God Wishar - 4 Ram Make द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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God Wishar - 4






इतना कहकर वह तेज़ी से भाग गई। कबीर उसे जाते हुए देखता रहा और मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। उसे कुछ ज़रूरी काम थे, पर वह अव्या को सीधे 'दफा हो जाओ' नहीं कहना चाहता था, इसलिए उसने जानबूझकर उसे तंग किया ताकि उसे भागने का मौका मिल जाए।लेकिन जैसे ही वह मुड़ने वाला था, अव्या वापस दौड़ती हुई आई। उसने अपना फोन आगे किया और हांफते हुए बोली, "अपना व्हाट्सऐप नंबर दो!"कबीर मुस्कुराया और अपनी जेब में हाथ डाला। उसका फोन बहुत पुराना मॉडल था, जिसे सालों पहले बदल देना चाहिए था। पर उसके पास नए फोन जैसी विलासिता के लिए कभी पैसे नहीं थे।

अव्या को कबीर के फोन के मॉडल से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने कबीर का नंबर सेव किया और तिरछी नज़रों से कबीर के चेहरे को निहारती रही।
"अगली बार खाना मेरी तरफ से," वह बुदबुदाई और फिर से "बाय!" कहकर भाग गई।कबीर ने उसके जाते हुए रास्ते को देखा और फिर अपने फोन को। उसके होठों पर एक मुस्कान आ गई।अपने नए एट्रीब्यूट पॉइंट्स को 'फुर्ती' (Dexterity) में जोड़ने के बाद कबीर को साफ महसूस हुआ कि उसकी रफ़्तार एक पायदान और बढ़ गई है।

वह बैंक गया और डकैती के बदले मिले ₹2,00,000 का चेक जमा कर दिया। उसने कुछ कैश अपने पास रखा और बाकी पैसे अपने गूगल पे (Google Pay) से जुड़े अकाउंट में डाल दिए।₹2,00,000 उसके लिए बहुत बड़ी रकम थी।वह बैंक के बाहर खड़ा होकर एक पल के लिए हिचकिचाया। सीधे किताबों की दुकान जाने के बजाय, वह पास के एक बड़े शॉपिंग मॉल की तरफ बढ़ गया।

उस सुबह उसे अहसास हो गया था कि उसकी 'त्वरित स्मरण' (Instant Memorization) शक्ति कितनी अद्भुत है। उसे पूरी किताब शब्द-दर-शब्द पढ़ने की ज़रूरत नहीं थी। बस पन्ने पर एक पल की नज़र डालनी थी, और वो शब्द उसके दिमाग में छप जाते थे।वह एक 'एडवांस्ड स्कैनर' की तरह हो गया था। बस स्कैन करो, और सब रिकॉर्ड!
इस वजह से उसे महंगी किताबें और प्रैक्टिस सेट्स खरीदने की ज़रूरत नहीं थी। वह बस दुकान में खड़ा होकर पन्ने पलटकर सब कुछ याद कर सकता था।

लिहाज़ा, किताबों पर बचने वाले पैसों से उसने एक नया फोन खरीदने का फैसला किया। दिखावे के लिए नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि उसका पुराना फोन अब दम तोड़ रहा था।शहर का वो सेंट्रल मॉल काफी आलीशान था और जब वह वहाँ पहुँचा, तो खरीदारों की भारी भीड़ थी।कबीर फोन के काउंटर की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक वह ठिठक गया। जिस ग्रुप के पास से वह गुज़रा था, वे असल में उसके हाई स्कूल के पुराने सहपाठी थे।

एक लड़की, जिसने बहुत ज़्यादा मेकअप कर रखा था, एक साधारण कपड़ों वाले लड़के का मज़ाक उड़ा रही थी, "हे भगवान, विक्की! तुम अपनी गर्लफ्रेंड के लिए ये फोन खरीद रहे हो? क्या वो सच में ₹15,000 वाले फोन के साथ घूमेगी?"
पास खड़ी एक दूसरी साधारण सी दिखने वाली लड़की (विक्की की गर्लफ्रेंड) के चेहरे का रंग उड़ गया, लेकिन विक्की ने जवाब दिया, "तुम्हें क्या तकलीफ है, पायल? मैं अपनी गर्लफ्रेंड को जो चाहे फोन दिलाऊँ। क्या तुम्हें लगता है कि तुम हमसे बेहतर हो क्योंकि तुम्हारे बॉयफ्रेंड के पास थोड़ा पैसा है?"

