हंटर - 4 Ram Make द्वारा यात्रा विशेष में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

हंटर - 4




"कियान।" विशंभर ने कुछ ही दूरी पर एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को इशारा किया। कियान वशिष्ठ - जो वरुण की सेवा करने वाला एक पुराना नौकर था, जल्दी से वहाँ चला गया।

"मुझे बताओ," विशंभर ने दबी आवाज में कहा, "वरुण आज कितने समय से अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस कर रहा है?"

“मास्टर, छोटे मास्टर ने सुबह-सुबह अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस को शुरू कर दिया था। खाने और आराम करने के अलावा, वह रुके नहीं है!” कियान ने तुरंत कहा।

“उसने इतनी देर तक प्रैक्टिस की?” विशंभर ने यह सुनते ही भौंहें चढ़ा दीं।

"रात में औषधि स्नान करने के बाद भी, छोटे मास्टर ने अगले दो घंटों तक अपने आंगन में अपने सेबर आर्ट की प्रैक्टिस को जारी रखेंगे।" कियान यह कहने से खुद को नहीं रोक सका, "पिछले कुछ दिनों से, खाने, सोने, पेंटिंग करने, औषधीय स्नान करने और पवित्रतत्व पड़ाव की साधना के अलावा. वह हर दिन लगभग बारह से चौदह घंटों तक सेबर आर्ट की प्रैक्टिस करते है ।”

“पिछले कुछ दिनों से?” विशंभर बड़बड़ाया। पिछले कुछ दिनों में? उसके बेटे को इस तरह के पागलपन भरे प्रशिक्षण के लिए किस बात ने इतना उत्तेजित किया होगा? क्या सगाई के रद्द होने की वजह से?

“हाँ, पिछले कुछ दिनों से!” कियान ने कहा। “उससे ठीक पहले, छोटे मास्टर तो अच्छे मूड में ही थे। यहां तक कि उन्होंने मुझसे कुछ संतों की जीवनियां खरीदने के लिए कहा और इतने पागलपन भरे प्रैक्टिस को किया भी नही था। लेकिन मुझे नहीं पता कि पिछले कुछ दिनों में क्या हुआ। मैने उन्हें समझाने के बहुत प्रयास किए पर उन्होंने मुझे अनसुना कर दिया।”

थोड़ी देर बाद, प्रशिक्षण मैदान में।

वरुण पत्पर्ण सेबर आर्ट की प्रैक्टिस करने में पूरी तरह से dub गया था।

"वरुण।"विशंभर की आवाज़ गूंज उठी।

"बाबा।" वरुण रुका और देखा कि विशंभर दस से अधिक लोगों को लेकर आ रहे थे।

विशंभर ने मुस्कुराते हुए कहा, "वरुण, वंश ने तुम्हे आगे बढ़ने में और अधिक प्रयास करने का फैसला किया है। आज से, ये आठ पवित्रतत्व पड़ाव और तीन नश्वरता पातन पड़ाव के योद्धा तुम्हारे साथी होंगे।

"क्या मेरे पास लड़ने के लिए गार्ड नहीं हैं?" वरुण आश्चर्यचकित था।

उसके पास पहले से ही आठ पवित्रतत्व पड़ाव के गार्ड और दो नश्वरता पातन पड़ाव के गार्ड थे। वे सेबर आर्ट की प्रैक्टिस के दौरान कभी-कभी वे उसकी मदद करते थे।

“वे गार्ड हैं। ये वे योद्धा हैं जो युद्धकला में माहिर हैं। उदाहरण के लिए, इन आठ पवित्रतत्व पड़ाव के योद्धाओं में से एक तीरंदाजी में कुशल है, और दूसरा वार के दिशा समझने और उससे बचाव करने में कुशल है। इससे तुम्हे साधना में बहुत मदद होगी, ”विशंभर ने कहा। "इसके अलावा, तुम्हारे गार्ड के रूप में, हम उन्हें अक्सर तुम्हारे साथ झगड़ने नहीं दे सकते, ठीक है?"

वरुण ने सिर हिलाया।

गार्ड अच्छी तरह से पैसों केलिए काम करने वाले लोग होते है (जैसे की paid employees)। अगर वे कभी-कभार वरुण के साथ युद्ध करते तो ठीक था, लेकिन अगर ऐसा अक्सर बहुत ज्यादा होने लगा तो उनकी तरफ से नाइंसाफी की शिकायते सामने आने लग जायेगी।

“यह बताने की कोई आवश्यकता नहीं है कि ये तीन नश्वरता पातन पड़ाव के एक्सपर्ट तुम्हे कितनी सहायता प्रदान कर सकते हैं। यह" - विशंभर ने एक पतले, मूंछों वाले आदमी की ओर इशारा किया - "भाई नवीन बेदी है, जो अखंडता पड़ाव के एक सीनियर है।"

"सीनियर नवीन।" वरुण तुरंत सम्मानपूर्वक झुक गया। एक अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट्स को उज्जैन शहर में उच्च दर्जा प्राप्त था। नवीन बेदी शहर के एक रक्षक संगठन में दूसरे नंबर पर थे।

"इतना विनम्र होने की कोई ज़रूरत नहीं है, छोटे मास्टर वरुण।" नवीन मुस्कुराया.

