अकथ - भाग 2 silent script द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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अकथ - भाग 2

भाग  -  2 

अवनि ने अपनी आँखों के सामने देखा—वो सफेद कार, जिसने नील को टक्कर मारी थी, एक पल के लिए रुकी और फिर तेज़ रफ़्तार में धुंआ उड़ाती हुई भाग निकली। अवनि ने काँपते हुए उस भागती कार का नंबर पढ़ने की कोशिश की, पर उसकी आँखों के सामने धुंध छा गई थी।



‎सड़क के बीचों-बीच नील पड़ा था। उसका छोटा सा शरीर बेजान लग रहा था और उसके सिर के नीचे से खून का एक गहरा लाल दरिया बहने लगा था।
‎"एम्बुलेंस! कोई एम्बुलेंस बुलाओ!" अवनि के गले से एक चीख निकली जो शायद पूरी बस्ती तक सुनाई दी होगी।



‎भीड़ जमा हो गई। शोर, चिलम-चिल्ली और धूल के बीच एम्बुलेंस का सायरन गूँजा। अवनि, जिसके हाथ अब भी खून से सने थे, काँपते पैरों से एम्बुलेंस में नील के साथ बैठ गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह पुलिस को क्या जवाब देगी या उस माँ को क्या कहेगी
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‎अस्पताल की सफेद दीवारों और फिनाइल की तीखी गंध ने अवनि का दम घोंट दिया था। जैसे ही वार्ड बॉय स्ट्रेचर को अंदर लेकर भागे, एक नर्स ने अवनि को बाहर ही रोक दिया। अवनि वहीं सुन्न खड़ी रही। उसे लग रहा था जैसे यह सब सच नहीं है, बस एक भयानक सपना है जिससे वह अभी जाग जाएगी।
‎तभी डॉक्टर बाहर आए। उनके चेहरे की शिकन अवनि के दिल की धड़कन बढ़ा रही थी।



‎"डॉक्टर, वह ठीक तो है न?" अवनि की आवाज़ कांप रही थी।

‎डॉक्टर ने लंबी सांस ली और अपना चश्मा उतारते हुए कहा, "हमें माफ कर दीजिए। उस बच्चे का खून बहुत ज्यादा बह चुका था। ऊपर से वह शरीर से पहले ही बहुत कमजोर था... हम उस मासूम को नहीं बचा पाए।"



‎अवनि के कानों में जैसे बम फूटा हो। उसकी साँसें रुक गईं। वह वहीं ज़मीन पर बैठ गई और सिसक-सिसक कर रोने लगी। उसका गला रुंध गया था। तभी डॉक्टर ने पास आकर पूछा, "आप उस बच्चे की क्या लगती हैं? और यह हादसा कैसे हुआ? किसने किया यह सब?"



‎डॉक्टर के सवालों ने अवनि के अंदर के डर को जगा दिया। उसे लगा कि अगर वह सच बोलेगी तो पुलिस आएगी, तो उसे ही ज़िम्मेदार ठहराएगी उसने अपनी आँखें पोंछीं और कांपती आवाज़ में झूठ बोल दिया, "मैं... मैं उसे नहीं जानती। बस रास्ते में पड़ा देखा तो ले आई।"



‎यह बोलते ही वह वहाँ से पागलों की तरह भागी। अस्पताल के गलियारे उसे निगलने को दौड़ रहे थे।
‎सड़क पर आकर उसने एक सुनसान कोने में रुककर उल्टियां करना शुरू कर दिया। उसका शरीर कांप रहा था। उसने पास के नल से पानी पिया और खुद को शांत करने की कोशिश की।



वह मन ही मन खुद को समझाने लगी, "मैंने कुछ नहीं किया... वह बस एक एक्सीडेंट था। मेरी क्या गलती? दुनिया में रोज़ एक्सीडेंट होते हैं। मुझे इन सब झमेलों में नहीं पड़ना चाहिए। मुझे घर जाना होगा... हाँ, मुझे बहुत काम है।"



‎अवनि तेज़ कदमों से घर की तरफ बढ़ने लगी, लेकिन उसे पता नहीं था कि वह अस्पताल से तो भाग आई थी, पर उस मासूम बच्चे 'नील' की यादों से भागना अब मुमकिन नहीं था।,