अभी तक आपने पढ़ा कि रितु का परिवार भावनात्मक रूप से पंकज से जुड़ गया और विदाई के समय सबने उसका आभार व्यक्त किया। रितु भी पंकज के सच्चे प्यार को महसूस कर रोते हुए उससे लिपट गई, जिससे परिवार भावुक हो उठा। गाँव लौटने पर उनका दोस्त राहुल भी बिना कुछ जताए सामान्य व्यवहार करता रहा, जबकि बसंती ने रितु को संभालते हुए उसे जीने की हिम्मत दी। अब इसके आगे पढ़ें-
एक माँ के लिए यह बड़ी कठिन परीक्षा की घड़ी थी। बेटी कहीं कुछ कर ना ले यह डर बसंती के दिलो दिमाग में इस कदर घर कर गया था कि वह दिन रात इसी चिंता में डूबी रहती। कितनी ही बार वह रितु के पास बैठकर उसे यूँ ही निहारा करती। वह उसे अकेला छोड़ना ही नहीं चाहती थी और उसका बहुत ध्यान रखती। जब भी उनके घर में कोई मिलने-जुलने आता तो रितु सकुचा जाती। उसे किसी से मिलना-बातें करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता, लेकिन मजबूरी में यह सब भी उसे करना ही पड़ता था।
इसी तरह लगभग एक हफ्ता बीत गया। किशन एकदम गुमसुम रहने लगा था। रमन और बसंती को किशन की भी चिंता हो रही थी। जवान बेटा है, पता नहीं क्या कर गुजरे। यह चिंता उन्हें रात को ढंग से सोने भी नहीं देती। किशन की आँखों में जो नफ़रत वे देख रहे थे वह बहुत ही डरावनी थी। उसके कारण उन्हें बहुत डर लगता था। इन दिनों किशन ने पढ़ाई लिखाई से भी दूरी बना रखी थी। वह ना किसी से ज़्यादा बात करता और ना ही पहले की तरह खाता पीता ही था।
इसी बीच एक रात लगभग दो बजे के करीब किशन का दोस्त राहुल और उसके दूसरे तीन दोस्त उनके घर आए। भले ही उनका घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन एक छोटी-सी छत ज़रुर थी, जहाँ वे सभी इकट्ठे हुए। घर में बिल्कुल सन्नाटा था। गहरी नींद का समय था। किशन ने देखा कि उसके पापा-मम्मी गहरी नींद में सो रहे थे। उसके बाद उसने रितु के कमरे में धीरे से झांका तो देखा, वह भी सो रही थी। बस, उसके बाद वह ऊपर अपने दोस्तों के पास गया।
ऊपर उन पाँचों ने अंधेरे में ही अपनी बातचीत शुरू की।
किशन ने कहा, "तुम सब मेरे बचपन के दोस्त हो। राहुल तो सब जानता है जो मेरे परिवार के साथ घटा है। मैं तुम्हें भी सब कुछ बताता हूँ।"
किशन की बातें सुनकर उसके सभी दोस्त हैरान थे।
किशन ने आगे कहा, " इसमें सबसे बड़ा दोष उस लड़की का है जिसने यह करवाया। मैं चाहता हूँ कि उसके साथ भी वही सलूक होना चाहिए जो उसने..." इतना कहकर वह आगे कुछ भी न कह सका।
राहुल ने कहा, "तू जो कहना चाह रहा है, उसके लिए मैं तैयार हूँ। उसे उसके किए की सजा तो मिलनी ही चाहिए, तभी उसे पता चलेगा।"
किशन ने कहा, "मैं पागल हो जाऊंगा। मुझे उससे बदला लेना है। बोलो, क्या तुम तैयार हो?"
जोश में आकर उसके तीनों दोस्तों ने कहा, "सच की लड़ाई में हम तेरे साथ हैं।"
किशन ने कहा, "वह लड़की बहुत मालदार है। उसे कोर्ट से कोई सजा नहीं मिलेगी। उसे सज़ा तो हमें ही देनी चाहिए।"
राहुल ने कहा, "किशन सच कह रहा है, सब पैसा खाकर उस पर आंच तक नहीं आने देंगे।"
किशन ने कहा, "राहुल तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। वे लड़के छूटेंगे या नहीं, यह तो वक़्त बताएगा। लेकिन उस पापिन को मैं नहीं छोड़ूंगा, जो पैसे के दम पर जमानत लेकर बाहर आ चुकी है। हमें बहुत सतर्क रहना होगा। हमसे कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए। हम सब पूरा मुँह ढक लेंगे। उसके घर में जाने के लिए चौकीदार को बेहोश करना होगा। उसके बाद तो रास्ता साफ़ ही होगा। उसे तो मैं बर्बाद कर दूंगा, तभी मुझे सुकून मिलेगा "
✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक
क्रमशः