मंदिर में तुम - 2 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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मंदिर में तुम - 2

अब ये रोज़ का सिलसिला बन गया था…सुबह की वो पवित्र घड़ी…
मंदिर की वही सीढ़ियाँ…और सुनामी और कृतिक का यूँ मिलना…
कभी भगवान के सामने खड़े होकर…तो कभी मंदिर के पीछे वाले शांत कोने में बैठकर…दोनों बातें करते…वो जगह अब उनकी छोटी-सी दुनिया बन चुकी थी…।

Title song आया - 
मंदिर की सीढ़ियों पे पहली मुलाकात थी,
तेरी आँखों में जैसे कोई खास बात थी…
हाथ में प्रसाद, दिल में ख्वाब लिए,
तू सामने आई तो रुक गई हर घड़ी…
घंटी की आवाज़ में, तेरा नाम सुनाई दिया,
रब के दर पे ही मुझे, मेरा प्यार मिल गया…

एक दिन…मंदिर के पीछे पुराने पीपल के पेड़ के नीचे… 🌿
दोनों साथ बैठे थे…हल्की हवा चल रही थी…और पास में घंटियों की आवाज़ धीमी-धीमी सुनाई दे रही थी…।

कृतिक (मुस्कुराते हुए) बोला - 
तो… इंजीनियर साहिबा… आज क्या नया सिखाएँगी?

सुनामी (हल्का सा हँसते हुए) बोली - 
आप तो ऐसे बोलते हैं जैसे मैं आपकी टीचर हूँ…

कृतिक बोला - 
अरे आप हैं ही… इतनी intelligent जो हैं…

सुनामी ने हल्का सा सिर झुका लिया…पर उसके चेहरे पर मुस्कान साफ थी…

सुनामी बोली - 
मैं… वृंदावन की हूँ…

कृतिक ने ध्यान से उसकी तरफ देखा…

सुनामी (धीरे-धीरे) बोली - 
वहाँ से B.Tech किया… और फिर यहाँ placement मिला… इसलिए आना पड़ा…

कृतिक बोला - 
अच्छा… इसलिए आप इतनी समझदार हैं…

कुछ पल चुप्पी रही…

फिर सुनामी ने धीरे से पूछा—
और आप… कृतिक जी?

कृतिक की मुस्कान थोड़ी हल्की पड़ गई…

कृतिक बोला - 
मैं भी B.Tech वाला हूँ…पर… job नहीं लगी…

उसकी आवाज़ में हल्की सी कड़वाहट थी…सुनामी ने गौर किया…
पर कुछ बोली नहीं…

कृतिक (थोड़ा रुककर) बोला - 
अब… reporter हूँ… छोटी-मोटी खबरें कवर करता हूँ…

फिर वो अचानक चुप हो गया…सुनामी को कुछ अजीब लगा…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
आप ठीक हैं…?

कृतिक ने एक गहरी सांस ली…

कृतिक (धीरे, भारी आवाज़ में) बोला - 
कुछ महीनों पहले… मम्मी-पापा… चले गए…

वो शब्द जैसे हवा में रुक गए…सुनामी का दिल कस गया…उसने धीरे से उसकी तरफ देखा…उसकी आँखों में पहली बार…दर्द साफ दिखाई दे रहा था…कुछ सेकंड...कोई कुछ नहीं बोला…फिर…
सुनामी ने धीरे से अपना हाथ उसके पास रखा…छुआ नहीं… बस पास…।

सुनामी (बहुत नरमी से) बोली - 
आप अकेले नहीं हैं…

कृतिक ने उसकी तरफ देखा…उसकी आँखों में पहली बार...सुकून आया…

कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला - 
थैंक यू… इंजीनियर साहिबा…

सुनामी (मुस्कुराते हुए) बोली - 
आप मुझे नाम से भी बुला सकते हैं…

कृतिक (थोड़ा teasing करते हुए) बोला - 
नहीं… इंजीनियर साहिबा ही ठीक है…

दोनों हँस पड़े…अब उनके बीच…सिर्फ जान-पहचान नहीं थी…
दर्द, समझ और अपनापन जुड़ चुका था…मंदिर की घंटी फिर बजी… 🔔 और इस बार…जैसे दो दिलों के बीच दूरी थोड़ी और कम हो गई…अब उनके मिलने का इंतज़ार…दोनों को रहने लगा था…मंदिर… अब सिर्फ पूजा की जगह नहीं था…वो उनकी कहानी का हिस्सा बन चुका था…।

Title song -
ये जो “मंदिर वाला प्यार” है, सच्चा है, पवित्र सा एहसास है…
तेरे संग हर दुआ मेरी, अब तो हर जन्म की आस है…
ये जो “मंदिर वाला प्यार” है, रब की दी हुई सौगात है…
तेरे बिना अधूरी थी मैं, अब तू ही मेरी हर बात है… ❤️