“आज से, अखंडता पड़ाव के छह Expert हर महीने तुम्हारे साथ युद्ध करेंगे। उनमें से हर कोई महीने के पांच दिन, और दिन में दो घंटे प्रैक्टिस के दौरान तुम्हारे साथ रहेगा,' विशंभर ने गंभीरता से कहा। “वंश ने तुम्हारे साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए छह अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट्स को नियुक्त करने के लिए एक बड़ी कीमत चुकाई है। तुम्हे इस मौके का पूरी तरह से लाभ उठाना होगा।”

"जी।" यह कहते हुए वरुण हैरान भी था।

उज्जैन प्रांत में अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट्स सभी महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। उनका समय बहुत कीमती था; वे हर दिन उसको एक महीना प्रैक्टिस मे करने में नहीं बिता सकते थे। आख़िरकार उनके पास करने के लिए बहुत सारी चीज़ें थीं। वे पहले से ही उदार थे जो यदि वे लगातार पाँच दिनों तक हर दिन दो घंटे उसके साथ बिताने को तैयार थे। फिर भी, वंश ने छह अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट्स को काम पर रखा. वरुण के साथ हर दिन युद्ध करने के लिए एक अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट को चुना गया था।

"वरुण, इंसान के सपने बहुत बड़े होने चाहिए। बीवी न होने के बारे में चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम्हे कड़ी मेहनत करनी होगी। परिवार की अपेक्षाओं को पूरा करने केलिए।” बोलने के बाद, विशंभर बाहर चले गए।

बीवी न होने के बारे में चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है? बाबा का इससे क्या मतलब था?

"बाबा, बीवी न होने के बारे में चिंता करने की ज़रूरत न होने से आपका क्या मतलब है?" वरुण ने तुरंत पूछा।

"मैं नहीं चाहता कि तुम्हारी कल्पनाओं की वजह से तुम जंगली हो जाए," विशंभर ने कहा और प्रशिक्षण मैदान को छोड़ दिया।

“कैसी कल्पना?” पास के युद्ध विशेषज्ञों की ओर देखने से पहले वरुण बुदबुदाया। उसकी आंखें चमक उठीं.

सेबर आर्ट की तकनीके हत्या करने के लिए थीं।

एक संयमित साथी के साथ, प्रैक्टिस के परिणाम बहुत बेहतर होंगे। भले ही अतीत में उसके पास झगड़ने वाले साथी थे, लेकिन अब जो उसके पास है उनकी तुलना कैसे की जा सकती है? उनके पास पवित्रतत्व पड़ाव से लेकर अखंडता पड़ाव तक के साथी थे!

उस दिन के बाद से, वरुण ने सुबह होने से पहले अपने सेबर आर्ट की प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया और सुबह में साथी खिलाड़ियों के होने का लाभ उठाया।

जब दोपहर या रात का समय होता, तो वह अकेले ही साधना करता था। उसे सुबह के युद्ध प्रशिक्षण पर भी ध्यान केंद्रित करने और उस पर विचार करने की आवश्यकता थी।

जैसे-जैसे वरुण की मनःस्थिति बदली, वह पत्पर्ण के 81 रुखों में से प्रत्येक रुख में से अद्वितीय आकर्षण को महसूस करने लगा क्योंकि उसने खुद को पूरी तरह से तकनीक की प्रैक्टिस में डुबो दिया था। उसने जल्द ही गुप्त तकनीक, तिहेरी ऋतुपर्ण की विधि के खोज लिया।

उन्हें धीरे-धीरे एहसास हुआ कि 81 रुखमुद्राओं की सुंदरता को एक के बाद एक प्रैक्टिस करने के बाद जोड़ा जा सकता है।

उदाहरण के लिए, पहला रुख सेबर निकालने का रुख था। वह बहुत ही तीक्ष्ण और शक्तिशाली था। दूसरा रुख घूमता चंद्र रुख था वो विचित्र और अलौकिक था। जब उसने तीसरे रुख खुलते नभ का रुख को शुरू किया तो वो अलौकिकता और विचित्रता से अचानक एक हत्यारे कदम में बदल गया। फिर उसने चौथे रुख को शुरू किया।

एक के बाद एक चाल।

ये चाले पहाड़ से लुढ़कती हुई चट्टान के जैसी थी; जितनी आगे जायेगी इसकी गति और भी तेज हो जाएगी।

चालें अजेय गति से बढ़ती गईं और वे मूसलाधार लहरों की तरह एक के बाद एक चलती रहीं।

यदि 81 रुखमुद्राओं को वास्तव में एक में जोड़ा जा सकता है, तो इससे उसकी ताकत चरम तक पहुंच सकती है, तो मैं मैनुअल में बताई गई गुप्त तकनीक को "स्वाभाविक रूप से" सीखने में सक्षम हो जाऊंगा! ऐसा इसलिए था क्योंकि वरुण इस बात को समझता था कि वह अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस करने के प्रति इतना जुनूनी था।

यदि 81 रुखों की "सुंदरता" को एक में जोड़ दिया जाए, तो ब्लेड हवा की दिशा को काट देगा, और उसकी दिशा से पूरी तरह से जुड़ जाएगा।

सेबर आर्ट की गति और परिवर्तन ने एक लय बना दी। यह नेचर के गीत जैसा था।

जब प्रत्येक चाल की सुंदरता को जोड़ा गया तो एक पेंटिंग बन गई.

क्योंकि वह अस्पष्ट रूप से इस पड़ाव के पास में आया, वरुण की सफलता पाने की लालसा बढ़ गई।

दिन प्रतिदिन.

