50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 18 Priya Chaudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 18

(दूर जलते हुए हॉस्पिटल के मलबे से आती हुई लपटों की कड़कड़ाहट। आर्यन की कार के टायर का गीली सड़क पर घिसटना। आयशा की भारी, सिसकती हुई सांसें और रात के सन्नाटे को चीरता हुआ सायरन।)
कार के शीशे में दिखता वह जलता हुआ हॉस्पिटल, आर्यन के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं थी, बल्कि उसके बीस साल के उस नर्क की अंत्येष्टि थी जिसे उसके पिता ने बनाया था। लेकिन उस लिफाफे ने—"खेल अभी शुरू हुआ है"—आर्यन की रीढ़ में एक सिहरन पैदा कर दी थी। क्या वाकई विक्रम मल्होत्रा का अंत इतनी आसानी से हो सकता था?
सीन 1: आयशा का अनकहा सच
कार में भारी सन्नाटा था। आयशा खिड़की की ओर देख रही थी, उसकी आँखें खाली थीं।
"पापा," उसने धीरे से कहा, बिना आर्यन की ओर देखे, "क्या आपने कभी सोचा है कि जब मैं उस बेसमेंट में थी, तो मुझे वहाँ से किसने निकाला? रंजना तो जेल में थी। दादाजी व्हीलचेयर पर थे। तो फिर वो कौन था जिसने मेरे हाथ खोले और मुझे बाहर निकलने का रास्ता दिखाया?"
आर्यन का दिमाग फिर से घूमने लगा। "आयशा, क्या तुम किसी को देख पाईं?"
"नहीं," उसने सिर हिलाया। "उसने एक काला मास्क पहना था। लेकिन उसके हाथ... उसके हाथों में वही खुशबू थी जो उस दिन हवेली में थी, जब समीर चाचा ने मुझे पहली बार गले लगाया था।"
आर्यन ने झटके से ब्रेक लगाए। कार सड़क के किनारे रुकी। "समीर? समीर तो उस वक़्त मेरे साथ था, हॉस्पिटल के कैंपस के बाहर। वह मेरे साथ था जब हमने उसे देखा था!"
सीन 2: 34वां दिन—संदेह का बीज
आर्यन की आँखों के सामने समीर की हर हरकत आने लगी। समीर का अचानक वापस आना, हवेली का रहस्य सुलझाना, रंजना का सच उगलना... क्या समीर भी उसी खेल का हिस्सा था? क्या 'समीर' नाम का कोई इंसान वाकई ज़िंदा था, या यह सब भी उसकी कल्पना थी जिसे उसके पिता ने और अधिक पुख्ता किया था?
"नहीं," आर्यन खुद से बोला। "समीर मेरा भाई है। वह मुझे धोखा नहीं दे सकता।"
लेकिन उसके अंदर का वह पुराना 'आर्यन' जो हमेशा दूसरों पर शक करता था, अब जाग चुका था। उसने अपनी नोटबुक निकाली। 34वां दिन बाकी था। उसने लिखा: "सच्चाई एक आइना है, जिसके हर टुकड़े में अलग चेहरा दिखता है। क्या मेरा भाई, मेरा आखिरी सहारा भी झूठ है?"
सीन 3: हॉस्पिटल का अवशेष
वे फिर से हॉस्पिटल के मलबे के पास पहुँचे। पुलिस और दमकल की गाड़ियाँ वहाँ थीं। आर्यन ने अपनी पहचान का इस्तेमाल किया और फॉरेंसिक टीम के प्रमुख से मिला।
"सर, विक्रम मल्होत्रा का शव मिला?" आर्यन ने पूछा।
अधिकारी ने सिर हिलाया। "मिस्टर मल्होत्रा, हमने पूरे केबिन की तलाशी ली। वहाँ कोई शव नहीं था। बस एक व्हीलचेयर थी, जो जलकर राख हो चुकी है। अगर कोई वहाँ था, तो वह चमत्कारिक रूप से बाहर निकल गया, या फिर वह कभी था ही नहीं।"
आर्यन सन्न रह गया। उसके पिता गायब थे। इसका मतलब था कि वह लिफाफा उनके किसी गुर्गे ने रखा था, और वे अभी भी खेल को कंट्रोल कर रहे थे।
सीन 4: उस 'तीसरे' व्यक्ति की तलाश
आर्यन ने फॉरेंसिक टीम से सीसीटीवी फुटेज मांगी। फुटेज में साफ दिख रहा था—विक्रम मल्होत्रा व्हीलचेयर पर बैठे हैं, तभी अचानक लाइट चली जाती है। जब लाइट आती है, तो केबिन खाली होता है। लेकिन फुटेज के कोने में, एक काली आकृति दीवार के अंदर गायब होते हुए दिख रही थी।
"यह दीवार तो कंक्रीट की है!" आर्यन चिल्लाया। "कोई अंदर कैसे गायब हो सकता है?"
