किसन कुमार शिव नारायण के सामने हाथ जोड़ते है और कहते है --
किसन कुमार: - संबंधी जी , अब जब बच्चो ने एक दुसरे को चुन लिया है तो ... क्या आपको रिश्ता मंजूर है ? पर आप चितां मत किजिये अरेंजमेंट ये सब ... सब मैं दैख लूगां आप बस इस शादी के लिए हां कर दिजिए और कार्यक्रम को आगे बड़ाए ।
शिव नारायण इतना डरा हूआ था के मंत्री जी संम्धी कहने पर भी वो समझ नही पाया और कुछ और ही बड़ बड़ा रहा था । पर पि के और रुद्रा संबंधी सुनकर हैरान था । Pk मन ही मन कहता है --
“हे भगवान…मुझे तो लगा था आज हमारा काम तमाम हो जाएगा। या तो गोली चलेगी, या किसी गाड़ी में डालकर उठा लिए जाएंगे। लेकिन यहाँ तो खेल ही उल्टा हो गया…मंत्री जी ने पापा को सीधे ‘समधी जी’ कह दिया! अजीब किस्मत है हमारी…हम तो यहां पर शादी तराने आए थे,और यहाँ रिश्ता ही जुड़ गया। इस देश में पंडित बनना सबसे खतरनाक काम है—आज पूजा, कल शादी!
तभी मंत्री किसन कुमार फिर से शिव नारायण से कहता है --
किसन कुमार: - क्या बात है संबधी जी क्या सौचने लगे आप ?
मंत्री जी के बात पर शिव नारायण घबराते हूए कहता है --
शिव नारायण: - मंत्री जी हमे कुछ भी नही पता के ये सब क्या हो रहा है । हमे तो जरा सा भी भनक नही था इस बारे मे , पता नही ये सब कबलऔर कैसे हो गया ।
तब पि के शिव नारायण के पास जाकर धिरे से कहता है ।
पि के :- अरे अपने डर पर काबु रखो पापा और ध्यान से सुनो के मंत्री जी ने आपको संबंधी जी कहा ।
शिव नारायण हैरानी से मंत्री जी की और दैखता है और कहता है ।
शिव नारायण: - संबंधी जी?
मंत्री जी हंसते हूए कहता है ---
किशन कुमार: - हां , आपने सही सुना । अब मेरी बेटी आपकी बहू बनेगी तो आप मेरे संबधी हूए के नही ? आप रुद्रा को तैयार करके लाईए , जाईए ।
शिव नारायण को विश्वास नही हो रहा था के मंत्री जी शगाई के लिए मान गए , शिव नारायण की खुशी का ठिकाना नही था । शिव नारायण मंत्री जी से कहता है --
शिव नारायण: - तो क्या आप इस शगाई के लिए मान गए ?
मंत्री किसन कुमार हल्की मुस्कान के साथ कहता है--
किसन कुमार: - हां संबधी जी , अब मेरी बेटी यही चाहती है तो उसकी खुशी मे ही मेरी खुशी है ।
तब शिव नारायण हाथ जोड़कर मंत्री किसन कुमार से कहता है --
शिव नारायण: - मंत्री जी , आपसे एक बात कहनी थी ।
किसन कुमार शिव नारायण की बात को बड़े ध्यान से सुन रहे थे ,किसन कुमार कहता है --
किसन कुमार: - आप बेझिझक होकर कहिए ।
शिव नारायण कहता है ---
शिव नारायण: - मंंत्री जी आप तो हमारी हालत जानते ही है , कहा आप और कहा हम .. आपने अपनी बेटी को इस महल मे बहुत लाड़ से पाला है , फिर भी आप चाहते है के ...
