(एक ठंडी हवा का झोंका जो कोठरी की सलाखों से टकराकर एक लंबी 'सीटी' जैसी आवाज़ पैदा कर रहा है। आर्यन की धड़कनें किसी पुरानी घड़ी की तरह तेज़ और लयबद्ध तरीके से बज रही हैं। उसके कानों में उसकी अपनी ही दो आवाज़ें गूँज रही हैं—एक जो माफी मांग रही है, और दूसरी जो पागलों की तरह हंस रही है।)आर्यन के हाथ में वह रिवॉल्वर थी। उसकी उंगली ट्रिगर पर थी। आयशा उसके सामने खड़ी थी, उसकी आँखें उम्मीद और डर के बीच झूल रही थीं। "पापा, यह मत कीजिए! आप जो कुछ भी देख रहे हैं या सुन रहे हैं, वो सब आपकी बीमारी का हिस्सा है। वह कातिल आर्यन... वह आप नहीं हैं!"
सीन 1: आईने का वहशी अक्स
आर्यन ने अपनी रिवॉल्वर को दीवार की तरफ घुमाया जहाँ एक बड़ा आईना लगा था। उसने आईने में देखा। आईने में उसका प्रतिबिंब स्थिर था, लेकिन जैसे ही उसने अपनी आँखें झपकाईं, प्रतिबिंब ने अपनी आँखें नहीं झपकाईं। वह प्रतिबिंब मुस्कुराया—एक ऐसी मुस्कान जो आर्यन की नहीं हो सकती थी।
"तुम मुझे नहीं मार सकते, आर्यन," प्रतिबिंब ने आईने के अंदर से कहा, उसकी आवाज़ दीवार से टकराकर वापस आर्यन के कानों में पड़ी। "क्योंकि अगर तुमने ट्रिगर दबाया, तो मैं मरूँगा, और मेरे साथ ही वो सारा सच मर जाएगा जो तुम्हें आज़ाद कर सकता है। क्या तुम वाकई अपनी बेटी को हमेशा के लिए अंधेरे में रखना चाहते हो?"
आर्यन का सिर फटने लगा। उसने रिवॉल्वर को कसकर पकड़ लिया। "तुम कौन हो? क्या तुम समीर हो? या तुम वो शैतान हो जिसे मेरे पिता ने बनाया था?"
प्रतिबिंब हँसा। "मैं वो सब कुछ हूँ जिसे तुमने दबाया है। मैं तुम्हारा वो लालच हूँ जो तुमने बिज़नेस मीटिंग्स में छिपाया, मैं वह नफरत हूँ जो तुमने समीर के लिए पाली, और मैं ही वह 'सच्चाई' हूँ जो तुम स्वीकार करने से डरते हो। मैं कातिल हूँ, क्योंकि तुम कातिल हो।"
सीन 2: 33वां दिन—अस्तित्व का संकट
आयशा चिल्लाई, "पापा, रिवॉल्वर नीचे रख दो! वो आपको भ्रमित कर रहा है!"
आर्यन ने आयशा की ओर देखा। उसे अब शक होने लगा था—क्या आयशा वाकई यहाँ है? उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और आयशा के गाल को छूने की कोशिश की। उसका हाथ आयशा के चेहरे के पार निकल गया। वह धुएँ की तरह ओझल होने लगी।
"नहीं! आयशा!" आर्यन दहाड़ा।
"देखा?" प्रतिबिंब ने कहा। "वह यहाँ नहीं है, आर्यन। वह भी तुम्हारे दिमाग का एक कोना है जिसे तुमने 'बेटी' का नाम दिया है ताकि तुम खुद को अकेला महसूस न करो। तुम इस कोठरी में बीस साल से अकेले हो, आर्यन। यह '50 दिन का सन्नाटा' सिर्फ एक टाइमर है जो तुम्हारे दिमाग के खत्म होने का इंतज़ार कर रहा है।"
सीन 3: यादों का भंवर
आर्यन ज़मीन पर बैठ गया। उसे याद आया—वह हॉस्पिटल का कमरा, वह सन्नाटा, वह हवेली, वह कोर्ट... क्या सच में कुछ भी वास्तविक था? क्या उसने कभी अपनी बेटी को देखा भी था? या वह सिर्फ एक तस्वीर थी जिसे उसने कचरे में पाया था?
वह 'कातिल आर्यन' (प्रतिबिंब) अब आईने से बाहर आने की कोशिश कर रहा था। उसके हाथ कांच की सतह पर दबे हुए थे। आर्यन ने देखा कि जहाँ-जहाँ उसके हाथ लग रहे थे, वहां कांच टूट रहा था।
"अगर तुम हार मान लोगे," प्रतिबिंब ने कहा, "तो मैं इस शरीर का कब्ज़ा ले लूँगा। और इस बार, मैं सिर्फ हवेली नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को जला दूँगा।"
आर्यन ने संघर्ष किया। वह लड़ना चाहता था। उसने अपनी नोटबुक निकाली। उसके पास 17 दिन और थे। उसे याद आया कि कैसे उसने 33 दिनों तक खुद को संभाला था। उसने लिखा: "सन्नाटा बाहर नहीं, अंदर है। अगर मैं कातिल हूँ, तो मैं अपना ही शिकार भी हूँ। अब फैसला मुझे करना है।"
सीन 4: 33वें दिन का निर्णय
आर्यन खड़ा हुआ। उसने रिवॉल्वर अपने सिर पर नहीं, बल्कि सीधे आईने पर दे मारी।
धड़ाम!
