हंटर - 1 Ram Make द्वारा यात्रा विशेष में हिंदी पीडीएफ

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हंटर - 1





महान गुप्त साम्राज्य, अवंती प्रदेश, उज्जैन प्रांत।उज्जैन प्रांत की आठ प्रमुख एकेडमीयों में से एक छाया झील एकेडमी के प्रवेशद्वार से एक लडका अपनी कमर पर सेबर लटकाकर बाहर निकला।“सीनिअर अग्रज।“शुभ प्रभात, सीनिअर अग्रज।”“नमस्ते, सीनिअर अग्रज।”उसके आसपास के सभी साथी शिष्य काफी मिलनसार थे।लड़के ने अपने जूनियर शिष्यों की ओर देखते हुए हल्का सा सिर हिलाया। दरअसल उनमें से कई उससे उम्र में काफी बड़े थे। हालांकि एकेडमी में सभी लोग ताकतवर शिष्यों को बहुत सम्मान देते थे। उसने दो साल पहले ही एकेडमी के शिखर नदी समूह में प्रवेश किया था। शिखर नदी समूह के 22 शिष्य छाया झील एकेडमी के सबसे ताकतवर 22 शिष्य थे।

कई जूनियर शिष्य उनकी प्रशंसा करते थे। जहां तक बात है सीनियर वरुण अग्रज की, एकेडमी में उसका बहुत सम्मान किया जाता था। क्योंकि वह जूनियरों को अक्सर गाइड किया करता था। शिखर नदी समूह के बाकी सीनियर उन्हें गाइड करने के लिए समय बर्बाद करने की जहमत तक नहीं उठाते थे।

“छोटे मास्टर, छोटे मास्टर!” पास ही से एक जानी पहचानी आवाज वरुण को सुनाई दी।हरे कपड़े पहने एक लड़की उसके पास भाग कर आई। जब वरुण ने उसे देखा तो वह मुस्कुराकर बोला
“अरे विद्या, तुम यहां क्या कर रही हो।”“मेरी मेडम चाहती है की आप उनके साथ पूरब (दिशा) वाले पहाड़ पर घूमने चले। कल रात को वहां बर्फबारी हुई थी, जिससे वहां पर सुंदर नजारा बन गया है।” विद्या चहकते हुए बोली।“पूरब वाले पहाड़ पर घूमने जाना है?” वरुण अग्रज ने भौहें चढ़ाकर कहा, “पूरब का पहाड़ तो बहुत दूर है। मुझे डर है की, अगर हम पूरब के पहाड़ पर घूमने गए तो हमें वहीं पर रात गुजारनी पड़ेगी। हम आज दिन खत्म होने से पहले तो वापिस भी नही आ पाएंगे।”

विद्या मुस्कुराई और बोली, “हमारे बादल परिवार के पास पूरब के पहाड़ के पास एक बंगला है जहां पर आप दोनों रात को ठहर पाएंगे।”
वरुण ने अपना सिर हिलाया और कहा, “वापिस जाओ और ईशान्वी को बता दो की सूर्य महल की दानव वध बैठक एक महीने में शुरू होने वाली है। मुझे अपनी प्रैक्टिस पर ध्यान भी देना है और प्रतियोगिता के लिए खुद को तैयार करने की जरूरत है, इसीलिए मैं उसके साथ नही आ पाऊंगा।

“उस बारे में.” विद्या झिझकते हुए बोली।वरुण ने निर्देश दिया, “जब तुम वापस जाओगी तो बस उसे मैने अभी बोली हुई बात को बता देना।” “इसके अलावा उसे यह भी बता देना की उसे साधना पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए उसे हर समय मौज मस्ती के बारे में नहीं सोचना चाहिए।जी, छोटे मास्टर।” विद्या को आज्ञाकारी ढंग से जवाब देने और अपनी मैडम कसुनी हुई बात बताने के लिए लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

