मंदिर में तुम - 5 Sonam Brijwasi द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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मंदिर में तुम - 5

रात गहरा चुकी थी… 🌙मुंबई की भागती हुई एमएम धीरे-धीरे पीछे छूट रही थी…कृतिक और सुनामी…दोनों स्टेशन पर खड़े थे…
अब लौटने का वक्त था…अपनी पुरानी जगह… नोएडा…और… अपने मंदिर के पास…ट्रेन आ चुकी थी… 🚆 दोनों चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गए…कुछ पल…बस खिड़की के बाहर देखते रहे…
फिर…ट्रेन चल पड़ी, हल्का-सा झटका लगा…और उसी के साथ…जैसे उनकी ज़िंदगी भी एक नए सफर पर निकल पड़ी…सुनामी ने धीरे से अपनी कलाई उठाई…कश्मीरी चूड़ियाँ…हल्की-हल्की खनक रही थीं… 💫 कृतिक की नजर उन पर पड़ी…वो हल्का सा मुस्कुरा दिया…।

कृतिक (धीरे से)। बोला - 
अच्छी लग रही हैं…

सुनामी (शरमाते हुए) बोली - 
किस पर…?

कृतिक (नज़रें उसी पर टिकाकर) बोला था 
आप पर…

सुनामी की नजरें झुक गईं…पर मुस्कान छुप नहीं पाई…ट्रेन की खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी…
कुछ देर बाद…सुनामी ने धीरे से सिर खिड़की के पास टिका दिया…पर अचानक…एक झटका लगा…वो थोड़ा डगमगाई…तभी…कृतिक ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया…

कृतिक बोला - 
संभलकर…

उसका हाथ अब भी उसके हाथ में था…दोनों की नजरें मिलीं…इस बार…कोई नहीं हटा…धीरे-धीरे…सुनामी ने अपना सिर…कृतिक के कंधे पर रख दिया… ❤️
कृतिक कुछ सेकंड के लिए सन्न रह गया…फिर…उसने बहुत हल्के से अपना सिर…उसके सिर के पास झुका दिया…ट्रेन चलती रही…
रात गहराती रही…चूड़ियों की हल्की खनक…और दिलों की धड़कन…एक ही लय में चलने लगी…।

कृतिक (फुसफुसाते हुए) बोला - 
इंजीनियर साहिबा…

सुनामी (आँखें बंद किए) बोली - 
हम्म…?

कृतिक बोला - 
अब… आप मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएँगी ना…?

सुनामी ने आँखें खोलीं…और धीरे से उसकी तरफ देखा…

वो बोली - 
अब… जाने का मन ही नहीं करता…

कृतिक के चेहरे पर सुकून आ गया…उसने धीरे से उसका हाथ थोड़ा कसकर पकड़ लिया…

कृतिक (धीरे से) बोला - 
तो फिर… हमेशा ऐसे ही रहिए…

सुनामी मुस्कुरा दी…रात के उस सन्नाटे में…ट्रेन के सफर में…दो दिल…और करीब आ गए…अब ये सिर्फ प्यार नहीं था…ये साथ निभाने का एहसास था… ❤️
धीरे-धीरे…सुनामी उसकी बाहों के सहारे…सो गई…और कृतिक…उसे देखता रहा…जैसे…उसकी दुनिया अब यहीं बस गई हो…🚆 सफर जारी था…और उनकी कहानी भी…।

सुबह की पहली किरण… ☀️ नोएडा की हल्की-सी ठंडी हवा…और…वही मंदिर…जहाँ से सब शुरू हुआ था। आज…सुनामी अकेली नहीं थी…उसके साथ था कृतिक…दोनों साथ-साथ मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे…पर आज…उनके कदमों में एक अलग ही सुकून था…।

सुनामी (धीरे से मुस्कुराते हुए) बोली - 
याद है… पहली बार यहीं मिले थे…

कृतिक (हल्की हँसी के साथ) बोला - 
और आपने मुझे देखा भी नहीं था…

सुनामी बोली - 
आपने भी तो नहीं देखा था…

दोनों हँस पड़े…वो दोनों अंदर गए…राधा-कृष्ण के सामने…इस बार…दोनों ने साथ-साथ हाथ जोड़े…और आँखें बंद कर लीं…पर आज की दुआ…अलग थी…

सुनामी मन में बोली - 
भगवान… अब इन्हें कभी दूर मत करना…❤️

मंदिर की घंटी बजी… 🔔 और जैसे ही दोनों ने आँखें खोलीं…कृतिक ने धीरे से सुनामी का हाथ पकड़ लिया…सुनामी चौंकी…पर इस बार…उसने हाथ नहीं छुड़ाया…उसकी कलाई में पहनी कश्मीरी चूड़ियाँ हल्की-हल्की खनक उठीं… 💫 कृतिक ने उसकी तरफ देखा…

कृतिक (धीरे से) बोला - 
अब… ये हाथ कभी नहीं छोड़ूँगा…

सुनामी की साँसें हल्की-सी रुक गईं…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
और अगर मैंने छोड़ दिया तो…?