कांच के हज़ारों टुकड़े हो गए। कमरा अब शांत था। प्रतिबिंब गायब हो चुका था। लेकिन सन्नाटा अभी भी बना हुआ था। आर्यन को लगा कि उसने जीत हासिल कर ली, लेकिन तभी उसे फर्श पर कुछ दिखा। आईने के पीछे से एक और दरवाज़ा खुल गया था। यह दरवाज़ा उसे एक ऐसे कमरे में ले गया जो बिल्कुल उसकी हवेली के उस 'तहखाने' जैसा था।
वहाँ एक और कुर्सी थी। उस पर एक पुरानी टेप रिकॉर्डर चल रही थी।
रिकॉर्डर से आवाज़ आई: "आर्यन, तुम अभी भी खेल रहे हो। क्या तुम वाकई अपनी बेटी को ढूँढना चाहते हो, या तुम सिर्फ खुद को मरते हुए देखना चाहते हो?"
सीन 5: एक और रहस्य का खुलासा
आर्यन ने कमरे के चारों ओर देखा। उसे दीवारों पर अपनी और आयशा की हज़ारों तस्वीरें दिखीं। ये तस्वीरें पुरानी नहीं थीं। इनमें आयशा अलग-अलग उम्र की थी—5 साल की, 10 साल की, 15 साल की... और एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें वह आज की तारीख में किसी हॉस्पिटल के बेड पर लेटी थी।
"आयशा ज़िंदा है?" आर्यन चिल्लाया।
उसने तस्वीरें देखीं—आयशा को एक ऐसे हॉस्पिटल में रखा गया था जहाँ वह कोमा में थी। यह वही हॉस्पिटल था जहाँ से उसके पिता 'गायब' हुए थे। आर्यन को समझ आया—आयशा उसकी बेटी तो है, लेकिन उसे कोमा में रखकर उसके पिता ने उसे एक 'मोहरे' की तरह इस्तेमाल किया है ताकि आर्यन हमेशा उनका गुलाम बना रहे।
सीन 6: प्रायश्चित का असली युद्ध
आर्यन का चेहरा अब एक दृढ़ संकल्प से भर गया था। वह कातिल नहीं, वह अब एक पिता था जो अपनी बेटी को बचाना चाहता था। उसने दीवार पर मौजूद नक्शे को देखा। वह नक्शा उस हॉस्पिटल का था।
"समीर, अगर तुम मेरी कल्पना हो, तो मेरी मदद करो," आर्यन ने हवा में कहा।
अचानक, कमरे की बत्ती जल गई। आईने के टुकड़ों के बीच से समीर की परछाईं दीवार पर उभरी। समीर ने एक सीक्रेट कोड बताया: "7-9-4-2... यह उस वार्ड का कोड है।"
आर्यन को अब यकीन हो गया था कि समीर चाहे उसकी कल्पना हो या उसका अंतर्मन, वह उसे दिशा दिखा रहा है। उसने वह कोड याद कर लिया। उसने वहां से एक लोहे की रॉड उठाई। अब उसे उस हॉस्पिटल में घुसना था, चाहे कोई भी उसे रोके।
नैरेटर: 33 दिन शेष हैं। आर्यन की अपनी ही परछाइयों के साथ युद्ध अब एक बचाव अभियान (Rescue Mission) में बदल चुका है। क्या आर्यन अपनी बेटी आयशा को उस कोमा की हालत से बाहर निकाल पाएगा? क्या वह 'कातिल आर्यन' उसे फिर से रोकने की कोशिश करेगा?
(सस्पेंस पॉइंट: आर्यन जैसे ही बाहर निकला, उसने देखा कि जेल की पूरी छत उड़ चुकी थी। वह कोठरी एक उड़ते हुए हेलिकॉप्टर के अंदर थी। उसे पता चला कि वह जेल में नहीं, बल्कि उसके पिता के किसी गुप्त ठिकाने पर है जो आसमान में उड़ रहा है! वह कितनी ऊँचाई पर था और नीचे कौन सी ज़मीन थी, उसे कुछ नहीं पता था। आर्यन ने नीचे देखा—वह उसकी हवेली का खंडहर था। क्या वह अपनी हवेली के ऊपर गिर रहा है?)
लेखक: प्रिया
आर्यन अब एक ऐसी जगह है जहाँ से बचना नामुमकिन लगता है। 17 दिन और बचे हैं। क्या आर्यन अपनी बेटी तक पहुँच पाएगा? सस्पेंस की आग और तेज़ होगी!