नीली रोशनी - 5 Sapna Badh द्वारा जासूसी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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नीली रोशनी - 5

उस होटल में अधिकतर विदेशी लोग आते थे , क्योंकि वह समंदर से कुछ ही दूर था।

होटल से कुछ ही दूरी पर राजन ने कार रोक दी। इस वक्त उसके साथ नफीस और राणा भी थे। तीनों कार से उतरकर एक गली में दाखिल हो ग‌ए ।गली के अंत में एक कार खड़ी थी।

राजन ने दोनों को उस कार को दिखाया, फिर बोला वापसी मे इस कार का प्रयोग करना अब जाओ।

दोनों बिना कुछ बोले गली के रास्ते चल पड़े।गली में अधेरा था, इसलिए राणा ने पेन टार्च का उपयोग कर रहा था।

। नफीस इस वक्त मेकअप में था। उसने चेहरे पर घनी दाढ़ी व मूंछें लगाई हुई थी,जिस पर चमड़े जैकट व जीन्स पहनी थी सिर पर कैप पहनी हुई थी,कद की माशा अल्लाह था।

इस वक्त नफीस किसी खतरनाक गुंडा नजर आ रहा था।

जैसे ही वह हॉल में दाखिल हुआ,क‌ई लोगों की नजरें उसकी तरफ उठ गई, क्योंकि उस जैसे भयंकर हुलिए वाला उस हॉल में और कोई नहीं था।वे दोनों बैठ ग‌ए राणा ने वेटर को बुलाकर दो कप कॉफी का आर्डर दिया।

थोड़ी देर बाद वेटर दो कप कॉफी लाकर मेज‌ पर रख गया।

नफीस सारे हॉल में नजरें दौड़ाकर देख रहा था,गोरी सांवली युवतियां मौजूद थी।काफी का एक घूंट भरते हुए उसने पूछा, इनमें संयोगिता कौन है ?

यानि कि रोजी ? राणा ने पूछा ।

 

हां  ! कोई नहीं।

फिर कब आएगी ?

इंतजार करिए। इंतजार का फल मीठा होता है 

लेकिन अपन को तो कोई लफाडा लगता है।

कैसे ?

हॉल में बहुत सारे लोग है,अगर एक चौथाई ने भी घूसे जड़ दिए,तो बत्तीस के बत्तीस दांत पेट में पहुंच जाएंगे 

अगर ऐसा होता है गया तो, मैं तो भरी जवानी में बूढ़ा हो जाऊंगा और मुझे फिर नकली दांत लगवाने पड़ेंगे, नफीस ने रो देने वाले स्वर में कहा।

इतने बहादुर होकर रो रहे हैं?

खाक बहादुर अपुन ने तो कभी चींटी तक नहीं मारी।

हम यहां किसी को मरना नहीं है सिर्फ अपहरण करना है। अब तो मुझे लोगों के जूते भी दिखाई देने लगे हैं।

अगर एक एक भी पड़ गया तो सिर पर एक भी बाल नहीं बचेगा, मैं तो गंजा हो जाऊंगा।

नफीस भाई जान !

हां वह आ रही है यानी कि रोजी ।

कहां ?

रंग गोरा, स्कर्ट नीली,उसके बाल कंधों तक कटे हुए हैं ।

 

नफीस की नजर उस पर टिक गई,वह नागिन की तरह बल खाती हुई चली आ रही थी।

नफीस भाई जान जैसे ही वो पास आए,टूट पड़िएगा।

मुझे तो डर लग रहा है।

मेरे पास रिवाल्वर है,अगर आप पृथ्वी राज चौहान नही बने तो मैं आपको गोली मार कर खुद भी आत्महत्या कर लूंगा।

 

अरे नहीं ।

तो उठिए,वह करीब आ गई है।

नफीस में एकाएक जोश आ गया था। जैसे ही रोजी उनके पास से गुजरी वह चीते की तरह उस पर झपटा और उसे उठाकर कंधों पर लाद लिया।

उसकी चीख पूरे हॉल में गूंज उठी थी।

भाई जान ! राणा सरसारते स्वर में बोला, मुंह दबा लीजिए और दरवाजे की तरफ बढिए।

रोजी की चीख बंद हो गई थी। जिसका मतलब था कि नीली रोशनी नफीस ने उसका मुंह दबा लिया है।

लेकिन हॉल में भगदड़ मच गई थी  । दोनों हॉल से बाहर निकल कर गली की तरफ भागने लगे।

 

क्रमशः ✍️