वरुण ने अपना सिर थोड़ा हिलाया।ईशान्वी बादल – जिसके साथ बचपन में ही वरुण की सगाई तय हो गई थी, उसने उसे परेशान कर रखा था।छाया झील एकेडमी छाया झील के पूर्वी किनारे पर बनाई गई थी। छाया झील के पश्चिमी किनारे पर कई मकान थे उनमें से ही एक अग्रज भवन था। ये अग्रज वंश के महल का एक इलाका था, जहां वरुण रहता था।भवन के प्रवेशद्वार पर दो गार्ड खड़े थे। जब उन्होंने वरुण को आते हुए देखा तो वे काफी सम्मानजनक व्यवहार करते हुए बोले “छोटे मास्टर।”

“क्या मेरे बाबा अंदर है?”

“अभी थोड़ी देर पहले ही बुलावा आने पर बड़े मास्टर पूर्वज हवेली पर गए है।” गार्ड ने कहा।वरुण ने कुछ सोचते हुए सिर हिलाया और हवेली में प्रवेश कर गया।जल्द ही उसने तीरों को चलाने की आवाज सुनी। आवाज का पीछा करते हुए वोप्रशिक्षण मैदान में जा पहुंचा।
वहाँ कर एक लाल कपड़े वाली लड़की तीर चला रही थी। हर एक तीर शेकड़ो फीट की दूरी तय करते हुए लक्ष पर जा लग रहा था। हर अगला तीर पिछले तीर पर भेद दे रहा था।जब तक वो तीरंदाजी की प्रैक्टिस कर रही थी, तब तक वरुण उसे किनारे पर खड़े रहकर देखता रहा।उसका लड़की का नाम निधि यादव था – जो वरुण के बाबा के जिगरी दोस्त विद्याधर यादव की इकलौती बेटी थी। उन दोनों की दोस्ती जीवन और मौत की स्थिति में बनी दोस्ती थी।

जब वरुण आठ साल का था, तब विद्याधर यादव अपनी बेटी को अग्रज हवेली में ले आए थे और उस वक्त से ही वो वहीं रहने लगी थी।निधि कुछ बातें थी जो वरुण से काफी मिलती जुलती थी, उनमें से एक यानी, जब वे दोनों छोटे थे तो उन दोनो ने अपनी माँ को खो दिया था। उन्होंने छोटी उम्र से लेकर आज तक एक साथ प्रैक्टिस की थी; इसी प्रकार, उनका एक दूसरे के साथ गहरा रिश्ता बन गया था।

“ओह वरुण, तुम वापस आ गए।” जब उसने वरुण को देखा तो निधि की आँखें चमक उठीं। “इन लक्षों पर निशाना लगाना बहुत उबाऊ है। एक काम करो, तुम मेरे निशानी पुतले बन जाओ। सच कहूं तो मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा थी, नहीं तो मैं अपनी तीरंदाजी की प्रैक्टिस करने के लिए एकेडमी चली गई होती। एकेडमी का तीरंदाजी वाला मैदान बहुत बड़ा है।”

“ठीक है, ठीक है, मैं तुम्हारा निशानी पुतला बन जाता हूं।” वरुण मुस्कुराया और प्रशिक्षण मैदान के बीच की जगह की ओर चला गया।निधि ने तरकश बदला, जिसके किसी भी तीर की नोक नहीं थी। निधि ने वरुण को मुड़कर देखा अबकी बार उसकी आँखें उत्साह से चमक उठीं।” वरुण, तुम्हें सावधान रहना चाहिए। दोबारा मुझसे पीट मत जाना।”“तुम भी सावधान रहो। इस बार, मैं पक्का तुम्हारे सप्ततीर की चाल को बेअसर कर दूंगा।” वरुण ने ध्यान केंद्रित किया और तीरों की बौछार का इंतजार करने लगा।निधि हल्के से मुस्कुराई और उसके बाद, उसकी उंगलियाँ किसी भूत की तरह हिलने लगीं। उसने तुरंत अपना धनुष निकाला और तीर चला दिया, जैसे कि निशाना लगाना महत्वहीन था।

