अब आपको पता ही होगा कि दृष्टि के पिता मोहनलाल को उसकी पढ़ाई और उनके झुठ के बारे में पता चल गया था। दृष्टि के पिता एक गुस्से वाले होंने के साथ ही बहुत चालाक है। उन्हें पता है कि जबरदस्ती करने से एक दिन दो दिन वो उनकी बात मानेगी पर उनसे जुठ बोलकर अपनी इच्छा का ही करेगी ।
" हर पुरुष को यही लगता है कि स्त्री को अपने निर्णय लेने का कोई हक नहीं होता उसको सिर्फ पुरुषो इच्छा अनुसार ही चलना होता है।"
इसलिए उन्होंने पहले तो बड़ी आसानी से उन्हें समझाया और उसकी एक गन्दी योजना को पुरा करने के लिए अपनी बेटी को स्कूल जाने के लिए हां कर दी। यह सुनकर दोनों मां बेटी बहुत खुश हो गयी पर कहीं न कहीं उनके मन में थोड़ा सा डर तो था ही पर थोड़ी सी शांति भी थी । पर कहते हैं ना जितनी ज्यादा खुशी हो उतनी ही जल्दी वो दुख में भी बदल जाती है।
उन्हें ये नहीं पता था कि ये कुछ पल की खुशी देकर उन्हें जिंदगी भर की सजा मिलने वाली थी। कुछ दिन, महिने तक सब कुछ ठीक चल रहा था। दृष्टि के पिता को अभी तक क्या करें ये समझ नहीं आ रहा था।
मोहनलाल जी के कई मित्र थे जो पंचायतीयां ( जो समाज में अग्रणी ) थे । वे लोग किसी काम से बाहर गांव गये थे । बस कुछ दिन पहले ही सब गांव लौटे हैं। सब लोग कुछ दिन आराम करने के बाद वे लोग मोहनलाल से मिलने ही जाने की सोच रहे थे। उन लोगों ने एक दिन तय कर उसे मिलने का आयोजन किया।
फिर एक दिन सब मित्र मोहनलाल के घर गये । बहुत दिनों बाद सभी मित्रो के मिलने पर सभी साथ बैठकर बहुत सारी बातें की और मिलकर अपने दिल की बातें की । उसके दोस्त भी उसी की तरह रूढ़ीवादी ही थे ।उनके चार मित्र थे और सभी व्यापारी थे । वे गांव में लोगों कि सादीयां भी करवाते थे।
मोहनलाल के मित्र घर पर आए है ये बात सुनकर दृष्टि की मां को थोड़ा सा डर महसूस हुआ क्योंकि बहुत साल पहले उनका नाता भी उन्ही के पिता के कारण हुआ था ।
वे लोग भी बहुत सी लड़कियों का नाता करवा चूके हैं । दृष्टि की मां को डर था कि कहीं वे उसकी बेटी का भी नाता न करवा दें ।
दृष्टि की मां कजरी बस यही चाहती थी कि वो जिस दल-दल में गिरी है उस दलदल से वो अपनी बेटी को बचा पाए।
मोहनलाल ने अपने मित्रों से सबकुछ बताया और उनसे एक सुझाव देने की मांग की जिससे वो उसकी बेटी का पढ़ना रुक्वा सके और वो कभी इस बारे में सोच ना सके क्योंकि ये बात थोड़ी सी गंभीर है इसलिए उन सब ने थोड़ा समयमांगा और सभी घर चले गए । सभी घर जाकर यही सोच में ही थे कि केसे कोई समाधान दे ।
मोहनलाल के मित्र उसे क्या उपाय सुझाएगे ? क्या ये कजरी और उसकी बेटी के लिए नयी मुसीबत लेकर आयेगा ?
कैसे कजरी बचाएगी अपनी बेटी को इस कुप्रथाओ के जाल से ? कैसे देगी उसके सपनों को उड़ान ?