उसकी उंगलियाँ मृगा के चेहरे के करीब आकर ठहर गईं।
“बस एक बार… तुम्हें पाना चाहता हूँ…”
उसकी आवाज़ अब और भारी हो गई थी।
मृगा की साँसें तेज़ हो गईं , रिहान इस वक्त हल्के नशे में था उसके मुंह से आती एल्कोहल की गंध से मृगा डर गयी वो खुद को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी…
और तभी—
रिहान का फोन बज उठा।
एक पल के लिए उसका ध्यान भटका…
और उसी एक पल का फायदा उठाकर—
मृगा ने पूरी ताकत से उसे धक्का दिया।
रिहान की पकड़ ढीली पड़ गई।
मृगा बिना पीछे देखे, तेज़ कदमों से कमरे से बाहर भाग गई।
कमरे में अब सिर्फ रिहान खड़ा था—
उसके चेहरे पर वही अजीब-सी मुस्कान वापस आ गई।
उसने आराम से अपने बाल पीछे किए और फोन उठाया।
स्क्रीन पर उसके दोस्तों का नाम चमक रहा था।
उसने कॉल रिसीव किया—
“ओए रिहान! आज पूरा दिन कहाँ था तू?”
दूसरी तरफ से सौरभ की आवाज़ आई।
“तेरे बिना तो मज़ा ही नहीं आया… और सुन—आलिया तुझे बहुत मिस कर रही थी!”
रिहान चुपचाप सुनता रहा।
“दिन में नहीं आया, चलो ठीक… लेकिन शाम को भी क्लब नहीं पहुँचा! आज तो उसके लिए स्पेशल ड्रिंक पार्टी रखी थी उसने…”
सौरभ हंसते हुए बोला,
“बेचारी बार-बार तेरा नाम ले रही थी… यार, एक बार कॉल तो कर ले उसे… आखिर तेरी गर्लफ्रेंड है।”
रिहान की नज़र अभी भी दरवाज़े की तरफ थी…
जहाँ से कुछ देर पहले मृगा भागी थी।
उसके होंठों पर फिर वही हल्की, रहस्यमयी मुस्कान उभर आई…
सौरभ ने आगे कहा," ठीक है फोन रखता हुं तुम आलिया से बात कर ले...फोन डिस्कनेक्ट हुआ!!
रिहान ने फोन अब आलिया को किया , अपने फोन कान से लगाया और धीरे से बेड पर लेट गया , उसका एक हाथ सिर के पीछे था, और आँखों में अब भी वही हल्की-सी शरारत तैर रही थी ,
“हेलो…” उसने धीमे, मुलायम लहज़े में कहा।
उधर से जैसे ही आवाज़ आई, उसमें शिकायत भी थी और प्यार भी—
“रिहान…! तुम कहाँ थे पूरे दिन…?”
