आशिकी.....अब तुम ही हो। - 5 vaishnavi Shukla द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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आशिकी.....अब तुम ही हो। - 5

पिछले अध्याय में हमारी मुलाकात हुई हमारे कहानी के नायक ...मिस्टर अनिरुद्ध सिंह महेश्वरी से..!!

अब आगे!

अध्याय :5 

तभी केबिन में एक व्यक्ति एंट्री लेता है।

वह व्यक्ति: (अनिरुद्ध की ओर बढ़ते हुए) congratulations मेरे भाई।(अनिरुद्ध को गले लगाते हुए) माय अनि darling तुझे बेस्ट यूथ बिजनेस टायकून का अवॉर्ड मिल रहा है। I am very proud of you brother..!!

(ये है आनंद सिंघानिया... अनिरुद्ध के मौसेरे भाई और बचपन के दोस्त..!! माता पिता की मौत के बाद बचपन से अनिरुद्ध के साथ ही रहते है। अनिरुद्ध के हमउम्र, स्वभाव : हसमुख ..दिखने में ये भी अनिरुद्ध से कम नही !! पर अनिरुद्ध जैसे नही !!)

(अनिरुद्ध दुनिया के सामने काफी  रूड और सीरियस रहता है । एक आनंद ही है जिस से सारी चीजे शेयर करता है। अनिरुद्ध उसे [आनंद को] नंदू बुलाता है । इस नाम से बुलाने का हक  सिर्फ अनिरुद्ध को है।)

(अनिरुद्ध आंखे बंद कर लंबी सांस छोड़ता है फिर आंखे खोलता है।)

अनिरुद्ध:(अपनी हाथ आगे करके घड़ी दिखाते हुए..!!) 10:25

आनंद :(दांत दिखाते हुए ) अरे यार..!! हो गई थोड़ी देर

अनिरुद्ध:थोड़ी देर..!! ऑफिस का टाइम 9:00 ka  hai ..आगे से तू मुझे 8:45 पर ऑफिस में दिखाई देना चाहिए । This is the last warning to you nandu ...!!

आनंद:(अनिरुद्ध के कंधे पर हाथ रखते हुए) ओके ओके यार।। आगे से टाइम पर आऊंगा ।

लेकिन आज तो खुश होजा यार...!!हर वक्त सड़ा हुआ मुंह बनाना जरूरी है क्या ..।

(अनिरुद्ध पहले आनंद को घूरता है फिर वही खड़ी नोवा.... जो काफी देर से उनकी बाते सुन रही थी.. से थोड़ा सख्ती से कहता है। )

अनिरुद्ध: (सख्त लहजे में) मिस नोवा ...आप जा सकती है ..!! सैलरी आप को हमारी बाते सुनने के लिए लिए नही दी जाती ।

 नोवा:(सिर झुका कर ) आई एम रियली सॉरी सर..!!

(और केबिन से निकल जाती है।)

(आनंद अनिरुद्ध को देख कर अपना सिर ना में हिलाता है वही पास में रखे सोफे पर बैठ जाता है।)

आनंद :अच्छा ठीक है। बाकी सब छोड़ यार ...कुछ खाने को मंगा बड़ी भूख लगी है..!!

(अनिरुद्ध उसे तिरछी निगाहों से घूरता है!!)

आनंद :(पेट पर हाथ रख कर) सच में लगी है यार..!!

अनिरुद्ध: चल.. जा अपने केबिन में!! और खाना तुझे लंच टाइम में ही मिलेगा ...निकल अब ।

आनंद: (ड्रामा करते हुए)  अरे निर्दयी इंसान ..!! तुझे मेरे खाने से क्या प्रॉब्लम है .!! (उपर देखते हुए) भगवान अगर मैने एक दिन भी मन से याद किया है तो मेरी एक प्रार्थना सुन ले ..(अनिरुद्ध के ओर उंगली करके) इस इंसान को एक नंबर की भुख्खड बीवी देना। कोई ऐसी जो इस पर हुकुम चलाए।

अनिरुद्ध:(तिरछा मुस्कुरा कर ) तुझे लगता है कि कोई ऐसा होगा। जहां मेरे सामने किसी को जुबान नही चलती... वहा पर कोई मुझ पर हुकुम चलाएगा।।(ऐसा कहते हुए उसके चहरे पर घमंड के भाव थे) और रही बात बीवी को तो वो आने से रही...!! (गुस्से भरे भाव से) I hate the marriage...इस दुनिया में सिर्फ धोखेबाज  है।। 

(इस समय अनिरुद्ध के भाव काफी सख्त थे)

आनंद: हम्म्म वो तो पता है  you hate the marriage।। पर आने दे तेरा  30th birthday फिर देखता हूं कैसे बचता है तू ।

अनिरुद्ध: (सीरियस टोन में) अभी उसको 8 महीने है तब तक कोई न कोई सॉल्यूशन निकाल ही लूंगा ।।

आनंद :(चिड़ते हुई शक्ल बना कर) हां यार निकल यार ...क्योंकि Mrs Maheshwari तेरी शादी उस सनाया से करवाने की पूरी कोशिश में है...!! और वो सनाया नाम की चुड़ैल भी हाथ धोकर पीछे पड़ी है तेरे।। 

और मुझे उस मेकअप की दुकान को भाभी कहने में कोई इंट्रेस्ट नही है।। ( फेस और प्यारी सी स्माइल लाके) अरे मुझे तो प्यारी सी भाभी चाहिए ..(मुंह बनाके)वो चुड़ैल नही।।

आनंद :(सनाया की एक्टिंग करते हुए) आ रही होगी अभी अनि डार्लिंग ,अनि डार्लिंग करते हुए..!!  हम्मम।

(अनिरुद्ध आनंद को देखकर मुस्कुराता है..!!!)

अनिरुद्ध:(मुस्कुराकर) अब बंद कर ड्रामा... और निकल।।

आनंद: हम्म।

(तभी मिस नोवा डोर नॉक करती है।)

मिस नोवा: may I come in sir ...!!

अनिरुद्ध:(डोर की तरफ नजारे घुमा कर ) yes..!!

मिस नोवा: सर..रजत सर आप से मिलना चाहते है ।

(रजत सिंह महेश्वरी: अनिरुद्ध के पिता )

(अनिरुद्ध और आनंद एक दूसरे को देखते है ।)

अनिरुद्ध: (फर्श की और देखते हुए) हम्म ओके।

(नोवा चली जाती हैं!!)

आनंद :फिर चले..!!

अनिरुद्ध:(without any expression) hmm..!!

(दोनो केबिन से निकल जाते है!!)

आज के अध्याय में बस इतना ही ...आगे जानेंगे अनिरुद्ध के पिता को उस से क्या बात करनी है 

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AAP logo ke appreciation ke liye  bahut bahut dhanyawad 😊🙏...!! Mere story ko rating aur review dene ke  liye thank you...!!