उस दिन…मंदिर के पीछे वही पीपल का पेड़… 🌿सुनामी और कृतिक साथ बैठे थे…। आज कृतिक थोड़ा चुप था…जैसे कुछ सोच रहा हो…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
क्या हुआ… कृतिक जी? आज आप शांत हैं…

कृतिक हल्का सा मुस्कुराया…

कृतिक बोला - 
आपको पता है… मैं ऐसा ही नहीं हूँ…

सुनामी ने उसे देखा…थोड़ी जिज्ञासा के साथ…

कृतिक (थोड़ा गर्व, थोड़ा दर्द लेकर) बोला - 
10th में मेरे 89% आए थे…12th में 92%…
और B.Tech के final में… पूरे UP में 3rd rank थी मेरी…

सुनामी की आँखें हल्की सी फैल गईं…

कृतिक (धीरे से, नजरें झुकाकर) बोला - 
87% थे मेरे… फिर भी… job नहीं लगी…

उसकी आवाज़ में दर्द साफ था…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
इतना अच्छा score… फिर भी…?

कृतिक हल्का सा हँसा…पर वो हँसी… अंदर से टूटी हुई थी…

कृतिक बोला - 
कभी-कभी… मेहनत से ज्यादा… luck काम करता है…

फिर उसने दूर देखने लगा…

कृतिक बोला - 
और जब luck साथ ना दे…तो इंसान को खुद ही अपना रास्ता बनाना पड़ता है…।

सुनामी उसे बस देख रही थी…आज वो पहली बार समझ रही थी…कि उसके सामने बैठा लड़का…सिर्फ मुस्कुराने वाला नहीं है…उसके अंदर बहुत कुछ छुपा हुआ है…।

कृतिक बोला - 
Reporter बनना… मेरी choice नहीं थी…मजबूरी थी…

सुनामी का दिल भर आया…

कृतिक (थोड़ा सख्त होते हुए) बोला - 
लेकिन अब… ये मेरी पहचान है…और मैं… डरता नहीं हूँ…

उसकी आँखों में अचानक एक अलग ही चमक आ गई…

कृतिक बोला - 
कई दुश्मन हैं मेरे…क्योंकि मैं सच लिखता हूँ…

सुनामी थोड़ा घबरा गई…

सुनामी बोली - 
डर नहीं लगता आपको…?

कृतिक ने उसकी तरफ देखा…और हल्का सा मुस्कुराया…

कृतिक बोला - 
डर तो लगता है…लेकिन… गलत के सामने झुकना… उससे ज्यादा डरावना है…।

सुनामी कुछ बोल नहीं पाई…उसके लिए ये दुनिया… नई थी…वो सीधी-साधी…ना बोलना भी नहीं जानती थी…और कृतिक…दुनिया से लड़ने वाला…दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थे…फिर भी…
कहीं ना कहीं… जुड़े हुए थे…।

सुनामी (धीरे से) बोली - 
आप बहुत अलग हैं…

कृतिक (मुस्कुराते हुए) बोला - 
और आप… बहुत सीधी हैं…

सुनामी बोली - 
मुझे ‘ना’ बोलना भी नहीं आता…

कृतिक ने उसे गौर से देखा…

कृतिक (थोड़ा serious होकर) बोला - 
ये अच्छी बात नहीं है… इंजीनियर साहिबा…

सुनामी चौंक गई…

कृतिक बोला - 
हर जगह ‘हाँ’ कहना… आपको मुश्किल में डाल सकता है…

उसकी आवाज़ में चिंता थी…

कृतिक (धीरे से) बोला - 
अगर कभी… कोई दिक्कत हो…तो… मुझे बता देना…

सुनामी का दिल फिर से धड़क उठा…

सुनामी (धीरे से मुस्कुराते हुए) बोली - 
ठीक है… कृतिक जी…

दोनों फिर चुप हो गए…पर इस बार…ये चुप्पी भरोसे से भरी थी…
अब कहानी बदलने वाली थी…क्योंकि…कृतिक की दुनिया के दुश्मन…धीरे-धीरे सुनामी की जिंदगी के करीब आने वाले थे… 😏🔥

Title song...
ये जो “मंदिर वाला प्यार” है,हर जन्म तक साथ रहेगा…
तेरा नाम मेरी सांसों में,मरके भी साथ चलेगा… ❤️

सुबह का वही समय…मंदिर के बाहर हल्की भीड़…सुनामी आज थोड़ी जल्दी आ गई थी…वो सीढ़ियों के पास खड़ी थी…कृतिक अभी तक नहीं आया था…तभी…एक लड़का उसके पास आकर खड़ा हो गया…चेहरे पर अजीब-सी मुस्कान…आँखों में बदतमीज़ी साफ झलक रही थी…।

लड़का बोला - 
नई हो क्या इस शहर में…?