आलिया की आवाज़ में एक मीठी नाराज़गी थी, जैसे हर शब्द में चाशनी घुली हो।
रिहान हल्का-सा मुस्कुराया,
“बस… थोड़ा बिज़ी था। लेकिन लगता है… किसी ने मुझे बहुत मिस किया है।”
“किसी’ नहीं…” आलिया ने तुरंत जवाब दिया,
“मैंने तुम्हें मिस किया है… बहुत ज़्यादा…”
उसकी आवाज़ अब और नरम हो गई थी—
“तुम्हें पता है… हर घंटे फोन उठाकर देखा… शायद तुम्हारा मैसेज हो… लेकिन तुम तो जैसे गायब ही हो गए थे…”
रिहान ने आँखें बंद कर लीं, जैसे उस आवाज़ को महसूस कर रहा हो।
“इतना याद करती हो मुझे…?” उसने हल्की छेड़ते हुए पूछा।
आलिया हँसी… वो हँसी भी जैसे शहद में डूबी हुई थी—
“तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है, रिहान…
मैं तुम्हारे बिना एक दिन भी ठीक से नहीं रह पाती…”
कुछ पल रुककर उसने धीरे से कहा—
“तुम मेरी आदत नहीं… मेरी ज़रूरत बन चुके हो…”
रिहान के होंठों पर मुस्कान और गहरी हो गई।
“इतना प्यार करती हो मुझसे…?” उसने फुसफुसाते हुए पूछा।
“प्यार…?” आलिया ने जैसे उस शब्द को महसूस किया,
“मैं तुमसे सिर्फ प्यार नहीं करती, रिहान… मैं तुम्हारे लिए पागल हूँ…
तुम्हारी एक झलक के लिए… एक कॉल के लिए… मैं कुछ भी कर सकती हूँ…”
उसकी आवाज़ में दीवानगी साफ झलक रही थी—“आज क्लब में सब थे… म्यूज़िक, ड्रिंक्स, हँसी… सब कुछ था…
बस तुम नहीं थे… और तुम्हारे बिना सब अधूरा लग रहा था…”
रिहान ने करवट बदली, छत की ओर देखते हुए बोला—“तो फिर… कल मिलते हैं… सिर्फ तुम और मैं…”
आलिया की साँस जैसे एक पल को थम गई ,“सच…?” उसने धीरे से पूछा।
“हूँ…” रिहान की आवाज़ और भी गहरी हो गई,“और इस बार… तुम्हें शिकायत का मौका नहीं दूँगा…”
आलिया मुस्कुराई—उस मुस्कान की झलक उसकी आवाज़ में साफ थी।
“मुझे कोई शिकायत नहीं चाहिए, रिहान…”
“बस तुम चाहिए…”
कुछ पल दोनों खामोश रहे—
लेकिन वो खामोशी भी शब्दों से ज्यादा कुछ कह रही थी ,रिहान की नजर एक बार फिर दरवाज़े की ओर गई…
जहाँ से कुछ देर पहले मृगा भागी थी।
उसकी आँखों में एक पल को दो अलग-अलग एहसास टकराए—
एक तरफ आलिया की दीवानगी…
और दूसरी तरफ मृगा की डर से भरी आँखें…
लेकिन अगले ही पल—
उसने अपनी आवाज़ फिर से मुलायम कर ली—“आई मिस्ड यू टू, आलिया…”
और फोन पर चलती रही वो मीठी, नशे जैसी बातें…
रात गहरी थी…
बंगले के बड़े-बड़े दरवाज़े बंद हो चुके थे, लाइट्स धीमी हो गई थीं, और हर तरफ सन्नाटा पसरा था,लेकिन उस सन्नाटे के बीच… एक बेचैनी जाग रही थी।
मृगा अपने छोटे से सर्वेंट रूम में बैठी थी,
नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी।
बार-बार उसे रिहान की हरकत याद आ रही थीं...
रिहान का इतना पास आना…उसकी नजरें…और वो अजीब-सी मुस्कान के साथ छिछोरा हरकत ,“कुछ ठीक नहीं है…” उसने खुद से कहा।
उधर…रिहान अपने कमरे में आलिया ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया था ,उसके चेहरे पर एक अलग ही भाव था ,जिद… और एक गलत इरादा ,उसने घड़ी देखी—रात के 12 बज गए थे “अब तो सब सो चुके होंगे…” उसने धीरे से कहा, और फिर…
वो अपने कमरे से बाहर निकल आया ,
मृगा हल्की नींद में थी डर के मारे उसको अचानक बाहर हल्की आहट सुनाई दी, नींद टूट गई और सजग हो गई,
उसका दिल जोर से धड़कने लगा।
दरवाज़े के पास कदमों की आवाज़ रुकी…
और फिर -हल्की-सी दस्तक ,मृगा के हाथ ठंडे पड़ गए।
“मृगा… दरवाज़ा खोलो…” बाहर से आवाज़ आई ,वो आवाज़…रिहान की थी
मृगा के मन में डर की लहर दौड़ गई,
“इस वक्त…?” उसने सोचा।
उसने हिम्मत जुटाकर जवाब दिया -
“क्या काम है…?”
