बारह बरश का इंतज़ार - 4 kusum kumari द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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बारह बरश का इंतज़ार - 4

किटी... अंकित ने धीरे से कहा “ …
कुसुम ने अपनी आंखें खोल दी ! 
“हम्म।” कुसुम ने धीरे से जवाब दिया ! 

“तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।”
“क्यों  किया? तुम जवाब देना नहीं चाहती?”
“नहीं।”
“क्यों?”
“पता नहीं।”
“नाराज़ हो?”
“नहीं।”
“मुझसे बात नहीं करना चाहती?”
“पता नहीं।”
“मुझसे कोई गलती हुई है क्या?”
“नहीं।”
“तो फिर तुम ऐसे क्यों बिहेव कर रही हो!”

अंकित की आवाज़ तेज़ हो गई ! और वो उठकर खड़ा हो गया। उसने कुसुम को अपनी क़रीब खींच लिया। अब दोनों ही एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। अंकित ने अब भी कुसुम की कलाई नहीं छोड़ी थी। कुसुम अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अंकित की पकड़ कसती जा रही थी।

“Give me an answer, damn it! Why are you behaving like this?”

कुसुम की आँखें लाल हो गईं थी ! और उसका गला भर आया। उसके आँसू आँखों से बहना चाहते थे ! पर कुसुम ने उन्हें ज़ब्त कर रखा था। वो वहाँ से भाग जाना चाहती थी ! पर अंकित उसे छोड़ने को तैयार नहीं था।

“मुझे जाने दो, अंकित...”  कुसुम ने उसकी आँखों में देखते हुए बड़ी मुश्किल से कहा” ..।
“पहले मेरे सवाल का जवाब दो,” अंकित ने बेचैनी से उसे देखते हुए कहा” ..।
“प्लीज़, किटी... ऐसे बिहेव मत करो जैसे मैं हूँ ही नहीं... मैं यहाँ सिर्फ़ तू...”

कुसुम!  एक तेज़ आवाज़ आई। कुसुम ने उसे धक्का दिया ! और वहाँ से भागती हुई चली गई। अंकित बस उसे देखता रह गया।

कुसुम जैसे ही अपने कमरे में आई, उसने गेट को धड़ाम से बंद किया ! और जाकर बिस्तर पर औंधे मुँह गिर गई। पता नहीं क्या हो रहा था ! उसकी लाइफ़ में... और अंकित की गर्लफ़्रेंड का क्या हुआ… उसके जहन में हज़ारों सवाल चल रहे थे ! पर जवाब उसके पास नहीं था !  और अंकित से पूछने की उसकी हिम्मत भी नहीं थी।

थोड़ी देर बाद वो बालकनी में गई तो देखा !  अंकित अपनी बालकनी में खड़ा ! उसकी बालकनी की ओर ही देख रहा था।
उसने एक नज़र उसे देखा और झट से अंदर आकर बालकनी का गेट ज़ोर से बंद कर दिया। अंकित सुनी आंखो से उसको बालकिनी को देखता रहा ! वो कुसुम को बहुत कुछ बताना चाहता था पर वो सुनने को तैयार नहीं थी ! पता नहीं वो ये क्यों व्यवहार कर रही थी ! उसने एक गहरी सास छोड़ी और चाँद को देखने लगा ! 

अब ये रोज़ की बात हो गई थी। अंकित उससे बात करने की कोशिश करता ! कुसुम भी उससे बात करना चाहती थी !  पर उसकी हिम्मत नहीं होती थी।

आज कुसुम फिर से रेडी थी। उसकी मम्मी ने आज फिर लड़केवालों को बुलाया था। अंकित अपने कमरे की बाल्कीनी में खड़ा होकर सब देख रहा था !  उसकी नजर जैसे ही बगीचे में बैठे लड़के पर गई ! उसका जबड़ा बीच गया !  बस बहुत हो गया उसको अब कुसुम से बात करनी ही होगी ! उसने फेसला किया और अंदर चला गया ! 