वरुण के सेबर आर्ट की सुंदरता जैसे-जैसे खामियों को दूर करती गई, और ज्यादा से ज्यादा परफेक्ट होती गई।

जैसे-जैसे जुड़ते हुए लय में गिरावट आई, सेबर आर्ट की लय और अधिक मधुर हो गई। सेबर आर्ट के वार की दिशा को और भी ज्यादा परफेक्ट बनाती गई।

वरुण अपने सुधार को तीव्रता से महसूस कर सकता था। उसे लगा कि वह उस पड़ाव के काफी करीब पहुँच चुका है।

प्रशिक्षण मैदान के किनारे के पेड़ धीरे धीरे से हरे होने लगे थे, यह संकेत था कि मार्च तेजी से आ रहा था। हमेशा की तरह, वरुण प्रैक्टिस कर रहा था। वह धीरे धीरे उस पड़ाव के करीब पहुंचा, और करीब जाता गया।

शूऽऽऽ।

जैसे-जैसे वरुण ने प्रैक्टिस की, सेबर आर्ट की सुंदरता के लिए उसकी लंबी खोज आखिरकार खत्म हो गई। उसका मांस, हड्डियाँ, मांसपेशियां और हृदय- से होकर उसकी तकनीक उसके शरीर में विलीन हो गई थी। उसकी सेबर आर्ट शरीर और मन से एक होने की स्थिति तक पहुंच गई। वो स्पष्ट रूप से महसूस कर सकता था कि उसके हाथ में थामी हुई सेबर की ब्लेड आने वाली हवा को काट रही है! उसका शरीर, मन और सेबर एक हो गए, वैसे ही सेबर की ब्लेड ने भयानक गति से हवा को काट दिया।

जब वरुण अपनी सेबर आर्ट का उपयोग करता था, तो उसका एक क्लोन सौ फीट से अधिक दूर दिखाई देता था। दोनों भी एक साथ अस्तित्व होते में थे।

हवा में एक हल्का अर्धचंद्राकार सेबर चाप देखा जा सकता था।

तभी वरुण की ऊर्जा खतम हो गई।

मैं- मैंने इसे समझ लिया? वरुण स्तब्ध होकर अपनी जगह पर खड़ा रहा।

वरुण फिर से कोशिश करने से खुद को नहीं रोक सका। एक पल में, उसका शरीर, दिमाग और तकनीक एक हो गए। जैसे ही उसने सेबर को अपने चारों ओर चलाते हुए हवा में छेद किया, उसने प्रशिक्षण मैदान में पीछे छोड़ी गई छवियों को देखा, जैसे कि सेबर आश्चर्यजनक तरीके से चमक को बिखेरते हुए एक के बाद एक दिखाई देने लगी।

ये बहुत तेज़ और अलौकिक था! ये गुप्त तकनीक, तिहेरी ऋतुपर्ण की विशेषता थी। अब उसकी मूवमेंट तकनीक तेज़ और अलौकिक थी! उसकी सीवर आर्ट भी तेज़ और अलौकिक थीं!

इसे लगातार दस बार आज़माने के बाद, अंततः वह रुक गया और वो अपनी उत्तेजना को दबाने में असमर्थ हो गया। तिहेरी ऋतुपर्ण, एक पत्ते का गिरना वर्ष के तीसरे मौसम- शरद ऋतु के आने का संकेत देता है! मुझे आखिरकार ये समझ आ गया! मुझे आखिरकार ये समझ आ गया! मैं आख़िरकार सेबर आर्ट के पहले प्रमुख मंडल- एकता मंडल तक पहुँच ही गया हूँ! मैं, वरुण अग्रज, अब मेरे पास एक संत एक्सपर्ट बनने का मौका है!


मैं आख़िरकार सेबर आर्ट के पहले प्रमुख मंडल- एकता मंडल तक पहुँच ही गया हूँ! मैं, वरुण अग्रज, अब मेरे पास एक संत एक्सपर्ट बनने का मौका है!

वो सच में उत्साहित था। उसने ग्यारह साल की उम्र में पत्पर्ण सेबर आर्ट को सीखना शुरू किया था। तब से चार साल बीत चुके थे।

पिछले चार सालों में उसने कभी भी ढिलाई नहीं बरती, जितना हो सके कड़ी मेहनत की, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि सेबर आर्ट के शुरुआती पड़ाव के दौरान कई उत्कृष्ट साधक थे। हर Academy में ऐसी अनेक प्रतिभाएँ थीं। जब आठ ॲकेडमीयों को मिला दिया जाए तो और भी ज्यादा प्रतिभाएँ थी। हालाँकि, इन उत्कृष्ट साधकों में से. 99% को एकता मंडल ने द्वारा रोक दिया था। वे धीरे-धीरे औसत दर्जे के मानें जायेंगे। ये भी एक चमत्कार ही होगा यदि वे अपने जीवनकाल में अखंडता के पड़ाव तक पहुंच सकें।

हालाँकि, यह उसका लक्ष्य कभी नहीं था। वह एक संत बनना चाहता था! इसीलिए उसने कड़ी मेहनत की थी और कठिन परिश्रम किया था, सब कुछ एक ही लक्ष्य के लिए - संत बनना!जब वह छह साल का था, तब उसके बाबा दानवों से बचते हुए भाग रहे थे, इसलिए वह अपने बाबा की पीठ से बंधा होना नहीं भूला। महत्वपूर्ण क्षण में, उसकी मां ने दानवों को रोककर समय निकालने के लिए दानवों पर हमला करने की पहल की थी।

यह सब उसके बेटे की खातिर था!अपने पिता की पीठ पर उसने अपनी माँ को दानवों से हारते हुए देखा। उस समय, वरुण फूट-फूट कर रोने लगा। उसके बाबा के गालों से आँसू बहते रहे लेकिन वे पीछे नहीं मुड़े; उन्होंने अपनी पूरी ताकत से भागने पर ध्यान केंद्रित किया। अंत में, वरुण बच गया।