बाहर से हल्की हँसी आई—
“तुमसे माफी मांगनी है… खोलो ना…”
अब मृगा समझ चुकी थी -ये “सिर्फ माफ़ी की बात” नहीं है , उसने खुद को मजबूत किया ,“मुझे कोई माफ़ी नहीं देना और ना बात नहीं करनी… आप जाइए यहाँ से…”
कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
फिर…
रिहान की आवाज़ थोड़ी बदल गई ,
“इतना attitude अच्छा नहीं होता… समझी?”
मृगा का दिल बैठ गया, लेकिन उसने दरवाज़ा नहीं खोला।
बाहर खड़ा रिहान कुछ सेकंड तक दरवाज़े को घूरता रहा…फिर हल्के से
“ठीक है… आज नहीं… कल सही…”और वह वहाँ से चला गया।
अंदर…
मृगा की आँखों में आँसू आ गए थे,
वो बिस्तर पर बैठ गई और खुद को समेट लिया,“ मुझे यहाँ से निकालना होगा… उसने रोते हुए मन ही मन कहा।
उसे अब साफ समझ आ गया था ,
ये जगह उसके लिए सुरक्षित नहीं है।
अगली सुबह…
सब कुछ पहले जैसा दिख रहा था,
नंदिनी कपूर अपने कॉल्स में व्यस्त थीं ,
“हाँ, नए स्किन सीरम का लॉन्च डेट फाइनल कर दो , शादी से पहले होगा तो अच्छा है...
राजीव कपूर अखबार पढ़ रहे थे,
इशिका ऑफिस के लिए निकलने की तैयारी कर रहा था।
और रिहान…जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
वो आराम से तैयार होकर नीचे आया, और सोफे पर अपने डैड के पास बैठा ,“गुड मॉर्निंग डैड…” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
राजीव ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा ,“गुड मॉर्निंग…”और कल ऑफिस में पहला दिन कैसा रहा ..??
रिहान ने जवाब दिया," अच्छा था लेकिन थकान भरी थी..!!
राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा," थकान ,जब पैसे कमाने की लत होगी तो थकान अच्छा लगेगा तुम्हें ..!!
रिहान ने जवाब दिया ," हूम्म...
डायनिंग टेबल पर नाश्ता लग गई थी और नंदिनी ने सबको डायनिंग टेबल पर चलने कहा ...
रिहान को मौका मिल गया मृगा डायनिंग टेबल पर अकेली खड़ी थी , रिहान जल्दी से डायनिंग टेबल पर आया और मृगा के करीब खड़े होकर कहा ,“कल रात… तुमने दरवाज़ा क्यों नहीं खोला मैं माफी मांगने आया था ?” उसने सीधे पूछा।
काव्या के हाथ रुक गए,उसने हिम्मत जुटाकर कहा ,“क्योंकि रात बहुत हो गई थी और साहब लोग गरीब नौकर से माफी मांगे… वो सही नहीं था…”
रिहान हल्का-सा हँसा ,“ओह… तो तुम सही-गलत भी समझती हो…”
अब मृगा ने उसकी आँखों में देखा ,
पहली बार… बिना डरे ,“हाँ… और मैं अपनी हद भी जानती हूँ।”
रिहान कुछ पल के लिए चुप हो गया,
लेकिन उसकी आँखों में अब और भी गहराई आ गई थी ,जैसे वो और ज्यादा ठान चुका हो।
उसी वक्त…नंदिनी कपूर आई और बोली - मृगा तुम चाहो तो अपनी मां के घर चली जाना दो दिन के लिए फिर शादी के तैयारी में ज्यादा काम होगा और तुम नहीं जा पाओगी मां से मिलने ,मेरे ऑफिस जाने से पहले मेरे कमरे में आना और कुछ पैसे ले जाना अपने पगार की ..
