कुछ पल के अंतर्द्वंद्व के बाद त्रिशा ने अपनी सास को उस दिन हुई सारी घटना के बारे में विस्तार से बताया। उसने उन्हें एक एक बात बताई कि उस दिन क्या हुआ था और उसकी सास ने भी पूरा प्रकरण एकदम तसल्ली से सुना।
त्रिशा जब सब कुछ बता रही थी तो उसे पूरी उम्मीद थी कि सारी बात सुनकर उसकी सास उसकी तरफ से ही बोलेगी लेकिन जैसे ही उन्होंने उसकी सारी बात सुन ली, वह त्रिशा की ओर देख कर बोली," बस इतनी सी बात थी!!!!!! और इतनी सी बात पर तूने उससे बात करनी बंद कर दी?????? इतनी सी बात पर तुम दोनों ने घर का माहौल ऐसा तनावपूर्ण बना दिया???? बेचारी गुनगुन के बारे में ही सोच लेते।।।।"
"मम्मी जी, यह इतनी सी बात नहीं है!!!!!!!!!!पहली बात तो मेरी कोई गलती ही नहीं थी और दूसरी बात वहां बहुत सारे लोग थे।।।। और सभी हमें देख रहे थे।।।।। और सभी के सामने तमाशा बन गया मेरा वहां पर।।। अगर उनमें से कोई आगे चलकर गुनगुन की टीचर या दोस्त के पेरेंट्स निकले तो मैं ऊनी नजरे कैसे मिला पाऊंगी???? मेरा आत्म विश्वास हिल गया है पूरी तरह से मम्मी जी।।।।।।" त्रिशा ने दुखी स्वर में एक बार फिर अपनी बात, अपना दुख, अपनी तकलीफ अपनी सास को समझाने की कोशिश की।
" त्रिशा, बेटा यह ऐसी भी कोई बड़ी बात नहीं है यह जिसको पकड़ कर बैठा जाए या जिस पर इतना कुछ हो।
हां माना वहां बहुत सारे लोग थे पर यह कौन सी नई बात है। पति पत्नी के बीच तू तू मैं मैं कहां और किस घर में नहीं होती। सबके घर में होता है ऐसा तो।
और अरे पति है वो तेरा। और कौन सा पहली बार हाथ उठाया है उसने जो तू ई बात को तूल दे रही है। तुझे तो अब तक राजन के गुस्से और आदत के बारे में अच्छे से पता हो जाना चाहिए था।।।
अरे वो बिल्कुल अपने पापा पर गया है। तेरे ससुर भी बहुत गुस्से वाले थे उन्हें हर छोटी बात पर गुस्सा आता था और बिना हाथ उठाए तो वो बात ही नहीं करते थे। उन्होने तो राजन के बड़े होने पर भी लड़के का लिहाज ना करा। उसके आगे भी हाथ उठा देते थे। और एक बार तो मेरी मायके की शादी में सबके आगे मेरे साथ ऐसा हुआ था। अब तू ही बता अगर मैं भी तेरी तेरी रुठकर बैठ जाती तो सोच मेरा क्या होता????? "
" अरे बेटा, हम औरतें है, हम शुरु से ही दूसरों पर निर्भर रही है। कभी पिता पर, कभी भाई पर, कभी पति पर तो कभी बेटे पर। हमें हमारे भरण पोषण के लिए, अपनी जरुरत के लिए उन पर निर्भर रहना पड़ता है। तो हमें थोड़ा बहुत सुनना ही पड़ेगा ना, सहना ही पड़ेगा ना!!!!!"
