(घने जंगल में रात की भयावह शांति। उल्लुओं के बोलने की आवाज़ और सूखी पत्तियों के आर्यन के जूतों के नीचे टूटने की चटक-चटक आवाज़। आयशा की धीमी और भारी सांसें, जो आर्यन को बार-बार याद दिला रही हैं कि समय निकलता जा रहा है।)आर्यन ने आयशा को एक सुरक्षित गुफा में लिटाया था और उसे गर्म रखने के लिए सूखी टहनियों से आग जलाई थी। उसके पास मीरा की वह पुरानी डायरी थी, जो अब उसकी एकमात्र गाइड थी। डायरी का आखिरी पन्ना उसे एक पुरानी, वीरान कब्रिस्तान की ओर ले जा रहा था, जो शहर के सबसे पुराने चर्च के पीछे स्थित था।
सीन 1: कब्रिस्तान का सन्नाटा
आर्यन कब्रिस्तान के लोहे के गेट को ढकेलकर अंदर पहुँचा। वहाँ का वातावरण इतना ठंडा था कि उसके हर शब्द के साथ भाप निकल रही थी।墓 (कब्रें) इतनी पुरानी थीं कि उन पर उगे काई (moss) ने नाम तक मिटा दिए थे। आर्यन ने टॉर्च जलाई और हर पत्थर को गौर से देखने लगा।
"मीरा... कहाँ हो तुम?" आर्यन फुसफुसाया।
तभी, कब्रिस्तान के कोने में उसे एक ऐसा पत्थर दिखा जो बाकी सब से अलग था। वह नया लग रहा था। उस पर लिखा था: "मीरा मल्होत्रा—एक प्रेम जो कभी खत्म नहीं हुआ।"
आर्यन उस पत्थर के सामने घुटनों के बल बैठ गया। जैसे ही उसने पत्थर को छुआ, उसके कानों में मीरा की आवाज़ गूँजी—वही मधुर आवाज़ जो उसने बीस साल पहले सुनी थी। "आर्यन, अगर तुम यहाँ हो, तो इसका मतलब है कि तुमने अंततः उस नफरत को हरा दिया जिसे तुम्हारे पिता ने बोया था।"
सीन 2: 31वां दिन—कब्र के नीचे का राज़
आर्यन ने पत्थर को हटाने की कोशिश की। वह पत्थर के नीचे कोई कब्र नहीं, बल्कि एक छोटा सा तहखाना था। वह उसे खिसकाकर नीचे उतरा। वहाँ का नज़ारा देखकर वह सन्न रह गया। वह एक छोटा सा कमरा था जिसमें हज़ारों ऑडियो टेप्स और फाइलें रखी थीं। ये वही फाइलें थीं जो बताती थीं कि मीरा की 'मौत' के बाद उसके साथ क्या हुआ था।
उसे वहां एक टेप मिला जिस पर लिखा था: "आर्यन के लिए—अंतिम सच।"
उसने टेप प्लेयर में उसे डाला। आवाज़ गूँजी—यह उसके पिता, विक्रम मल्होत्रा की आवाज़ थी!
"आर्यन, अगर तुम यहाँ तक आ गए हो, तो शायद तुम उन 30 दिनों से भी ज़्यादा जी गए हो जितनी मुझे उम्मीद थी। मीरा मरी नहीं थी, उसे मैंने एक ऐसे सुधार गृह (correction facility) में डाल दिया था जहाँ वह तुम्हारे न होने के दुख में धीरे-धीरे मर रही थी। उसने आयशा को वहां जन्म दिया था। अगर तुम सच में अपनी बेटी को होश में लाना चाहते हो, तो उस जगह की चाबी इस कमरे के कोने में रखे 'ब्लैक बॉक्स' में है।"
सीन 3: ब्लैक बॉक्स और अंतरात्मा का खेल
आर्यन ने कोने में रखा वह भारी 'ब्लैक बॉक्स' उठाया। वह फिंगरप्रिंट लॉक से बंद था। उसने अपना अंगूठा उस पर रखा। बीप... बीप... खट!