पायल ने अपने पास खड़े एक मोटे से आदमी का हाथ पकड़ लिया और गर्व से बोली, "मैंने ऐसा तो नहीं कहा। लेकिन अगर मैं अपने बैग से एक रैंडम लिपस्टिक भी निकालूँ, तो शर्त लगा लो तुम दोनों उसे खरीदने की औकात नहीं रखते।" वह ऐसे हँसी जैसे उसने कोई बहुत बड़ा जोक मारा हो।पायल के तानों से विक्की का स्वाभिमान जाग उठा। वह काउंटर पर मौजूद सेल्समैन की ओर मुड़ा और बोला, "मुझे नया 'आईफोन प्रो मैक्स' दिखाओ। मुझे वो चेक करना है।"सेल्समैन ने उसे देखा, पर बिना हिचकिचाए डिब्बा निकाल दिया। विक्की ने डिब्बे को हाथ में लिया, जिस पर ₹1,50,000 का टैग लगा था। एक पल के लिए वह सन्न रह गया।डेढ़ लाख रुपये—उस जैसे युवा लड़के के लिए यह बहुत बड़ी रकम थी।

उसका चेहरा देखकर पायल ने फिर ताना मारा, "चेक करना है? रहने दो विक्की। तुम ऐसे नाटक कर रहे हो जैसे तुम्हारी जेब में पैसे हों, जबकि तुम्हारी नज़र अभी भी उस ₹15,000 वाले सस्ते फोन पर ही है!"पायल का बॉयफ्रेंड भी उसी घमंडी अंदाज़ में मुस्कुराया। उसने विक्की को हिकारत से देखा, पर जब उसकी नज़र विक्की की गर्लफ्रेंड पर पड़ी, तो वह कुछ ज़्यादा ही देर तक उसे घूरता रहा
विक्की का खून खौल उठा, पर वह मजबूर था। वह चाहकर भी यह फोन नहीं खरीद सकता था.।
लेकिन अपनी गर्लफ्रेंड का उतरा हुआ चेहरा और पायल की नफरत भरी नज़रें देखकर, विक्की ने ठान लिया था कि वह कोई न कोई रास्ता ज़रूर निकालेगा।
अगर वह आज खाली हाथ यहाँ से गया, तो वह अपनी नज़रों में गिर जाएगा, अपनी गर्लफ्रेंड का सामना करना तो दूर की बात थी।

इस हंगामे ने दुकान में मौजूद अन्य लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया था। वे विक्की को तिरस्कार और दया की नज़रों से देख रहे थे। कुछ लोग आपस में फुसफुसाने लगे और उस 'गरीब लड़के' का मज़ाक उड़ाने लगे जो भावनाओं में बहकर अपनी औकात भूल गया था।आस-पास की कानाफूसी सुनकर विक्की ने अपने हाथों में आईफोन का डिब्बा कसकर पकड़ लिया। उसकी आँखें रुआंसी होने लगीं। लेकिन ठीक उसी पल, जब उसकी बेबसी उसे तोड़ने ही वाली थी, पीछे से एक शांत आवाज़ आई।"विक्की, ये फोन मैं तुम्हारे लिए खरीदूँगा।"आवाज़ बहुत तेज़ नहीं थी, लेकिन शोर-शराबे के बीच एकदम साफ सुनाई दी।

भीड़ चौंककर मुड़ी, और विक्की ने भी पीछे देखा। "कबीर!" वह हैरानी से चिल्लाया।हाई स्कूल में ये दोनों पक्के दोस्त थे; दसवीं क्लास से ही उनकी दोस्ती की मिसालें दी जाती थीं। लेकिन स्कूल खत्म होने के बाद, दोनों अपनी-अपनी ज़िंदगी में मसरूफ हो गए और धीरे-धीरे उनके बीच दूरियाँ बढ़ गईं।कबीर मुस्कुराया और उसने सिर हिलाया। "मुझे तुम्हारे ₹1,50,000 लौटाने थे ना? सोचा आज ही हिसाब बराबर कर दूँ।"

"क्या... मुझे?" विक्की उलझ गया, लेकिन कबीर के इशारे को समझकर वह तुरंत चुप हो गया।कबीर काउंटर की तरफ बढ़ा और मुस्कुराकर बोला, "हम ये फोन ले रहे हैं।"सेल्सगर्ल ने मुस्कुराते हुए उस युवक को देखा। वह पिछले कुछ सालों से यहाँ काम कर रही थी और उसने हर तरह के ग्राहक देखे थे। भले ही कबीर ने साधारण कपड़े पहने थे, लेकिन उसके व्यक्तित्व में एक अलग ही आत्मविश्वास और चमक (Charm) थी। वह समझ गई कि यह बंदा आईफोन खरीदने की हैसियत रखता है।
सेल्सगर्ल ने मीठी मुस्कान के साथ कहा, "एक मिनट सर, मैं अभी इसका बिल बनाती हूँ।"कबीर ने मुस्कुराकर सिर हिलाया, लेकिन तभी उसके बगल से पायल के हँसने की आवाज़ आई। "कबीर, तुझ जैसे मामूली इंसान के पास डेढ़ लाख का आईफोन खरीदने के पैसे कहाँ से आए? कहीं महीनों से भूखा तो नहीं रह रहा? क्या साल भर से सिर्फ मैगी खाकर पैसे बचाए हैं आईफोन के लिए? ओ भाई, तू तो बड़ा मज़ाकिया है!"कबीर उस लालची और बदतमीज़ लड़की के मुँह नहीं लगना चाहता था। उसने सेल्सगर्ल की तरफ देखकर कहा, "ओह सुनिए, एक मुझे अपने लिए भी चाहिए। कुल मिलाकर दो कर दीजिए।"

"दो?"सेल्सगर्ल की आँखें फटी की फटी रह गईं। "सर, क्या मैंने सही सुना? आप दो आईफोन प्रो मैक्स का बिल बनवाना चाहते हैं?"