जितनी जल्दी साधना शुरू की जाए, उतना ही अच्छा होता है। क्योंकि एक नश्वर इंसान का शरीर बीस साल की आयु में अपने चरम पर पहुँच जाता है। उसके बाद साधना की बढ़त धीमी हो जाती है। वरुण ने मन ही मन सोचा, अभी, उज्जैन प्रांत में नंबर एक की प्रतिभा- भार्गव छेत्री ने पंद्रह साल की उम्र में गुप्त तकनीक का पता लगा लिया। ठीक एक महीने पहले, उसने बीस साल की उम्र में आइस बल मंडल के बारे में इनसाइट को समझ लिया था। वो सूर्य महल के भीतर रहने और वहां साधना करने में भी सक्षम है।भर्गव उज्जैन प्रान्त के एक साधारण परिवार से आता था। उसकी माँ एक नौकरानी थीं, और उनके पिता केवल नश्वरता पातन पड़ाव में थे।

हालाँकि, भार्गव ने पंद्रह साल की उम्र में Academy को चौंकाते हुए गुप्त तकनीक का पता लगा लिया था। Academy ने तुरंत अपनी पूरी ताकत से उसको रिसोर्सेस देना मुहैया कराए। यहां तक कि संत वंश भी अपने वंश की मेन ब्रांच के लड़कियों की शादी उससे करना चाहते थे, लेकिन भार्गव का ध्यान साधना पर केंद्रित था। उसे संत वंशों के द्वारा दिए गए प्रलोभन में वो नही पड़ा.आख़िरकार, 12 जनवरी को, भार्गव ने "आइस बल" का पता लगा लिया। बीस साल की उम्र में उसने बमुश्किल समय पर "बल" मंडल में कदम रखा। इस वर्ष, उसे सबसे साधना के क्षेत्र में सबसे प्राचीन भूमि, विध्यांचल पर्वत में प्रवेश मिल जाएगा।विध्यांचल पर्वत के नियमों के अनुसार, प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वाला कोई भी व्यक्ति बीस वर्ष से अधिक नहीं हो सकता।

मैं एकता मंडल में पहुँच गया हूँ। यह तो सिर्फ पहला कदम है. अभी भी "सेबर बल" और "कोर को बनाने" जैसी कई सीमाएँ हैं। वरुण ने धीरे से बुदबुदाया, "मैं ऐसे ही नही बैठ सकता।" उसने अपने आस-पास का निरीक्षण किया और देखा कि प्रशिक्षण मैदान में वह एकमात्र व्यक्ति था। और बाकी सिर्फ हरे भरे पेड़ थे।क्या संयोग है। वरुण अपनी हैरानी से बाहर निकला। आज 27 फरवरी ह। मैंने सच में Academy में सीटों के बटवारे के लिए होने वाली लढाई से एक दिन पहले एक सफलता हासिल की।कभी-कभी, दुनिया में चीज़ें महज़ संयोग होती थीं।

अगली सुबह।
वरुण और निधी नाश्ता कर रहे थे।
पूरा अग्रज परिवार इस समय युवा पीढ़ी को तैयार करने की पूरी कोशिश कर रहा था। उन्होंने वरुण के साथ युद्ध प्रशिक्षण करने के लिए अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट्स को काम पर रखा था। विशंभर जिन्होंने सेबर बल को समझ लिया था और एक अखंडता पड़ाव के एक्सपर्ट थे, स्वाभाविक रूप से उन्हें भी वंश के कई कामों के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। वे हाल ही में पुश्तैनी हवेली में रह रहे थे और वंश के कई सारे बच्चों को पढ़ा रहे थे। जहाँ तक वरुण की बात है, उसके पास अपने बाबा का मार्गदर्शन प्राप्त करने के बहुत सारे अवसर थे। वह पहले से ही अपने बाबा की शिक्षाओं से बहुत परिचित थे। हालाँकि, निधी के पिता विद्याधर यादव बहुत रहस्यमयी थे। उन्होंने साल का अधिकांश समय बाहर ही बिताया।"वरुण, तुम्हारी Academy में आज सीटों के बटवारे के लिए लड़ाई होने वाली है, है ना?" निधी ने सहजता से कहा, "मुझे पहले ही सीट मिल गई है।"वरुण ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं भी इसे आज ले ही लूंगा।"

"क्या तुम इतने आश्वस्त हैं?" निधी ने मुस्कुराते हुए पूछा। "तुम्हे विश्वास है कि तुम पवित्रतत्व पड़ाव के टॉप पर पहुँचने से पहले ही छाया झील Academy की तीन सीटों में से एक को प्राप्त कर सकते हो?""क्या करोगी अगर मुझे भी एक सीट मिल गई तो ?"निधी ने वरुण को ध्यान से देखा और कहा। “अगर तुम्हें सीट मिल जाए, तो मैं अगले एक महीने के लिए तुम्हारा रात का खाना बनाऊंगी।” लेकिन अगर तुम सीट प्राप्त नहीं कर पाते हो तो -हेहे- तो तुम्हे मुझे अपनी विराश्व दे देनी होगी ! तो बोलो क्या तुम मेरी शर्त को मानने की हिम्मत करोगे?
वरुण हँसा।उसके कलात्मक कौशल ने बहुत समय पहले ही उज्जैन प्रांत के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों को पीछे छोड़ दिया था। बेशक, कम ही कलाकार इसके अपवाद थे।

