कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 2 miss k द्वारा आध्यात्मिक कथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 2


"गुनाह करना , गुनाह सहना और गुनाह होते
देखना ये भी एक अपराध ही है।"
अब तक दृष्टि ने पढ़ना तो शुरू ही किया था कि उसके पिता को थोड़ा सा शक होने लगा की ये दृष्टि पुरे दिन घर पर तो होती ही नहीं।
बहुत दिनों तक ऐसा चलता रहा फिर उन्होंने एक बार याद करके पुछ ही लिया कि " ये तेरी बेटी घर पे दिखाई क्यों नहीं देती । कुछ कांड तो नहीं कर रही ना ।
 पर उन्होंने अपनी बच्ची के भविष्य के लिए या तो बात टाल देती या तो झुठ बोल देती ‌। ऐसे कुछ दिन तो चले गए पर अब दृष्टि की मां को लगने लगा की कही न कही कभी न कभी कही से तो पता चल ही जाएगा पर उन्हें ये भी पता था कि अगर सामने से बताएंगे तो भी कोई फायदा नहीं होगा ‌क्योकि वो कुछ भी नहीं समझेंगे इसलिए छुपाना तो था ही। पर अब दृष्टि के पिता को ऐसा लगने लगा था कि वे उनसे कुछ छुपा रहे हैं। 
आज उन्होंने नक्की कर लिया था आज तो कुछ भी करके सब उगलवाना ही पड़ेगा।
रात को जब दृष्टि की मां और उसके पिता घर पहुंचते हैं तो पहले वे शांति से पुछते है क्योंकि उन्हें पता है कि डरा कर कोई सवाल का जवाब नहीं मिल सकता इसलिए शांति से पुछा पर कोई भी जवाब नहीं मिला बहुत पुछने के बाद भी कुछ नहीं पता 
चला ।
अब तो मारना पीटना और जबरदस्ती करना तो उनका रोज का हो गया था। कोई भी औरत यु ही नहीं सहती इतना पर जब अपने बच्चो की बात आती है तो वो कुछ भी कर सकती हैं। अब तो दृष्टि के पिता कुछ न कुछ करते और सच उगलवाने की कोशिश करते।
दृष्टि के पिता ने दृष्टि और उसकी मां का जीना मुश्किल कर दिया था।खाना भी नहीं खाने देता और काम उससे दुगुना करवाता ।दृष्टि भी अभी बड़ी हो रही थी और उसे भी सब कुछ समझ आता है। उसे पता था कि अगर वो नहीं पढेगी तो उसकी मां की हालत नहीं सुधरेगी ।
कहते हैं ना कि कोई भी चीज जितनी छुपाने की कोशिश करो उतनी जल्दी से वह सबको पता चल जाती है। दृष्टि और उसकी मां को यह तो पता ही था कि किसी न किसी दिन सच तो पता चलना ही था पर ये नहीं पता था कि इतनी जल्दी पता चल जाएगा।
एक दिन दृष्टि के पिता काम से जल्दी घर आ गए और उसी वक्त दृष्टि भी स्कूल से घर आ रही थी। तब तो वो जेसे तेसे छुप गई पर उसके दुसरे दिन ही दृष्टि की शिक्षक उसके घर उसकी मां को मिलने आ रही थी पर तभी उसके पिता मिल गए और उसकी शिक्षक ने उसके पिता को उसकी पढ़ाई के बारे में बात बताई।
ये सबकुछ जानते ही उसके पिता आग बबूला हो गए और घर आते ही जोर जोर से चिल्लाने लगे दोनों मां बेटी को पीटने लगे और कहा " मेने कहा था तुम लोगों से की हमारे घर की लड़कियां पढ़ने नहीं जाती पर तुमने मेरी बात नहीं मानी और इस लड़की को पढ़ने भेजा । ये सबकुछ जो उनके साथ हो रहा था कही न कही उसकी जिम्मेदार दृष्टि की मां भी थी क्योंकि शोषण करने से ज्यादा शोषण सहना और उसके खिलाफ आवाज ना उठाना भी एक अपराध है और ऐसा करके हम हमारे उपर हो रहे शोषण के प्रति सहमती दिखाते हैं।

अब दृष्टि के पिता दृष्टि और उसकी मां के साथ क्या करेंगे? क्या उन्हें मार डालेंगे या मोत से बत्तर जिंदगी देंगे ?