सिर्फ सेल्सगर्ल ही नहीं, आस-पास खड़ी भीड़ में भी हलचल तेज़ हो गई।"देखने में तो अमीर नहीं लगता।""दो आईफोन? यानी तीन लाख रुपये से भी ज़्यादा!"
"मुझे लगता है सिर्फ डींगें हांक रहा है।"कबीर ने इन बातों की ओर ध्यान नहीं दिया और सेल्सगर्ल को देखकर मुस्कुराया। "हाँ, क्या मेरी आवाज़ साफ नहीं आई?"
"ओह! माफ़ कीजिये सर," सेल्सगर्ल समझ गई कि उसने गलती कर दी है। "मैं अभी बिल बनाती हूँ।"पायल गुस्से से पागल हो रही थी। उसे दिख रहा था कि कबीर जानबूझकर उसे नज़रअंदाज़ कर रहा है। जिसे वह कल तक 'कचरा' समझती थी, वह आज उसे भाव नहीं दे रहा था, यह पायल के लिए बर्दाश्त से बाहर था।लेकिन वह इतने लोगों के सामने तमाशा नहीं करना चाहती थी। अपने गुस्से को पीते हुए वह व्यंग्य से बोली, "देखते हैं पेमेंट कैसे करता है! शर्त लगा लो, इसका कार्ड डिक्लाइन (Decline) हो जाएगा।"

विक्की घबराया हुआ था। उसे कबीर के घर की हालत अच्छे से पता थी। कबीर का परिवार तो उसके खुद के परिवार से भी ज़्यादा तंगहाल था।पर वह जानता था कि कबीर सिर्फ उसकी मदद करने की कोशिश कर रहा है, ताकि इतने लोगों के सामने विक्की की बेइज्जती न हो। इसीलिए कबीर ने 'उधार लौटाने' का नाटक किया था।ऐसा सच्चा दोस्त मिलना वाकई मुश्किल था। विक्की भावुक भी था और डरा हुआ भी। उसने कबीर को चिंता भरी नज़रों से देखा।

कैशियर ने पूछा, "सर, पेमेंट कैसे करेंगे?"कबीर ने एक पल के लिए सोचा, फिर मुस्कुराते हुए अपना पुराना फोन लहराया, "गूगल पे (Google Pay)!""ठीक है सर," कैशियर ने मशीन पर कुछ बटन दबाए।सबकी नज़रों के सामने, कबीर ने शांति से अपना फोन टैप किया और पेमेंट कर दी। फिर वह बड़े आराम से नए आईफोन के फीचर्स के बारे में पूछने लगा।यह देखकर भीड़ में फिर से खुसुर-पुसुर शुरू हो गई। अब तिरस्कार की जगह उनके चेहरों पर इज़्ज़त थी। आखिर पैसा सम्मान खरीद ही लेता है।

विक्की ने कबीर से फोन लिया और अपनी गर्लफ्रेंड को थमा दिया। विक्की के पास शब्द नहीं थे, वह बस कबीर को देखता रह गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अपने पुराने दोस्त का शुक्रिया कैसे अदा करे।दूसरी तरफ, पायल के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। वह कबीर को गौर से देख रही थी, यह समझने की कोशिश कर रही थी कि जिस लड़के को टीना ने ठुकरा दिया था, उसके पास एक नहीं बल्कि दो-दो आईफोन खरीदने के पैसे कहाँ से आए!क्या उससे कबीर को पहचानने में गलती हो गई? क्या कबीर का परिवार छुपा रुस्तम निकला?

पायल जैसी लड़कियों की नज़रों में सिर्फ पैसा ही भगवान था। उसने एक गहरी सांस ली, खुद को संभाला और एक बनावटी प्यारी मुस्कान के साथ कहा, "कबीर, मुझे गलतफहमी हो गई थी। अगले महीने हमारे स्कूल का रीयूनियन (Reunion) है, क्या हम साथ चलें?"कबीर ने ऐसे बर्ताव किया जैसे उसने कुछ सुना ही न हो। उसने कोई जवाब नहीं दिया।लेकिन भीड़ ने पायल के गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले बर्ताव को नोटिस कर लिया और उसका मज़ाक उड़ाने लगे।विक्की ने तंज कसा, "क्यों पायल? अभी तो तुम कह रही थी कि हम उस रीयूनियन के लायक ही नहीं हैं? अब अचानक बुलावा कैसे दे रही हो? कहीं ये तो नहीं चाहती कि कबीर तुम्हें भी एक आईफोन दिला दे?"पायल की मुस्कान गायब हो गई और वह विक्की पर चिल्लाई, "तुम..."