विराश्व वरुण की महान कलाकृति थी। यह एक लंबे स्क्रॉल पर बनी हुई पेंटिंग का एक नमूना थी। इसमें अलग भाव वाले सौ घोड़े शामिल थे। इसे बनाने में उसे एक साल से ज्यादा का समय लगा था। निधी की नज़र उस पर तब से थी जब से उसने पहली बार उसे देखा था। यहां तक कि ईशान्वी ने भी इसे एक बार देखने के बाद इसके लिए तीन हजार चांदी के सिक्के और बेशकीमती पत्थर के दो टुकड़ों की पेशकश की थी।“अगर मैं हार गया, तो मुझे विराश्व को छोड़ना होगा। अगर मैं जीत गया, तो तुम केवल एक महीने के लिए मेरे लिए रात का खाना बनाओगी। क्या यह थोड़ा अनुचित नहीं है?” वरुण ने झिझक के साथ पूछा।“यह सिर्फ एक महीने के लिए है! क्या तुम में हिम्मत है?" निधी ने उसे घूरकर देखा।

“आमतौर पर मेरे लिए भोजन बनाना तुम्हारे लिए बहुत कठिन है। ठीक है, मैं यह शर्त लगाता हूं।' वरुण ने अपने दाँत भींच लिये और कहा। "जब तुम हार जाओ तो पछतावा मत करना।"ऐसा तो मुझे कहना चाहिए!" निधी ने अपने खाने के बर्तन नीचे रखे और जाने के लिए खड़ी हो गई। “मैं Academy जा रही हूं। बाद में डर के मारे पीछे मत हटना क्योंकि तुम दोपहर में हार गए।'ता मत करो।" वरुण ने इत्मीनान से अपना दलिया पिया। वह अपनी प्यारी निधी के पूरे एक महीने के लिए रात का खाना बनाने के प्रस्ताव को क्यों अस्वीकार करेगा?
अपना खाना खतम करने के बाद, उसने अपने मुँह का कोना पोंछा और फुरसत से अपनी Academy की ओर चल दिया

छाया झील एकेडमी।

एकेडमी में पहुंचने के बाद, उसे एहसास हुआ कि कई शिष्य मैदान में आ गए थे।

“सीनियर वरुण जरूर से जीतेंगे।”

“सीनियर वरुण, आप निश्चित रूप से शीर्ष तीन में प्रवेश करेंगे।”

कई जूनियर शिष्य अत्यंत उत्साहित थे। उन सभी को पता था कि दानव वध बैठक में भाग लेने वाले शिष्यों का आज अंतिम चयन है। एकेडमी के शिष्य यह भी चाहते थे कि वे शिखर नदी समूह के अपने सीनियर्स की प्रतियोगिता देखें। क्योंकि वरुण कभी कभी अपने जूनियरों को गाइड करने के लिए तैयार रहता था, इसीलिए उनमें से कई शिष्यों ने उसका समर्थन किया।

“हालाँकि मैं चाहता हूँ कि सीनियर वरुण जीतें, लेकिन ईमानदारी से कहूँ तो उन्हें किसी भी तरह का फायदा नहीं है। ये पवित्र तत्व पड़ाव के शीर्ष दस शिष्यों के बीच की लड़ाई है, इसलिए उनके शीर्ष तीन में आने की संभावना सच में बहुत कम है।”

“शीर्ष दस शिष्यों के बीच सबसे हालिया प्रतियोगिता में सीनियर कौस्तुभ और सीनियर सोम का मुकाबला बराबरी पर खतम हुआ था। इसलिए ये तो बेशक है कि दोनो भी एक एक सीट लेंगे। कई जूनियर्स गरमागरम बातों में लगे हुए थे। उनमें से कुछ ने आँख बंद करके अपने पसंदीदा सीनियर का समर्थन किया, जबकि कुछ शिष्यों ने विश्लेषण करके तर्क लगाना शुरू किया। हालाँकि, उन सभी में एक बात समान थी। वे सभी लड़ाई शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

अखाड़े में सौ फुट का मंच था, जो शिष्यों को मंच के पास आने से और मंच पर दिखाई गई शक्तियों को मंच के नीचे जाने से रोकता था।

वरुण और बाकी सीनियर्स इंतजार करते हुए एक के बाद एक पहुंचे। एकेडमी के प्रोफेसर्स ने हर एक के हथियारों की जाँच की, यह पुष्टि करने के लिए कि वे सभी बिना धार के थे।

एक दुबला पतला आदमी, जिससे शराब की बदबू आ रही थी, शराब की बोतल लेकर वहां से गुजरा।

“डीन।”

“डीन।”

सभी शिष्य उस आदमी को बहुत आदर दिखा रहे थे। यहां तक कि शिखर नदी के 22 शिष्यों ने भी आदर से अपना सिर झुकाया। यह छाया झील एकेडमी के डीन सोमवर्ण शास्त्री थे। उनकी प्रतिष्ठा काफी भयानक थी – वह अपने लालच और शराब के प्रति रुचि के लिए जाने जाते थे। वे लापरवाही से काम किया करते थे।

“ठीक है, हर कोई यहाँ मौजूद है।” हालाँकि डीन सोमवर्ण का चेहरा पूरी तरह से लाल था और उनसे शराब की दुर्गंध आ रही थी, फिर भी सभी शिष्य उनके सामने बहुत आज्ञाकारी बने हुए थे। प्रोफेसर्स और उनके मददगारों ने एक शब्द भी बोलने की हिम्मत नहीं की। क्योंकि उनके सामने वाले आदमी ने तेजी वाली सेबर आर्ट में सर्वश्रेष्ठ होने का खिताब अर्जित किया था।

