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मौत का खेल - भाग-13
द्वारा Kumar Rahman

गुमशुदगी की रिपोर्ट सिगार सुलगाने के बाद सोहराब ने दो-तीन कश लिए। उस के बाद उस ने किसी का फोन मिला दिया। दूसरी तरफ से फोन रिसीव होने पर ...

अनोखा जुर्म - भाग-7
द्वारा Kumar Rahman

पीछा सार्जेंट सलीम ने कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद हाशना से पूछा, “यह वाकिया कब हुआ था?” “लगभग तीन साल पहले।” हाशना ने बताया। इसके बाद ...

मौत का खेल - भाग -12
द्वारा Kumar Rahman

तफ्तीश इंस्पेक्टर कुमार सोहराब और सार्जेंट सलीम के बीच अभी बातें हो ही रही थीं कि तभी सोहराब के फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ से राजेश शरबतिया की ...

मौत का खेल - भाग-11
द्वारा Kumar Rahman

कौन था वह सलीम ने आज जम कर मेहनत की थी। उसे यकीन था कि उस की जानकारी सोहराब को खुश कर देगी। जब वह कोठी पर पहुंचा तो ...

अनोखा जुर्म - भाग- 6
द्वारा Kumar Rahman

कॉकरोच शाम को सलीम ऑफिस से निकल कर सीधे गीतिका के घर के सामने वाले चायखाने पर ही आ कर रुका था। गीतिका के दरवाजे पर ताला नहीं लटक ...

मौत का खेल - भाग-10
द्वारा Kumar Rahman

इश्क की दास्तान अबीर कुछ देर पहले एक लड़की के साथ था और अब यह दूसरी लड़की। अबीर आखिर किसे धोखा दे रहा है? यह सलीम की समझ में ...

अनजान कातिल - 2
द्वारा V Dhruva

अपने भाग 1 में पढ़ा तावड़े इंस्पेक्टर मिश्रा की तरफ देखकर कहता है- सर! खूनी ने गोली अंधेरे मे चलाई। इसका मतलब वो उस अधेड़  शख्स के नज़दीक ही ...

मौत का खेल - भाग-9
द्वारा Kumar Rahman

कब्र खोदी गई डॉ. वीरानी की कब्र सभी लोगों के सामने थी। गड्ढा मिट्टी से भरा हुआ था। रायना और शरबतिया ने लोगों को बताया था कि उन्होंने कुछ ...

आग और गीत - 20 - अंतिम भाग
द्वारा Ibne Safi

(20) साइकी अब उस कमरे में अकेली खड़ी थी । उसी कमरे में एक छोटी सी मशीन लगी हुई थी और लकड़ी के एक तख्ते पर ट्रांसमीटर रखा हुआ ...

अनोखा जुर्म - भाग-5
द्वारा Kumar Rahman

चपरासी ऊपर वाले ने सलीम की एक न सुनी और उसे स्काई सैंड सॉफ्टवेयर कंपनी में चपरासी बन कर जाना ही पड़ा। गीतिका उस से एक बार कोठी पर ...

मौत का खेल - भाग-8
द्वारा Kumar Rahman

शीर्ष आसन सार्जेंट सलीम न्यू इयर पार्टी से लौटने के  बाद जम कर सोना चाहता था, लेकिन लगातार बजते फोन ने उसकी नींद में खलल डाल दिया था। उसने ...

आग और गीत - 19
द्वारा Ibne Safi

(19) “मगर यह तो बाजीगर है, इसे किस क्यों किया गया ? ” मोबरानी ने कहा । “यह बहुत खतरनाक आदमी है ।” बेन्टो ने कहा “यह इसकी असली ...

अनोखा जुर्म - भाग-4
द्वारा Kumar Rahman

पीछा सार्जेंट सलीम हर दिन सुबह गीतिका के घर के सामने मौजूद एक चायखाने में बैठ जाता। वहां वह अपनी भोंडी शायरी सुनाता रहता। कभी चाय वाले से खरीद ...

आग और गीत - 18
द्वारा Ibne Safi

(18) “इसकी कोई आवश्यकता नहीं है बाबा ।” राजेश ने भरे कंठ से कहा । वह निशाता के बाप से बहुत अधिक प्रभावित हुआ था । “नहीं बेटे ! ...

मौत का खेल - भाग-7
द्वारा Kumar Rahman

खून के धब्बे कार के चले जाने के बाद राजेश शरबतिया ने नाइट गाउन उतार दिया और ओवरकोट पहन लिया। उस की पत्नी बेड पर बेखबर सो रही थी। ...

आग और गीत - 17
द्वारा Ibne Safi

(17) राजेश पहाड़ियों में था । उस जगह पर था जहां से मेकफ और मदन नष्ट होने वाले हवाई जहाज के काठ कबाड़ उठा लाये थे । वापसी के ...

