अभी तक आपने पढ़ा कि गाँव से लौटकर पंकज को बीना की साज़िश और रितु पर हुए अत्याचार की सच्चाई पता चली। गुस्से में उसने थाने जाकर बीना का सामना किया और उससे नफ़रत जताई। इसके बाद वह सीधे अस्पताल पहुँचा, जहाँ रितु अपने परिवार के साथ दर्द में थी, और पंकज ने उसके लिए अपना सच्चा प्यार और साथ जताया। अब इसके आगे पढ़ें-
इसके बाद धीरे-धीरे पंकज के प्यार का जादू रितु पर चढ़ने लगा क्योंकि वह सच में रितु से बेइंतहा प्यार करने लगा था, जिसे रितु भी महसूस कर रही थी। अब तो पंकज को देखते ही उसका दिल भी धड़कने लगता।
इन दिनों बीना के घर पंकज का आना-जाना बहुत बढ़ गया था। पंकज के दिल में पनपते प्यार से अंजान बीना बहुत खुश थी, क्योंकि उसका एकतरफा प्यार तो कब से पंकज को पाने के लिए तड़प रहा था। लेकिन कुछ ही दिनों में बीना को लगने लगा कि पंकज के बार-बार आने का कारण वह नहीं, बल्कि रितु है। पंकज बार-बार कभी रितु से पानी मांगता, कभी बुलाकर कहता कि कुछ नाश्ता बना दो। वह कुछ न कुछ बहाना करके रितु को अपने नज़दीक बुलाने की कोशिश करता। बीना को धीरे-धीरे यह महसूस होने लगा था कि पंकज रितु की तरफ़ आकर्षित हो रहा है।
रितु को भी पंकज का यह व्यवहार अच्छा लगने लगा था। वह भी चाहती थी कि पंकज बार-बार उससे पानी मांगे, चाय मांगे। इस तरह पंकज और रितु धीरे-धीरे एक-दूसरे के नज़दीक आने लगे। अब पंकज को बीना कबाब में हड्डी की तरह लगने लगी थी। इसलिए वह कई बार, जब बीना घर पर नहीं होती तब भी मौका देखकर उसके घर आ जाता। उसके बाद वह रितु को लेकर बाहर घूमने निकल जाता और उसके साथ समय बिताता।
जब प्यार गहराता है, तो हवाएँ भी उसकी ख़ुशबू को हर तरफ़ फैलाने लगती हैं। यह महक बड़ी स्वाभाविक होती है, मतलब, आसपास के लोगों को शक होने लगता है और वे उन पर नज़र भी रखने लगते हैं। ऐसा ही उन दोनों के साथ भी हुआ।
बीना को जब शक हुआ, तो उसने उन पर नज़र रखना शुरू कर दी। वह उन्हें अलग करना चाहती थी और पंकज को पाना अब उसकी ज़िद बन चुकी थी। वह कहते हैं ना, ज़िद अगर सही काम के लिए हो और अच्छी हो, तो इंसान को एक अच्छा और सच्चा इंसान बना सकती है, घर को स्वर्ग बना सकती है। किंतु यदि किसी ग़लत धारणा को ज़िद धारण कर ले, तो इंसान को शैतान तक बना सकती है, जैसा बीना के साथ हुआ। उसने जो कुछ भी किया, वह एक अच्छा इंसान कभी नहीं कर सकता था और एक स्त्री तो ऐसा सोच भी नहीं सकती थी। लेकिन पंकज को पाने की ज़िद और रितु से होने वाली ईर्ष्या ने उसके भीतर शैतान को जन्म दे दिया था।
उधर अस्पताल में पंकज के पहुँचते ही उसे देखकर रितु ने दूसरी तरफ़ मुंह फेर लिया।
किशन ने यह देख कर पूछा, "जीजी, क्या यह पंकज है?"
रितु ने हाँ कहा।
यह सुनते ही किशन ख़ुद पंकज के पास आया और कहा, "मैं किशन ... रितु का भाई हूँ," यह कहते हुए उसका गला रुंध रहा था, मानो दर्द और दुख के कारण आवाज़ निकल ही नहीं पा रही हो।
पंकज ने कहा, "मैं जानता हूँ, रितु ने फोटो में दिखाया था।"
किशन ने कहा, "सब बर्बाद हो गया है, पंकज।"
पंकज ने उसे गले लगा लिया और कहा, "हमें हिम्मत से काम लेना होगा। हमारे आँसू रितु को और कमजोर कर देंगे। हमें उसमें फिर से जीने की चाह पैदा करनी होगी और उसे एक सामान्य जीवन देने की कोशिश करनी होगी। तुम तो जानते ही होगे कि रितु ने मुझे बताया था कि वह तुमसे सबसे ज़्यादा करीब है और तुम्हें अपने जीवन का हर सुख-दुख बताती है तो शायद उसने मेरे बारे में भी तुम्हें ज़रूर बताया होगा।"
"हाँ पंकज, मैं सब जानता हूँ, लेकिन ..."
✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक
क्रमशः