अमेज़न के उस घने और जानलेवा जंगल में चींटियों का खूंखार झुंड ऐशली की तरफ बढ़ रहा था। ऐशली का पैर एक दलदली पौधे की झाड़ी में फंसा हुआ था और वह पागलों की तरह चीख रही थी। मैट का पैर जख्मी था, इसलिए वह बेबस होकर सिर्फ चिल्ला सकता था। रोज़ी और पॉल खुद को बचाने के लिए पहले ही एक ऊंचे पत्थर पर चढ़ चुके थे। बिल और टोनी भी पीछे हट रहे थे। इस पूरी अफरा-तफरी में सिर्फ लारा थी, जिसके दिमाग ने काम करना बंद नहीं किया था।
लारा ने बिना एक पल गंवाए मलबे के पास से विमान का एक जलता हुआ छोटा सा टुकड़ा उठाया, जिसके कोने पर अभी भी हल्का सा ईंधन लगा था और आग सुलग रही थी। वह तेजी से दौड़ती हुई ऐशली के पास पहुँची। जंगली चींटियाँ और कीड़े आग की गर्मी से नफरत करते हैं। लारा ने उस जलती हुई लकड़ी को ऐशली के पैर के चारों तरफ घुमाया। आग की लपटें देखते ही बुलेट आंट्स का वो खौफनाक झुंड पीछे हटने लगा।
लारा ने पूरी ताकत लगाकर ऐशली का पैर उस दलदली झाड़ी से बाहर खींचा और उसे धक्का देकर मैट की तरफ कर दिया। ऐशली हांफती हुई ज़मीन पर गिर पड़ी, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। वह लारा की तरफ देख रही थी, वही लारा जिसका उसने कुछ घंटों पहले हवा में 35,000 फीट ऊपर मज़ाक उड़ाया था, आज उसी ने उसकी जान बचाई थी। ऐशली के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला।
"सब लोग इस मलबे से दूर हटो! यहाँ रहना मौत को बुलावा देना है। मलबे की गंध और यह खून जंगल के बड़े जानवरों को यहाँ खींच लाएगा,
लारा ने अपनी भारी आवाज़ में सबको चेतावनी दी। सोफिया ने लारा का कंधा थामा, वह अभी भी कांप रही थी।
मैट ने दर्द से कराहते हुए लारा की तरफ देखा,
लारा... थैंक यू। अगर आज तुम नहीं होतीं, तो ऐशली...। लेकिन अब हम कहाँ जाएं? मुझे तो चलने में भी तकलीफ हो रही है।
लारा ने चारों तरफ देखा। अमेज़न का जंगल किसी भूलभुलैया जैसा था। चारों तरफ ऊंचे-ऊंचे पेड़ थे जो सैकड़ों साल पुराने थे। इन पेड़ों की पत्तियाँ इतनी घनी थीं कि दोपहर के वक्त भी नीचे अंधेरा छाया हुआ था। लारा ने अपनी रिसर्च के हिसाब से याद किया कि अमेज़न में ज़िंदा रहने का पहला नियम है—पानी का स्रोत ढूँढना और ज़मीन से ऊंचे स्थान पर रहना ताकि ज़हरीले सांपों और कीड़ों से बचा जा सके।
"बिल, टोनी! तुम दोनों मैट को सहारा दो। पॉल, तुम रोज़ी को संभालो। हमें यहाँ पास में ही कोई सूखी और ऊंची जगह ढूंढनी होगी जहाँ हम आज की रात बिता सकें। सूरज ढलने में अब ज़्यादा वक्त नहीं है, और अमेज़न की रात का मतलब है—खुला नर्क,
लारा ने हुक्म सुनाया। अब इस ग्रुप की लीडर रोज़ी या ऐशली नहीं, बल्कि लारा बन चुकी थी।
वे सब लारा के पीछे-पीछे चलने लगे। जंगल की ज़मीन गीली और दलदली थी। हर कदम पर पैर कीचड़ में धंस जाता था। थोड़ी ही दूर चलने पर उन्हें पेड़ों के बीच एक विशाल चट्टान दिखाई दी, जो ज़मीन से काफी ऊंची थी और उसके ऊपर एक गुफा जैसा हिस्सा बना था। वह जगह रात बिताने के लिए एकदम सुरक्षित लग रही थी।
सब किसी तरह रेंगते हुए उस चट्टान के ऊपर पहुँचे। मैट को एक सूखी जगह पर लिटाया गया। टोनी का कंधा अभी भी उखड़ा हुआ था और वह दर्द से बेहाल था। बिल ने कुछ सूखी पत्तियाँ इकट्ठी कीं ताकि बैठने की जगह बनाई जा सके। रोज़ी एक कोने में बैठकर अपने फटे हुए कपड़ों को देख रही थी और रो रही थी,
"हम यहाँ भूखे मर जाएंगे। हमारे पास न खाना है, न पानी। मुझे घर जाना है...