लेकिन सबकी नज़रों के सामने उसकी असलियत खुल चुकी थी, इसलिए वह आगे कुछ बोल नहीं पाई। उसका चेहरा उतर गया और उसने अपना मुँह बंद कर लिया। ठीक उसी समय, कबीर के दिमाग में सिस्टम की आवाज़ गूँजी।"डिंग! आपने विक्की की आईफोन खरीदने की इच्छा पूरी की, विश वैल्यू + 1।"
"डिंग! आपने विक्की की गर्लफ्रेंड की आईफोन पाने की इच्छा पूरी की, विश वैल्यू + 1।"डिंग! आपने तमाशा देख रहे लोगों की इच्छा पूरी की, विश वैल्यू + 1।"डिंग! आपने विक्की का मज़ाक उड़ाने की पायल की इच्छा को चकनाचूर कर दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"डिंग! आपने कबीर को बेइज्जत होते देखने की पायल की इच्छा को खत्म कर दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"डिंग! आपने पायल के बॉयफ्रेंड के घमंड को तोड़ दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।""डिंग! आपने कबीर के करीब आने की पायल की लालची इच्छा को तोड़ दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"कुल फ्री एट्रीब्यूट पॉइंट्स: 4। कुल वर्तमान विश वैल्यू: 7/10।"

नोटिफिकेशन्स का हिसाब लगाते हुए कबीर को समझ आया कि उसे 4 नए एट्रीब्यूट पॉइंट्स और 3 नई विश वैल्यू मिली हैं। अब उसे अपनी अगली बड़ी इच्छा के लिए सिर्फ 3 और विश वैल्यू की ज़रूरत थी।शहर के लोगों को तमाशा पसंद था, और कबीर को समझ आ गया था कि वह जहाँ भी जाएगा, लोग अनजाने में उसकी विश वैल्यू बढ़ाने में उसकी मदद ही करेंगे।कबीर का मन खुशी से नाच उठा, पर चेहरे पर उसने वही बेपरवाह अंदाज़ बनाए रखा। उसने विक्की से कहा, "बहुत साल हो गए भाई। चलो, कहीं टहलते हैं और पुरानी बातें करते हैं।"
विक्की, कबीर का न केवल आभारी था बल्कि उससे काफी प्रभावित भी था। उसने अपनी गर्लफ्रेंड का हाथ पकड़ा और कबीर के पीछे-पीछे स्टोर से बाहर निकल आया।पूरी घटना के दौरान, कबीर ने पायल की तरफ एक बार भी नहीं देखा। उसके लिए वह हवा की तरह अदृश्य थी, जिसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया था।पायल गुस्से से तमतमा उठी, उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया। उसने कबीर को शांति से जाते हुए देखा और फिर अपने मोटे बॉयफ्रेंड की तरफ गुस्से और पछतावे से भरे चेहरे के साथ मुड़ी। उसकी आँखों में आँसू भर आए।

कबीर ने उसके बारे में एक पल के लिए भी नहीं सोचा। उसने बहाना बनाकर विक्की की गर्लफ्रेंड को घर भेज दिया और विक्की से पूछा, "और सुना भाई, आजकल क्या चल रहा है?"विक्की ने एक फीकी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "वही पुराना हाल है भाई। ज्यादा पढ़ा-लिखा हूँ नहीं, घर की हालत भी ठीक नहीं है। क्या ही कर सकता हूँ?"विक्की ने कबीर की आँखों में आँखें डालकर कहा, "आज के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। चिंता मत कर, मैं तेरे पैसे पाई-पाई करके चुका दूँगा।"कबीर मुस्कुराया और सिर हिलाया। "पैसे की कोई जल्दी नहीं है। उसके बारे में हम बाद में बात करेंगे।"

कबीर ने बात बदली, "तो आगे का क्या इरादा है?"
विक्की ने उदास मन से कहा, "सच कहूँ तो भाई, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।"
अचानक विक्की का चेहरा चमक उठा और उसने पूछा, "अरे, तू तो काफी तरक्की कर रहा है। तूने यह सब कैसे किया? क्या मैं तेरे किसी काम आ सकता हूँ? तू जो कहेगा मैं वो करूँगा भाई। सीरियसली, कुछ भी!"कबीर ने अपने बगल में खड़े दोस्त को देखा। उसने आज विक्की की मदद इसलिए की थी क्योंकि वे स्कूल में भाइयों की तरह थे, और दूसरा इसलिए क्योंकि उसके दिमाग में पहले से ही एक योजना चल रही थी।