अनोखा जुर्म - भाग-3
द्वारा Kumar Rahman

पीछा सार्जेंट सलीम कॉफी का मग गीतिका और हाशना को देने के बाद खुद के लिए कॉफी बनाने लगा। कॉफी का पहला सिप लेने के बाद उसने हाशना से ...

मौत का खेल - भाग-6
द्वारा Kumar Rahman

खेल में मौतरायना भी यही समझ रही थी कि डॉ. वरुण वीरानी मरने की एक्टिंग कर रहा है। जब वह इस तरह से गिर गया तो उस के मुंह ...

आग और गीत - 16
द्वारा Ibne Safi

(16) राजेश जहां था वही से उसने कलाबाजी लगाईं औए अपने साथियों के सरों पर से होता हुआ ठीक उस भीमकाय आदमी के सामने गिरा और बिजली की सी ...

अनजान कातिल - 1
द्वारा V Dhruva

 सभी पाठको को प्यारभरा नमस्कार?। काफी समय हो गया कुछ लिखे हुए। आज पहली बार एक सस्पेंस स्टोरी लिख रही हुं। कोई आइडिया नही सस्पेंस स्टोरी कैसे लिखूं? लिखावट ...

आग और गीत - 15
द्वारा Ibne Safi

(15) “फिर किसके बारे में बातें करूँ ? ” राजेश ने पूछा । “मेरे बारे में भी कुछ बातें करो ।” “तुम्हारे बारे में क्या बातें करू, तुम तो ...

अनोखा जुर्म - भाग-2
द्वारा Kumar Rahman

सैनोरीटा सार्जेंट सलीम सजधज कर होटल सिनेरियो के पार्किंग में कार पार्क करके जब ऊपर पहुंचा तो उसका मूड बड़ा अच्छा हो रहा था। एक तो मौसम सुहाना था, ...

मौत का खेल - भाग-5
द्वारा Kumar Rahman

दो अजनबीकमरे में मौजूद उस आदमी ने आराम कुर्सी की पुश्त से टेक लगा रखी थी। अब उस ने आंखें बंद कर ली थीं। अलबत्ता वह अभी भी जाग ...

आग और गीत - 14
द्वारा Ibne Safi

(14) “मैं समझ गया कि तुम क्या जानना चाहती हो ।” राजेश ने बात काटकर कहा “तुम चाहती हो कि मैं अपने बारे में बता दूं और तुम जाकर ...

अनोखा जुर्म - भाग-1
द्वारा Kumar Rahman

जासूसी उपन्यास अनोखा जुर्म कुमार रहमान कॉपी राइट एक्ट के तहत जासूसी उपन्यास ‘अनोखा जुर्म’ के सभी सार्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। किसी भी तरह के उपयोग से ...

मौत का खेल - भाग-4
द्वारा Kumar Rahman

रक्स शरकी और ठरकीरक्स शर्की अपने दूने टाइम तक चला था। दरअसल उसे दस बजे शुरू हो जाने के बाद साढ़े ग्यारह बजे तक खत्म हो जाना था। उसके ...

आग और गीत - 13
द्वारा Ibne Safi

(13) तमाम मामला राजेश के समझ में आ गया था मगर वह चुपचाप खड़ा रहा, फिर जब उस आदमी ने उस औरत का बाल पकड़ लिया और उसे अपने ...

आग और गीत - 12
द्वारा Ibne Safi

(12) “सामान की क्या खबर है ? ” “ओह, तो आप लोग आ गये ।” दूसरी ओर से आवाज आई “सामान भेजा जा रहा है ।” “कुछ खच्चरों की ...

मौत का खेल - भाग-3
द्वारा Kumar Rahman

फ्लर्ट होटल का डायनिंग हॉल धीरे-धीरे भरता जा रहा था। नहीं आ रहा था तो उस लड़की का कोई अपना, जिसके लिए वह इस कदर बेचैन थी। उसने एक ...

आग और गीत - 11
द्वारा Ibne Safi

(11) “तो वह तीनों भी मार डाले गये ? ” राजेश ने पूछा । “यह मैं नहीं जानता ।” “तुम लोग यहां से कहा जाते ? ” “कुसुमित घाटी ...

आग और गीत - 10
द्वारा Ibne Safi

(10) “पवन ! ” – राजेश ने पवन के स्वर में कहा “तुम और मदन सशस्त्र होकर बाटम रोड के तीसरे और चौथे क्रासिंग के मध्य वाले भाग में ...

आग और गीत - 9
द्वारा Ibne Safi

(9) “तो क्या वह नर्तकी निकल गई होगी ? ” – जोली ने पूछा । “पता नहीं – चलो देखते है ।” – राजेश ने कहा । दोनों होटल ...