कुसुम अपने रूम में तैयार हो रही थी। कुछ देर बाद वो नीचे गई। वही सारी चीज़ें फिर हुईं ! लेकिन इस बार उस लड़के की नज़रों में उसे कुछ अलग महसूस हुआ और कुसुम की मुट्ठियाँ भींच गईं। उसके अंदर जेसे भावनाओं का तूफ़ान उठा हुआ था ! वो फेसला नहीं कर पा रही थी कि ! किया करे और किया नहीं ! 

शाम को उसकी माँ बहुत खुश थी !  क्योंकि लड़केवालों ने उसे पसंद कर लिया था।
पर कुसुम अपने कमरे में बैठी सुन्य में घूर रही थी ! ये क्या हो रहा है?* क्या वो यही नहीं चाहती थी? कहा तो था उसे ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए! बस एक ऐसा लड़का जो उसे वैसे ही पसंद करे जैसी वो है… तो फिर क्या है जो उसे अंदर से कचोट रहा है?

आज तो उसने लिपा-पोती भी नहीं की थी !  फिर भी लड़के ने पसंद कर लिया !
क्यों? क्यों ये सब कर रही है, कुसुम? “बस भी करो...” उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। “अब मैं ज़्यादा नहीं सोचने वाली। जो हो रहा है वही सही है ! जो नहीं हो सकता !  उसके बारे में क्या सोचूँ... शायद यही मेरी किस्मत है।”

सोचते-सोचते वो बिस्तर पर लुढ़क गई। 
वो अपने खयालों में गुम थी जब उसकी बालकनी से कुछ आवाज़ आई !  जैसे कोई कूदा हो! वो झट से बिस्तर पर उठकर बैठ गई ! और बालकनी की ओर बढ़ी।

जैसे ही उसने बालकनी का गेट खोला !  अंकित भूत की तरह उसके सामने प्रकट हो गया! कुसुम लड़खड़ाकर पीछे हट गई।
“तुम... श्श्श...” अंकित ने अपने होंठों पर उँगली रखी और कुसुम के पास से अंदर आ गया।

“तुम कहाँ जा रहे हो?”  कुसुम उसके पीछे अंदर आई। अंकित को ईस वक्त यहां देख कर उसका दिमाग सुन्न हो गया था ! उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ! 
अंकित जाकर उसके बेड पर बैठ गया ! और इधर-उधर देखते हुए बोला “ क्या बात है... तुम किताबें पढ़ती हो किटी? तुमने तो अच्छे-खासे कमरे को लाइब्रेरी बना दिया।”

कुसुम ने घूरकर उसे देखा  “तुम पहले मेरे सवाल का जवाब दो! यहाँ क्या कर रहे हो तुम?”
“तुमसे मिलने आया हूँ,” अंकित ने आराम से कहा” …।
“क्यों?” — कुसुम जाकर उसके सामने खड़ी हो गई।
“बात करनी थी...”
“क्या? कुछ बताना है ! और कुछ पूछना है? 
इतनी रात को?”

“तुमको कुछ बताना है। और बात कभी भी की जा सकती है !  और दिन में तो तुम मिलती नहीं हो।”मुझसे ऐसे दूर भाग रही हो जैसे मैं कोई वैम्पायर हूं ! अंकित ने उसकी आँखों में देखा जो हल्का लाल था ! वो समझ गया कि वो रोयी है ! पर उसने कुछ नहीं कहा “ ..! 

“बैठो।” अंकित ने अपने बगल में उसे बैठने का इशारा किया। कुसुम ने उसे बगल में देखा ! वो अब भी खुदमे ही उलझी थी ! 
अंकित ने उसको कहीं खोये हुवे देखा तो ! उसका हाथ पकड़ा और खींचकर अपने बगल मैं बैठा लिया। फिर एक झटके से उसकी ओर मुड़ा ! कुसुम कुछ कहती ! उसे  पहले ही अंकित बोल पड़ा ! 
“प्लीज़, किटी... बस 10 मिनट, ओके?”