“तुममें से केवल छह लोग ही नश्वरता त्याग पड़ाव में हैं। चयन की प्रक्रिया आसान ही होगी,” डीन सोमवर्ण ने कहा। “तुममें से छह पहले लड़ाई कर सकते हैं और हम उनमें से ही शीर्ष तीन को चुनेंगे।”

“डीन।”

एक लड़के ने झुककर कहा, “सेन भाई और मैं हाल ही में नश्वरता त्याग पड़ाव में पहुँचे हैं और अभी भी नश्वरता त्याग पड़ाव के शुरुवाती स्तर में हैं। हम स्वीकार करते हैं कि हममें ताकत की कमी है और हम मुकाबले को न लड़ना चुनते हैं।‘’

“डीन, हम कल रात को पहले ही लड़ चुके हैं। मैं तीनों लड़ाइयाँ हार गया हूं,’’ एक धृष्ठ पुष्ट, सांवली त्वचा वाले युवक ने कहा।

“ओह?”

यह सुनकर डीन सोमवर्ण ने सिर हिलाया। वे अपने शिष्यों की ताकत को भी जानते थे। “ठीक है, चूँकि यह मामला है, सूर्य महल की दानव वध बैठक में जाने वाले लोग समर्थ सिसोदिया और चालुक्य बंधु होंगे।”

“जी।” समर्थ और अन्य दो ने सम्मानपूर्वक उत्तर दिया।

समर्थ ने पूर्ण नश्वरता त्याग पड़ाव में था।

चालुक्य बंधु भी नश्वरता त्याग पड़ाव के अंतिम स्तर में थे, इसलिए उन्हें ताकत का लाभ मिला।

“पवित्र तत्व पड़ाव में कुल 16 शिखर नदी समूह के शिष्य हैं।” ये कहते हुए डीन सोमवर्ण ने वरुण और बाकियों की ओर देखा। “तुम में से हर कोई इन सीटों के लिए मुकाबला कर सकता है। मैं नियम बना रहा हूं। जिनको आत्मविश्वास है वे सीधे मैदान में उतर सकते हैं! तुम्हे तुम्हारे साथी शिष्यों से चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जब तक तुम लगातार पांच मैच जीतते हो, तो तुम एक सीट प्राप्त कर लोगे। साथ ही. दो हार खुद ही तुम्हे अयोग्य घोषित कर देगी।

“ठीक है, चलो अब शुरू करते हैं।” जैसे ही डीन सोमवर्ण बोले, उन्होंने शराब की बोतल को मुंह लगाया और एक बड़ा घूंट पी लिया।

सोलह पवित्र तत्व पड़ाव के शिष्य चुप हो गए।






मैदान में उतरना और लगातार पांच मैच जीतना? इसका मतलब, मैदान में सबसे पहले जो भी प्रवेश करेगा उसका नुकसान होगा!

दो सीट लेने के बाद तीसरे सीट के लिए मुकाबला करना बहुत आसान होगा क्योंकि दो सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी चले गए पहले ही प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गए होंगे।

“पहले कौन जा रहा है?” शिखर नदी समूह के अधिकांश शिष्यों की निगाहें दो शिष्यों पर टिकी थीं – मांसल और मुस्कुराता हुआ कौस्तुभ चंदेला और सख्त और ठंडे चेहरे वाला सोम श्वेत। दस सबसे मजबूत शिष्यों के मुकाबले में, पहला स्थान आम तौर पर उन दोने के बीच ही तय किया जाता था।

“तुम ऊपर नहीं जा रहे हो?” कौस्तुभ ने सोम की और देखकर मुस्कुराते हुए कहा।

“यदि तुम गए तो तुम्हारे बाद,” सोम ने ठंडे स्वर में कहा।

उसी पल.

एक परछाई ने एक कदम आगे बढ़ाया और मैदान में प्रवेश किया। यह कोई और नहीं बल्कि वरुण अग्रज था।

उसने चौंके हुए साथी शिष्यों पर अपनी निगाहें घुमाईं और कहा, “मुझे लगता है कि पहला स्थान मेरा है।”

वरुण के काम ने सच में शिखर नदी समूह के बाकी शिष्यों को चौंका दिया। वह समूह में विशेष रूप से उत्कृष्ट नहीं था, और वह अपेक्षाकृत एक नया शिष्य था। हालाँकि उसके पिता अग्रज परिवार के होने वाले वंश हेड थे, लेकिन उसमें वह अहंकार नहीं था जिसकी कोई उम्मीद कर सकता था। उसके साथी शिष्यों में उसके बारे में अच्छी धारणा थी, लेकिन इस बार उसने सबसे पहले अखाड़े में उतरने की पहल की थी। उसने यहां तक कहा “मुझे लगता है कि पहला स्थान मेरा है।”

यह वाकई में एक ऐसा काम था जिससे उसके सीनियर्स की भावनाओं को ठेस पहुंची।

“सीनियर वरुण मंच पर गए?”

“वो पहले क्यों गए?”

“पहले दो सीट हासिल किए जाने के बाद ऊपर जाने में भी कोई देर नहीं हो जाती।” दूर से देख रहे जूनियर्स तो और भी हैरान हो गए थे।

यहां तक कि शराब पी रहे डीन सोमवर्ण भी आश्चर्यचकित थे। शराब के प्रति उनके लालच और रुचि के कारण वह अक्सर उज्जैन प्रांत की सबसे अच्छी सराय के मालिक विशंभर अग्रज का फायदा उठाते था। उन्हें विशंभर के बेटे से भी काफी लगाव भी था, न केवल इसलिए कि वरुण ने अपनी वंश की ताकत का उपयोग करके परेशानियाँ खड़ी नही की, बल्कि इसलिए भी क्योंकि उसे विशंभर से सराय में बहुत लाभ मिलता था।

“जल्दी करो, जो कोई भी वरुण अग्रज को चुनौती देना चाहता है वह मंच पर जा सकता है,” डीन सोमवर्ण ने आग्रह किया।

“मैं वरुण को चुनौती देता हूं।”

ठंडे चेहरे वाले सोम ने एक कदम आगे बढ़ाया और मैदान की ओर चला गया। वरुण की ओर देखते हुए उसकी नज़रे ठंडी थी और जैसे वो उपहास कर रहा था। “वरुण, अगर तुम पहला स्थान लेना चाहते हो तो तुम्हें पहले मुझसे लढ़ना होगा।”

पवित्र तत्व पड़ाव के शीर्ष दस शिष्यों के बीच मुकाबले के दौरान वह कई बार पहले स्थान पर आया था और केवल एक बार कौस्तुभ से हारा था।

पवित्र तत्व पड़ाव के शिखर नदी समूह के शिष्यों में से नश्वरता त्याग पड़ाव के 6 शिष्यों को छोड़कर केवल कौस्तुभ चंदेला (जो जबरदस्त ताकत के साथ पैदा हुआ था) ने उसे हमेशा मुकाबले में बचाव करने के लिए मजबूर किया था। सोम ने अपने अन्य साथी शिष्यों के बारे में कभी कुछ नहीं सोचा। यदि वरुण मैदान में प्रवेश करने वाला पहला व्यक्ति होता तो भी वह किनारे खड़े होकर देख सकता था, लेकिन “मुझे लगता है कि पहला स्थान मेरा है” इन शब्दों ने उसे वरुण को सबक सिखाने के लिए प्रेरित किया।

“पहले आप।”

“सीधी बात, ठीक है।”

सोम ने अपनी पीठ से दो लंबी तलवारें निकल ली। वे बिना धार के थी क्योंकि साथी शिष्यों के बीच मुकाबले में केवल बिना धार वाले हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था।

सोम ने हर हाथ में एक लंबी तलवार पकड़ रखी थी। उसने वरुण की ओर घूरकर देखा और कहा, “तुमने मुझसे सात बार लड़ाई की, लेकिन एक बार भी तुम मेरे दस वार भी झेल नहीं पाए।”

“दोनो हाथ से तलवार चलाने की कला सच में बहुत ताकतवर है,” वरुण ने सिर हिलाते हुए प्रशंसा की।

सोम श्वेत इतना ताकतवर था कि कौस्तुभ चंदेला (जो जबरदस्त ताकत के साथ पैदा हुआ था) भी उसे केवल एक बार हराने में सफल रहा था, इसका कारण उसकी दो तलवारों को एक साथ चलाने की क्षमता थी! कुशलतापूर्वक ज्यादा काम करने के लिए एक सच्चे दोहरे तलवार एक्सपर्ट की आवश्यकता होती है। उनसे लड़ते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि हर तलवार का उपयोग दो अलग अलग योद्धा द्वारा किया जा रहा हो जिन्होंने मिलकर काम करने की ट्रेनिंग ली ही। दो तलवारों का एक साथ उपयोग करने वाले तलवारबाज के खिलाफ लड़ाई में, प्रतिद्वंद्वी को ऐसा महसूस होगा जैसे वे एक बार में दो तलवारबाजों के क्रूर हमले का सामना कर रहे हों। इसी वजह से शिखर नदी समूह के अन्य सभी पवित्र तत्व पड़ाव के शिष्य उससे हार गए थे
“मैं सबसे पहले मैदान में उतरने के लिए तुम्हारे साहस की प्रशंसा करता हूँ। इसीलिए, मैं तुम्हे हार मनवाने के लिए तुम्हारे खिलाफ मेरी जानलेवा चाल विभक्त दिल का इस्तेमाल करूंगा। गर्व और आत्मविश्वास से भरे सोम ने उसके अगले चाल की घोषणा की जो वह इस्तेमाल करने जा रहा था। वरुण को सबक सिखाने के लिए, उसने अपनी सर्वश्रेष्ठ टेक्नीक का उपयोग करने की योजना बनाई थी।

“जैसा आप चाहते हैं वैसा कीजिए।” वरुण जल्दी में नहीं थी। क्योंकि वह गुप्त टेक्नीक को समझकर पहले ही ताकत के एक नए मुकाम पर पहुँच चुका था, इसलिए स्वाभाविक रूप से उसे पहला कदम उठाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इसी लिए उसे लगा बेहतर होगा कि अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरी चाल चलने का मौका दिया जाए।

शूऽऽऽ।

सोम जल्दी से आगे बढ़ा।

वह दोनों तलवारों को हाथ में लेकर तेजी से आगे बढ़ा। भले ही उसे भरोसा था, फिर भी उसने वरुण पर सीधा हमला करते हुए अपनी पूरी ताकत लगा दी। उसकी मूवमेंट टेक्नीक बहुत अजीब थी। एक सेकंड में वह बायीं ओर प्रकट हुआ, दूसरे ही सेकंड में दाहिनी ओर इस अप्रत्याशितता के कारण उसके सही स्थान को तय करना कठिन हो गया था।

पलक झपकते ही, वह पहले से ही अखाड़े को पार करके वरुण के सामने आ पहुंचा था।

“मरो।” सोम वरुण को देखकर मुस्कुराया जब उसने दोनों तलवारों से विभक्त दिल टेक्नीक के वार किया। उसकी राय में, यदि उसे वार लग गया तो बिना धार वाली तलवारें भी वरुण को घायल कर सकती थीं।

