अगर आपका टीवी म्यूट हो और उसका रिमोट ना मिल रहा हो और आपको न्यूज़ पर अपने ही शहर से शाहरुख , सलमान और ऐश्वर्या के एक साथ अपहरण की खबर न्यूज़ में नीचे चलती दिखे तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी …. आप अचंभित हो जाएँगे ना ये कैसे हुआ और सबसे बड़ी बात के ये लोग आए कब आपके शहर में यही हालात थे नोबतगंज थाने में पदस्थ सभी पुलिस कर्मियों की इतनी बड़ी आफत अच्छानक उनके शहर में कैसे आ गई ? फिर बाद में किसी रिपोर्टर से पता चलता है ये अपहरण फ़िल्म अभिनेता का नहीं बल्कि नोबतगंज के कबूतरबाज़ी की प्रतियोगिता में भाग लेने वाले मुख्य कबूतरों के नाम है … ! उपन्यास कबूतरबाज़ उत्तर प्रदेश के नौबतगंज में मुख्य रूप से होने वाले खेल कबूतरबाजी पर आधारित है जिसका मुख्य पात्र एक 19 साल का युवा कबूतरबाज कबीर है । जो अपने माता पिता के तलाक के बाद अपने पिता पुलिस बैंड के मुखिया हेड कांस्टेबल एकइस राम के साथ रहता है उसकी मुखबधिर बड़ी बहन चारू जो उसकी वकील माँ के साथ रहती है ! उपन्यास की शुरुवात बहुत अच्छे मनोरंजक रूम से शुरू होती है और आगे रोमांच के साथ बढ़ती जाती है । इस उपन्यास में एक परिवार में तलाक के बाद आने वाली सभी प्रकार की कठिनाइयों को और आपसी मतभेद के बाद भी उन्ही रिश्तों में कभी खतम ना होने वाले प्रेम को भी बहुत अच्छे और सुंदर ढंग से शब्दों में पिरोया है । कबीर जो की १२ वी की पढ़ाई कर रहा वही चारू अपनी आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहती है जंहा उसका एडमिशन हो जाता है जिसकी तैयारी उसने अपनी माँ से बिना बताए की थी अब बात आती है उसके वन्हा जाने और पढ़ने के खर्च की … जिसके लिए उसके सीधे सादे पिता और भाई कबीर अपने अपने तरीक़े से पैसे की व्यवस्था में लग जाते है ! कबीर जिसका लक्ष्य किसी भी तरह नोबतगंज की सालाना होने वाली कबूतरबाज़ी की प्रतियोगिता हो जीत कर उसकी मिलने वाली इनाम राशि से अपनी बहन को विदेश पढ़ने भेजना चाहता है और पिता एकइस राम अपनी बेटी की फीस और अपने बेटे को पुलिस में पक्की नौकरी दिलाने के लिए अपनी ऑन ड्यूटी सुपारी देने का विचार तय के लेते है …! हालाकि ये उपन्यास दो लेखको ने मिल कर लिखा है पर इस कहानी में बहुत मज़ेदार किरदारों की भरमार है जैसे कबीर के दोस्त अम्बैश और मुंशी हो या कबीर के गुरु उस्ताद पीर मुश्ताक या फिर कबूतरबाज़ी के माफिया बिसेसर पांडे और एकइस राम से उनकी सुपारी लेने वाले युवा नेता जैकी चौहान का भरपूर और काफ़ी अच्छे रोमांचक तौर पर इस्तेमाल किया है … और इसके साथ साथ कबूतरबाज़ी के इतिहास को सरल और आसान बातों में बहुत अच्छे तरीक़े से विस्तृत रूप से पेश किया है कबूतरबाज़ी के क्या नियम होते है और उसमे प्रतियोगी कैसे हिस्सा लेते है कैसे उनके बीच हार जीत को लेकर संघर्ष होता है ये सभी सजीव रूप से दिखया है ! जिसके बाद कबीर के सालाना प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले कबूतरों की चोरी हो जाती है … ! अब क्या कबीर इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले पाएगा और जीत कर अपनी बहन को विदेश पढ़ने भेज पाएगा या फिर एकइस राम की अपनी हत्या की दी हुई सुपारी से मृत्यु के बाद अपने बेटे और बेटी के भविष्य को सुरक्षित कर पाएंगे ये जाने के लिए आपको उपन्यास पढ़ना पड़ेगा …. वाइस दोनों युवा लेखकों ने कहानी को बहुत अच्छे तरीके से लिखा है जो आपको बौर नहीं होने देती है साथ भरपूर मनोरंजक बनती है … वैसे तो कहानी की समीक्षा में बताने को बहुत बाते है आप आप इसको पढ़ कर उन सभी चीजों का आनंद लेंगे तो आपको ज़्यादा मज़ा आयेगा …