सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…
मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक लड़की धीरे-धीरे कदम रखते हुए अंदर आई—
सुनामी सिंह…सफेद सूट में, लंबे खुले बाल, आँखों में हल्की झिझक… क्योंकि वो इस शहर में नई थी।
उसने चारों तरफ देखा…सब कुछ अनजान था, पर मंदिर में एक अजीब सा अपनापन था।वो आगे बढ़ी…हाथ जोड़कर राधा-कृष्ण के सामने खड़ी हो गई…धीरे-धीरे उसने अपनी आँखें बंद कर लीं…
उसी समय…मंदिर के दूसरे कोने से एक लड़का अंदर आया—
कृतिक ठाकुर…शांत स्वभाव, चेहरे पर सादगी…वो रोज़ की तरह आज भी ऑफिस जाने से पहले यहाँ आया था।उसने आते ही भगवान को देखा…और फिर बिना इधर-उधर देखे… जाकर वही खड़ा हो गया… जहाँ सुनामी खड़ी थी।
अब दोनों एक-दूसरे के बिल्कुल पास खड़े थे…पर दोनों की आँखें बंद थीं…एक ही समय पर…एक ही भगवान के सामने...दो अजनबी…एक जैसी शांति में डूबे हुए…
मंदिर की घंटी बजी। और उसी पल…दोनों ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं…पहले कृतिक की नजर बगल में खड़ी लड़की पर पड़ी…वो कुछ सेकंड तक उसे देखता रह गया…सुनामी ने भी जैसे ही आँखें खोलीं…उसकी नजर कृतिक से टकरा गई…पहली बार…
दोनों की आँखें मिलीं…और जैसे वक्त कुछ पल के लिए रुक गया…
सुनामी ने हल्का सा नजरें झुका लीं…दिल थोड़ी तेज़ धड़क रहा था…(शायद नए शहर की घबराहट… या कुछ और…)कृतिक ने भी तुरंत नजरें हटा लीं…पर उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई…पुजारी जी ने प्रसाद दिया…दोनों ने एक साथ हाथ बढ़ाए…
और गलती से…उनकी उंगलियाँ एक-दूसरे से छू गईं…सुनामी थोड़ा चौंक गई…कृतिक ने तुरंत हाथ पीछे कर लिया…।
कृतिक (धीरे से) बोला -
Sorry…
सुनामी (हल्की मुस्कान के साथ) बोली -
It's ok…
बस इतना सा पल…पर दोनों के दिल में कुछ हल्का-सा असर छोड़ गया…सुनामी मंदिर से बाहर निकल गई…पर जाते-जाते एक बार पीछे मुड़कर देखा…कृतिक अभी भी वहीं खड़ा था…और अनजाने में उसकी नजर भी उसी पर टिक गई…।
कहानी की शुरुआत हो चुकी थी…मंदिर में…भगवान के सामने…
दो दिलों के बीच…।
अगली सुबह…मंदिर वही था…घंटियों की वही मधुर आवाज़…और वही सुकून भरी हवा…लेकिन आज…कुछ अलग होने वाला था…
सुनामी धीरे-धीरे मंदिर में दाखिल हुई…अब उसके कदमों में कल जैसी झिझक नहीं थी…जैसे उसे इस जगह से थोड़ा लगाव हो गया हो…वो जाकर फिर से राधा-कृष्ण के सामने खड़ी हो गई…हाथ जोड़े…और आँखें बंद कर लीं…।
कुछ ही देर बाद…कृतिक भी मंदिर में आया…उसकी नजर जैसे किसी को ढूंढ रही थी…और फिर…उसे वो दिख गई…सुनामी…
उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई…और वो जाकर फिर से उसके पास खड़ा हो गया…।
दोनों फिर से…एक साथ…आँखें बंद किए…भगवान के सामने खड़े थे…तभी…हल्की सी हवा चली… 🌿और अचानक…राधा रानी जी के हाथ से एक फूल गिरा… 🌸वो फूल सीधे नीचे गिरने लगा…
और उसी पल…दोनों ने एक साथ आँखें खोलीं…और उसी फूल को उठाने के लिए…एक साथ झुक गए…उनके हाथ…फिर से एक ही फूल की तरफ बढ़े…और जैसे ही दोनों ने उसे उठाने की कोशिश की…उनकी उंगलियाँ फिर से टकरा गईं…इस बार…कुछ सेकंड ज़्यादा…।
दोनों एकदम पास थे…इतने पास… कि एक-दूसरे की साँसें महसूस हो रही थीं…सुनामी ने धीरे से नजर उठाई…और उसकी आँखें…
सीधे कृतिक की आँखों में जा मिलीं…।
कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
लगता है… ये फूल हमें ही मिलना था…
