काल कोठरी - 12 Neeraj Sharma द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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काल कोठरी - 12

----------------------12 वा काल कोठरी ---------------

                    काल कोठरी एक रहस्य का खजाना है... जिसमे तर्क संगत ये है। टूट तब जाता है इंसान ज़ब आदमी को कुछ दिखायी नहीं देता कौन उसका है, कौन उसके साथ खड़ा होता है।

                           गेंदा राम को जो भी पता था वो सी बी आयी को बता चूका था। बिलकुल हकीकत। अजीत पाल सी बी आई से रिपोर्ट कया लिखें, कया न लिखें। गेदा राम ने कहा था, एक बार दीपक से जरूर मिल ले।

                       अजीत पाल ने भौहे ऊपर की.. तब वो करता था ज़ब वो केस को बोझ समझ रहा हो... चलो एक बार। गेदा राम के साथ वो दीपक के घर को निकल पड़े थे। गेंदा राम ने लुंगी और कुरता कट पीस डाला हुआ था... सवेर का घोष था। पंछी चीची कर थे.. सड़को पर एक दम से भीड़े थी। शहर सोता नहीं जागता रहता है। " सर, शहर सोता नहीं, गांव की तरा... टाइम सात वजे है, रोड गांव की खाली होंगी... लेकिन ये तो पता ही नहीं कहा से इतनी भीड़। " अजीत पाल बस मुस्करा पड़ा। उसने अंदर शुक्र किया था, कि गेंदा राम उसका एक अच्छा दोस्त बन गया था।

                           " सर दीपक को अच्छी तरा जयादा सुनना... वो एक एक समाचर दे देगा... " अजीत पाल मुस्करा पड़ा। "सर इधर से कट ले। जरूर ले... शार्ट कट रास्ता है।" गेंदा राम ने कहा। " एक पान बीड़ी वाली दुकान का खोखा देख अजीत पाल ने ब्रेक लगा दी। सड़क के बीच नहीं, पासे मे... " गेंदा राम जी, जाओ और सिगरट की डिबिया मार्लबोरो ले कर आओ। " डिबिया खोली.... अजीत पाल ने होठो मे सिगरट लगा ली। वो कश मारता हुआ.. दीपक के फ्लैट की और चल कर जा रहे थे.... "शायद, सर यही है।" वोह दो फ्लैट की सीढ़िया चढ़ चुके थे। वो सधारण कमीज पेंट मे था। "डोर बिल वजा " थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला.... " भाभी जी दीपक घर पर है " गेंदा राम ने पूछा। भाभी निस्कोच बोली ----" हम किसे लफड़े मे नहीं पड़ना चाहते.... बस हमारी जान बख्श दो। " अजीत पाल को इसी बात पे हासा आ गया ----" आप से सवाल ही तो पूछने है, बस। " वो बोली ---" वाह वो डॉ के कहने पर डिस्टर्ब चल रहे है.... वो अंदर है, किसी को डॉ ने मिलने की इजाजत नहीं दी। " अजीत पाल रुक गया... " ओके भाभी जी। हम समझ गए, ज़ब ठीक हो तो उसको ये इडनती पकड़ा देना... " हम उनसे राफ्ता जोड़ लेगे। " भाभी जी ने इडनटी पढ़ी और नमस्ते कह कर दरवाजा बंद कर अंदर आ गयी। " और सत्य बोलो ---कितनी बार समझा चुकी थी इस बंदे को, इतना सत्य जो आपना ही गला घुट जाये..... "

                       "---तुम ठीक कहती हो " दीपक ललचार आँखो से लेटा हुआ था। " कौन था " वो बोला। " कोई पुलिस ब्राँच का बंदा ही होगा...... कह देना सब झूठ है.. मैंने कुछ नहीं देखा। "  दीपक एक दम से चुप था।

उधर अजीत पाल ने दूसरी सिगरट जला ली थी.... " गेंदा राम बोला " सर इस हिसाब से आप की डिबिया मसा एक दिन चलती होंगी... " अजीत पाल मुस्करा कर उसने कश छोड़ा।

(चलदा )      -------------- नीरज शर्मा ❤️❤️