अध्याय: 13
दिल्ली शहर के सबसे प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटल में देश के नामी बिजनेस मैन ,निवेशक ,राजनेता और मीडिया जगत की बड़ी हस्तियां एकत्रित थी।
होटल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का काफिला लगातार पहुंच रहा था तभी मेन गेट पर एक काली लग्जरी कार आकर रूकी ।
वहां मौजूद मीडिया कर्मियों की नजरे उसी ओर उठ गई.......गाड़ी का दरवाजा खुलता है।
................सबसे पहले आनंद बाहर आता है उसके चेहरे पर वही सहज मुस्कान थी। फिर दूसरा दरवाजा खुला... अनिरुद्ध कार से नीचे उतरता है चेहरे पर वही कठोरता ।।वह बिना मुस्कान के आगे बढ़ गया साथ ही आनंद भी.!!
दोनो अंदर प्रवेश कर गए!!
कुछ समय बाद....!!
कार्यक्रम अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका था! सभी की निगाहें मंच पर थी।
एंकर:(मुस्कुराते हुए) ladies and gentleman, Today's the most prestigious award
India's Best youth Business Tycoon Award....goes to
Mr. Aniruddh singh maheshwari..!!
पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा...लाइट अनिरुद्ध पर केंद्रित हुई।... अनिरूद्ध अपनी सीट से उठता है..मंच पर पहुंच कर अवार्ड लेता है।
फिर एंकर:(उसकी ओर माइक बढ़ाते हुए) Sir, a few words, Please.
अनिरुद्ध माइक थामा..कुछ क्षण पूरे हॉल पर नजर डाली..!
फिर
अनिरुद्ध: Success is not about being the smartest person in the room, it's about having the courage to make difficult decisions when everyone else is afraid.
I don't believe in luck...I believe in discipline,consistency and responsibility.
This award is not a destination it's a reminder that there is still a long way to go..
Thank you....!!
न कोई अतिरिक्त शब्द , न कोई भावुकता।
लेकिन उसको शब्दो में ऐसा आत्मविश्वास था की पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
इधर ..... लखनऊ।
दृश्य: मंदिर
बच्चो के कार्यक्रम समाप्त हो चुके थे। और मंच प्रीति ने संभाल लिया था!
प्रीति: अब तक आपने नन्हे मुन्ने बच्चो की प्रस्तुतियां देखी लेकिन अब एक उस प्रस्तुति की बारी है जिसका हर साल इंतजार रहता है।...अगली प्रस्तुति राधारानी के निश्छल प्रेम, वात्सल्य और समर्पण को समर्पित है। इस प्रस्तुति को प्रस्तुत करेंगी , हमारी अपनी (हल्की मुस्कान के साथ) श्रद्धा।
वहां मौजूद लोग तालियां बजाने लगते हैं।
उसी समय मंच की रोशनियां मंद होती हैं।हल्के धुएं और सुनहरी रोशनी के बीच मंच के मध्य खड़ी श्रद्धा दिखाई दी।
श्रद्धा हल्के नीले और सफेद रंग का लंहगा पहना हुआ था... लम्बे बालों में गहरा, माथे पर छोटी सी बिंदी..!!
संगीत बजना शुरू होता है।
मोरे बंसी बजैया, नंदलाला कन्हैया।
श्रद्धा ने धीरे से पलके उठाई और दोनो हाथों से बांसुरी का भाव बनाते हुए मधुर मुस्कान के साथ नृत्य आरंभ किया।
मोरे बंसी बजैया, नंदलाला कन्हैया।
मोरे बंसी बजैया, नंदलाला कन्हैया।।
मोहे मोहे ऐसे नही छेड़ो सावरें,
श्रद्धा शरमा कर अपना चीज घूंघट के पीछे छिपाने का अभिनय करती है।
सुनो सुनो मोसे नही खेलो दाव रे
जाके यशोदा से कह दूंगी रे..!
कान्हा सोजा जरा
ओ कान्हा सोजा जरा।
लुक छुप के तक यूं न मोहे...
कान्हा सोजा जरा.!
नैनो से न छू न मोहे
कान्हा सोजा जरा
ओ कान्हा सोजा जरा....!!
श्रद्धा के चेहरे पर संकोच और प्रेम इतने स्वाभाविक ढंग से उभरा की कई लोग उसे एकटक देखने लगे।
नृत्य के आखिरी चरण में श्रद्धा ने दोनो हाथ जोड़कर राधा - कृष्णा को प्रमाण किया।
कुछ पल शांति के बाद लोग जोरदार तालिया बजाने लगे।।
वन्दना और अमृत श्रद्धा को देखकर बहुत खुश थे
वन्दना: मेरी बच्ची को किसी की नजर न लगे।
पार्थ उछल - उछल कर तालियां बजाने लगा . बहुत बढ़िया दीदू।
प्रीति: वाह...श्रद्धा कमाल कर दिया ।
दूसरी ओर..!!