जब उसने पूरी प्रक्रिया को बार बार दोहराया तो एक के बाद एक तीर छूटते गए – अपनी पीठ के तरकश से एक तीर निकालना, धनुष की प्रत्यंचा खींचना और निशाना लगाना. यह किसी सामान्य इंसान की सांस लेने के पैटर्न जैसा था। हर तीर आश्चर्यजनक रूप से तेज़ और शक्तिशाली था।वरुण ने कमर पर लटकी सेबर पहले ही मयान से बाहर निकाल ली थी।उसकी ओर आने वाले किसी भी तीर को उसके सेबर चलाने की तकनीक द्वारा बनाए गए प्रभाव क्षेत्र या कहो क्षेत्र गुंबद द्वारा रोक दिया गया था।“वरुण, तुम्हारा सेबर आर्ट और भी ज्यादा शक्तिशाली होता जा रहा है। देखने में तो यही लगता है कि मुझे सप्ततीर वर्षा का उपयोग करना होगा”, निधि ने वार करते समय धृष्टता भरी हंसी हंसते हुए कहा। जाहिर है, ऐसे तीर चलाना उसके लिए बहुत ही आसान था।

शूऽऽऽऽ!
आवाज धीमी होने से पहले, निधि द्वारा छोड़ा गया तीर एक कर्ण भेदी चीख के साथ आया।तीर को पास आता देख! वरुण और भी ज्यादा गंभीर हो गया।
बूम! बूम!वरुण ने सेबर से एक अर्धचंद्राकर आर्क बनाया, जो गुंबद की तरह तीरों को को रोकने का काम करने लगा। हालाँकि, सप्ततीर वर्षा एक हत्यारा चाल थी, जिसमे बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा की खपत होती थी। तीरों की गति हर दूसरे तीर के आने के साथ बढ़ जाती थी।छठे तीर पर वरुण के हाथ से सेबर छूट गई। अनजाने में पीछे लड़खड़ाने से पहले उसे अपने सीने में दर्द महसूस हुआ। शायद उसके सीने पर चोट लगी थी।

“मैं अभी भी इसे रोक नहीं सकता।” वरुण ने मजबूरी में अपना सिर हिलाते हुए कहा।“तुमने मेरे द्वारा विकसित की गई पाँच घातक चालों में से चार को पहले ही नाकाम कर दिया था। जो कुछ बचा था वह सप्ततीर वर्षा है।” निधि ने मुस्कुराते हुए कहा। “यह पहले से ही बहुत प्रभावशाली है। एकेडमी में, पवित्रतत्व पड़ाव का कोई भी शिष्य मेरे त्रिमाया तीर को रोकने में सक्षम नहीं है, लेकिन तुम उसे भी रोक पा रहे हो।”

“मैं बचपन से ही तुम्हारी तीरंदाजी से लड़ता आ रहा हूं। बेशक, मैं तुम्हारी एकेडमी के शिष्यों से बेहतर हूँ।” वरुण ने अपना सिर हिलाया। “इसके अलावा, तुम्हारे तीर बिना सिर के थे, सिरवाले तीर तो और भी तेज़ गति से आयेंगे। मुझे डर है कि मैं तुम्हारी पाँच घातक चालों में से दो से ज्यादा चालों से तो बचाव भी नहीं कर पाऊँगा।”वरुण, क्या तुमने नहीं सुना है? जब कभी ऐसे लोगों के बीच लड़ाई हो जाती है जो एक ही पड़ाव कि ताकत रखते है, तो सामने वाला चाहे कोई भी हो, वो एक तीरंदाज के हमलों का सामना नहीं कर सकता।” निधि ने सहजता से कहा।

“निधि . अगर यह जिंदगी और मौत की स्थिति होती, तो मैं तुम्हारी ओर दौड़ पड़ता।”“ये बात मत भूलो कि, तीरंदाज के पास अंगरक्षक भी होते हैं।” निधि अपने होंठ भींचते बोली। “मेरे अंगरक्षक तुम्हें पकड़ लेते, फिर तुम आसानी से मेरा निशाणा बन जाओगे। क्या पता शायद भविष्य में तुम ही मेरे अंगरक्षक बनोगे!”ये बात सुनकर वरुण अग्रज मुस्कुराया।

वह अच्छी तरह जानता था कि इस दुनिया एक तीरंदाज कितना खतरनाक होता है। किसी भी समूह या दल में, शीर्ष तीरंदाजों को बहुत ऊंचा दर्जा दिया जाता है और उन्हें बहुत अच्छी तरह से संरक्षित किया जाता है


वह अच्छी तरह जानता था कि एक निशानेबाज कितना खतरनाक होता है । किसी भी समूह में, शीर्ष निशानेबाजों को अत्यधिक उच्च दर्जा प्राप्त था और उन्हें बहुत अच्छी तरह से संरक्षित किया जाता था।निधी तीरंदाजी में बहुत प्रतिभाशाली थी।" वरुण, क्या तुम्हारे डीन ने तुम्हे सूर्यमहल की दानव-वध बैठक के बारे में सूचित करने के लिए आज बुलाया है ?" निधी ने पूछा।" हां, मुझे लगता है कि तुम्हे इसकी जानकरी Rising Sun Academy से ही मिली होगी?" वरुण ने पूछा।

" हां!  Rising Sun Academy के शीर्ष दस शिष्यों में से पवित्रतत्त्व पड़ाव में मैं अकेली हूं । डीन ने मुझे एक Seat देने का फैसला किया है ।" निधी ने कहा । " सूर्य महल की दानव-वध प्रतियोगिता में, दानव-वध हम निशानेबाजों की विशेषता के अंदर आता है।"वरुण ने मुस्कुराते हुए कहा, "हालांकि मैं पवित्रतत्व पड़ाव के शीर्ष दस शिष्यों में से एक हूं, फिर भी पवित्रतत्व पड़ाव के लिए मेरी छाया झील Academy के तीन Seat में से एक के लिए लड़ना होगा । यदि मुझे स्थान नहीं मिला, तो मुझे प्रतियोगिता में जाने का अधिकार नहीं मिलेगा ।”

"तो फिर कोशिश के मज़े लो । " निधी हँसकर बोली।“ लापरवाह मत बनो । तुम्हे सूर्य महल की दानव-वध प्रतियोगिता के दौरान दानवों के करीब नहीं जाना चाहिए, " वरुण ने कहा। " चलो Practice करते हैं ।"इतना कहकर वह अचानक आगे बढ़ गया।" अगर तुम मुझे पकड़ पाओ तो पकड़ो !" निधी तुरंत झुक गई और तीर चलाने के लिए पलट भी गई।कहीं और ,उज्जैन प्रांत के पांच प्रमुख संत वंशो में से एक- बादल वंशईशान्वी अपने पिता अंगद बादल के लिए चाय बना रही थी।"पिताजी, कुछ तो करिए ।" ईशान्वी ने अपने पिता के सामने एक कप चाय को भावपूर्ण ढंग से रखा । अचानक उसकी नज़र अपनी नौकरानी विद्या पर पड़ी, जो अभी-अभी दूर से लौटी थी । उसकी आँखें चमक उठीं और वह तुरंत चिल्लाई, " विद्या (Vidhya )!"