सुनामी थोड़ा घबरा गई…पर उसने धीरे से सिर हिला दिया…

लड़का (और करीब आते हुए) बोला - 
नाम क्या है…?

सुनामी को अच्छा नहीं लग रहा था…पर उसे ‘ना’ बोलना आता नहीं था…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
सुनामी…

लड़का मुस्कुराया…

लड़का बोला - 
नाम तो बड़ा खतरनाक है…पर आप तो बड़ी सीधी लगती हो…

वो और करीब आने लगा…सुनामी पीछे हटने लगी…दिल तेज़ धड़क रहा था…

लड़का बोला - 
चलो… कभी कॉफी पे चलते हैं…

सुनामी कुछ बोल ही नहीं पाई…उसके होंठ हिल रहे थे…पर आवाज़ नहीं निकल रही थी…तभी…

पीछे से एक ठंडी… सख्त आवाज़ आई—
वो कहीं नहीं जाएगी…

सुनामी ने तुरंत पीछे देखा…कृतिक…उसकी आँखें… आज अलग थीं…शांत नहीं…गुस्से से भरी हुई…वो धीरे-धीरे आगे बढ़ा…और सीधे उस लड़के के सामने आकर खड़ा हो गया…

कृतिक (धीरे, लेकिन खतरनाक आवाज़ में) बोला - 
समझ नहीं आता क्या…?
जब कोई uncomfortable हो… तो पीछे हट जाते हैं…

लड़का हँसने लगा…

लड़का बोला - 
और तू कौन है…? उसका bodyguard?

बस…यही सुनना बाकी था…कृतिक की मुट्ठियाँ भींच गईं…

कृतिक (आँखों में आग लेकर) बोला - 
नाम याद रख लेना…कृतिक ठाकुर…

लड़के के चेहरे का रंग हल्का सा उड़ गया…शायद उसने ये नाम सुना था…कृतिक एक कदम और आगे बढ़ा…

कृतिक (धीरे, लेकिन बेहद खतरनाक लहज़े में) बोला - 
और हाँ…जिस लड़की से तुम बात कर रहे हो ना…वो मेरी जिम्मेदारी है…।

सुनामी ये सुनकर एकदम चौंक गई…दिल ज़ोर से धड़कने लगा…

कृतिक बोला - 
तो अगली बार…इससे दूर रहना…”

लड़का अब पूरी तरह डर चुका था…

लड़का बोला - 
ठीक है… ठीक है… जा रहा हूँ…

वो जल्दी-जल्दी वहाँ से निकल गया…कुछ पल…वहाँ सन्नाटा छा गया…सुनामी अभी भी shock में थी…कृतिक ने उसकी तरफ देखा…और उसकी आँखें तुरंत नरम हो गईं…

कृतिक (धीरे से) बोला - 
आप ठीक हैं…?

सुनामी ने हल्का सा सिर हिलाया…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
आप… आ गए…

उसकी आवाज़ में सुकून था…कृतिक ने गहरी सांस ली…जैसे खुद को शांत कर रहा हो…

कृतिक (थोड़ा सख्त, पर चिंता के साथ) बोला - 
मैंने क्या कहा था…?
हर किसी को ‘हाँ’ मत कहा कीजिए…

सुनामी चुप हो गई…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
मुझे… मना करना नहीं आता…

कृतिक कुछ सेकंड उसे देखता रहा…फिर…वो थोड़ा करीब आया…

कृतिक (धीरे, लेकिन गहराई से) बोला - 
तो सीख लीजिए…क्योंकि… हर बार मैं नहीं आ पाऊँगा…

ये सुनकर सुनामी का दिल हल्का सा बैठ गया…पर अगले ही पल…

कृतिक (धीरे से) बोला - 
लेकिन… जब भी हो सका…मैं आऊँगा…

सुनामी की आँखें नम हो गईं…

उसने बस इतना कहा—
थैंक यू… कृतिक जी…

और पहली बार…उसकी आवाज़ में सिर्फ शुक्रिया नहीं था…कुछ और भी था… ❤️
आज… सिर्फ एक लड़का नहीं गया था…आज…सुनामी के दिल में कृतिक के लिए जगह और गहरी हो गई थी… 😈✨

Song...
मंदिर की चौखट गवाह रहेगी,ये प्यार कभी ना टूटेगा…
रब के सामने जो जुड़ा है, वो रिश्ता उम्र भर छूटेगा… 💫