सुनामी थोड़ा शरमा गई…पर इस बार उसने नजरें नहीं हटाईं…।
सुनामी (धीरे से) बोली -
शायद… राधा रानी का कोई संकेत है…
दोनों कुछ पल ऐसे ही झुके हुए खड़े रहे...फूल उनके बीच था...और नजरें एक-दूसरे में खोई हुई…
तभी पुजारी जी की आवाज आई—
बेटा… फूल भगवान को अर्पित कर दो…
दोनों जैसे होश में आए…कृतिक ने धीरे से फूल उठाया…और सुनामी की तरफ बढ़ाया…।
कृतिक बोला -
आप चढ़ाइए…
सुनामी ने फूल लिया…और हल्की मुस्कान के साथ भगवान को अर्पित कर दिया…उसके बाद…दोनों एक साथ खड़े हो गए…पर आज…उनके बीच खामोशी नहीं थी…कुछ अनकहा जुड़ चुका था…।
कृतिक बोला -
वैसे… मैं कृतिक…
सुनामी ने उसकी तरफ देखा…
हल्की सी मुस्कान के साथ बोली—
सुनामी…
दोनों के नाम…आज पहली बार एक-दूसरे के दिल में दर्ज हो गए…
मंदिर की घंटी फिर बजी… 🔔और इस बार…जैसे भगवान भी मुस्कुरा रहे थे…मंदिर की घंटियाँ धीरे-धीरे थम चुकी थीं…लोग भी कम हो गए थे…सुनामी ने भगवान को आखिरी बार देखा…और फिर बाहर की तरफ बढ़ने लगी…उसके हाथ अभी भी हल्का-सा कांप रहे थे…(शायद उस अजीब-से एहसास की वजह से…)जैसे ही वो मंदिर की सीढ़ियाँ उतरने लगी…।
पीछे से एक आवाज आई—
सुनिए…
सुनामी रुक गई…धीरे से पलटी…कृतिक उसकी तरफ आ रहा था…वो उसके पास आकर थोड़ा सा रुका…जैसे कुछ सोच रहा हो कि क्या कहे…।
कृतिक (हल्की झिझक के साथ) बोला -
अगर… आपको बुरा न लगे तो… मैं आपको बाहर तक छोड़ दूँ?
सुनामी थोड़ी हैरान हुई…पर उसके चेहरे पर एक सुकून भी था…
नए शहर में…कोई अपना-सा मिलना… आसान नहीं होता…।
सुनामी (धीरे से) बोली -
हां… ठीक है…
दोनों साथ-साथ मंदिर की सीढ़ियाँ उतरने लगे…कुछ पल तक…
दोनों चुप रहे…पर ये चुप्पी अजीब नहीं थी…आराम देने वाली थी…मंदिर के बाहर हल्की भीड़ थी…गाड़ियाँ आ-जा रही थीं…
तभी अचानक…एक तेज़ बाइक उनकी तरफ आई… ⚡
सुनामी थोड़ा घबरा गई…वो संभल पाती… उससे पहले कृतिक ने तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया…।
सुनामी सीधे कृतिक के करीब आ गई…इतनी करीब… कि उसका दिल जोर से धड़कने लगा…बाइक तेज़ी से निकल गई…कुछ सेकंड…दोनों वैसे ही खड़े रहे…।
कृतिक (थोड़ा सख्त, पर फिक्र भरे अंदाज़ में) बोला -
ध्यान से… ये रोड थोड़ी risky है…
सुनामी ने उसकी तरफ देखा…उसकी आँखों में साफ़ चिंता थी…
सुनामी (धीरे से) बोली -
थैंक यू…
कृतिक को जैसे एहसास हुआ…कि वो अभी भी उसका हाथ पकड़े हुए है…उसने तुरंत हाथ छोड़ दिया…।
कृतिक (थोड़ा नर्वस होकर) बोला -
Sorry… वो… बस…
सुनामी हल्का सा मुस्कुराई…
सुनामी बोली -
It's ok… अगर आप नहीं पकड़ते… तो शायद मैं गिर जाती…।
दोनों फिर साथ चलने लगे…
कृतिक बोला -
आप यहाँ नई हैं…?
सुनामी बोली -
हां… अभी कुछ दिन पहले ही आई हूँ…।
कृतिक बोला -
हम्म… इसलिए शायद… थोड़ा ध्यान रखना पड़ेगा…।
उसके लहज़े में फिर वही protectiveness झलक गई…सुनामी ने उसे देखा…दिल में एक अजीब-सी गर्माहट महसूस हुई…थोड़ी दूर चलने के बाद…।
सुनामी बोली -
मैं यहीं से चली जाऊंगी…
कृतिक रुक गया…
कृतिक (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
Ok… फिर मिलते हैं… मंदिर में…
सुनामी ने भी मुस्कुराकर सिर हिला दिया…वो मुड़ी…कुछ कदम चली…और फिर…एक बार पीछे मुड़कर देखा…कृतिक अभी भी वहीं खड़ा था…उसे जाते हुए देख रहा था…दोनों की नजरें फिर मिलीं…और इस बार…दोनों के चेहरे पर अनजानी सी मुस्कान थी…।
अब ये सिर्फ मुलाकात नहीं रही थी…ये आदत बनने लगी थी…।