अंदर से एक इंजेक्शन और एक नोट निकला। नोट पर लिखा था: "यह एंटीडोट नहीं, एक स्टिमुलेंट है। अगर तुम इसे आयशा को दोगे, तो वह कोमा से जाग जाएगी, लेकिन इसकी कीमत तुम्हें अपनी याददाश्त से चुकानी होगी। तुम यह भूल जाओगे कि तुम कौन थे, तुम क्या थे, और तुम इस प्रायश्चित की यात्रा पर क्यों निकले थे।"
आर्यन का दिल बैठ गया। अगर वह याददाश्त खो देता है, तो वह कभी नहीं जान पाएगा कि उसके पिता कहाँ हैं, या उस 'कातिल आर्यन' का अंत कैसे होगा। लेकिन अगर वह नहीं देता, तो आयशा शायद कभी नहीं जाग पाएगी।
सीन 4: 31वां दिन—बलिदान की घड़ी
वह कब्रिस्तान से वापस जंगल की ओर भागा। उसने आयशा को देखा, वह अब भी कोमा में थी, उसकी मशीनें अब कमज़ोर पड़ रही थीं।
"आयशा..." आर्यन ने रोते हुए कहा। "अगर मैं सब भूल गया, तो मुझे याद कौन दिलाएगा कि मैं तुम्हारा पिता हूँ?"
उसका 'कातिल आर्यन' वाला अक्स फिर से उभरा। "आर्यन, इसे मत करो! ये पिता की एक और चाल है! वह चाहता है कि तुम अपनी पहचान खो दो ताकि वह तुम्हें अपनी उंगलियों पर नचा सके!"
"चुप हो जाओ!" आर्यन चिल्लाया। "मैं अपनी बेटी को बचाने के लिए खुद को मिटा सकता हूँ!"
सीन 5: एक दर्दनाक निर्णय
उसने इंजेक्शन भरा और आयशा की नस में लगा दिया। आयशा के शरीर में एक झटका लगा। वह धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलने लगी। आर्यन ने उसे अपने गले से लगाया।
"पापा?" आयशा की आवाज़ बहुत कमज़ोर थी।
आर्यन ने उसे देखा, लेकिन उसका चेहरा धीरे-धीरे धुंधला होने लगा। उसे लगने लगा कि वह अपनी ज़िंदगी के पन्ने भूल रहा है। उसे हवेली का नाम याद नहीं आ रहा था, उसे समीर का चेहरा याद नहीं आ रहा था, उसे यह भी याद नहीं रहा कि वह 50 दिन के सन्नाटे पर क्यों निकला था।
सीन 6: 31 दिन पूरे
आर्यन अब पूरी तरह एक खाली स्लेट (Blank slate) की तरह था। उसे बस इतना याद था कि वह अपनी बेटी के साथ है। वह नहीं जानता था कि उसके पीछे दुश्मन कौन है, या वह खुद क्या है।
लेकिन तभी, अँधेरे में से कोई बाहर निकला। वह समीर था—या शायद वह कोई और था। उसने आर्यन के हाथ से वह नोटबुक छीनी जिसमें 50 दिन का हिसाब लिखा था।
"अब खेल असली शुरू होगा," उस अनजान शख्स ने कहा।
नैरेटर: 31 दिन शेष हैं। आर्यन की याददाश्त जा चुकी है। अब उसके पास न कोई अतीत है, न कोई डर। लेकिन क्या एक याददाश्त खो चुका इंसान अपने पिता के उस खौफनाक खेल को समझ पाएगा?
(सस्पेंस पॉइंट: अंधेरे में खड़े उस शख्स ने चेहरे से नकाब हटाया—वह रंजना थी! उसने कहा—"तुम भूल गए आर्यन, लेकिन मैं नहीं भूली। अब तुम मेरे मोहरे हो।" क्या आर्यन रंजना के हाथों की कठपुतली बन जाएगा?)
लेखक: प्रिया
आर्यन के लिए अब नई मुश्किलें खड़ी हैं। क्या वह अपनी याददाश्त खोकर भी अपनी बेटी की रक्षा कर पाएगा? सस्पेंस की आग अब और भी तेज़ होगी! ⏳🖤🔓🔥