शहद की गुड़िया - प्रकरण 84
" बचपन से हीं औरत जाति का सन्मान करना दादू फिदरत रही हैं. वह हर किसी स्त्री को देवी का दर्जा देते आये है. तहेदिल से उन के लिये कामना करते रहे है. इस लिये कुछ साफ सुथरी फिल्मों और कहानियो से उन्हें काफ़ी प्रेरणा मिली हैं."
" मीना कुमारी, नूतन और नर्गिस जैसे किरदारों ने उन्हें नारी के त्याग की विधविध तस्वीर से अवगत कराया था. "
" उन्होंने ने एक बार अनन्या को भी नादान होकर देवी का सन्मान दिया था."
" उन्होंने अपनी मा को तो देखा नहीं था. लेकिन वास्तव में वह भी एक देवी थी. उन में कई गुण शामिल थे, जो दादू कोई विरासत में मिले थे."
"गीता बहन में भी उन्होंने ने वही गुण ढूंढने की कोशिश की थी लेकिन ऊस वक़्त उन पर अपनी मा का बुरा प्रभाव था, जिस की वजह से उस की भीतर छिपी देवी कुछ समय तक बाहर नहीं आ पाई थी."
" नई नानी मा को अपनी बेटी के इस विवाह से कुछ दिक्क़त हुई थी. उन के दामाद ने ही अपने मतलब के लिये ऐसा रिश्ता ढूंढा था."
" बड़ी उम्र में अपनी बेटी का विवाह हुआ था. इस बात से उन का बोज उतर गया था. लेकिन उस ने एक बीजवर से शादी की थी, जिस के तीन बच्चे थे. इस लिये वह शादी से नाराज थी. बेटी के सौतेले बच्चों को संपत्ति में हिस्सा देना पड़ेगा. यह बात वह गीता बहन की मा झेल नहीं पाती थी. "
" उन्हों ने शुरू से हीं दादू और उन के भाई बहन से दूरिया बनाये रखी थी.. उन्हें वह काँटों की तरह खटकते थे.वह उन के साथ अछूत जैसा व्यवहार करते थे."
"एक रात बारह बजे के बाद उन की तबियत ख़राब हो गई थी. और दो घंटे में उन का देहांत हो गया था. उस से पहले उन के बडे भाई सुखेश का भी उन के हीं घर में देहांत हुआ था. "
" उस वक़्त दादू की उम्र आठ नौ साल की थी. उस समय क़ोई टेलिफोनिक सेवा भी उपलब्ध नहीं थी. बस भी बंद हो गई थी. और ऐसी स्थिति में उन्हें मौसे मौसी को जानकारी देने चलकर तारदेव तक जाना पड़ा था."
"अपनी मा के जाने के बाद गीता बहन में काफ़ी बदलाव आ गया था. अब दादू और उन की बहन उन के लिये सब कुछ थे. यह बात उन की समझ में आ गई थी. और उन्हों ने हमें अपना लिया था."
"शुरू से गीता बहन अपनी मा के दबाव में रहे थे. उन्हें अपनी मा का बहुत डर लगता था. उन के खिलाफ एक शब्द बोलने की कभी उन्हों ने हिम्मत नहीं जुटाई थी."
" दादू ने तो अपने दिमाग़ से नानी मा की बात को निकाल दिया था: "
" सौतेली मा अक्सर दुख देती हैं!! "
" लेकिन सुखेश और छोटी बहन भाविका के दिमाग़ में यह बात बूरी तरह से संचित हो गई थी. बड़ा भैया तो बीमारी में चल बसे थे , लेकिन उन की के बहन भाविका के दिमाग़ में नानी मा की बात आखरी दम तक घर कर गई थी."
"उन दोनों के बीच कभी सुलह नहीं हो पाई थी."
" गीता बहन उसे बहुत चाहते थे. उस का ख्याल रखते थे. लेकिन भाविका उन की लागणी को लंबे अरसे तक समझ नहीं पाई थी."
" उन के मृत्यु के दो दिन पहले भाविका का जन्म दिवस था. वह दादू घर आई थी. उस वक़्त वह तो घर में नहीं थे . गीता बहन उस के लिये कुछ स्वादिष्ट डिश बना रहे थे. उस वक़्त उन की तबियत बिगड गई थी. "
" वह बेहोश हो गये थे. पिताजी ने तुरंत डोक्टर को बुलाया था. और उन का उपचार शुरू हो गया था. "
" ऑक्सीजन की जरूरत हुई थी. उन्हें तुरंत बोटल चढ़ाई गई थी. उन की हालत काफ़ी नाजुक थी. डोक्टर ने अपनी राय सुना दी थी. "
" 48 घंटे काफ़ी भारी हैं. "
" उन्हें तुरंत अस्पताल में दाखिल करना पड़ा था."