उसने दीवार को करीब से देखा। वहां एक सूक्ष्म दरार थी—एक गुप्त रास्ता। वह रास्ता उसे उस बेसमेंट की ओर ले गया जहाँ आयशा कैद थी। वहां फर्श पर एक मोबाइल फोन गिरा हुआ था।
सीन 5: आखिरी काल (The Final Call)
आर्यन ने फोन उठाया। वह फोन लॉक नहीं था। उसमें एक ही वीडियो रिकॉर्डिंग थी।
आर्यन ने प्ले किया। स्क्रीन पर उसका अपना चेहरा था। लेकिन वह आर्यन नहीं था जो वह आज था। वह कोई और आर्यन था—उसकी आँखों में वही क्रूरता थी जो उसने कभी महसूस नहीं की थी। वह 'अदर आर्यन' बोल रहा था, "आर्यन, तुम 34 दिनों से खुद को ढूंढ रहे हो। लेकिन तुम यह भूल गए कि तुम अपनी ज़िंदगी के हर मोड़ पर एक अलग 'आर्यन' बनकर जिए हो। यह खेल तुम्हारे पिता का नहीं, यह खेल तुम्हारे उस व्यक्तित्व का है जिसे तुम 'सफल' कहकर गर्व करते थे। रंजना, समीर, पिता... ये सब तुम्हारे मन के विकार हैं।"
वीडियो में वह 'अदर आर्यन' एक बटन दबाता है और अचानक आर्यन को अपने सिर में एक तेज़ दर्द महसूस होता है। उसे याद आने लगता है कि बीस साल पहले उसने हवेली में क्या किया था। उसने समीर को नहीं मारा था। उसने खुद को चोट पहुँचाई थी और अपनी याददाश्त को दो हिस्सों में बाँट दिया था—एक 'सज्जन आर्यन' और एक 'कातिल आर्यन'।
सीन 6: 34 दिन पूरे—दोहरे व्यक्तित्व का सच
आर्यन को समझ आया। समीर उसका भाई नहीं, उसका 'दूसरा व्यक्तित्व' था। समीर का मतलब था—उसके अंदर का वह हिस्सा जो न्याय चाहता था।
वह गिर गया। उसके सामने खड़ी आयशा को अब वह डर की नज़र से देख रहा था।
"आयशा, क्या तुम यहाँ हो? या तुम भी मेरे दिमाग की उपज हो?"
आयशा ने रोते हुए उसकी ओर हाथ बढ़ाया। "पापा, मैं यहाँ हूँ! मैं असली हूँ! वह वीडियो झूठ है! आप हमें नहीं तोड़ सकते!"
नैरेटर: 34 दिन शेष हैं। आर्यन का सच अब और भी भयानक हो गया है। अगर 'समीर' उसका ही एक हिस्सा है, तो फिर वह 'कातिल आर्यन' कौन है जिसने उसे यह वीडियो भेजा? क्या आर्यन अपने ही दिमाग में फँसा हुआ एक कैदी है जो खुद को ही मारने के लिए तैयार है?
(सस्पेंस पॉइंट: फोन पर एक मैसेज आया—"अगर तुम खुद को मारोगे, तो आयशा भी मर जाएगी, क्योंकि वह तुम्हारी एकमात्र याद है। खेल 50वें दिन खत्म होगा, आर्यन। और तब तक, तुम या तो खुद को खत्म करोगे या उस 'कातिल आर्यन' को।" आर्यन ने अपनी जेब में हाथ डाला—वहाँ एक रिवाल्वर थी, और उसका ट्रिगर उसकी अपनी उंगलियों पर था। क्या वह खुद को गोली मारेगा?)
लेखक: प्रिया
आर्यन अब एक ऐसी मनोवैज्ञानिक भूलभुलैया में है जहाँ दुश्मन और दोस्त की पहचान करना नामुमकिन है। क्या यह खेल 50 दिन में खत्म होगा?