काल कोठरी - 13 Neeraj Sharma द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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काल कोठरी - 13

13 वा धारावाहिक आपने आप मे एक अंतरमन की पुकार कह लो, ये काल कोठरी किसे के नसीब मे न हो, बस माथे की लकीरो की बेचैनी आदमी को कभी कभी ऐसी खोज पर ले जाती है कि पूछो मत।

                           ( काल कोठरी 13 वी कड़ी )

जिंदगी कब सरकल मे घूमने लगे कोई पता नहीं, जज्बात यहां पे कुछ नहीं है। सच मे यकीन करो जो तेरे साथ रह रहा है जरुरी नहीं, वो सब कार्य मे अच्छा ही हो।

गेंदा राम से मिलने के बाद वो उस लड़की जो सुजाता थी कहा रहती थी पता लगा वो अकेला ही सिंपल ड्रेस मे गया था। कि कुछ अतीत जान लू.... कार एक लम्बी ब्रेक मारती रुकी... पहिये एक दम घिसे... रगड़ से आवाज उतपन्न हुई... बसती थी कहा से शुरू कहा पे खत्म.... अभी उतरा ही था, " साहब आये माल दिखूंगा, याद करोगे। " एक देखने मे नेपाली सा दिखता था। " ठहरो भाई, उतर तो लू। " उसने ठंड के कारण कोट पहना था। " अब मेरी सुनो... मुझे सुजाता चाहिए.. वही नाज नखरे वाली... एक सफ़ेद झूठ। " नेपाली कहता है, " हाँ सर वो..... फिर अंदर ही बोला कौन...? और देख ले। " नेपाली ने कहा। " देख नेपाली तू जुआ खेला कभी... " एक दम से बोला " हाँ सर.. नहीं सर। " घबराहट थी।

                            " खेला है --- हारे हो... " फिर अजीत पाल रुक कर बोला " अगर दस हजार से ऊपर आज ही बीस बन जाये तो कया कहोगे। " नेपाली नसमझी मे पड़ गया, लम्बा सोचा.... " सर समझा नहीं कुछ भी " अजीत पाल हसा ऊंची आवाज मे। " मानो हम दोस्त है, मुझे ये सुजाता का पता और सारी बाप्रोग्राफी चाइये। " तस्वीर नेपाली के हाथ मे थी... उसके एक रंग जाये एक आये... " इतना सोचोगे। " अजीत पाल ने कहा।

      " सर एक बात से डरता हूँ... " नेपाली जैसे रुक गया। "-----कया ----" अजीत पाल ने उच्चे हसते पूछा।

" अगर कुछ गलत कह हो गया तो पुलिस केस न बन जाये... " फिर दोनों चुप।

चुपी तोड़ी... अजीत पाल ने " दोस्त हमने कया लेना देना... ये बात यही दफन... जिसने ये जिम्मेदारी ली है वो मुझे बीस ऑफर कर रहा है, मेरी तरफ से सारे तुम रख लो... मेरा भी हक़ है या नहीं.... " नेपाली और चक्र मे पड़ गया। अजीत पाल चाहता था किसी तरा वो झमेले मे पड़े। पर ताजुब पड़ गया......

" हाँ आप मुझे पंद्रा देदीजिये... पांच अब, दस काम के बाद... " अजीत पाल सनक गया जैसे। " नेपाली यकीन करो है या नहीं.... बाद मे लो। " 

"सारी रिपोर्ट आप को दुगा... जरूर लगा के!" 

चलो ठीक है, विश्वास कर लेटा हूँ... अगर न हुआ, फिर बोलो... " 

नेपाली ने पांच हजार गिने और पक्का आश्वासन दिया... मगर पिछली रोड झांसी डेयरी फार्म के पीछे।

"याद रखुगा ---" अजीत पाल रुक कर बोला "----कितनी देर बाद ---" कितनी देर बाद मिलूगे। "

"यही साहब ज़ी कोई तीन दिन बाद शाम को..." कार मे बैठा अजीत पाल तरुन्त जा चूका था। नेपाली खुश था 

सोच रहा था.. "फोटो देख कर, इसका पता लगा लू जल्दी से " ऐसा सोच रहा था....