50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 23 Priya Chaudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 23

(हवेली के हॉल में भारी सन्नाटा, जिसे केवल आर्यन की तेज़ सांसें और दूर कहीं गिरती हुई बारिश की बूंदों की आवाज़ तोड़ रही है। रंजना का चेहरा डर और हैरत से सफेद हो चुका है। समीर, जो अभी-अभी सामने आया था, उसकी आँखों में एक ऐसी चमक है जो किसी रहस्यमय मक़सद को दर्शाती है।)
रंजना ने अपने हाथ हवा में उठाए, जैसे वह किसी अदृश्य ताकत से अपना बचाव कर रही हो। "नहीं! यह झूठ है! मीरा मर चुकी है! मैंने खुद... मैंने खुद उसे...!"
समीर, जिसकी उपस्थिति अभी भी आर्यन के लिए एक पहेली थी, धीरे-धीरे हॉल के बीच में आया। उसने रंजना की ओर देखते हुए ठंडी मुस्कान के साथ कहा, "तुमने क्या किया, रंजना? तुमने एक खाली कब्र खोदी थी। मीरा को तुम्हारे पिता ने कभी नहीं मारा, उन्होंने उसे बस तुम्हारी नज़रों से दूर रखा था।"
सीन 1: 27वां दिन—सत्य का एक और तहखाना
आर्यन के लिए सब कुछ एक कोहरे की तरह था। उसे अपना नाम याद था, लेकिन उसका चेहरा, उसकी पहचान, उसका अतीत—सब कुछ एक अजनबी की तरह महसूस हो रहा था। उसने समीर के पास जाकर उसका कॉलर पकड़ लिया। "कौन हो तुम? और ये मीरा कौन है? मुझे सच बताओ, वरना मैं इस हवेली को अभी इसी वक्त राख कर दूँगा!"
समीर ने आर्यन के हाथों को बहुत ही सौम्यता से हटाया। "आर्यन, मैं तुम्हारा वो हिस्सा हूँ जो तुम्हारी अंतरात्मा है। और मीरा? वह वो है जिसने तुम्हारे पिता के हर काले कारनामे को देखा था। उसने ही तुम्हें बचाने के लिए खुद को 'मरने का नाटक' करने पर मजबूर किया था, ताकि तुम्हारे पिता का ध्यान हट सके।"
सीन 2: रंजना का पतन और खुलासा
रंजना, जो अब तक अपने घुटनों पर थी, अचानक खड़ी हुई। उसने अपनी रिवॉल्वर निकाली और सीधा समीर की तरफ तान दी। "मुझे परवाह नहीं कि मीरा ज़िंदा है या मर चुकी है! आर्यन, तुम्हें इस हवेली से बाहर नहीं निकलना है। ये जायदाद, ये पैसा, ये सब मेरा है!"
आर्यन ने एक पल भी गँवाया नहीं। अपनी याददाश्त खोने के बावजूद, उसके अंदर का 'शार्प कॉर्पोरेट आर्यन' अभी भी ज़िंदा था। उसने रंजना के हाथ पर एक ज़ोरदार प्रहार किया, रिवॉल्वर नीचे गिरी और आर्यन ने उसे अपने पैर से दूर धकेल दिया।
"रंजना," आर्यन ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा, "तुमने मीरा की बहन होकर भी मीरा का इस्तेमाल किया। तुम कोई बदला नहीं ले रही थी, तुम सिर्फ एक लालची इंसान थी। आज इस सन्नाटे में तुम्हारे सारे झूठ खत्म हो रहे हैं।"
सीन 3: 26वां दिन—मीरा का संदेश
रंजना को पुलिस के हवाले करने के बाद, आर्यन और आयशा उस हॉल में अकेले थे। समीर भी वहाँ नहीं था, जैसे वह हवा में गायब हो गया हो। तभी, हॉल के उस पुराने ग्रैमफ़ोन (Gramophone) पर एक सुई खुद-ब-खुद चलने लगी।
एक रिकॉर्ड बजने लगा। वह मीरा की आवाज़ थी।