"और 33 घंटे में उन्हों ने देह त्याग दिया था."
" उन के मौत से पिताजी को बड़ा झटका लगा था. उन के नसीब में पत्नी का सुख नहीं लिखा था. उस बात का उन्हें बड़ा अफ़सोस हो रहा था. "
"गीता बहन ने दादू एक सगे बेटे से भी ज्यादा ख्याल रखा था. गरिमा के मुआमले में उन का बुरा हाल हुआ था. तब उन्हे सब से ज्यादा तकलीफ हुई थी."
" दादू यह बात भूला नहीं पाये थे. "
" सुहानी की वजह से दादू ने सिगरेट को गले लगाया था. जो ना तो गीता बहन को पसंद था ना तो पिताजी को. उन्हों ने कई बार दादू सिगरेट पीने के लिये मना किया था. लेकिन वादा करने के बावजूद वह उसे छोड़ नहीं पाये थे. "
" गीता बहन की मौत पर दादू ने शपथ ली थी:"
" मैं सिगरेट नहीं पियूंगा. "
" लेकिन उन्होंने अपने शपथ तोड़ दिये थे."
" और दोबारा सिगरेट को गले लगाया था.
"इस बार ' कीसी ' उस के लिये , कलप्रीट साबित हुई थी. "
"परम् पूज्य महात्मा गांधीजी की एक बात मुझे सतत याद आती थी. "
"स्त्री चरित्र का क़ोई भरोसा नहीं किया जा सकता. "
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" दादू उस के घर गये थे. "
" तब 'कीसी ' ने खुलासा किया था. "
" किशन मेरे लिये जोब की ओफर लाया था."
. " इसी लिये मैं उस से बातें कर रही थी."
" वह ' कीसी ' पर क्यों इतना मेहरबान हो रहा था? "
" उस की नियत पर दादू संदेह होने लगा था . उस को दादू और 'कीसी ' के रिश्ते को लेकर कुछ आपत्ति हो रही थी.. जिस ने मुझे बेतुका सवाल भी किया था. "
" आप फ्लोरा के साथ आते जाते हो. उस के बारे में आप की वाइफ को पता हैं क्या? "
" वह ' कीसी ' को कुछ कहना चाहते थे . लेकिन उस वक़्त वह किशन की बातों से प्रभावित हो गईं थी.. इस लिये वह उसे नाउम्मीद करना नहीं चाहते थे.. इस लिया उन्होंने चुप रहना ही मुनासिब समझा था."
" किशन को नवनीत राय ने अपनी गोद में बिठाकर रखा था. वह उन का HMV बनकर रह गया था.. ओफिस में उस की गिनती एक चमचे में होती थी. वह अंदर जाकर नवनीत राय के सामने सब की फिल्मे उतारता था. "
" उस ने मैनेजमेंट को उन के रिश्तों के बारे में भड़काया था. "
" इस लिये उन्हों ने दादू को कहां था. "
" हमारी ओफिस में डिसीप्लिन- शिस्त का अभाव हैं.. "
" यह उन का दादू और कीसी के रिश्ते पर निर्लज प्रहार था."
" दादू ने उन को डटकर जवाब दिया था."
" शिस्त का नाम लेकर आप कौन सी गंदगी उगल रहे हो. उस का मुझे पता हैं. प्लीझ मुझे अपनी जुबान खोलने के लिये मजबूर मत कीजिये. "
"' कीसी' से भी उन्हों ने ऐसी बातें करने का प्रयास किया था. उस ने भी नेहले पर देहला बनकर जबरदस्त जवाब देकर नवनीत राय की बोलती बंद कर दी थी."
" वह तब से ' कीसी' के पीछे पड़ गया था."
" एक बार 31 मार्च के दिन उन्हों ने सब को जल्दी बुलाया था. उस वक़्त 'कीसी ' ने मना कर दिया था. उस वक़्त नवनीत राय ने मेरी दाढ़ी में हाथ डाला था."
" आप अपनी दोस्त को समजाओ. कल सुबह जल्दी ओफिस आ जाये. कल इम्पोर्ट पोलिसी में बदलाव आने वाला हैं. उस की वजह से हमें नुकसान हो सकता हैं. इस लिये हमें वर्तमान बेनिफिट पाने के लिये कुछ डमी एप्लीकेशन फाइल करनी है! "
" दादू ने कीसी' को समजाया था. और वह आने को तैयार हो गई थी."
0000000000 (क्रमशः )