थोड़ी देर की खामोशी के बाद कबीर ने गंभीरता से कहा, "मैं पैसे कमाने का एक तरीका ढूंढ रहा हूँ, लेकिन इसमें काफी मेहनत और समय लग सकता है। अगर तू इसका हिस्सा बनना चाहता है, तो पहले अच्छे से सोच ले।"विक्की देख सकता था कि कबीर मज़ाक नहीं कर रहा है। उसने सिर हिलाया और कहा, "अगर तेरे पास पूंजी कम है, तो मैं अपने घर वालों से बात करके कुछ जुगाड़ करूँगा। बोल, क्या प्लान है?"डिंग! आपने अपने साथ बिजनेस शुरू करने की विक्की की इच्छा पूरी की, विश वैल्यू + 1।*"वर्तमान विश वैल्यू प्रोग्रेस: 8 / 10।"

कबीर नोटिफिकेशन देखकर मुस्कुराया। अगर सिस्टम उसे इनाम दे रहा था, तो इसका मतलब था कि विक्की वाकई दिल से उसके साथ काम करना चाहता था।
भले ही विक्की स्कूल में 'टॉपर' नहीं था, पर वह बेवकूफ भी नहीं था। उसके पास व्यावहारिक समझ (Street Smarts) थी, जो असली दुनिया में बहुत काम आती है। कबीर को मदद की ज़रूरत थी और विक्की इसके लिए सबसे सही आदमी था।कबीर ने उसके कंधे पर हाथ रखा। "ऐसा करते हैं, मैं तुझे पंद्रह हज़ार रुपये देता हूँ। तू शहर में घूमकर एक अच्छी दुकान तलाश कर। अगर तुझे कोई सही जगह मिले, तो मैं आगे की बात करूँगा।"

विक्की हैरान रह गया, "कैसी दुकान खोलने का सोच रहा है? किन इलाकों में देखूँ?"विक्की के सवालों ने कबीर को और संतुष्ट कर दिया; उसे दिख रहा था कि उसका दोस्त अभी से काम की बारीकियों को समझने लगा है। उसने विक्की के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए और कहा, "मेरे पास कुछ आईडिया हैं। पैसों की चिंता मत कर, बस तू दुकान ढूंढ। लगभग हज़ार स्क्वायर फीट की जगह काफी होगी, बस लोकेशन सही होनी चाहिए। अगर तुरंत न मिले तो तनाव मत लेना।"

विक्की ने सिर हिलाया, "मुझे तीन दिन दे, मैं काम कर दूँगा।"

"ठीक है।" कबीर ने उसका कंधा थपथपाया। "रही बात सैलरी और फायदे की, तो दुकान मिलने के बाद बात करेंगे। मुझे अभी कुछ और सामान लेना है, तो मैं निकलता हूँ।"विक्की सन्न खड़ा कबीर को जाते हुए देखता रहा। कबीर था तो वही पुराना दोस्त, पर विक्की को लगा कि उसमें कुछ बदल गया है। वह पहले से कहीं ज्यादा शांत और आत्मविश्वासी हो गया था। विक्की उसका सम्मान तो करता था, पर साथ ही उसे कबीर से थोड़ा डर भी लगने लगा था।
रजिस्ट्रेशन ऑफिस से बाहर निकलते समय कबीर काफी खुश था। उसने कॉलेज प्रवेश परीक्षा के लिए फॉर्म भर दिया था और रास्ते में एक युवती की मदद करके एक और विश वैल्यू भी हासिल कर ली थी।

किताबों की दुकान की ओर बढ़ते हुए कबीर ने हालात का जायजा लिया। उसने कल रात विक्रम की नाक तोड़ी थी। विक्रम के मिजाज़ को देखते हुए, यह तय था कि वह बदला लेने ज़रूर आएगा। और इस बार वह सिर्फ दो बॉडीगार्ड्स के साथ नहीं आएगा। कबीर जानता था कि उसे जल्द से जल्द अपनी ताकत बढ़ानी होगी।उसके पास पाँच फ्री एट्रीब्यूट पॉइंट्स थे। थोड़ी हिचकिचाहट के बाद, उसने 2 पॉइंट 'ताकत' (Power) में और 3 पॉइंट 'फुर्ती' (Dexterity) में जोड़ दिए।

अब उसका पैनल कुछ ऐसा दिख रहा था:
ताकत:13 पॉइंट
फुर्ती: 17 पॉइंट
सहनशक्ति (Stamina): 11 पॉइंट
आकर्षण (Charm): 1 पॉइंट
विश वैल्यू: 9 / 10