" और राजन इस घर का एकलौता कमाने वाला है वो इस घर का तेरा, मेरा , तेरी बच्ची का, सबका खर्च उठाता है ।आज तो तू उससे रुठ कर बैठी है पर अगर कल को उसने तुझसे नजर फेर ली फिर क्या करेगी।।।। मर्दों को दूसरी औरत बहुत जल्दी मिल जाती बेटा, और उन्हें घरवाली से ज्यादा बाहरवाली जुड़ पसंद आती है। अगर सच में राजन ने किसी ओर को ढूंढ लिया तो तू सोच तेरा और तेरी बच्ची का क्या होगा?????? "
" और बेटा शादी के बाद औरत का एक ही सहारा होता है और वो होता है उसका पति। शादी के बाद अगर वो अपने मायके चली भी जाए तो भाभियों और समाज को खटकने लगती है। और मां बाप भी एक समय तक ही उसका साथ दे पाते है। क्योंकि एक तो उनकी उम्र हो जाती है तो दुनिया से लड़ने की ताकत नहीं बचती और दूसरा बेटी का जीवन उनके गलत चुनाव से बर्बाद हो गया इस बात का अपराधबोध उन्हें अंदर ही अंदर खाता जाता है।"
" इसलिए मेरी बात मान इस बात को भूल जा!!!! राजन से माफी मांग कर बात खत्म कर दें और मै बताती हूं तुझे उसे कैसे मना, आज ना खाने में सब कुछ राजन की पसंद का बना और शाम को जब वो आए ना तो एकदम सज संवर कर उसके आगे आ। अपनी अदाओं से रीझा कर रख अपने पति को। अरे अच्छे से सुंदर बन कर घूम उसके आगे फिर देख तेरा पति कैसे मोहित होगा तुझसे।
अरे आगे पीछे घूम उसके ताकी तू उसके मन में बसी रहे। जितना दब कर रहेगी उतना सुखी रहेगी। समझ इस बात को। औरतों को रूठना और नखरे दिखाना शोभा नहीं देता। और किसी का नहीं तो गुनगुन का तो सोच!!!!"
" गुनगुन चार साल की छोटी बच्ची है इस उम्र में उसे मां बाप दोनों के प्यार की जरुरत है और सबसे बड़ी बात जब तुम दोनों प्यार से नहीं रहोगे तो इस घर का चिराग कैसे आएगा?????? मैं तो कहती हूं इस बार ठीक होते ही तुम दूसरा बच्चा कर ही लो!!!!!! एक लड़के का बाप बनते ही वह खुशी से तेरे आगे पीछे घूमेगा!!!!!"
"मुझे जो कहना था वो मैनें कहना दिया। अब तू जाने और तेरा मन पर फिर भी जाते जाते एक बात बोलती जाऊंगी। ध्यान से सुन और समझ कि जो तेरे साथ हुआ है ना वो कोई नई बात नहीं है। बहुतों के साथ ऐसा होता आया है और बहुत सी के साथ तो इससे बुरा होता आया है और आज तक सभी ने एक ही काम किया है और वो है सहना।।।।।।।।" त्रिशा को इतना समझा कर राजन की मां वहां से उठकर चली गई और खाली घर में पीछे रह गई बस त्रिशा।
त्रिशा ने अपनी सास के मुंह से जो कुछ भी सुना, उसने उसकी उम्मीद कभी नहीं की थी। उसे लगा था कि भले ही वह अपने बेटे से उसके लिए ना लड़े पर कम से कम वो उसका दुख, उसकी तकलीफ समझेगी और उसे दिलासा देगी, सांत्वना देगी। पर ......
पर उन्होनें तो उसे ना जाने कौन सा ज्ञान दे दिया। वह जानती है कि भले ही कड़वी रही हो, कठोर रही हो पर समाज की सच्चाई यहीं है। इस समाज में और इस समाज के हर एक घर में औरत की हैसियत यही बना कर तो रखी हुई थी और वह क्या राजन से गुस्सा हो रही है, उसने तो खुद अपने पिता, मामा और भाई को अपनी अपनी पत्नी पर बहुत बार बिना बात गुस्सा उतारते देखा है। मामा वहीं रहते थे और पापा भी वहीं रहते थे तो शायद उसी बात का लिहाज रखते हुए उन्होनें अपनी अपनी पत्नियों पर हाथ नहीं उठाए होगें या क्या पता अकेले में उनके साथ भी कभी यही सब हुआ हो।
त्रिशा वहां से उठी और अपने काम में लग गई।लेकिन उसकी सास की बातों ने उसे अंदर तक सोचने पर विवश कर दिया। उसके मन में बहुत सी बाते चल रही थी। समाज के जिस वर्ग से वो है वहां आज के जमाने में भी समाज की सच्चाई यही है जो उसकी सास ने कहा। तो उसके मन में बस एक ही बात आई क्या सच में वो गलत है?? क्या सच में उसका यह गुस्सा गलत है??? क्या सच में राजन की कोई गलती नहीं है???
त्रिशा के अंदर इतना कुछ चल रहा था कि वो किसी ना किसी से सबकुछ कहना चाहती थी। वह चाहती थी कि कोई उसे सुने, कोई उसे समझे और फिर कोई उससे बोले कि तुम गलत नहीं हो।।।।।। और तुम तो उस दिन भी गलत नहीं थी और ना ही तुम आज गलत हो। तुम सही हो इसलिए अपने आत्म सम्मान के लिए डटी रहो।।।"