शहद की गुड़िया- प्रकरण
शहद की गुड़िया - प्रकरण 10
" टूथ और डेयर की गेम में किसी को अपनी सच्ची बात बतानी पड़ती हैं. इस खेल में मैंने सब से खड़ूस प्रोफेसर के चश्मे पर ट्रांसपेरेंट नेल पोलिश लगाई थी."
" मैंने वह काम इतनी सफाई से किया था. उस का पूरा दिन धुंधला हो गया था. जिसमे उसे परेशानी के आलम में डाल दिया था. "
" दादू मैं आज अपनी सारी शरारते एक दौर में पिरोकर लाई हूं. एक एक क़र के अपने रीडर्स को सुनाती हूं. "
" तो दादू शुरू करती हूं..एक बार कॉलेज के फेस्टिवल में अपने दोस्त के जन्म दिन की केक पर ढेर सारी मिर्ची भर दी थी."
" ज़ब उस ने पहला टुकड़ा मुंह में डाला तो उस का चेहरा टमाटर जैसा लाल हो गया और वह पानी के लिये सारे कैम्पस में इधर उधर भागने लगा. "
" दादू! एक बार कॉलेज के स्टेज प्ले में मैंने हिरो के डायलॉग्स भी बदल दिये थे. "
" उस ने सब से सामने स्क्रिप्ट के बजाय मुझे सच में प्रपोज़ कर दिया. उस के बाद वह इतना नर्वस हो गया था की वह पसीनों से तरबतर हो गया था. "
" दादू उस वक़्त एक बात मुझे याद आई थी."
" एक बार रात को कैसे सब के चप्पल के नीचे गुंदर लगा दिया था... "
" वह सुबह ज़ब कॉलेज के लिये निकले तो सब के पैर फर्श पर चिपक गये थे. वह नजारा देखकर मैं अपनी हसी नहीं रोक पाई थी."
" दादू स्कुल की केमेस्ट्री लैब की एक ओर बात याद आ रही हैं. मैंने चुपके से सब के केमिकल्स बदल दिये थे. "
" ज़ब प्रयोग शुरू हुआ तो लेब में रंगबैंरंगी धुए निकलने लगे और टीचर परेशान हो गये."
" लाडो.. मेरी सुकू तुम तो सचमुच आफत की पुड़िया हो. मानना पड़ेगा तुम सचमुच की गुड़िया हो मैंने तो तुम्हे शहद की गुड़िया का रुतबा दिया पर तुम तो आफत की सचमुच पुड़िया बनकर सब से खेल रही हो. "
" दादू बस तुम्हारी सुकू गुड़िया की शरारते देखते जाओ. "
" एक बार मैंने हॉस्टल की वॉर्डन की खिड़की पर नकली भूत लटका दिया था."
" उन की चीख सुनकर पूरा हॉस्टल जाग गया था. और मैं चादर में मुंह लपेटकर मुस्कुरा रही थी. "
" दादू! आप यकीन नहीं करोगे पर तुम्हारी यह सुकू गुड़िया बड़ी शातिर हैं. उसे कोई नहीं पहुंच सकता. "
" एक बार कॉलेज में मेडिटेशन क्लास थी. मैंने चुपके से वहाँ के स्पीकर में एक खर्राटे वाला रिकॉर्डिंग शुरू कर दिया था. "
" सब लोग आँखे बंद कर के उस की वजह ढूंढ़ रहे थे लेकिन कुछ पता नहीं चला था. "
" सचमुच सिकु यह मजेदार किस्सा था. "
" एक बार मैंने कॉलेज के केंटीन में नमक और सककर के डिब्बे आपस में बदल दिये थे. "
" सब ने मीठी चाय की जगह नमकीन चाय के घूंट भरे थे. "
" उन के चेहरे देखने लायक हो गये थे. आप की सुकु हिरोइन इतनी शैतान और बदमाश होगी ऐसा कभी आपने सोचा था. "
" दादू! एक बार मैंने कोलेज के अन्य फंक्शन में माइक की सेटिंग्स बदल दी थी ज़ब प्रिंसिपल सर बोलने आये तो उस की आवाज बिल्कुल कार्टून जैसी हो गईं थी. "
" पूरा ऑडिटोरियम हंसी की आवाज से गूंज उठा था. और सर गुस्से में लाल हो गये थे. "
" दादू! एक बार स्कुल की असेंबली में मैंने पी टी टीचर की पीठ पर चुपके से स्टिकर लगा दिया था. ' मैं गधा हूं. "
वो पुरे मैदान में बड़ी शान से घूम रहे थे और सब बच्चे उन्हें देखक़र लोटपोट हो रहे थे.. "
" दादू! एक बार मैंने प्रिंसिपल सर की खुर्सी पर खुजली वाला पावडर लगा दिया था. उन का पूरा दिन मीटिंग में व्यस्त था और वह पुरे समय अपना बदन खुजलाते हुए थक गये थे. "
" दादू! एक बार मैंने उन की स्पीच के पीछे चुपके से एक मज़ाकिया कार्टून म्यूझिक चला दिया था. "
" सब लोग खुलकर हस रहे थे और वह परेशान हो रहे थे. लोग क्यों उनकी गंभीर बातों पर हंस रहे थे. "
" दादू! एक बार मैंने कोलेज ट्रिप की बस में सब के सोते ही उन के चेहरे पर मार्कर पेन से उन के चेहरों पर मुछे बना ली थी. "
" सुबह ज़ब जागे तो एक दुसरो को देखकर हसी के फौववारे उड़ने लगे. "
" एक बार मैंने बायोलोजी लैब में हाड पिंजर को साड़ी पहनाई थी. "
" दूसरे दिन लेब खुली तो सब लोग डर के मारे यहाँ वहाँ भागने लगे. "
" फिर भी मैं अपनी शरारतों से बाज नहीं आई थी. "
" एक बार मैंने प्रोफेसर की खुर्शी में ' गिला पेंट ' लगा दिया था. "
" उन का पूरा सफ़ेद शर्ट ख़राब हो गया था. और मैं हमेशा की तरह मासूमियत चेहरे पर ओढ़े हस रही थी. "
" दादू मेरी शरारतों का अंत ही नहीं होता था. "
" मैंने फिजिकस लेब में मेग्नेट छिपा दिया था. प्रोफेसर उसे पूरा दिन ढूंढ़ते रह गये थे. "
" एक बार मैंने केंटीन के समोसे में मैंने रुई भर दी थी. "
" ज़ब प्रिंसिपल ने पहला निबाला लिया तो उन के मुंह से धागे निकलने लगे और मैं दूर ख़डी उसे एन्जॉय कर रही थी. "
" दादू एक बार कोलेज की लाइब्रेरी में मैंने सब की किताबों के कवर्स आपस में बदल दिये थे "
" मैथ्स की किताब में हिस्ट्री और सायन्स देखकर सब अपना सर पकड़ कर बैठ गये थे. "
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