अब उसकी 'ताकत' 13 थी, जो एक औसत वयस्क पुरुष से कहीं ज्यादा थी। इसका मतलब था कि उसकी शारीरिक शक्ति अब किसी प्रोफेशनल 'फिटनेस कोच' के बराबर थी।और 17 'फुर्ती'! यह वाकई कमाल था। सीधे शब्दों में कहें तो उसकी रफ़्तार अब दुनिया के सबसे बेहतरीन स्प्रिंटर (धावक) के बराबर थी। उसकी प्रतिक्रिया देने की गति (Reaction Speed) इतनी तेज़ थी कि आम इंसान उसे छू भी नहीं सकते थे। हाँ, वह अभी गोलियों से बचने जितना तेज़ नहीं हुआ था... फिलहाल।

उसकी 'इंजरी रिकवरी' शक्ति की वजह से वह फिलहाल 'सहनशक्ति' की कमी को नज़रअंदाज़ कर सकता था, पर वह जानता था कि लंबे समय में यह भी ज़रूरी है। सहनशक्ति का मतलब सिर्फ लड़ाई नहीं, बल्कि हर तरह के धीरज से है। कबीर ने सोचा कि अगर भविष्य में उसकी कोई गर्लफ्रेंड बनी... तो वहाँ भी यह काफी काम आएगी।अपने शरीर में ताकत की नई लहर महसूस करते हुए उसने एक लंबी सांस ली।

सड़क पर चलते हुए अचानक एक बड़े कुत्ते ने उस पर भौंकना शुरू किया। कबीर ने अपनी भौहें सिकोड़ीं और एक सिक्का उसकी तरफ उछाला।"डिंग! थ्रोइंग प्रोफिशिएंसी (निशानेबाजी) सक्रिय!"जानवरों की अपनी सहज बुद्धि होती है और वे जानते हैं कि खुद से ताकतवर जीव से पंगा नहीं लेना चाहिए। सिक्का कुत्ते के कान को छूकर निकला। कुत्ता पहले तो गुर्राया, पर जब उसने कबीर की ठंडी आँखों में देखा, तो वह दुम दबाकर भाग गया।
"डिंग! आपने कुत्ते की आपको डराने की इच्छा को बेअसर कर दिया। एट्रीब्यूट पॉइंट + 1।"

सिस्टम ने कबीर को याद दिलाया कि वह रोज़ाना जानवरों से दो एट्रीब्यूट पॉइंट और दो विश वैल्यू ले सकता है। यह उसे 'मुफ्त' में मिलने वाली चीज़ थी।
बिना देर किए उसने 'आई ऑफ डिटेक्शन' चालू की! थोड़ी देर बाद, दुकान के पास वाले एक पार्क के तालाब में मछलियों को दाना खिलाकर उसने अपना कोटा पूरा कर लिया।
"डिंग! आपका विश स्लॉट भर गया है। अब आप एक इच्छा (Wish) मांग सकते हैं।"डिंग! सिस्टम ने पिछले दो दिनों में होस्ट के अच्छे व्यवहार को नोट किया है। इसलिए, सिस्टम होस्ट को बिना किसी पाबंदी के एक 'बोनस विश' (Bonus Wish) प्रदान करता है।"कबीर थोड़ा उलझ गया। उसने पिछले दो दिनों को याद किया। उसने एक बंदे की नाक तोड़ी, कई लोगों को पीटा और एक कुत्ते को डराया। क्या सिस्टम इसे 'अच्छा व्यवहार' मानता था?

यह इच्छा पूरी करने वाला सिस्टम था या कोई 'दुष्ट' सिस्टम?खैर, इनाम ने कबीर को एक बड़ा आईडिया दिया। उसने उत्साहित होकर पूछा, "सिस्टम, जब कोई पाबंदी नहीं है, तो मुझे सीधे 1000 करोड़ रुपये दे दो!"डिंग डोंग! सिस्टम खुद पैसा पैदा नहीं कर सकता। लेकिन सिस्टम दुनिया भर के अन्य खातों से आपके खाते में 1000 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर सकता है। अगर आप यह इच्छा चुनते हैं, तो इस पैसे के लिए कई लोग दिवालिया हो जाएंगे। इसके अलावा, यह एक बड़ा अपराध भी हो सकता है। कृपया अपनी इच्छा सोच-समझकर चुनें।"**

कबीर का मुँह खुला रह गया। उसे एहसास हुआ कि सिस्टम की बात में दम है। 1000 करोड़ रुपये रातों-रात अकाउंट में आना बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता था।परंतु एक पल में अमीर बनने का विचार इतना लुभावना था कि कबीर खुद को रोक नहीं पाया। उसने उत्सुकता से पूछा, "क्या यह पैसा विदेश से ट्रांसफर किया जा सकता है?""डिंग! पैसा दुनिया के किसी भी कोने से ट्रांसफर किया जा सकता है।"कबीर को एक पल के लिए लगा कि क्या वह बुरा इंसान बन रहा है? अमीर बनने के लिए उसे विदेशी लोगों की जान-माल की परवाह नहीं थी।