कमला और सरला के चेहरे उतर चुके थे।
सरला ने मुलाकात अपनी बेटी रीमा की ओर देखती है..जो आराम से मोबाइल चलाने में busy थी।
सरला:(कंधे पर हल्की चपत लगाते हुए)किसी काम की नही है तू..!!
रीमा मुंह बनाती है फिर से मोबाइल में नजरे गड़ा लेती है।
कमला: हुंह, इतना भी क्या खास था।
लेकिन उसकी आवाज में छिपी जलन साफ महसूस हो रही थी।
राजेश्वरी जी: (मुस्कराकर) ये बच्ची केवल सुंदर नही है गुणी और संस्कारो से भी परिपूर्ण है।
इधर दृश्य: अवार्ड शो के बाद आयोजित छोटी सी मीट अप पार्टी।
अवार्ड शो खत्म हो चुका था ओर देश के बड़े बड़े बिजनेस मैन छोटे छोटे ग्रुप्स मे खड़े होकर बातचीत कर रहे थे।
हॉल के एक शांत कोने में रखे सोफे पर अनिरुद्ध और आनंद बैठे हुए थे।
आनंद के हाथ में कोल्डड्रिंक का ग्लास था जबकि अनिरुद्ध हमेशा की तरफ शांत बैठा हुआ था।
आनंद:(कोल्ड ड्रिंक पीते हुए) भाई, इतना बड़ा अवार्ड मिला , तेरे चेहरे पर 1% की भी खुशी नही है
अनिरुद्ध: तुम already जानते हो नंदू की मेरी सारी खुशियां उसी एक हादसे ने छीन ली Now I don't have any reason to be happy!
आनंद थोड़ी देर उसकी तरफ देखता है।
फिर
आनंद: ओके कोल्ड ड्रिंक, काफी कुछ चाहिए ??
अनिरुद्ध: No need, i am fine ।
तभी दो बिजनेस मैन उसके पास आए और वहीं पास में पड़े सोफे पर बैठ जाते हैं।
उनमें से एक व्यक्ति: Congratulations Mr Maheshwari इतनी कम उम्र में Indian's best business award जीतना is very remarkable.
अनिरुद्ध:(हल्का सिर झुकाते हुए) thank you.
दूसरा व्यक्ति: आपकी कंपनी की ग्रोथ देखकर तो हम सब हैरान है, मिस्टर महेश्वरी।
अनिरुद्ध:(without any expression) business surprises peoples only when they stop paying attention.
व्यक्ति एक पल को चुप हो गया।
फिर व्यक्ति: well...that's true.
अनिरुद्ध ने बस हल्की मुस्कान दी।
कुछ देर बाद एक और बिजनेस मैन उनके पास आया ।
व्यक्ति: Mr maheswari what is the secrete of your success..??
अनिरुद्ध:(सीधे उसकी आंखो मे देखते हुए) simple, I don't waste my time to explaining my plans, I excute them,
सामने वाला व्यक्ति असहज होकर हंस पड़ा।
व्यक्ति: हा हा इंप्रेसिव।
उनके जाते ही आनंद मुस्कुरा उठा।
आनंद:(हंसते हुए) भाई, सब लोग तुझे देने तो बधाई आते है..पर जाते इंटरव्यू लेकर।
अनिरुद्ध: (उसकी तरफ देखते हुए) atleast they learn something.
आनंद: या फिर डर जाते हैं।
अनिरुद्ध: same thing.!
आनंद हंस देता है।
इधर ,लखनऊ, 12:00 होने वाले थे, आरती की तैयारियां शुरू हो चुकी थी।
राजेश्वरी देवी की नजरे श्रद्धा पर थी, वे श्रद्धा के प्रति एक अपनापन सा महसूस करने लगी थीं।
राजेश्वरी जी:(पुजारी जी से श्रद्धा को देखते हुए) पुजारी जी, जरा उस लड़की को बुलाइए।
हरी प्रसाद जी: कौन?? श्रद्धा बिटिया
राजेश्वरी जी: जी।
हरी प्रसाद जी: अभी बुलाते हैं। (हल्की ऊंची आवाज में) श्रद्धा बिटिया, जरा इधर आना
श्रद्धा (जो खड़ी प्रीति से कुछ बात कर रही थी) जी काका।
श्रद्धा तुरंत वहां आ जाती है।
श्रद्धा: जी काका कहिए..!!