सोफिया ने अपने बैग में हाथ डाला। खुशकिस्मती से, क्रैश के वक्त उसका छोटा बैग उसके पास ही रह गया था। उसने बैग से पानी की एक बोतल निकाली, जिसमें आधा पानी बचा था। सोफिया ने वो बोतल मैट की तरफ बढ़ाई,
"मैट, ये लो। थोड़ा पानी पी लो।"
मैट ने पानी की बोतल देखी और फिर ऐशली की तरफ देखा जो सूखी जीभ से होंठ चाट रही थी। मैट ने वो बोतल ऐशली को दे दी। ऐशली ने एक ही सांस में पूरा पानी खत्म कर दिया। रोज़ी यह देखकर चिल्लाई,
"ऐशली! तुमने पूरा पानी खत्म कर दिया? हम सब यहाँ प्यासे हैं!
"तो मैं क्या करूँ? मुझे प्यास लगी थी!
ऐशली ने रोते हुए जवाब दिया। उनके बीच की वो अंदरूनी नफरत और स्वार्थ अब इस मुश्किल घड़ी में भी बाहर आ रहा था।
लारा चुपचाप गुफा के मुहाने पर खड़ी बाहर देख रही थी। अचानक जंगल का माहौल बदलने लगा। जो पक्षी सुबह चहक रहे थे, वे सब एकदम शांत हो गए। पूरे जंगल में एक सन्नाटा पसर गया, सिर्फ रह-रहकर किसी बड़े जानवर के पत्तों पर चलने की सरसराहट आ रही थी।
"सब लोग बिल्कुल चुप हो जाओ! अपनी सांसें भी रोक लो,
लारा ने फुसफुसाते हुए कहा और सबको पीछे हटने का इशारा किया।
चट्टान के ठीक नीचे, झाड़ियों को चीरता हुआ एक विशालकाय साया बाहर निकला। वह अमेज़न का सबसे खूंखार शिकारी था—एक ब्लैक जगुआर (काला तेंदुआ)। उसकी आँखें अंधेरे में पीले रंग की तरह चमक रही थीं। वह मलबे की तरफ से आ रहे खून की गंध सूंघते हुए ठीक उसी चट्टान के नीचे आकर रुक गया जहाँ ये 8 लोग छिपे थे।
रोज़ी ने जैसे ही उस खूंखार जानवर को देखा, उसके हलक से एक चीख निकलने ही वाली थी कि बिल ने फुर्ती से आगे बढ़कर रोज़ी के मुंह पर अपना हाथ रख दिया। रोज़ी की आँखें डर के मारे फटने को हो गईं। जगुआर ने अपना सिर ऊपर उठाया, उसने हवा में सूंघा। उसे इंसानों की मौजूदगी का अहसास हो चुका था। वह धीरे-धीरे उस चट्टान की सीढ़ियों जैसे पत्थरों पर ऊपर चढ़ने लगा। मौत अब उनसे सिर्फ चंद कदम की दूरी पर थी... (जारी है)
लेखक _समीर खान