"डिंग! सिस्टम दुनिया की जनसंख्या और देशों के अनुपात के हिसाब से फंड ट्रांसफर करेगा।"यह सुनकर कबीर निरुत्तर हो गया। अमेरिका जैसे देशों की जनसंख्या बहुत ज़्यादा है, न जाने कितने लोग इस चक्कर में कंगाल हो जाते। और अगर उसके खाते में अचानक इतना पैसा आ जाता, तो वह कभी न कभी पकड़ा ज़रूर जाता।"मुझे तुम पर भरोसा नहीं है," कबीर ने आह भरी। सिस्टम पर उसका विश्वास कम हो रहा था। उसने मज़ाक में कह दिया, "अगर पैसा नहीं दे सकते, तो कम से कम मेरे लिए कोई बहुत अमीर और खूबसूरत पत्नी ही ढूंढ लो, क्यों?"

"डिंग! इच्छा सफल। सिस्टम उपयुक्त उम्मीदवारों की तलाश करेगा।"क्या!?" कबीर को इतना बड़ा झटका लगा कि वह अपनी जगह से उछल पड़ा। उसने तो बस मज़ाक किया था, उसे अंदाज़ा नहीं था कि सिस्टम इसे सचमुच एक 'विश' मान लेगा।कबीर को बिना किसी पाबंदी के एक 'बोनस विश' मिली थी। अगर उसे सौ करोड़ नहीं मिल सकते थे, तो वह कम से कम सुपरमैन बन सकता था, या कोई जादुई शक्ति पा सकता था। उसने इस इच्छा को रद्द करने की बहुत कोशिश की, लेकिन सिस्टम का जवाब आया: "इच्छा पर काम शुरू हो चुका है। बिना पाबंदी वाली इच्छाओं को रद्द नहीं किया जा सकता।"

कबीर ने मन ही मन खुद को कोसा। पर फिर उसने सोचा कि सिस्टम वैसे भी उसे उड़ने या बिजली गिराने जैसी शक्तियाँ शायद ही देता।जब कबीर अपनी झुंझलाहट को शांत करने की कोशिश कर रहा था, सिस्टम की आवाज़ फिर गूंजी।"डिंग! मिलान सफल। आपकी होने वाली पत्नी एक 23 वर्षीय सीईओ (CEO) है। उसकी पारिवारिक संपत्ति लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये (33 बिलियन डॉलर) है। वह अत्यंत सुंदर मानी जाती है। विवाह का प्रबंध शीघ्र ही किया जाएगा।"

"डिंग! आपको 1 आकर्षण (Charm) पॉइंट प्राप्त हुआ।"33 बिलियन डॉलर! यह सुनकर कबीर की सांसें अटक गईं। यह रकम तो विक्रम के खानदान की कुल दौलत से भी कहीं ज़्यादा थी।और वह एक खूबसूरत सीईओ थी। अचानक, कबीर को अपनी इस गलती से हुई इच्छा का परिणाम देखने की उत्सुकता होने लगी। "सिस्टम, वह कहाँ है? उसका नाम क्या है? मुझे उसे देखना है!""डिंग डोंग! कृपया धैर्य रखें। होस्ट जल्द ही अपनी भविष्य की पत्नी से मिलेगा। सिस्टम ने एक उत्तम जोड़ी सुनिश्चित की है।"कबीर का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। क्या उसे आँख बंद करके सिस्टम पर भरोसा करना होगा? पता नहीं उसने कैसी लड़की चुनी होगी। पर अब तीर कमान से निकल चुका था।

कौन हो सकती है वह खूबसूरत सीईओ? कबीर ने खुद को भविष्य के भरोसे छोड़ दिया। क्या पता, वह लड़की उससे भी ज़्यादा बेचैन हो।खुद को संभालने के बाद कबीर किताबों की दुकान की ओर बढ़ने ही वाला था कि उसका फोन बज उठा। उसने अपना नया आईफोन निकाला और देखा कि उसके पिता का फोन था।बूढ़े पिता ने अपनी पूरी ज़िंदगी गरीबी में काटी थी। वे बिना वजह फोन पर पैसे बर्बाद करना पसंद नहीं करते थे। कबीर को लगा ज़रूर कुछ ज़रूरी बात होगी।पिता ने उसे रात के खाने के लिए घर बुलाया। उन्होंने कहा कि कुछ बहुत ज़रूरी चर्चा करनी है जो वे फोन पर नहीं बता सकते।कबीर घर जाने के लिए राज़ी हो गया और पहुँच गया किताबों की दुकान। उसने प्रतियोगी परीक्षाओं और कॉलेज प्रवेश परीक्षा के सेक्शन में जाकर एक-एक करके किताबें पलटनी शुरू कीं।