कृतिक थोड़ा और करीब आया…

कृतिक (गहराई से) बोला - 
तो… फिर से पकड़ लूँगा…

सुनामी शरमा गई…दोनों मंदिर के पीछे उसी पीपल के पेड़ के पास गए… 🌿 वही जगह…जहाँ दोस्ती शुरू हुई थी…आज…वो प्यार में बदल चुकी थी…कृतिक ने धीरे से उसका हाथ अपने दोनों हाथों में लिया…

कृतिक बोला - 
इंजीनियर साहिबा ! अब इस रिश्ते को कोई नाम भी दे दें…?

सुनामी का दिल तेज़ी से धड़कने लगा…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
क्या नाम…?

कृतिक मुस्कुराया…

वो बोला - 
वही… जो दो लोगों के बीच होता है…जब वो एक-दूसरे के बिना अधूरे लगें…

सुनामी की आँखें नम हो गईं…

वो बोली - 
प्यार…

कुछ पल…दोनों चुप रहे…फिर…

सुनामी (धीरे से) बोली - 
तो फिर… हाँ है…❤️

कृतिक के चेहरे पर वो मुस्कान आई…जो पहले कभी नहीं थी…उसने धीरे से…सुनामी के माथे को छुआ…एक सुकून भरा स्पर्श… 💫 मंदिर की घंटियाँ फिर बजीं… 🔔 और इस बार…भगवान के सामने…दो दिलों ने एक-दूसरे को अपना लिया था… ❤️
अब ये सिर्फ मुलाकात नहीं थी…ये एक रिश्ता था…जो मंदिर से शुरू होकर…दिल तक पहुँच गया…।

दिन अब पहले जैसे नहीं थे…अब हर दिन में एक अपनापन था…हर मुलाकात में प्यार…।

एक दिन…सुनामी ऑफिस में बैठी थी…कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते-करते…अचानक उसकी नजर एक मेल पर पड़ी…
Subject: International Assignment – 2 Years

उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा…उसने मेल खोला…और जैसे-जैसे पढ़ती गई…उसकी आँखें हैरानी से भर गईं…

वो बोली - 
2 साल के लिए विदेश पोस्टिंग…

उसके हाथ हल्के-से काँप गए…ये उसका सपना था…पर…अब उसकी ज़िंदगी में कृतिक भी था…।
शाम को…वो मंदिर पहुँची…कृतिक पहले से वहाँ था…

कृतिक (मुस्कुराते हुए) बोला - 
इंजीनियर साहिबा… आज लेट क्यों…?

सुनामी थोड़ी चुप थी…

कृतिक (थोड़ा चिंतित) बोला - 
क्या हुआ… सब ठीक है…?

सुनामी ने गहरी सांस ली…

सुनामी बोली - 
मुझे… एक mail आया है…

कृतिक बोला - 
किस बारे में…?

सुनामी (धीरे से) बोली - 
2 साल के लिए… विदेश जाना है…

कुछ सेकंड…कृतिक चुप रहा…फिर…उसके चेहरे पर धीरे-धीरे मुस्कान फैल गई…

कृतिक (खुश होकर) बोला - 
सच में…? ये तो बहुत बड़ी बात है!😍

सुनामी हैरान रह गई…

सुनामी बोली - 
आप… खुश हो…?

कृतिक (पूरी sincerity से) बोला - 
बहुत…ये आपका सपना था ना…?

उसकी आँखों में गर्व था…सुनामी की आँखें भर आईं…

वो बोली - 
पर… 2 साल…

कृतिक ने उसकी बात काट दी—
सपनों के लिए… वक्त देना पड़ता है…

सुनामी उसे देखती रह गई…फिर…

उसने धीरे से पूछा—
आप… रह लोगे मेरे बिना…?

ये सवाल…सीधा दिल से निकला था…कृतिक कुछ पल चुप रहा…
फिर…वो थोड़ा करीब आया…

कृतिक (धीरे, गहराई से) बोला - 
रह तो जाऊँगा…

सुनामी का दिल हल्का सा टूटने लगा…लेकिन…

कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला - 
पर… जी नहीं पाऊँगा… ❤️

सुनामी की आँखों से आँसू बह गए…

वो बोली - 
फिर… जाने दूँ…?

कृतिक ने उसके आँसू पोंछे…

वो बोला - 
अगर आप नहीं गईं…तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं करूँगा…

उसकी आवाज़ में प्यार भी था… और त्याग भी…

कृतिक बोला - 
आप जाओ… अपने सपने पूरे करो…मैं यहीं रहूँगा…”
आपका इंतज़ार करते हुए…

सुनामी ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया…

वो बोली - 
और अगर… मैं बदल गई तो…?

कृतिक हल्का सा मुस्कुराया…

वो बोला - 
तो… मैं आपको फिर से मना लूँगा…😏

दोनों हँस पड़े… आँसुओं के बीच…मंदिर की घंटी बजी… 🔔
आज…प्यार ने एक नई परीक्षा दी थी…दूरी आने वाली थी…
पर भरोसा… उससे भी मजबूत था… ❤️