किसन कुमार शिव नारायण के कंधे पर हाथ रखता है और कहता है --
किसन कुमार: - ये आप कैसी बात कर रहे हो शिव नारायण जी । आप के घर मे मेरी बेटी बहुत खुश रहेगी मैं जानता हूँ । अगर बात पैसे की होती तो राजवीर से शादी कराता , पर पैसे से प्यार नही खरीदा जा सकता , आपके घर मे जो प्यार और जो संस्कार है , मुझे विश्वास है के आप मेरी बेटी को अपनी बेटी की तरह ही प्यार दिजिएगा ।
किसन कुमार की बातो को शिव नारायण और वहां पर मौजुद सभी के दिल को छु लिया था ।
शिव नारायण किसन कुमार से कहता है ---
शिव नारायण: - मंत्री जी , कोमल मेरी बेटी ही है , उसे कभी कोई शिकायत नही होगी । आप निश्चिंत रहिए ।
किसन कुमार: - बेटा रुद्रा , तुम जाओ और तैयार होकर आओ ।
शिव नारायण रुद्रा के पास जाता है और धीरे से कहता है --
शिव नारायण: - ये सब तुने कब और कैसे किया रुद्रा । ये सब करने से पहले तुझे डर नही लगा , वो तो मंत्री जी का मुड आज अच्छा लगता है इसलिए हम सब बच गए , वरना तुने तो आज हमारे प्राण लेने को ठान ही लिया था ।
रुद्रा कुछ बोलता तब तक शिव नारायण फिर कहता है ।
शिव नारायण: - और कुछ मत बोल जा जाके तैयार हो जा । अब बोलके फायदा भी क्या है , मंत्री शगाई के लिए कुछ नही किये अब अगर दैर होगी तो कही सच मे गोली ना मरवा दे । जो करना था वो तो कर दिया , पता नही ये सब कब और कैसे हो गया , पता नही इससे इतनी सुंदर लड़की एक दिन मे कैसे पट गई ।
शिव नारायण की बात पर रुद्रा फिर से मासुम चेहरा बनाकर कहता है --
रुद्रा :- "बापू, हम त ठहरा फटफटी गाड़ी , आर ई लइकी त मखनवाली मर्सडीज़ ह। हम त एकर देखभाल कइसे करीं… हमसे ना होई। आप मना करदीं ।
शिव नारायण :- "तोहरा कुछ करे के ज़रूरत नइखे। जेकरा करे के होई, अब ओही करिहें। अब अगर सगाई से मना कइलस ना, त जान से हाथ धोवे के पड़ी। और ई सब मधुमक्खी से कटवावे से पहिले सोचे के रहे!
रुद्रा ये सुनकर हैरान था के उसे पापा को मधुमक्खी वाली बात का सच पता है , शिव नारायण को भोजपुरी मे बोलते हूए दैखकर रुद्रा हैरान था । रुद्रा कहता है --
रुद्रा: - बापु । आप की भी भाषा ....
शिव नारायण: - अब ई समये में का बोलीं, कवनो भाषा हमरा के समझ में नइखे आवत… सब बात त आपन-आप दिल के भीतर से निकलत बा। बिटवा, हमार भावना के बुझीं, ई भाषा के नइखे, ई त दिल के पुकार बा… अब जल्दी से चलऽ ,आ सगाई खातिर रेडी हो जा!जवन कांड तू कर दिहलस ना,अब ओकरा अंजाम तक
खुदे पहुँचा!
रुद्रा Pk की और दैखता है और मन ही मन सौचता है --
रुद्रा :- वाह रे किस्मत! आज सुबह उठा था सोचकर—
के मंत्री के शादी मे जाएगें , खाना खायेगें और शाम होते-होते खुदकी शादी का पंडाल सज गया! अब सगाई तो करनी ही पड़ेगी, और कानून भी यही कहता है—जो कांड करो, उसका रिश्ता भी खुद निभाओ। अब देखते हैं रुद्रा, दुनिया के सारे दुश्मन को तो तुने संभाल लिए, पर मंत्री की बेटी… भाई, ये तो फाइनल बॉस है , इसे कैसे संभालु ?
रुद्रा Pk की और दैखता है और मन ही मन सौचता है --
रुद्रा :- वाह रे किस्मत! आज सुबह उठा था सोचकर—
के मंत्री के शादी मे जाएगें , खाना खायेगें और शाम होते-होते खुदकी शादी का पंडाल सज गया! अब सगाई तो करनी ही पड़ेगी, और कानून भी यही कहता है—जो कांड करो, उसका रिश्ता भी खुद निभाओ। अब देखते हैं रुद्रा, दुनिया के सारे दुश्मन को तो तुने संभाल लिए, पर मंत्री की बेटी… भाई, ये तो फाइनल बॉस है , इसे कैसे संभालु ?
दोनो को भोजपुरी मे बोलते सुन पि के गुस्से ये कहता है ।
पि के :- ओ भो....भोजपुरी के उजड़े हूए चमन । यहां पर भोजपुरी फि.....फिल्म की सुटिगं हो रही है । ये सब क्या ल ....लगा रखा है । छोकरिया , बापु , बिटवा । मंत्री क्या कह रहे है वो सुनिए ।
पि के :- त....उ... तु यहां आ । अब द...दोनो एक दुसरे को अं.....अंगूठी पहनाओ ।
इतना बोलकर पि के रुद्रा को कोमल के सामने खड़ा कर देता है ।
रुद्रा कहता है --
रुद्रा :- मुझे मेडम मे बात करनी है , अकेले मे ।
रुद्रा के इतना कहने पर पहले तो सभी हैरान हो जाता है फिर कोमल कहती है --
कोमल :- ठिक है , चलिए ।
रुद्रा :- P k तु भी आ ।
P k को बुलाने पर P k मन ही मन सोचता है --
" लगता है आज ये हम सबको मरवा कर ही मानेगा , पहले शगाई होने से डर लग रहा था , अब पता नही ये अंदर क्या करेगा , कही शगाई से मना ना कर दे । अब डर ये लग रहा है के कही शगाई टुट ना जाए । उफ्फ प्रभू ... लगता है मैं सस्पेंस मे ही मर जाउगां "
To be continue.....