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*नोवेल: "सीक्रेट: वो लड़की"*
*Chapter 2: "मिस्टीरियस गर्ल"
कॉलेज का सालाना फेयर। पूरे कैंपस में रंग-बिरंगी लाइटें, म्यूजिक, खाने की खुशबू और शोर।
दिल्ली का सबसे महंगा कॉलेज था। यहां बिजनेसमैन के बेटे-बेटियां पढ़ते थे। ब्रांडेड कपड़े, महंगी गाड़ियां, और इंस्टा पर 1M फॉलोअर्स वाला attitude।
और बीच में थी अनाया।
सिंपल नीली जींस। सफेद कुर्ती। बालों का ढीला जूड़ा। चेहरे पर न मेकअप, न एक्स्ट्रा स्माइल।
फिर भी लड़के 2 बार पलट कर देखते। "कॉलेज की परी" ऐसे ही नहीं बोलते थे।
"देखो आ गई बर्फ की रानी"
"इसको खुश देखना है तो 100 साल तपस्या करनी पड़ेगी"
पीछे से लड़कियां फुसफुसाईं।
अनाया ने सुना। और एक सेकंड के लिए भी पलट कर नहीं देखा। 3 साल में उसने इग्नोर करना सीख लिया था।
स्टेज पर डांस कॉम्पिटिशन चल रहा था। DJ पर तेज गाने।
तान्या स्टेज पर थी। लाल लहंगा। पूरे ग्रुप के साथ परफॉर्म कर रही थी। सबसे आगे, सबसे ज्यादा एनर्जी।
तालियां बज रही थीं। "तान्या! तान्या!"
अनाया भीड़ में सबसे पीछे खड़ी थी। हाथ में पानी की बोतल। चेहरा बिल्कुल शांत।
तभी हुआ।
स्टेज के किनारे एक लड़की - नेहा। फर्स्ट ईयर की। डांस करते-करते उसका पैर फिसला। वो स्टेज से नीचे गिरते-गिरते बची। एड़ी बुरी तरह मुड़ गई।
"आह" की आवाज के साथ वो जमीन पर बैठ गई।
1 सेकंड का सन्नाटा।
फिर... हंसी।
"देखो कैसे गिरी"
"एक्टिंग कर रही है अटेंशन के लिए"
"चल उठ नाटक मत कर"
कोई आगे नहीं बढ़ा। सब वीडियो बना रहे थे।
नेहा की आंखों में आंसू। दर्द और शर्म से वो सिकुड़ गई।
भीड़ में से एक लड़की उठी। धीरे-धीरे।
अनाया।
बिना कुछ बोले वो स्टेज पर चढ़ी। नेहा के पास बैठी।
"उठो" उसकी आवाज धीमी थी पर साफ थी।
नेहा: "दी... पैर में बहुत दर्द हो रहा"
अनाया ने कुछ नहीं कहा। नेहा का हाथ अपने कंधे पर रखा और उसे सहारा देकर उठाया। नेहा लंगड़ाते हुए खड़ी हुई।
"चलो"
और भीड़ को चीरा हुआ वो नेहा को लेकर सीधा मेडिकल रूम की तरफ चली गई।
पीछे से आवाजें आईं - "देखो हीरोइन बन रही"
"3 साल से मुंह नहीं खोलती आज दया आ गई?"
अनाया ने पीछे मुड़ कर भी नहीं देखा।
मेडिकल रूम में नर्स ने बर्फ और पट्टी बांधी।
नेहा रोते-रोते बोली "थैंक्यू दी। आप... आप अनाया मल्होत्रा हो ना?"