विद्या आज्ञाकारी ढंग से से चलते हुए सामने आई।" कैसा रहा? वरुण ने क्या कहा?" ईशान्वी ने तुरंत पूछा।" छोटे मास्टर वरुण ने कहा है कि, सूर्य महल की दानव-वध बैठक एक महीने के समय में होने वाली है । वे साधना पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं और खुद को तैयार करना चाहते हैं । वे आपके साथ पूर्वीय पहाड़ पर घूमने नहीं जा सकता ।" विद्या फुसफुसाई ।" वो फिर एक बार नहीं आ रहा है? " ईशान्वी कुछ हद तक क्रोधित थी । " वो केवल साधना करना जानता है ।"" छोटे मास्टर वरुण चाहते हैं कि, मैं आपसे कहूं कि, आप साधना करने में अधिक समय व्यतीत करें । हर समय मौज-मस्ती करने के बारे में मत सोचें। ' विद्या ने कहा।" वह अभी भी मुझे नियंत्रित करना चाहता है? " ईशान्वी और भी क्रोधित हो गई ।

" मुझे लगता है वरुण अग्रज सही है।" अंगद जो वहां बैठा था, उसने खुशी से अपनी चाय पी और कहा, " तुम्हे अच्छी तरह से साधना करनी चाहिए । हमेशा इधर-उधर घूमना बंद करो ।'

" पिताजी, वो वरुण एक पत्थरदिल इंसान है ।" ईशान्वी ने अंगद पर नज़र डाली और यह कहने से खुद को नहीं रोक सकी । " जब मैं सिर्फ एक महीने की थी , तो आप लोगों ने मेरी वरुण अग्रज से सगाई का फैसला किया ।  लेकिन मेरा व्यक्तित्व उससे बिल्कुल अलग है । मुझे खेलना पसंद है, और मैं मौज-मस्ती के लिए कई दोस्तों को आमंत्रित करना पसंद करती हूं । लेकिन उसे प्रैक्टिस, पेंटिंग और साधना करना ही पसंद है । बात करते समय हमारे पास कोई साधारण विषय तक नहीं होता है । भविष्य में उससे शादी करने का विचार ही मुझे पागल कर देता है ।'

" यह तो एक अच्छी बात है । ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम मुसीबतें खड़ी करने में बहुत अच्छी हो, इसलिए मुझे तुम्हे वश में करने के लिए उसके जैसे किसी इंसान की जरूरत है ।" अंगद ने मुस्कुराते हुए कहा।ईशान्वी अपने पिता के पास पहुंची और उनकी बांह को गले लगाकर वह चिल्लाती रही। “ पिताजी, मैं आपसे विनती करती हूँ। अग्रज परिवार के पास जाइए और अग्रज चाचा को बताइए कि,  हम सगाई रद्द कर रहे हैं।"" इसके बारे में सोचना भी मत।" अंगदने अपनी चाय पी और उसके अनुरोध को तुरंत अस्वीकार कर दिया।" पापा!" ईशान्वी ने गुस्से में कहा, "आप मुझ पर उससे शादी करने के लिए दबाव डालने पर क्यों जोर दे रहे हैं ? उस समय, मैं एक महीने की बच्ची के रूप में कुछ भी नहीं जानती थी, लेकिन आपने मेरी शादी का फैसला कर लिया। आपको कैसे पता चला कि वरुण अग्रज बड़ा होकर कैसा होगा? आपको कोई अंदाज़ा भी नहीं है, लेकिन फिर भी आपने ज़िद की कि मैं उससे शादी करूँ। आपने कभी मेरे विचारों की परवाह नहीं की. क्या आपको नहीं लगता कि ये बहुत ज़्यादा हो रहा है?”

अंगद ने कहा, " वरुण काफी अच्छी चॉइस है। वो उज्जैन प्रांत के पांच संत कुलों की युवा पीढ़ी के बीच पहले से ही उत्कृष्ट है।“ तो क्या हुआ अगर वह अच्छी चॉइस है ? मैं उसे पसंद नहीं करती !” ईशान्वी ने गुस्से में कहा । "मैं ऐसे तथाकथित Genius से शादी नहीं करना चाहती, जो मेरी रुचियों से मेल नहीं खाता ।"अंगद ने धीरे से चाय का प्याला नीचे रख दिया। उसने अपनी आँखें उठाईं और अपनी बेटी की ओर उदासीनता से देखा । ईशान्वी का दिल कांप उठा।
लेकिन उसके दिल में गर्व ने उसने अपना सिर उठाया और अपने पिता की आंखों में आंखे डालकर बात की ।