कुसुम बस उसका चेहरा देखती रह गई। कुछ बोल नहीं पाई।
उसकी धड़कनें फिर बेकाबू हो रही थीं ! और साँसें अपनी मनमानी कर रही थीं। उसे चुप देखकर अंकित मुस्कुरा दिया।

“अंजलि ने मुझे प्रपोज़ किया था ! कॉलेज टाइम में !  मैंने तुम्हें बताया था। मैंने उससे ‘हाँ’ कही थी !  पर कुछ समय बाद ही हमारा ब्रेकअप हो गया ! क्योंकि हमारी जमी नहीं...
या शायद मैं उससे प्यार ही नहीं करता था। वो महज़ एक “ attraction “ था !  जो हमारी उम्र में बहुत नॉर्मल है।

पर जब तुमने बात करना बंद कर दिया, किटी... तो सच कहूँ, मेरी हालत खराब हो गई थी। मैं बेचैन हो गया था। लगता था शायद मुझसे कोई गलती हो गई ! या फिर पता नहीं क्या...
मैंने तुम्हें कितने कॉल्स, मैसेज किए !  पर नहीं, तुमने किसी का जवाब नहीं दिया।

मुझे अपनी लाइफ खाली-सी लगने लगी थी।
आदत हो गई थी ! हर चीज़ तुमसे शेयर करने की, तुम्हारी बातें सुनने की… और जब तुम मुझसे दूर हुईं !  तो मुझे रियलाइज़ हुआ कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।” मैं यहां वापस ईस सहर मैं ! तुम्हारे लिए आया हूं किटी ! सिर्फ तुम्हारे लिए ! 

कुसुम की आँखें बड़ी हो गईं ! “तुम... तुमने क्या कहा?”
“यही,”  अंकित उसके क़रीब आ गया !  बहुत क़रीब... और धीरे से बोला “ 
“बारह बरस का इंतज़ार सिर्फ़ तुमने नहीं किया, किटी... मैंने भी किया है।

ये सुनते ही कुसुम की धड़कने रुक गई ! वो कुछ बोलती ! उसे पहले ही उसकी नजर अंकित के हाथो पर गई ! जहां उसका दिया हुआ लॉकेट था ! उसने उसके लॉकेट को ब्रेसलेट की तरह पहना हुआ था ! ये देख कर जाने क्यों उसका गला भर आया ! 

क्या पूरी ज़िंदगी मेरे साथ रहना चाहोगी, किटी?
मुझसे शादी करोगी?” अंकित धीरे से फुसफुसाया ..! 

कुसुम की आँखें भर आईं !  आँसू गालों पर लुढ़क आए।
वो अंकित को देख रही थी !  जो मुस्कुराते हुए उसके जवाब का इंतज़ार कर रहा था।

मतलब ये बारह सालों का इंतज़ार सिर्फ़ उसने नहीं ! अंकित ने भी किया था… इतने साल बेचैनी में सिर्फ़ उसने नहीं गुज़ारे थे...

उसका आज पूरा हुआ था — “बारह बरस का इंतज़ार आज पूरा हुआ था ! ”

कुसुम गीली आँखों के साथ मुस्कुरा दी ! और सिर हिलाया  “हाँ।”
ये सुनते ही अंकित के होठों पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई ! और आँखों में सुकून ! अंकित ने कुसुम को देखा जो उसको ही एक तक देख रही थी ! उसने खींचकर उसको अपने सीने से लगा लिया ! और धीरे से बुदबुदाया  “थैंक यू मेरे इंतज़ार करने के लिए...”

कुसुम भी मुस्कुरा दी। आज दोनों का इंतज़ार पूरा हुआ था।

तो बस  इतनी-सी थी ये कहानी।