोखे का शिकार होती हैं।"

रिया बोली, "हम तेरे साथ हैं। तू अकेली नहीं है।"

अनामिका ने दोनों दोस्तों का हाथ अपने हाथ में लिया और आंखों में आंसू लिए वादा किया, "मैं हार नहीं मानूंगी। मैं लडूंगी। अपने हक के लिए लडूंगी।"

समय पंख लगाकर उड़ गया। 

आज विजयनगर की अदालतों में अनामिका का नाम इज्जत से लिया जाता है। वो एक नामी वकील है। जिस डॉ. शिरीष ने उसका जीवन नरक बना दिया था, उसी को उसने कानून के जरिए सजा दिलवाई। 

पर अनामिका यहीं नहीं रुकी। उसने तय किया कि वो दूसरी लड़कियों के साथ होने वाले अन्याय को नहीं होने देगी। आज वो महिलाओं के हक के लिए फ्री में केस लड़ती है। कोर्ट के बाहर एक बोर्ड लगा है - "अनामिका लीगल एड - हर बेटी को न्याय"।

गाँव से आई वो लड़की जिसने कहा था "मुझे अपनी पहचान बनानी है", आज हजारों बेटियों की पहचान बन गई है।

दोस्ती ने उसे गिरने नहीं दिया और हिम्मत ने उसे उड़ना सिखा दिया।

समाप्त

डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली