टाम ज़िंदा हैं - 20 Neeraj Sharma द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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टाम ज़िंदा हैं - 20

------ काल कोठरी ----एक रहस्य था या वो केस गेंदा राम के भय से भयवीत हो जाना था। कुछ जान थी सोचना बनता था.... गेंदा  राम का एकाएक फोन रात के 2 के करीब समय... " हेलो सर जी कहा हो " एकाएक अजीत पाल थोड़ा हिचक से बोला... " गेंदा राम कया हुआ... इतने सास फुला कर बात कयो कर रहे हो... " एक दम चुपी। " मै 'सर बोल रहा हु... हॉस्पिटल से, फिर वही हो रहा है... जल्द देख ले.... " अजीत पाल का ----सुनना था ' तभी उसने जीप स्टार्ट की और जल्दी निकल गया। " 

                    उधर सुजाता की तस्वीर पकड़े वो शहर के ऐसे ऊंचे निचे वल वलेवे खाते आपने दोस्त मिंटू को मिला। दरवाजा खड़का... " तभी हाफ्ते हुए " कौन " 

उसने आपना नाम "चीची नेपाली बोला " फटक से दरवाजा खुला। " बड़ी मशकत के बाद मिले हो.... कहा कहा नहीं ढूंढ कर देखा। चीची बोला -----" बड़ा हाथ मारा, जुआ खेला, फिर कया अफ्रीको के कालो ने लूट लिया। " सालो ने बड़े चाकूओ से वार किये..... बहुत देर अंडरग्राउंड ही रहा, अजय पाल के पास। "...। मिंटू बोला " अब कया है... जरूरत है तभी आते हो.... " एक पम्प निकाला दो मिट मुँह मे घसोड़ी रखा.... सास ठीक हुई.. लम्बे सास लिए.... " कयो भागे हो कही से, इतना सास कयो... " चीची  नेपाली बोला " एक काम सिर्फ तुम ही करोगे, तुम्हारे ही लायक है " दोनों चुप।

"क़ीमत पता है.... बीस से जयादा लुगा... काम के हिसाब से। "जो तुम कर सकते हो, तुम ही करोगे.... मंजूर है... "तो बोलो... किसी का खून नहीं। " 

चीची बोला ----" रकम से खुश कर दुगा... " कयो कोई तगड़ी सामी है। " चीची ने कहा " नहीं --- अदाजा है, कोई किस्मत पलट जाये... पता नहीं.... " 

जीप एक दम से हॉस्पिटल के सामने ख़डी हुई..... अजीत पाल उतर कर भागा.... पर कमबख्त फोन जीप मे ही रह गया.... चलो कुछ भी हुआ, हुआ तो सही। गेदा राम ने साहब को देखा " दोनों हाथ जुड़ गए, जल्दी चलो.... ले कर गया.... सुजाता एक चादर ओढे थी... बाल बिखरे थे... आँखे ऊपर थी चिटा पन था... एक लम्बी चीख थी... "किसी को नहीं छोड़ोगी... " भय था। वो छटपटा रही थी आख़िरी वार.... फिर सदा के लिए लफ्ज़ खत्म हो गए..... डरावना चेहरा पैर घूमे थे वही रुक गए... शायद लाश थी अब वो। साइस थी डाक्टरी थी... अजीत पाल भी एक दम थमबर गया था। विश्वास हो गया था उसका शायद... उसने क्राइस को याद किया... जिसू जी को। शायद कोई ऊपरी चीज सुजाता को भी साथ ही ले गयी थी उपरली दुनिया मे......

सब फिर भी काप रहे थे। " अजीत पाल ने पूछा " भाई कोई ट्रीटमेंट डाक्टर का किया या नहीं। " यही जवाब सब का--- 'नहीं, सर। " ' कोई बेहोशी का इंजेक्शन " अजीत पाल का टफ सवाल था। " नहीं सर " फिर चुप्पी। "कयो ट्रीटमेंट नहीं " सब ये बात सुन कर चुप।

" सर कौन आये इस मौत के आगे ----" हौसला कर शीला ने जबाब दिया। 

"ओके ----- डॉ बलराज सिंह कहा है, जिसका हॉस्पिटल है।" 

कोई बीच मे बोला " सर वो बाहर गए है...... सिंघापुर।

"अजीब घटना, और वो बाहर कयो...... " सब सुनकर चुप थे।