हर किताब उसके हाथ में एक मिनट से ज़्यादा नहीं रहती थी। जैसे ही वह पूरी किताब याद कर लेता, वह अगली किताब की ओर बढ़ जाता। देखने वालों को लग रहा था कि वह कोई खास किताब ढूंढ रहा है, पर असल में वह किताबों को 'घोलकर पी' रहा था।लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, कबीर के चेहरे पर शिकन आने लगी। उसे लगा कि चीज़ें इतनी भी सरल नहीं हैं। सिर्फ रटने से पढ़ाई नहीं होती; उसे समझना भी ज़रूरी था।जैसे गणित। भले ही उसे सारे फॉर्मूले याद थे, पर उन्हें इस्तेमाल कैसे करना है, यह समझना ज़रूरी था। या फिर अंग्रेजी और विदेशी भाषाएँ; सिर्फ शब्द रटने से कोई भाषा बोलनी नहीं आ जाती।

अचानक कबीर को ख्याल आया, "सिस्टम, तुमने कहा था कि वह बोनस विश थी। क्या इसका मतलब है कि मेरा पिछला विश स्लॉट अभी भी भरा हुआ है?"सिस्टम ने जवाब दिया, "डिंग! सही कहा। होस्ट के पास अभी भी एक साधारण इच्छा (Regular Wish) बची है। आप इसे अभी इस्तेमाल कर सकते हैं या भविष्य के लिए बचा सकते हैं।"कबीर की खुशी का ठिकाना न रहा। उसने डरते-डरते पूछा: "क्या मुझे सुपरपावर मिल सकती है?""डिंग डोंग! साधारण इच्छाओं का उपयोग ऐसी बाहरी शक्तियों के लिए नहीं किया जा सकता जो आम इंसानों की समझ से बाहर हों।"कबीर ने एक फीकी मुस्कान दी। उसे पता था कि बिजली गिराना या उड़ना 'बाहरी शक्तियाँ' हैं। उसकी 'त्वरित स्मरण' शक्ति भी एक सुपरपावर जैसी ही थी, पर वह दूसरों को दिखाई नहीं देती थी, इसलिए वह एक 'आंतरिक क्षमता' थी।

कबीर थोड़ी देर शांत रहा, फिर गंभीरता से बोला, "सिस्टम, मुझे एक तीव्र तर्कशक्ति और लॉजिक (Logic) की क्षमता चाहिए!""डिंग! इच्छा सफल। होस्ट को 'सर्वोत्तम तर्क निपुणता' (Optimal Logic Proficiency) प्राप्त हुई। विवरण: होस्ट उपलब्ध जानकारी का उपयोग करके चीज़ों की गहराई को समझ सकता है और सही निष्कर्ष निकाल सकता है। नोट: इस क्षमता के उपयोग में मानसिक ऊर्जा खर्च होगी।""डिंग! होस्ट को 1 आकर्षण पॉइंट प्राप्त हुआ।"

जैसे ही सिस्टम की आवाज़ रुकी, कबीर को अपने सिर में एक झनझनाहट महसूस हुई। जो चीज़ें उसे थोड़ी देर पहले समझ नहीं आ रही थीं, वे अचानक शीशे की तरह साफ हो गईं। अब वह गणित के सबसे कठिन सवालों को भी चुटकियों में हल कर सकता था। उसे लगा कि वह अब अंग्रेजी और अन्य भाषाएँ किसी उस्ताद की तरह बोल सकता है।अब कबीर का आत्मविश्वास आसमान छू रहा था। इस तर्कशक्ति और याददाश्त के साथ वह चाहे तो वैज्ञानिक बन सकता था या दुनिया की सबसे बेहतरीन मशीनें बना सकता था।उसने अगली किताब उठाई और पागलों की तरह पढ़ना शुरू किया। अब हर मुश्किल सवाल उसे हलवा लग रहा था। उसे पूरा यकीन था कि अगले तीन दिनों में वह प्रवेश परीक्षा के पूरे सिलेबस का मास्टर बन जाएगा और टॉप रैंक हासिल करेगा।

पढ़ते-पढ़ते शाम के चार बज गए। उसका सिर थोड़ा चकराने लगा था। शायद तर्कशक्ति का ज़्यादा इस्तेमाल करने से उसका दिमाग थक गया था। उसे याद आया कि पिता ने उसे घर बुलाया है, इसलिए वह दुकान से निकलकर घर की ओर चल दिया।कबीर का परिवार शहर के बाहरी इलाके में एक पुरानी बस्ती में रहता था। जब वह पहुँचा, तो शाम के छह बज रहे थे। रास्ते में उसने दो और विश पॉइंट्स कमाए।जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसकी माँ ने उसका स्वागत किया। उन्होंने चिंता से पूछा, "कबीर बेटा, तेरे सिर की चोट अब कैसी है?"

कबीर मुस्कुराया, "मैं अस्पताल गया था चेकअप कराने माँ, अब सब ठीक है।"माँ को चैन मिला। वे कुछ और कहना चाहती थीं, लेकिन तभी अंदर से एक कर्कश आवाज़ आई।

"लो! साहबज़ादे आ गए! अब खाना शुरू किया जाए!"