अनाया ने सिर हिलाया। पानी का गिलास दिया।
"रिलैक्स करो। 2 दिन रेस्ट"
और उठ कर बाहर आ गई।
बाहर प्रोफेसर शर्मा खड़े थे। हेड ऑफ डिपार्टमेंट। चश्मे के पीछे से सब देख रहे थे।
"अनाया"
"जी सर"
"अच्छा किया"
अनाया ने सिर्फ "hmm" कहा और क्लास की तरफ चली गई।
शाम को फेयर खत्म होने से पहले अनाउंसमेंट हुआ।
"और अब एक स्पेशल मेंशन। आज स्टेज पर एक स्टूडेंट ने इंसानियत दिखाई। बिना सोचे, बिना दिखावे के। अनाया मल्होत्रा। प्लीज क्लैप फॉर हर"
पूरे ग्राउंड में तालियां। 2000 स्टूडेंट्स।
अनाया अपनी सीट पर बैठी थी। चेहरा वैसा ही। न शर्म, न घमंड। जैसे ये उसके लिए नॉर्मल हो।
तान्या स्टेज पर थी। उसने अनाया को देखा। 1 सेकंड। फिर मुंह फेर कर दोस्तों से हंसने लगी।
छुट्टी हुई।
पार्किंग में तान्या अपनी BMW के पास खड़ी थी। 4 दोस्त।
अनाया अपनी पुरानी Honda City की तरफ जा रही थी।
तान्या ने आवाज दी "दी"
अनाया रुकी।
तान्या पास आई। आवाज धीमी "नाटक बंद करो। घर चलो। मम्मी वेट कर रही"
अनाया: "तुम जाओ। मुझे लाइब्रेरी जाना है"
तान्या: "लाइब्रेरी? रात 8 बजे? झूठ"
अनाया ने जवाब नहीं दिया। गाड़ी में बैठी और निकल गई।
रास्ते में ड्राइवर ने 2 बार आईने से देखा।
"मैम... आज आपने बहुत अच्छा किया"
अनाया खिड़की से बाहर देख रही थी। "hmm"
घर 8:30 बजे।
डाइनिंग टेबल पर खाना लगा था। राजीव मल्होत्रा अखबार पढ़ रहे थे। नीलम सब्जी परोस रही थीं।
अनाया बैठी। चुपचाप रोटी ली।
पापा ने अखबार नीचे किया। "आज कॉलेज में तुम्हारा नाम आया। हीरोइन बन रही हो?"
टोन में तंज था।
अनाया ने पानी पिया। "खाना खा लूं?"
मम्मी: "खाओ। और खाकर कमरे में चली जाना। ड्रामा करने की जरूरत नहीं"
2 रोटी। दाल। अनाया उठ गई। "मैं जा रही हूं"
कोई जवाब नहीं।
कमरे में। दरवाजा बंद। AC की ठंडी हवा।
वो 2 मिनट छत की तरफ देखती रही। फिर अलमारी खोली।
काला लैपटॉप। स्टिकर: `I SEE YOU`
ऑन। पासवर्ड: `Truth_20`
`WELCOME ANON`
आज 7 मैसेज।
रोज बढ़ रहे थे।
1. "दी मेरे बॉस रात को रुकने को बोलते हैं। डर लगता है" - लोकेशन: ओखला फैक्ट्री
2. "सर हमारे स्कूल का फंड प्रिंसिपल खा गया" - लोकेशन: द्वारका
3. "मेरी बहन लापता है 3 दिन से" - लोकेशन: नोएडा
4. "ऑनलाइन फ्रॉड हुआ 50 हजार का"
5. "हॉस्टल में सीनियर मारते हैं"
6. "बुजुर्ग माँ को घर से निकाल दिया बेटे ने"
7. "पुलिस सुनती नहीं"
अनाया ने आंखें बंद कीं। गहरी सांस।
उंगलियां कीबोर्ड पर।
पहले वाले का IP ट्रैक। 8 मिनट। लोकेशन कन्फर्म। अनॉनिमस कॉल महिला हेल्पलाइन। साथ में वीडियो एविडेंस अटैच।
दूसरे का बैंक स्टेटमेंट हैक। 20 मिनट। 3 लाख का ट्रांजेक्शन हिस्ट्री। सीधे ED को मेल।
तीसरे वाले की लास्ट लोकेशन। CCTV फुटेज रिकवर। पुलिस को ड्रॉप।
रात 1:30।
बिजली गई। इन्वर्टर ऑन। कमरे में सिर्फ लैपटॉप की नीली रोशनी।
अनाया ने आईने में देखा। बाल बिखरे। आंखों के नीचे काले घेरे।
"कमजोर मत पड़ना" उसने खुद से कहा।
लैपटॉप बंद।
लेटी तो नींद नहीं आई।
फोन वाइब्रेट हुआ। Unknown नंबर।
मैसेज: _"तुम A हो ना? सच में हो? अगर हो तो प्लीज मेरी मदद करो।"_
अनाया ने मैसेज डिलीट किया। ब्लॉक किया।
सोते समय उसने डायरी निकाली। पुरानी, कवर फटा हुआ।
पेन चलाया:
_"दिन 1095।
आज कॉलेज में सबने ताली बजाई। पर घर में कोई नहीं बोला।
आज 3 लोगों की मदद की।
क्या मैं गलत थी पापा?
