निशा कुछ पल चुप रही फिर उसने धीरे से कहा
निशा- मुझे मदद चाहिए
दूसरी तरफ कुछ सेकंड की खामोशी रही फिर वही सीधी आवाज
आरव- क्या हो रहा है?
निशा ने गहरी सांस ली
निशा- हमारे घर में कुछ है
इस बार जवाब तुरंत आया
आरव- address भेजो
कॉल कट हो गई, निशा ने फोन नीचे रखा उसके चेहरे पर डर अब भी था लेकिन पहली बार उसे लगा कि अब वह अकेली नहीं है उसी समय घर के बाहर, अंधेरे में
कोई खड़ा था वही आकृति, वही साया धीरे-धीरे उसने सिर उठाया और घर की तरफ देखने लगा।
अगली सुबह गाँव पहले की तरह ही जागा, लेकिन इस घर के भीतर अब एक अलग तरह की चुप्पी थी निशा ने रात को जो किया था, उसके बाद से वह हर आवाज़ पर ध्यान दे रही थी। रितिका अपने काम में लगी थी, आर्यन अब भी बेफिक्र दिखने की कोशिश कर रहा था, और रोहित सामान्य व्यवहार कर रहा था।
लेकिन यह सामान्य अब सामान्य नहीं रह गया था दोपहर के करीब एक गाड़ी गाँव के बाहर आकर रुकी। कच्चे रास्ते पर धूल उठी और धीरे-धीरे बैठ गई।
गाड़ी से तीन लोग उतरे आरव, कबीर और मीरा
तीनों के चेहरे पर वही पुरानी गंभीरता थी। बिना किसी अनावश्यक बात के, उन्होंने घर की तरफ चलना शुरू किया।
दरवाज़े पर पहुँचकर आरव ने एक बार चारों तरफ देखा। उसकी नजर कुछ सेकंड के लिए दूर खड़े उस पुराने पेड़ पर गई, फिर वह वापस दरवाज़े की तरफ मुड़ा।
उसने दरवाज़ा खटखटाया अंदर से कदमों की आवाज आई दरवाज़ा खुला सामने निशा थी कुछ सेकंड के लिए दोनों एक-दूसरे को देखते रहे
निशा- आप… आरव?
आरव- हाँ
कबीर ने हल्के अंदाज़ में इधर-उधर देखा।
कबीर- अच्छा घर है… लेकिन vibe ठीक नहीं है।
मीरा ने बिना कुछ बोले अंदर कदम रखा रितिका बाहर आई उसके चेहरे पर हल्की घबराहट थी।
रितिका- आप लोग…?
निशा- मम्मी, मैंने ही बुलाया है
रितिका ने एक पल के लिए उसे देखा, फिर चुप हो गई।
आरव ने सीधा पूछा।
आरव- जो भी हुआ है, शुरू से बताइए।
सब लोग हॉल में बैठ गए।
निशा ने धीरे-धीरे सारी बातें बतानी शुरू कीं। रात की दस्तक… उल्टे पैर… आटे का बिखरना… और घर के अंदर चलने की आवाज़।
रितिका और आर्यन पहली बार यह सब सुन रहे थे।
आर्यन- ये सब… तूने हमें बताया क्यों नहीं?
निशा- पहले मुझे खुद यकीन नहीं था।
रोहित अब तक चुप बैठा था।
आरव की नजर उस पर टिक गई।
आरव- आप कुछ कहना चाहेंगे?
कुछ सेकंड की खामोशी रही।
फिर रोहित ने धीरे से कहा।
रोहित- एक-दो अजीब चीज़ें तो मैंने भी notice की हैं।
कबीर ने हल्का सिर टेढ़ा किया।
कबीर- जैसे?
रोहित- रात में आवाज़ें और ऐसा लगता है जैसे कोई आसपास हो
मीरा अब तक घर के हर कोने को ध्यान से देख रही थी। वह धीरे-धीरे आँगन की तरफ चली गई।
आरव ने उसकी तरफ देखा।
आरव- कुछ मिला?
मीरा- presence है… लेकिन direct नहीं।
कबीर- मतलब?
मीरा- ये यहाँ रहता नहीं… आता-जाता है।
कमरे में फिर खामोशी छा गई आरव उठकर खड़ा हुआ
आरव- हमें जगह देखनी होगी। हर कोना।
रितिका थोड़ा असहज थी, लेकिन उसने मना नहीं किया।
टीम ने घर का निरीक्षण शुरू किया।
कमरे… रसोई… बरामदा…
सब कुछ सामान्य दिख रहा था।
लेकिन जब वे आँगन में पहुँचे, मीरा एक जगह रुक गई।
वह जमीन को देख रही थी।
मीरा- यहाँ।
सबकी नजर वहाँ गई।
कुछ नहीं था।
साफ जमीन।
कबीर- क्या?
मीरा- residual marks… बहुत हल्के हैं… लेकिन हैं।
आरव झुका और ध्यान से देखने लगा।
आरव- ये अंदर आता है… और यहीं तक रहता है।
कबीर ने धीरे से कहा।
कबीर- मतलब… इसे कोई अंदर बुला रहा है… या ये खुद किसी से जुड़ा हुआ है।
तीनों की नजर एक साथ रोहित की तरफ गई कुछ सेकंड के लिए माहौल भारी हो गया रोहित ने उनकी तरफ देखा
रोहित- क्या मतलब है आपका?
आरव ने सीधा जवाब दिया
आरव- ये किसी एक से attach है।
खामोशी रितिका अब साफ घबरा चुकी थी
रितिका- साफ-साफ बताइए क्या हो रहा है?
मीरा ने धीरे से कहा
मीरा- अभी कुछ confirm नहीं है लेकिन ये चीज़ इस घर में किसी के साथ आई है।
कबीर ने हल्के से गहरी सांस ली।
कबीर- और हमें पता लगाना है… वो कौन है।
उसी समय आँगन के बाहर से हल्की हवा चली दरवाज़ा अपने आप थोड़ा हिल गया
किर्र…
सबकी नजर एक साथ उस तरफ गई कुछ सेकंड तक कोई नहीं बोला फिर
कबीर - मुझे चुनौती दे रहा है पछताएगा बेटा
आरव ने शांत आवाज में कहा
आरव- आज रात हम यहीं रुकेंगे।
कबीर- और जो भी है उसे सामने लाएँगे
मीरा ने आखिरी बार पूरे घर को देखा।
मीरा- ये खुद सामने आएगा या आएगी
रात अभी दूर थी...