वरुण के शरीर पर दो अलग अलग डायरेक्शन से दो तलवारों का वार आया।

“हुंह?” सोम ने अविश्वास से अपनी आँखें चौड़ी कर लीं क्योंकि उसे स्पष्ट रूप से एहसास हुआ कि उसका वार चूक गया है।

फिर उसे अपनी रीढ़ की हड्डी में ठंडक महसूस हुई।

वह चारों ओर घुमा।

उसके पीछे खड़े वरुण ने उसकी गर्दन पर सेबर रखी हुई थी।

ये कैसे हो सकता है? वो इतना तेज़ कैसे हो सकता है? सोम अविश्वास में था। मैंने इसे स्पष्ट रूप से भी नहीं देखा।

वह नहीं जानता था कि क्यों, लेकिन जो दुश्मन उसके ठीक सामने था वह उसके पीछे आ गया था। यहां तक कि उसकी गर्दन पर सेबर को रख भी दिया गया था।

जाहिर है, वरुण के लिए उसे मारना आसान था।
डीन सोमवर्ण (जो इत्मीनान से अपने शराब की बोतल को मुंह लगा रहे थे और इत्मीनान से शराब पी रहे थे। ) स्तब्ध थे। इस दृश्य को देखकर उन्होंने अविश्वास से अपनी आँखें फैला लीं। यहां तक कि उनके हाथ में मौजूद शराब की बोतल भी फिसल कर जमीन पर गिर गई और चकनाचूर हो गई। शराब हर तरफ बहती रही, लेकिन डीन सोमवर्ण ने अपनी प्यारी शराब की ओर देखा तक नहीं। उनकी नज़र पूरी तरह से वरुण पर टिकी थी।

“गुप्त टेक्नीक, तिहेरी ऋतुपर्ण! गुप्त टेक्नीक, तिहेरी ऋतुपर्ण! क्या मैं, सोमवर्ण शास्त्री, एक ऐसे शिष्य तैयार करने में कामयाब हुआ जो इस योग्य हो?” डीन सोमवर्ण ने मन ही मन बुदबुदाया। वह पंद्रह सालों से डीन रहे थे, लेकिन वह कभी भी किसी ऐसे जीनियस को तैयार करने में कामयाब नहीं हुए थे जिसके पास संत बनने का थोड़ा सा मौका हो।

लेक्चरर और टीचर असिस्टेंट भी अवाक रह गए। उनकी तेज़ आँखें एक नज़र में बता सकती थीं कि वरुण ने अभी क्या कदम उठाया है। वे भी समझ गये कि इसका मतलब क्या है।

“ये तो गुप्त टेक्नीक है, तिहेरी ऋतुपर्ण।”

“पत्पर्ण सेबर आर्ट की गुप्त टेक्नीक, तिहेरी ऋतुपर्ण! ये बात सोचना भी कितना अच्छा एहसास देती है की हमारी छाया झील एकेडमी ने एक ऐसा शिष्य का तैयार किया है जिसने गुप्त टेक्नीक का पता लगा लिया है। वह इस साल केवल पंद्रह साल का है। वह पंद्रह साल की उम्र में इसमें महारत हासिल करने में कामयाब रहा। यह सच के अलावा कुछ नहीं हो सकता!”

“हमारी एकेडमी ने एक ऐसा शिष्य तैयार किया है जिसने पंद्रह साल की उम्र में गुप्त टेक्नीक का पता लगा लिया है!”

“यहीं तो हमारी छाया झील एकेडमी है! हाहा.’’

एकेडमी को अपना जीवन समर्पित करने वाले ये लेक्चरर बेहद उत्साहित थे। ये उन के लिए सबसे गौरवशाली पल था। एकेडमी में इतने सारे शिष्यों को पढ़ाने का लक्ष्य सच्चे जीनियसों को तैयार करना था जो आगे जाकर एक दिन संत मंडल के एक्सपर्ट्स बन सकें।

अब जब छाया झील एकेडमी ने ऐसी प्रतिभा उभार कर आई है, तो लेक्चरर उत्साहित क्यों नहीं होंगे? वे कैसे खुशी से पागल नहीं हो सकते थे?

यदि डीन और अन्य लोग उत्साहित थे, तो यह दृश्य देख रहे हजारों शिष्य पूरी तरह से खुशी से पागल हो गए थे।

“भगवान सच में होते है!”

“क्या मैं सपना देख रहा हूँ?”

“ये तो.”

“मैंने दो सीनियर वरुण को देखा; एक सीनियर सोम के सामने, और एक उनके पीछे?”

“यह गुप्त टेक्नीक है, तिहेरी ऋतुपर्ण! यह पत्पर्ण सेबर की गुप्त टेक्नीक तिहेरी ऋतुपर्ण है! डीन अपने लेक्चर के समय हमेशा इसका उपयोग करते हैं।

“यह गुप्त टेक्नीक है, तिहेरी ऋतुपर्ण!”

जगह जगह तरह तरह की चर्चाएं छिड़ गईं। यहां तक कि शिखर नदी समूह के शिष्य भी दंग रह गए थे।

उस समय डीन से लेकर सामान्य शिष्यों तक सभी उत्साहपूर्वक चर्चा कर रहे थे। हर कोई जानता था कि पंद्रह साल की उम्र में गुप्त टेक्नीक का पता लगाने का क्या मतलब है!



तो दोस्तो आप लोगो को कहानी कैसी लगी जरूर बताए और कहानी को आपने दोस्तो के साथ साझा करना बिलकुल भी न भूले और कहानी पसंद आय तो स्टीकर भेजना बिल्कुल न भूले