हरी प्रसाद जी:(राजेश्वरी जी की ओर इशारा करते हुए) इनसे मिलो ।ये है राजेश्वरी जी।
श्रद्धा (मुस्कुराकर हाथ जोड़ते हुए) नमस्ते मैम। आपको कौन नही जानता । आपके समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए काम हम सब के लिए प्रेरणा है।
राजेश्वरी देवी जी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती है
हरी प्रसाद जी: आप दोनो बाते कीजिए, हम अभी आते हैं।
इतना कह कर वे वहां से चले गए।
राजेश्वरी जी:(अपने पास की खाली जगह की ओर इशारा करते हुए) आओ बेटा, यहां बैठो।
श्रद्धा: जी।
श्रद्धा उनके पास बैठ जाती है।
राजेश्वरी जी: आज तुम्हारी प्रस्तुति बड़ी सुंदर थी! तुम्हारे नृत्य में भक्ति भी थी और भाव भी ।
श्रद्धा:(मुस्कुराते हुए) धन्यवाद मैम।
राजेश्वरी जी: अरे मैम क्यों कह रही हो बेटा...!!तुम हमे दादी कह सकती हो।
श्रद्धा: (थोड़ा हिचकिचाते हुए)जी??
राजेश्वरी जी: क्यों? क्या हम तुम्हारी दादी जैसे नही लगते।
श्रद्धा के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ जाती है।
श्रद्धा: नही....ऐसी बात नही है।
राजेश्वरी जी: तो फिर!
श्रद्धा: जी दादी।
राजेश्वरी जी:(मुस्कुराकर) हम्म ...अब ठीक है।
राजेश्वरी जी: वैसे कहां रहती हो बेटा..??
श्रद्धा: यहीं पास में केशवनगर सोसाइटी है वहीं रहते हैं।
राजेश्वरी जी: अच्छा....और अभी क्या कर रही हो??
श्रद्धा हैरान थी की राजेश्वरी जी उस से इतनी दिलचस्पी लेकर बात क्यों कर रही है।
श्रद्धा: दादी , अभी ग्रेजुएशन कंप्लीट हुआ है।
राजेश्वरी जी:अच्छी बात है, ओर आगे का कुछ सोचा है??
श्रद्धा के आंखो में अपने सपनो की चमक उतर आई।
श्रद्धा: जी दादी, मैं एक फैशन डिजाइनर बनना चाहती हूं आगे किसी अच्छी सी कंपनी में जॉब करके अपने कैरिएर की शुरुआत करना चाहती हूं।
फैशन डिजाइनिंग का नाम सुनते ही राजेश्वरी जी की आंखों में अलग ही चमक आ गई ।
राजेश्वरी जी: तो तुम ASM कंपनी में अप्लाई क्यों नही करती। हमारे पोते की कंपनी है।
श्रद्धा:(थोड़ा हैरानी से) ASM कंपनी, दादी वो तो इंडिया की one ऑफ the best designing company है।
राजेश्वरी जी: हां, तुम कहो तो हम पोते से कह कर एक अच्छी जॉब दिलवा सकते हैं।
श्रद्धा:(मुस्कुराकर शांत भाव से) मेरे लिए आपका आशीर्वाद ही काफी है दादी, लेकिन मैं आपने दम पर ही नौकरी हासिल करना चाहती हूं, अपनी मेहनत ओर लगन से मिली सफलता मिले , उसकी खुशी ही अलग होती है।
राजेश्वरी जी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती है।
राजेश्वरी जी: बहुत अच्छी सोच है तुम्हारी बेटा
फिर उन्होंने पीछे खड़े अपने सहायक को इशारा किया कुछ ही समय में वह व्यक्ति एक विजिटिंग कार्ड लेकर उनके पास आता है।
राजेश्वरी जी:(कार्ड श्रद्धा को देते हुए) यह रखो...कभी कोई भी जरूरत पड़े तो बिना संकोच हम संपर्क करना।
श्रद्धा:(कार्ड लेते हुए) जी दादी , बहुत बहुत धन्यवाद।
राजेश्वरी जी: और हां ASM कंपनी में aply जरूर करना ।
श्रद्धा: जी ।
राजेश्वरी जी श्रद्धा के सिर पर प्यार से हाथ फेर देती है।
उधर मंदिर में घंटे और शंख की ध्वनि और भी तेज हो गई ! सभी लोग झूले के सामने एकत्रित हो गए।
क्षण भर में पूरा मंदिर जयघोष से गूंज उठा....।
नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।
हाथी घोड़ा पालकी ,जय कन्हैया लाल की।
श्रद्धा कान्हा जी की आरती गाती है, लोग कान्हा जी को झूला जुलते है और प्रसाद ग्रहण कर धीरे धीरे सभी अपने घर को प्रस्थान कर जाते हैं।
आज के लिए बस इतना ही।
आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए....
आशिकी.....अब तुम ही हो!
कहानी अच्छी लगे तो रेटिंग और रिव्यू जरूर दे !!
राधे राधे 😊🙏!!