रोजी का अपहरण
दक्षिण अफ्रीका के गेलफोम पहाड़ की चोटी हमेशा बर्फ से ढकी रहती है। प्रोफेसर सतीश किसी प्रकार वहां पहुंच गए थे।
वहां उन्हें सैकड़ों सालों से दवी हुई राजकुमारी फूलवती की लाश मिली लाश आभुषणों से लदी हुई थी।उसमे एक लाकेट भी था,जिसे प्रोफेसर सतीश साथ ले आए थे।एक खास धातु से बने उस चौकोर लाकेट पर तहरीर लिखी हुई थी,जिसके अंदर की तरफ एक नक्शा बना हुआ था।
वह नक्शा खजाने का था।
प्रोफेसर सतीश ने एक दिन खुले आम उस लाकेट का जिक्र होटल में कर दिया था।
जिसकी वजह से फिंगही व डेविड को उस लाकेट की जनाकरी मिल गई। दोनों अपराधी उसके पीछे लग गए ।
भयंकर खून खराबा शुरू हो गया, जिसके कारण राज और राणा को भी इस लडाई में कूदना पड़ा था ।
इस लडाई में प्रोफेसर सतीश मारे गए। लाकेट फिंगही के हाथ लग गया था।
हार्पर भी लाकेट हासिल करना चाहता था।तब हार्पर और फिंगही की खूनी टक्कर शुरू हो हुई।
राज और राणा उनके पीछे पड़े हुए थे। उस वक्त हार्पर फिंगही से लाकेट छीनकर भाग रहा था,जब राज और राणा ने एक छोटी सी मूठभेड के बाद हार्पर को गिरफ्तार कर लिया, उसे जेल में जमा करा दिया, ताकि सरकार उसके असली हकदार को लाकेट वापस कर सके।
लेकिन राज को पूरा विश्वास था कि फिंगही व हार्पर उस लाकेट को प्राप्त करने की पूरी कोशिश करेंगे।
उसका विश्वास सही निकला। दोनों ने आपस में समझौता कर लिया और एक साथ मिलकर खजाना प्राप्त करने की कोशिश में लग गए।
जब राज को इसकी जानकारी प्राप्त हुई तो उसने उनकी योजना असफल करने का निर्णय ले लिया। दोनों जानते थे कि राज और राणा के रहते वे इतनी आसानी से सफलता प्राप्त नहीं कर सकते, इसलिए कल रात राज पर कातिलाना हमला किया गया था।
लेकिन वे लोग सफल नहीं हो सके, उल्टा उनका एक साथी मारा गया ।
मरने से पहले उसने जो कुछ बताया था,उसी के आधार पर राज के नफीस खान द्वारा रोजी के अपहरण की योजना बनाई थी।
नफीस खान राणा के दोस्त अली खान का चचेरा भाई था उसके पिता जी मरने से पहले लाखों की संपत्ति उनके नाम कर गए थे।
नफीस खान और राज दोनों एक साथ काम कर चुके थे ।
वैसे नफीस खान एक बहुत ही भोले भाले किस्म का युवक होता है और राणा तो कभी कभी उससे मुर्ख बना मजे ले लिया करता था।
इस वक्त भी वो सोफे पर बैठा कुछ सोच रहा था तभी नौकर शंभू चाय का कप लिए अन्दर आया और बोला मियां जी चाय !
चुप रह इस वक्त सुंदर सुंदर चौखटे आंखों के सामने घूम रहे हैं।
शम्भू वही पलाथी मारकर वही बैठ गया और चाय का घूंट भरने के बाद बोला, कोई चौखटा पसंद आया ?
पसंद तो सभी हैं।
जो चौखटा ज्यादा सुन्दर हो उसे पकड़कर अलमारी में बंद कर लीजिए और फिर उसके माता-पिता से बात करके।
शम्भू तू ठीक कह रहा है, लेकिन कोई पकड में ही नहीं आता । सब साले हवा में तैरते हुए कभी पास आ जाते हैं तो कभी दूर चले जाते हैं।
शम्भू ने चाय का घूंट भरा और बोला,पकडने की कोशिश तो करो मियां जी।
फिर देखो साली कामयाबी जरूर मिलेगी।
क्रमशः