चूड़ियों का रंग kanta द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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चूड़ियों का रंग



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*कम उम्र वेडिंग - "चूड़ियों का रंग"* 


*[Story Start]*

*1. शॉक - "किताब गिर गई"* 
16 साल की रिया 12th के फॉर्म भर रही थी। सपना था - डॉक्टर बनना। 
तभी मम्मी रसोई से आईं और बोलीं - "बेटा, तेरे लिए रिश्ता आया है। लड़का सरकारी बैंक में है। 24 का है। अगले महीने शादी।"

रिया के हाथ से पेन छूट गया। 
"शादी? मम्मी मेरा बोर्ड बाकी है। नीट की तैयारी..." 
पापा अखबार से मुंह उठाकर बोले - "लोग क्या कहेंगे? 16 की हो गई। अब रिश्ता हाथ से निकल गया तो?" 
पड़ोस की सुनीता आंटी ने भी हां में हां मिलाई - "हमारी टाइम में तो 14 में ब्याह हो जाता था।"

रिया के अंदर *शॉक*, *डर* और *गुस्सा* तीनों एक साथ। पर वो चुप रही। क्योंकि इस घर में लड़कियों की "ना" की कोई कीमत नहीं थी।

रात भर वो रोई। डायरी में लिखा - "मेरे सपने क्यों छोटे हैं? क्योंकि मैं लड़की हूं?"

*2. दुख - "लाल जोड़ा"*
शादी का दिन आया। रिया लाल लहंगे में। माथे पर भारी मांग। हाथों में कांच की चूड़ियां। 
सब "कितनी प्यारी दुल्हन है" कह रहे थे। पर कोई उसकी आंखों का *खालीपन* नहीं देख रहा था।

विदाई के वक्त वो अपने 10 साल के भाई आरव से लिपट गई। 
"भैया, मेरी किताबें संभाल कर रखना।" 
आरव बोला - "दीदी तुम वापस आओगी ना पढ़ने?" 
रिया सिर्फ सिर हिला सकी। गले में आंसू अटक गए।

ससुराल में पैर रखते ही सास बोलीं - "बहु, पहले रसोई संभालो। पढ़ाई-लिखाई बाद में।"

*3. अकेलापन और संघर्ष - "रात 12 बजे का दिया"*
पति विक्रम अच्छा इंसान था। पर उसकी सोच पुरानी थी। 
जब रिया ने कहा "मुझे 12th का एग्जाम देना है" तो विक्रम हंस पड़ा। 
"अरे पगली, अब तुम घर की इज्जत हो। बाहर जाकर क्या करोगी?"

पूरा दिन काम। सुबह 5 बजे उठो, 10 लोगों का खाना, बर्तन, कपड़े। रात 11 बजे फ्री होती। 
तब वो बाथरूम में जाकर फोन पर छुपकर YouTube पर क्लास देखती। वॉल्यूम बिल्कुल धीमा। *उम्मीद* का वो छोटा सा दिया उसे जिंदा रखता था।

एक बार सास ने पकड़ लिया। फोन छीनकर फेंक दिया। "शादी के बाद पढ़ाई? शर्म नहीं आती?"

उस रात रिया बहुत रोई। *अकेलापन* काट रहा था। मायके फोन किया तो मम्मी बोलीं - "अब वो घर तेरा नहीं है। एडजस्ट कर ले।"

*4. मोड़ - "डॉक्टर का डर"*
3 महीने बाद रिया को चक्कर आने लगे। डॉक्टर ने बताया - "तुम प्रेग्नेंट हो। और तुम अभी खुद बच्ची हो। बहुत रिस्क है।"

ये सुनकर सबके होश उड़ गए। सास बोलीं - "अब पढ़ाई का नाम मत लेना। बच्चे पर ध्यान दो।" 
विक्रम भी डर गया। 

रिया टूट गई। *हताशा* की हद। एक दिन छत पर गई। नीचे देखा। मन में आया "खत्म कर दूं?" 

तभी उसकी नजर नीचे आंगन में रखी अपनी पुरानी NCERT की किताब पर पड़ी। बारिश में भीग रही थी। 
रिया दौड़कर गई और किताब को छाती से लगा लिया। "नहीं। अगर मैं हार गई तो आरव जैसे लाखों भाई ये सोचेंगे कि दीदी हार गई। मैं नहीं हारूंगी।"

उस दिन उसने अपने अंदर की *गुस्से* वाली रिया को जगा दिया।

*5. टकराव - "या पढ़ाई या मैं"*
रिया ने विक्रम के सामने स्टैंड लिया। पहली बार आवाज ऊंची की। 
"मुझे पढ़ना है। अगर नहीं पढ़ने दिया तो मैं अपने बच्चे के साथ मायके चली जाऊंगी। और केस करूंगी। चाइल्ड मैरिज का।"

विक्रम चौंक गया। उसे लगा ये डर जाएगी। पर रिया की आंखों में *हिम्मत* थी। 

2 दिन तक घर में तनाव रहा। फिर विक्रम ने हार मान ली। "ठीक है। पढ़। पर घर का काम भी करना पड़ेगा।" 
सास ने मुंह बनाया पर कुछ नहीं बोलीं।

*6. संघर्ष और जीत - "85%"*
अगले 9 महीने रिया के लिए जंग थी। दिन में बच्चा, रात में पढ़ाई। 
बच्चा सोता तो वो लालटेन की रोशनी में पढ़ती। विक्रम कभी-कभी रात को 1 बजे चाय बना देता। 

एग्जाम का दिन आया। सास ने कहा "पेपर देकर जल्दी आना।" 
रिया गई और 12th पास की - *85%* के साथ। स्कूल में टॉप किया।

रिजल्ट वाले दिन पूरे गांव में बात फैल गई। "उस कम उम्र वाली बहु ने टॉप किया है।"

*7. आज - "हिम्मत का रंग"*
आज रिया 20 साल की है। 2 बच्चों की मां। 
और सरकारी प्राइमरी स्कूल की टीचर। 

वो उन बच्चियों को पढ़ाती है जिनके घर वाले कहते हैं "लड़की है, पढ़ाकर क्या करेगी?" 
वो बोलती है - "मैं भी कम उम्र में ब्याही गई थी। पर मैंने हार नहीं मानी। तुम भी मत मानना।"

गांव की औरतें अब उससे सलाह लेती हैं। पंचायत में बुलाते हैं। 

शादी वाले दिन उसकी चूड़ियां लाल थीं - मजबूरी का रंग। 
आज उसकी चूड़ियां हरे और नारंगी हैं - *हिम्मत और आजादी का रंग*।

रिया अब डायरी में आखिरी लाइन लिखती है - 
"कम उम्र की शादी ने मेरी उम्र छीन ली। पर मेरे सपने नहीं छीन पाई।"

*[Story End]*

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