मृगा ने सिर हिला कर हां बोली , मृगा के चेहरे पर मुस्कान आ गई घर जाने के नाम से ...
कुछ देर बाद रिहान के साथ सब घर वाले ऑफिस चले गए और मृगा घर चली गई।
शाम धीरे-धीरे अपनी बाँहें समेट रही थी। ऑफिस की खिड़की से झांकती ढलती धूप के साथ रिहान अपने केबिन में बैठा फाइलों में उलझा हुआ था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार भटक रहा था। तभी उसका फोन लगातार बजने लगा।
उसने हल्की झुंझलाहट के साथ फोन उठाया, लेकिन जैसे ही स्क्रीन पर नाम देखा—आलिया—उसके चेहरे पर अनायास मुस्कान आ गई।
“हेलो…” उसने धीमे स्वर में कहा।
दूसरी तरफ से आलिया की मीठी, नर्म आवाज आई—
“हाय रिहान… मैंने इसलिए फोन किया है कि तुम आज ऑफिस से सीधे होटल ब्लू मून आ जाओ… वही, जहाँ हम मिलते हैं।”
उसकी आवाज में एक खास तरह की नजाकत और अपनापन था, जो सीधे रिहान के दिल में उतर गया।
“और हाँ…” आलिया ने थोड़ी शरारत के साथ कहा,
“आज कोई दोस्त नहीं होगा… सिर्फ हम दोनों। और तुम भी किसी को मत बुलाना… ओके?”
इतना कहकर उसने बिना जवाब सुने ही फोन काट दिया।
फोन कटते ही रिहान कुछ पल तक उसी स्क्रीन को देखता रहा… फिर उसके होंठों पर एक हल्की, मगर गहरी मुस्कान फैल गई। उसके भीतर जैसे एक मीठी सिहरन दौड़ गई थी।
वो कुर्सी पर पीछे टिकते हुए खुद से बुदबुदाया—
“आज तो मृगा घर पर नहीं होगी… तो आलिया ही सही…”
शाम अब पूरी तरह रात में बदल चुकी थी। आसमान में तारे अपनी जगह ले चुके थे, और शहर की रोशनी जैसे हर खामोशी को चमक से भर रही थी।
कुछ ही देर में रिहान की गाड़ी होटल ब्लू मून के बाहर आकर रुकी। उसने एक गहरी सांस ली और गाड़ी से उतरकर अंदर की ओर बढ़ गया।
उधर, कमरे के भीतर आलिया बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी ,उसने खुद को आईने में आखिरी बार देखा ,आलिया रेड वन पीस पहनी थी टाइट फिटिंग ड्रेस थी पीछे से आधी पीठ खुली थी और सामने भी खुली थी ,उसके दोनों उभार आधा नुमाइश कर रही थी बाल खुले हुए,रेड लिपस्टिक ,
रेड वन-पीस ड्रेस उसकी खूबसूरती को और निखार रही थी। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और आँखों में इंतजार की चमक थी।
तभी रिहान का फोन आया।
“हेलो स्वीटहार्ट… किस रूम में आना है?” रिहान की आवाज में हल्की शरारत घुली हुई थी।
आलिया मुस्कुराई, उसकी आँखों में चमक और गहरी हो गई—
“रूम नंबर 502… जल्दी आओ…”
उसने फोन रखा ही था कि अगले ही पल दरवाजे पर हल्की-सी नॉक हुई।
उसका दिल एक पल को तेज धड़क उठा।
वो लगभग उछलते हुए दरवाजे की ओर बढ़ी… उसके कदमों में बेसब्री थी, और चेहरे पर एक चमकती हुई खुशी।
दरवाजा खोलते ही सामने रिहान खड़ा था—
आँखों में वही चाहत, वही आकर्षण…
कुछ पल के लिए दोनों बस एक-दूसरे को देखते रह गए…
जारी है कहानी