चलो दूर कहीं..! - 20 Arun Gupta द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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चलो दूर कहीं..! - 20

चलो दूर कहीं -20

रवि के जमीन पर पड़े शरीर से लिपटकर प्रतीक्षा को रोते देख बुत बनी बैठी सुमी के तन बदन में जैसे आग लग गई हो वह उठी और प्रतीक्षा को पकड़ कर खींचते हुए चीखी, " रवि से दूर हट चुड़ैल.. आज तेरे ही कारण इसका ये हाल हुआ है..? मैं तुम्हारी छाया भी इस पर पड़ने नहीं दूंगी.. तू डायन है डायन..तू मेरे रवि को खा गई.. अब तो तेरे कलेजे को ठंडक पहुंच गया होगा..? फिर ये नाटक क्यों कर रही है..?"

 कहकर वह उसके हाथ को पकड़ कर खींचती रही परन्तु वह टस से मस नहीं हुई तो वह उसके बाल को पकड़ कर खींचना शुरू की ..तब दर्द से बिलबिलाते हुए उसने कहा, " नहीं बहन मैंने रवि को नहीं मारा .. मैं तो इसके विराट हृदय के कायल हो गई थी, इसके सेवा और समर्पण की मुरीद थी..इसे इसकी अच्छाई और सहृदयता ने मारा है,मेरे हृदय में इसके लिए जो कोमल भाव थे वहीं इसके मौत का कारण है.. अगर मुझे पता होता कि मेरे कारण इस पर इतनी बड़ी मुसीबत आएगी तो मैं इसके करीब कभी न आती.. रवि के मौत के लिए मैं नहीं ये दैत्य अनाह जिम्मेवार है..! पूछ इस शैतान से कि इस निरीह और निर्दोष को क्यों मारा..? मेरी ग़लती की सजा रवि को क्यों दिया..? पूछ इस कमीने से..? "

कहते कहते वह उसके गले लग फूट फूटकर रोने लगी, सुमी उस दैत्य समान विचित्र प्राणी को घूर रही थी। उसने बचपन से जवानी तक का सफर इसी जंगल में तय किया था, जंगल के हर छोटे बड़े जीव से वाकिफ थी लेकिन ऐसा जीव कभी नहीं देखा..! आखिर ये कौन सा जीव है न आदमी है न जानवर..? ये ख्याल आते ही उसके बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई.. उसने प्रतीक्षा को जोर से पकड़ते हुए कहा, "कौन है ये..?" 

"ये तो मुझे भी नहीं मालूम कि ये कौन है..? ये अपना नाम अनाह बताता है और दावा करता है कि उसने मुझे जिंदा किया है..! "

प्रतीक्षा का इतना कहना था कि वह उससे झटके से अलग होते हुए बोली," क्या..? अब मैं क्या करूं..? जरुर ये कोई राक्षस है.. ये मुझे भी नहीं छोड़ेगा..! अगर मैंने गांव वालों को आगाह नहीं किया तो ये सभी गांव वालों को मार देगा..! हमारे गुरु बाबा ने ठीक ही कहा था कि हमपर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है.. मैं गांव वालों के जान को जोखिम में नहीं डाल सकती..!" 

कहकर वह उठी और बिजली से तेज गति से वहां से भागी.. प्रतीक्षा उसे अवाक् जाते देखती रही तो वहीं अनाह अपने स्थान पर शांत बैठा उसे जाते देखता रहा.. उसकी भाव भंगिमाओं को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह सुमी को वहां से जाने देना चाहता था।

                      ********

सुबह की पहली किरण के साथ सुमी को साथ लेकर गांव वाले अपने पारंपरिक हथियार से लैस होकर जंगल के पगडंडी रास्ते पर चले जा रहे थे.. उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ये 'सेंदरा' के लिए निकले हों..! जैसे जैसे वे उस कच्चे घर जहां से बीते रात सुमी अपना जान बचाकर भागी थी, पहुंच रहे थे उस दल का मुखिया उन्हें और चौकन्ना और सतर्क रहने की हिदायत दे रहा था।

जब वे उस घर के करीब पहुंचे तो वहां निरव सन्नाटा पसरा था, हवा के झोंके से पत्ते फड़फड़ा रहे थे, जंगली फूलों की खुशबू हवा में घुली हुई थी.. और उस दस्ते का मुखिया इशारे से अपने साथियों को निर्देश दे रहा था और सभी उसके निर्देश का पालन करते हुए सधे कदमों से धीरे-धीरे उस घर की ओर बढ़ रहे थे..! 