"पिछले छह महीनों में, तुम पहले ही मुझसे छह बार अपनी सगाई रद्द करने का अनुरोध कर चुकी हो " अंगद ने ठंडे स्वर में कहा। “ऐसा लगता है जैसे मैंने तुम्हें बहुत ज्यादा ही बिगाड़ रखा है। मैं आज तुम्हारे लिए इसे स्पष्ट कर दूंगा।"ईशान्वी ने अपने पिता की ओर घूरकर देखा।

अंगद ने आगे कहा, " तुम्हारे और वरुण के बीच का विवाह केवल तुम दोनों के बीच नहीं है। यह बादल वंश और अग्रज वंश के बीच का मामला भी है। हालाँकि हमारा बादल परिवार पाँच प्रमुख संत वंशो में से एक है, लेकिन इसकी नींव केवल कुछ दशकों पहले से रखी हुई है । हमारे पास केवल कुछ दर्जन ही वंश के लोग हैं, और हमारे पास अभी भी विरासत का अभाव है। जहाँ तक अग्रज परिवार की बात है, वे एक संत वंश हैं जो हज़ारों सालों से आज तक खड़ा है, और उनके पास 10000 से ज्यादा वंश के लोग हैं । वरुण अग्रज के पिता, विशंभर अग्रज, अग्रज परिवार के अगले लीडर बनेंगे। बादल परिवार की तीसरी पीढ़ी में तुम इकलौती बेटी हो। यदि तुम वरुण से शादी करती हो, तो इससे स्वाभाविक रूप से हमारे दोनों परिवारों के बीच संबंध बेहतर होंगे। इससे हमारे बादल परिवार को बहुत लाभ होगा।”

ईशान्वी ने जवाब दिया, "दादाजी तो पहले ही एक संत Expert बन चुके है। और दादाजी के होते हुए, कोई भी बादल वंश को हिला भी नहीं सकता। इस स्थिति में, आप मुझे एक आजादी भरा जीवन क्यों नहीं जीने दे सकते?”" आजादी? आज़ादी का मतलब है कि तुम जिससे भी शादी करना चाहोगी, उससे शादी करने दू ?” अंगद ने ठंडे स्वर में कहा।"क्यों? क्या मैं नहीं कर सकती? ” ईशान्वी ने अपना सिर उठाया और पूछा, "क्या आप वंश के लिए मेरा बलिदान देना चाहते हैं? पिताजी, आपको शर्म नहीं आती?”

"चुप रहो !"
अंगद गुस्से में खड़ा हो गया और गुस्से से अपनी बेटी की ओर इशारा करते हुए चिल्लाया, " ईशान्वी, जब तुम बाहर जाना और मौज-मस्ती करना चाहती हो, तो तुम्हारे पीछे नौकरों का एक समूह होगा। यदि तुम सर्दियों के बीच में फ्लेमिंग ड्रैगन मछली खाना चाहती हो, तो तुम्हारे लिए उसे ढूंढने के लिए कोई अपनी जान जोखिम में डाल देगा। यहां तक कि जब तुम अपनी साधना में प्रयास नहीं करती हो, तब भी तुम पर बहुत सारा खजाना खर्च किया जाता है, जिससे तुम इस वर्ष पवित्रतत्व के पड़ाव तक पहुंच सको। मैंने तुम्हारे मार्गदर्शन के लिए विशेषज्ञों को काम पर रखा है, और क्योंकि तुम कमजोर हो, इसलिए मुझे तुम्हारी गुप्त रूप से रक्षा करने के लिए तीन नश्वरता पातन पड़ाव के गार्ड वंश से मिले हैं। उन तीनों को हर महीने किराये पर लेने के लिए 500 चांदी के सिक्के का खर्च आता है, जिसमें गार्ड को दिए जाने वाले आवश्यक अन्य सभी खजाने शामिल नहीं हैं."