अगर सच बोलना गलत है, तो मैं गलत हूं।
- A"_
आंसू आया। उसने तुरंत पोंछा। तकिए में मुंह छुपा कर लेट गई।
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सुबह 6 बजे। अलार्म।
न्यूज चैनल पर ब्रेकिंग: _"दिल्ली के ओखला में बड़ी फैक्ट्री पर रेड। नाबालिग लड़कियों से काम। मालिक गिरफ्तार। सबूत किसने भेजे? पुलिस कह रही 'A' नाम की अनॉनिमस टिप"_
अनाया ने टीवी बंद किया। नहाने गई।
नीचे पापा न्यूज देख रहे थे। रिमोट जोर से पटका।
"ये A कौन है? पुलिस को भी नहीं पता। कोई तो है जो हमें बदनाम करना चाहता है"
मम्मी: "छोड़ो भी। नाश्ता करो"
अनाया सीढ़ी से उतरी। "गुड मॉर्निंग"
पापा ने अखबार ऊपर कर लिया।
गाड़ी में बैठते समय ड्राइवर ने धीरे से कहा "मैम... आप ही हैं ना वो A?"
अनाया चौंकी। "क्या?"
ड्राइवर हंस दिया "कुछ नहीं मैम। बस। आप बहुत हिम्मत वाली हैं"
कॉलेज में प्रोफेसर शर्मा ने उसे केबिन में बुलाया।
"बैठो अनाया"
"जी सर"
"तुम अलग हो। 3 साल से देख रहा हूं। न किसी से दोस्ती, न शिकायत। पर मदद सबसे पहले। क्यों?"
अनाया ने सर झुकाया। "पता नहीं सर"
"कुछ छुपा रही हो?"
अनाया ने सीधा आंख में देखा। "शायद सर। पर जो कर रही हूं वो गलत नहीं"
प्रोफेसर शर्मा मुस्कुराए। "गलत नहीं है। पर अकेले मत लड़ो। कभी जरूरत हो तो..."
"थैंक्यू सर। मैं जा सकती हूं?"
क्लास में आज सब उसे घूर रहे थे। हीरोइन वाला टैग लग गया था।
लंच में छत पर। अकेली।
फोन पर फिर मैसेज: _"दी प्लीज। मुझे बचा लो। लोकेशन भेज रही"_
अनाया ने लोकेशन खोली। नोएडा। एक बंद गोदाम।
उसने 2 मिनट सोचा। फिर टाइप किया: `पुलिस को कॉल करो। मैं देखती हूं`
रात 11 बजे। गोदाम के बाहर 2 पुलिस की गाड़ी। अंदर से एक लड़की रोते हुए निकली।
अनाया दूर खड़ी देख रही थी। कैप, मास्क, काला हुडी।
काम खत्म। वो पलट कर जाने लगी।
तभी पीछे से आवाज: "रुको"
अनाया रुकी। पलटी नहीं।
"तुम कौन हो?" एक पुलिस ऑफिसर।
अनाया ने जवाब नहीं दिया। अंधेरे में गायब हो गई।
घर 1 बजे।
कमरे में आकर उसने लैपटॉप ऑन किया। स्क्रीन पर लिखा: `3 TASKS COMPLETED`
डायरी में आखिरी लाइन:
_"दिन 1096।
आज भी घर में सन्नाटा।
पर बाहर 1 लड़की आजाद सोएगी।
शायद इसी के लिए मैं जिंदा हूं।
- A"_
लाइट बंद।
नीचे हॉल में पापा अभी भी जाग रहे थे। टीवी पर फिर वही न्यूज। "A की तलाश"
पापा ने सिगरेट सुलगाई। धुएं के बीच बुदबुदाए "पता लगाना पड़ेगा कौन है ये A"
ऊपर अनाया की आंखों में नींद नहीं थी। सिर्फ एक संकल्प।
*[Chapter 2 End