देखते ही देखते गोरिल्ला युद्ध नीति के तहत इतनी चतुराई से उस घर को चारों ओर से घेर लिया गया कि किसी को कानों कान भनक न लगे.. और जब घर को चारों ओर से घेर लिया गया तब मुख्य दस्ता के आठ दस लोग सतर्क नजरों से इधर उधर देखते हुए सधे कदमों से उस घर के दरवाजे के ओर बढ़ रहे थे... सुमी इनके साथ साथ चल रही थी। दरवाजे पर पहुंच कर उस दस्ते का सरगना ठिठका और आधे सदस्यों को बाहर रहने और बाकी को साथ आने का इशारा करके दाहिने हाथ में मजबूती से झोरनी(तलवार जैसा पारंपरिक हथियार) को पकड़े घर में ऐसे दाखिल हुआ जैसे दुश्मन का सामना होते ही एक ही वार में उसका सर धड़ से अलग कर देगा..!

घर के अंदर निरव सन्नाटा पसरा था.. कहीं कोई सुगबुगाहट न थी । वे अंदर आने में जितना सतर्क थे उतना ही भयभीत भी थे । उनके मन में अनाह, रवि और प्रतीक्षा को लेकर अनेकों सवाल उमड़ घुमड़ रहे थे..! उन्हें न अनाह के बारे में मालूम था और न ही प्रतीक्षा के बारे में..वे बस इतना जानते थे कि रवि को किसी चुड़ैल ने अपने वश में कर लिया है..! और अनाह का जो हुलिया सुमी ने बयां किया था वह इनके भयभीत होने का मुख्य कारण था..! लेकिन जैसे जैसे वे आगे बढ़ते गए उनका भय भी जाता रहा.. उन्होंने पुरा का पुरा घर छान मारा पर घर में कोई न था। जब वहां कोई नहीं मिला तो उस दस्ते के मुखिया ने जोर से चिल्लाते हुए कहा,"सुमी अंदर आओ.. यहां तो कोई नहीं है?" 

सुमी के साथ साथ बाहर खड़े सभी लोग भागते हुए अंदर आए और सुमी ने थरथराते स्वर में कमरे में एक स्थान को दिखाते हुए कहा,"यहां रवि का शरीर पड़ा था दादा.. और यहीं पर वो चुड़ैल बैठी थी..वो विचित्र जीव यहां खड़ा था..मेरा विश्वास करो दादा..?" 

"लगता है हमारे आने की भनक उन्हें लग गई थी इसलिए हमारे पहुंचने से पहले ही भाग गए.. कोई बात नहीं इस जंगल से बाहर निकलना इतना आसान नहीं है..वे ज्यादा दूर नहीं गए होंगे जंगल का चप्पा-चप्पा ज
छान मारो..वे हमारे हाथ से नहीं निकलना चाहिए..!" 

फरमान जारी होते ही सभी गांव वाले चारों दिशाओं में फैल गए.. और उन्हें ढूंढते रहे। सुबह से दोपहर और दोपहर से शाम हो गई..गांव वालों ने पूरे जंगल को छान मारा लेकिन इन तीनों का कहीं अता-पता न था..था हार कर खोजबीन बंद करने का निर्णय लिया गया और सभी को सतर्क रहने की हिदायत दी गई खासकर सुमी के घर वालों को सुमी का खास ध्यान रखने को कहा गया.. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। सुबह गांव में कोहराम मचा था लोगों के जुबान पर बस एक ही बात थी कि "सुमी को दैत्य उठा ले गया..!"

क्रमशः...