" तुम्हारे लापरवाही के जीवन के लिए, क्या तुम जानती हो कि वंश ने कितना बलिदान दिया है?" अंगदने अपनी बेटी को घूरकर देखते हुए कहा।ईशान्वी स्तब्ध रह गई। वह मूर्ख नहीं थी।एक साधारण गिनती से, वह जानती थी कि ऐसा जीवन जीने के लिए वंश को उस पर कितनी चौंका देने वाली राशि खर्च करनी पड़ती होगी।"तुमने परिवार के लाभों का आनंद लिया है, इसलिए तुमको परिणाम भुगतना होगा!" अंगद गुस्से से चिल्लाया। “तुम केवल लाभों का आनंद लेना चाहती हो और कुछ भी योगदान नहीं करना चाहती हो? फिर तो ही सपने देखती रहो!"

"इसके अलावा, मुझे पता है कि तुम्हारा Academy में विश्वक सेन नाम का एक साथी है। वह हाल ही में तुम्हारी तरफ काफी ध्यान दे रहा है, ठीक कहा ना ?" अंगद ने व्यंग्य किया। “वह सिर्फ एक लड़का है जो सेन परिवार के मुख्य वंशावली से नहीं है। क्या वह सोचता है कि वह मेरी बेटी से शादी करने के लायक है? उसे खुद को आईने में देखना चाहिए कि वह कौन है!”

"पिताजी, सीनियर विश्वक और मैं." ईशान्वी ने तुरंत समझाने की कोशिश की।
"जब भी मुझे पता चलेगा कि तुम दोनों के बीच कुछ भी चल रहा है जिससे बादल परिवार और अग्रज परिवार की प्रतिष्ठा खराब हो सकती है, न केवल उसे मरना होगा, यहां तक कि तुम्हें भी नहीं बख्शा जाएगा! ये करते हुए मैं पीछे नहीं हटूंगा!” अंगद ने अपनी डरी हुई बेटी को उदासीनता से देखा। "जब समय आए तो मुझे पत्थरदिल होने के लिए दोष मत देना।"

ईशान्वी को अपनी रीढ़ की हड्डी में ठंडक महसूस हुई। इतना ठंडा व्यवहार करते हुए उसने कभी अपने पिता का चेहरा नहीं देखा था। इस वर्ष वह केवल पन्द्रह वर्ष की थी।" बेटी।" अंगद की अभिव्यक्ति नरम हो गई। “पारिवारिक वंशो के बीच विवाह गठबंधन ऐसा ही होता है। चाहे वह कितना भी बेकार क्यों न हो, तुम्हें उससे विवाह करना ही होगा। तुम्हारी माँ से मेरी शादी भी तुम्हारे दादाजी ने तय की थी। मुझे कोई विकल्प नहीं मिला था! वरुण के बारे में कहा जाए तो उसका व्यक्तित्व काफी अच्छा है। वो तुम्हे खुश रखेगा।”

ऐसा कहने के बाद, अंगद बादल ने कांपती हुई महिला नौकरानी विद्या पर एक नजर डाली और आदेश दिया, " विद्या ईशान्वी पर नजर रखो। उसे आगे से कोई ग़लती मत करने देना।"जी" विद्या ने जल्दी से जवाब दिया।अंगद बादल फिर अपने हाथों को अपनी पीठ के पीछे बांधकर चला गया।ईशान्वी वहां खड़ी रही और अपने पिता को जाते हुए एकटक देखती रही। उसने इन शब्दों के बारे में सोचा ".यहां तक कि तुम्हें भी नहीं बख्शा जाएगा! मैं पीछे नहीं हटूंगा! जब समय आये तो मुझे पत्थरदिल होने के लिए दोष मत देना।” इस वाक्य ने ईशान्वी को बहुत डरा दिया।

उसे लगा कि यह दुनिया उस दुनिया से बहुत ही अलग है जिसकी उसने इतने सालों में कल्पना की थी।