कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 miss k द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1

आज में बात करने वाली हुं एक लड़की के बारे में है थोड़ी सी नटखट , चुलबुली जिसे देख मन बस उसी के पास चला इतनी भोली शक्ल की कोई उससे नफ़रत न कर सके ।
हां, बहुत छोटी सी ही है सिर्फ ४ साल की पर उसके सपने बहुत बड़े हैं पर कहते हैं ना कि जीवन में जितने बड़े सपने होंगे उतना ही कठिन रास्ता होता है।
किसी ने कहा है कि "हमेशा सपने ऊंचे देखने चाहिए"

 लोग सपने तो ऊंचे देख लेते हैं पर ये भूल जाते हैं कि सपने पुरे करने के लिए महेनत की भी जरूरत पड़ती है।
अच्छा तो हम अपनी बात पर आते हैं। मेंने आपको उसका नाम अभी तक नहीं बताया था। हां , तो उसका नाम दृष्टि है और उसे बचपन से ही पायलट बनना है पर ना तो उसके माता-पिता के उतने पैसे से कि उसे पढ़ा सके और ना ही उसे अच्छा भविष्य दे सके । यह परिवार राजस्थान के कोठियां गांव में रहते थे। दृष्टि की मां उतनी पढ़ी लिखी नही थी पर उसे पता था कि अगर उसकी बेटी को अच्छा, भविष्य देना है तो उसे पढ़ने के लिए भेजना ही होगा तभी वो कुछ कर पाएगी नहीं तो उसकी जिंदगी भी उसी की तरह सबके ताने सुनने में और चुलाचोखा करने में निकल जाएगी । मुश्किल ये थी कि दृष्टि की मां ये सब समझती थी पर उसके पिता को ये सब पसंद नहीं था। वह थोड़े पुराने खयालात के थे इसलिए उन्हें लगता था कि लड़कियां हमेशा घर के काम करने के लिए ही बनी है , इसलिए उसके पिता ने उसे स्कूल भेजना नहीं चाहते थे और उसके पिता के सामने उनकी नहीं चलती थी । दरअसल दृष्टि के माता-पिता की शादी नहीं हुई थी वो तो उसकी मां के पिता ने उसे पैसे के लिए बेच दिया था उसके पिता तो उसे अपनी पत्नी भी नहीं मानते थे ।बस पुरी जिंदगी नोकरानी बनकर गुजार ली जहां पर उसके मन के साथ साथ शरीर का भी शोषण होता था।उसके पिता रोज रात दारू पीकर आते और उसकी मां के साथ जबरदस्ती करने लगते और रात भर उसे बहुत मारते भी थे। ये सबकुछ के दृष्टि की मां ने ये सोच लिया था कि अपनी बेटी को इस दलदल में नहीं गिरने देगी।
अब दृष्टि ५ साल की होने वाली थी। उसकी मां ने ये सोच लिया कि छुप के ही सही पर उसे पढ़ने भेजेगी ।
दृष्टि ने बचपन से अपनी मां को मार खाते देखा था इसलिए वो पढ़ना चाहती थी कि उसकी मां को वो बहुत दुर ले जाये और उसकी सारी तकलीफ़ दूर कर दे ।
आज दृष्टि के पांच साल हो गए थे और उसकी मां आज उसका दाखिला स्कूल में करवाने वाली है।
उसका दाखिला होने के बाद वह छूपछुप के स्कूल जाने लगती है पर उसके पिता को उसका कोई अंदाजा नहीं था बस इसी बात का उसकी मां को डर था ।
क्या पिता उसके पिता को पता चलेगा और उसके साथ क्या करेंगे ये बहुत चिंता का विषय है।
क्या दृष्टि पढ पाएगी ? या बिच में ही उसके पिता को पता चल जाएगा ? और वे उसके साथ क्या सलूक करेंगे ?