"आर्यन, अगर तुम यह सुन रहे हो, तो तुम जीत गए हो। मैंने तुम्हें सन्नाटे में छोड़ दिया था क्योंकि बाहर का शोर तुम्हें कभी सच नहीं देखने देता था। रंजना को पकड़ लिया गया, लेकिन तुम्हारे पिता अब भी आज़ाद हैं। वह उस प्राइवेट टापू पर हैं जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ था। अब तुम्हारी बारी है, आर्यन—अपने पिता को खत्म करो और उस 50 दिन के खेल को पूरा करो।"
सीन 4: पिता के टापू की ओर
आर्यन को अब एक दिशा मिल गई थी। मीरा ज़िंदा है या नहीं, यह अब गौण था। महत्वपूर्ण था उसके पिता का अंत। आयशा ने आर्यन का हाथ थाम लिया। "पापा, चाहे आप कुछ भी भूल गए हों, मैं जानती हूँ कि आप मेरे पापा हैं। चलिए, इस खेल को हमेशा के लिए खत्म करते हैं।"
उन्होंने हवेली छोड़ी। बाहर एक प्राइवेट जेट तैयार था—शायद मीरा की ही किसी योजना का हिस्सा।
सीन 5: 25वां दिन—हवा में सफ़र
जेट में बैठते ही, आर्यन ने देखा कि उसकी नोटबुक में 25 पन्ने और बचे हैं। वह अब एक नई नोटबुक में लिखना शुरू कर रहा था। 25वां दिन: "यादें नहीं, इरादे मायने रखते हैं। मुझे यह याद नहीं कि मैं कौन हूँ, लेकिन मुझे यह पता है कि मुझे क्या करना है।"
जैसे ही जेट उड़ा, उसने खिड़की से नीचे देखा—हवेली जल रही थी। रंजना ने मरने से पहले शायद उसमें आग लगा दी थी। वह पूरा सच, वह सारी फाइलें, सब कुछ राख हो रहा था।
सीन 6: दुश्मन का गढ़
टापू बहुत छोटा था, लेकिन वहाँ की सुरक्षा किसी किले से कम नहीं थी। जेट जैसे ही वहाँ उतरा, आर्यन ने अपनी रिवॉल्वर चेक की। आयशा को जेट के अंदर सुरक्षित छोड़ते हुए उसने कहा, "अगर मैं वापस न आऊं, तो यहाँ से निकल जाना।"
"पापा, आप वापस आएँगे," आयशा ने दृढ़ता से कहा।
आर्यन टापू के घने जंगल में आगे बढ़ा। वहाँ का सन्नाटा ऐसा था जैसे ज़मीन पर कोई रेंग रहा हो। अचानक, उसके सामने दस लोग आ गए—सफेद कपड़े पहने हुए, बिल्कुल उसके पिता के 'प्राइवेट गार्ड्स'।
आर्यन ने बिना किसी डर के, अपनी आंखों में वही पुरानी क्रूरता लाकर उन सबका सामना किया। वह कातिल आर्यन नहीं था, वह एक ऐसा इंसान था जिसे खोने के लिए कुछ नहीं बचा था।
नैरेटर: 25 दिन शेष हैं। आर्यन टापू पर पहुँच चुका है। उसके पिता, विक्रम मल्होत्रा, वहाँ उसका इंतज़ार कर रहे हैं। क्या यह आखिरी मुकाबला होगा? क्या मीरा सच में वहाँ है, या यह भी एक जाल है?
(सस्पेंस पॉइंट: आर्यन जैसे ही अपने पिता के बंगले के मुख्य द्वार पर पहुँचा, उसने देखा कि वहाँ एक कुर्सी पर कोई बैठा है। कुर्सी मुड़ी हुई है। जैसे ही उसने कुर्सी घुमाई, वहाँ कोई नहीं था, बस एक आईना रखा था। आईने पर लिखा था—"तुमने मुझे ढूंढ लिया आर्यन, लेकिन क्या तुमने खुद को ढूंढ लिया?" अचानक पीछे से आवाज़ आई—"तुम बहुत देर से आए, बेटा।" आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा—वहाँ मीरा खड़ी थी!)
लेखक: प्रिया
आर्यन के जीवन का सबसे बड़ा पल! क्या मीरा वाकई ज़िंदा है? सस्पेंस की आग अब और भी तेज़ होगी! ⏳🖤🔓🔥