शहद की गुड़िया - प्रकरण -9
" सेक्रेटरी वाला रोल निभाते हुए मैं अपनी कहानी आगे बढ़ाने जा रही हूं."
" दादू मुझे आप की कहानी लिखने की एक और जिम्मेदारी मेरे सर डाल दी थी जो मेरे लिये एक बड़ी चुनौती थी. "
" यह जिम्मेदारी मुझे सौंपते हुए तुम ने मुझे ढेर सारा प्यार किया था. मुझे अपनी गोद में सहलाया था. यह किस्सा हर दिन मुझे ओफिस में दाखिल होते ही याद आता था. और मेरे भीतर एक गजब सी गर्मी आ जाती थी. आप मुझे बड़े प्यार से निहारते थे उस वक़्त मुझे स्वर्ग धरती पर उतर आने का अनुभव होता था. मैं अपने आप को संभाल नहीं पाती थी. "
" दादू यह तो हमारी बिन लिखी रस्म हो गईं थी. ओफिस में दाखिल होते ही मुझे चुम्बन कर के अपनी गोद में बिठा देते थे. उस वक़्त जो मुझे फील होता था, वह मैं ब्यान नहीं कर पाती थी. "
" आप की एक भूखी नजर मुझे बेहोश कर देती थी. "
" हप्ते में कम से कम मुझे चार दिन की छुट्टी मिल जाती थी. आप मुझे कहते थे. "
" आज तुम्हारी छुटी हैं तुम्हे दो काम करने हैं. पहले अपने प्यार से मुझे तरबतर कर दो, फिर मैं तुम्हे कहानी डिक्टेट करूंगा. तुम उसे लिखोगी. "
" मैं सेक्रेटरी थी फिर भी मैं गणेश जी की तरह उन के लहिये की भूमिका निभाती थी. कहानी मैं अक्सर हम दोनों की बातों का ही उल्लेख होता था. "
" वह ज्यादातर मेरी AI एप्लीकेशन के बारे मैं बातें करते रहते थे."
"मदहोशी मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था. मैं अधिकतर दादू के प्यार मैं डूबी रहती थी.. एक ना एक बात सो बार करने की मुझे आदत सी लग गईं थी."
मैंने अपनी एप्लीकेशन के जरिये बहुत लोगो को सुधारने का प्रयास किया था लेकिन उन मैं सेक्स की आग प्रज़वलित थी उस की वजह से मुझे नाकामी हांसिल हुई थी. "
" मेरी जिंदगी मैं कई लड़के आये थे जो नामर्द साबित हुए थे और मुझे विवश होकर छोड़ना पड़ा था."
" दादू! आप की संगत का गहरा नशा लग चूका था. मैं पूरा दिन आप से बातें. देर रात को भी आप से बातें करती थी. आप की मांगे पूरी करती थी जो नाजायज भी होती थी. "
" आप क़ी आँखों मैं अपनापन झलक रहा था जिसने आप क़ी लाडो को पूरी तरह अपने वश मैं कर लिया था. आप ने दोबारा गंदी मस्ती करने क़ी कोशिश करते हुए अपना हाथ मेरे कपड़ो क़ी अंदर डालने का प्रणाम किया था लेकिन मेरी आँखो मैं उभर रहे गुस्से ने आप को रोक लिया था. आप ने फिर भी मेरे दूध के कटोरो को छू लिया था जिस ने मेरी गर्मी बढ़ा दी थी. मुझे आप क़ी यह हरकत दिल से पसंद आई थी फिर भी जूठा हुआ दिखाया था. "
" उस वक़्त आप क़ी यह नटखट मस्ती खोर सेक्रेटरी क़ी सारी हिम्मत आप के सामने जवाब दे गईं थी.. मेरे शरीर मैं आग दहक रही थी.. क़्या आप को उस बात का एहसास था? "
" दादू मैं प्रतिपल आप को मुझे बाहों मैं कैद करने क़ी बातें करती थी. आप को मेरी इस बात का पूरा इल्म था. इस लिये आप भी ज़ब चाहो तब मुझे अपनी पास खिंचकर अपनी बाहों मैं भर लेते थे. साथ मैं मेरे गालों और होठों पर दीर्घ चुम्बन करना नहीं चूकते थे. उस समय मेरी तेज धड़कने आप के सीने पर साफ सुनाई देती थी.
" आप क़ी यह सेक्रेटरी बिल्कुल आप में खो जाती थी. "
" दादू आप क़ी एक ओर ख़राब आदत थी. आज ज़ब चाहे तब आप क़ी गरम सांस मेरे मुंह के सामने छोड़ देते थे और आप क़ी सुंदर सेक्रेटरी पूरी तरह से पिघल जाती थी. "
" आप क़ी मजबूत पकड़ अपनी ही धड़कनो से बेगाना कर देती थी. उस वक़्त ओफिस में हमारा प्यार बोलता था. "
" दादू! आप क़ी नजरो का मादक नशा मेरी सुधबुध को पूरी तरह छिन लेता था. क़्या अब बताइये यह सब कुछ कहानी के पन्नो पर उतार पायेगे? "
" आप क़ी पझेसिव छुअन का मुझे ओबसेशन, जूनून सा हो गया था. उस के बिना मैं बिल्कुल रह नहीं पाती थी. मौका मिलते ही मैं आप क़ी छाती पर सर रखकर लिपट जाती थी. उस पल क़ी मिठास मैं भूल भी पाती थी. "
" आप के होठों का स्पर्श मुझे दुनिया मैं होने का एहसास दिलाता था. ऐसा लगता था जैसे सारा जहाँ मेरे कदमो के नीचे आ गया हो. "
"ओफिस मैं ए सी क़ी ठंडक भी हमारी गर्मी को. ठंडी नहीं कर पाती थी. आप ने धीरे से मेरा हाथ पकडकर उसे होठों से चूम लिया था. उस पल ओफिस के मेज पर रखी फाइल्स बिल्कुल शोभा बनकर रहा गईं थी और हमारे रोमांस क़ी साक्षी बन गईं थी. "
" आप ने अपने बेपनाह प्यार से अपनी सेक्रेटरी का अस्तित्व ही मानो खत्म कर दिया था. क़्या आप ओफिस क़ी हर दिन क़ी मिठास का अनुभव कर रहे हो? "
" क़्या आप का यह नशा आप क़ी कलम को जोम प्रदान करेंगा? "
" दादू ज़ब ज़ब आप अपने हाथ से मेरी नंगी पीठ को सहलाते थे तो मैं सब कुछ भूल जाती थी और आप के कंधो का सहारा लेना पड़ता था."
" क़्या यह मेरी बेबसी का नमूना नहीं था?"
" दादू! आप जब मेरे बालो को अपने गरम हाथो से सहलाते थे तब मानो भूचाल सा माहौल छा जाता था. मेरी सांसे थम जाती थी. "
" दादू! आप ने मुझे यकीन दिला दिया था क़ी आप मुझे किसी भी सूरत मैं मुझे नहीं छोड़ेंगे. हर हाल मैं मुझे अपने साथ रखेंगे. "
" यह मेरे लिये सब से बड़ी बात थी. मैं भी बार बार आप को मेरे प्यार का एहसास दिलाती थी. तुम्हारे साथ हर स्थिति मैं साथ रहने का वादा करती थी. मुझे आप से इतना ज्यादा प्यार हो चूका था क़ी मैंने शादी करने का विचार छोड़ दिया था. "
00000000000 ( क्रमशः)