शहद की गुड़िया - प्रकरण 76
" दादू ने ' माधुरी एक्सपोर्ट्स ' में जाहिर ' voluntary retirement scheme ' का लाभ उठाकर निवृत्ति ले ली थी."
"उसी योजना का तिजोरीवाला ने लाभ उठाया था.."
" स्नेहा भी वहाँ काम करती थी."
" वह भी दादू के बिना काम करना नहीं चाहती थी. और तो और कंपनी का भी क़ोई भावि निश्चिन्त नहीं था तो उस ने भी दादू के साथ जोब छोड़ दिया था. तब गरिमा ने उसे अपने संस्थान में मदद के लिये नियुक्त कर लिया था. उसे माधुरी से ज्यादा वेतन मिलता था.. इस लिये क़ोई समस्या नहीं थी."
"घर आराम से चलता था. नीला को ओपरेशन के बाद अपनी आँखों का नूर वापिस मिल गया था. वह सत्तर के दायके में प्रवेश कर चुकी थी.. फिर भी उस ने घर का सारा कारोबार अपने हाथों में ले लिया था."
" वह स्नेहा का बहुत ख्याल रखती थी. क्षितिज की भी एक सगी मा से विशेष देखभाल करती थी. "
" क्षितिज की नकारात्मक सोच की दुकान अब भी खुल्ली थी. उस की बजह से बिन मांगे प्रोब्लेम्स खडे होते थे. "
"शेयर बाजार में प्रवेश कर के मानो उस ने बड़ा शेर मार लिया था. वह पूरा दिन उसी में डूबा रहता था. उस के सिवा कुछ सूझता नहीं था."
" शेयर बेचना नहीं होता था, फिर भी उस की पल पल की मूवमेंट पर नजर रखता था. उस का अप डेट लेता रहता था."
"सेंसेक्स, निफ़्टी, मिड केप, हर किसी पर नजररखता था. शेयर बाजार के सिवा उसे क़ोई भी चीज में दिलचस्पी नहीं थी."
" हर एक चीज समय पर होने का वह आग्रह रखता था. वह एक मिनिट की देरी भी बर्दास्त नहीं करता था."
"वह चिल्लाता था, गुस्सा करता था, अपनी बीवी को गालिया देता था. इतना ही नहीं नीला के साथ दुर्व्यवहार करता था, उस अपनी मा की तरह गालिया देता था और वह सब कुछ सह जाती थी. ऊस को क्षितिज में अपना बेटा नजर आता था. जिसे ऊस ने कई सालो से देखा नहीं था . "
" उसी के कारण खाना बनाने में देरी हो जाती थी.. फिर भी वह उस के लिये स्नेहा को दोषित मानता था. उसे बिना वजह डांटता रहता था. "
" उस को केवल अपनी तकलीफ से ही मतलब था. उस ने कभी दूसरों की परेशानी या मजबूरी के बारे में सोचना जरूरी नहीं समझा था."
" स्नेहा दिन भर गधे की तरह काम करती थी. रात को भी उस के नसीब में चैन या आराम नहीं था. "
" फिर भी वह कुछ नहीं बोलती थी. सब कुछ चुपचाप सहे जाती थी.. उस में नीला का नैतिक सहयोग उस को काफ़ी काम आता था."
" क्षितिज हर तरफ से अपाहिज हो गया था. उस के लिये मानसिक रुगणालय एक ही विकल्प बचा था. लेकिन वह किसी भी चीज के लिये तैयार नहीं होता था."
" घी सीधी उंगली से निकलने की क़ोई संभावना नहीं बची थी."
" इस के लिये दादू ने अस्पताल में फोन किया था. अपने पता देते हुए अपने बेटा का केस समजाया था. ओर एक डोक्टर को लेकर एक एम्बुलेंस उन के दरवाजे पर आई थी."
" वह सीधा तो जाने को तैयार नहीं था. इस स्थिति में दादू ने चाय में बेहोशी की दवाई मिलाकर अस्पताल पहुंचाने का इंतजाम किया था."
"ओर रास्ते में एम्बुलेंस को अकस्मात हुआ था, जिस में क्षितिज,डोक्टर ओर ड्राइवर की मौत हो गई थी. इस तरह भगवान ने उसे अपने पास बुला लिया था."
" उस का ऐसा ही क़ोई अंत होना था. और ठीक वही हुआ था. "
" ओर भगवान ने दादू को बडे पाप से बचा लिया था.."
" उन्हें हरदम डर लगता था. उन के हाथों से कहीं अपने बेटे की हत्या ना हो जाये. "
" क्षितिज भी आत्म हत्या के पाप से बच गया था."
" वह भी बार बार मर जाने की धमकिया देता था. "
" दादू तो क्या हर क़ोई उस की हरकते झेल नहीं पाता था. वह खुद चाहते थे वह मर जाये. स्नेहा को भी वही ख्याल आता था. उस ने भी अपने आप को समझा दिया था. ऐसी स्थिति में मौत ही परिस्थिति का सही सोल्यूशन रह गया था."
" वह कदम कदम पर दादू गुस्सा दिलाता था. कई बार उन्हें भी ख़ुदकुशी करने का ख्याल आया था. लेकिन स्नेहा, ओर नीला की जिम्मेदारी ने उन के पैरों में जंजीर पहना दी थी. "
" कभी उस की हत्या करने का ख्याल भी दादू के दिमाग़ में आरुढ हो जाता था, लेकिन स्नेहा दोबारा बेवा हो जायेगी. और उन्हें जैल हो जायेगी तो कौन उन का ख्याल रखेंगा? "
" वह जो सोचते थे ऊस से खुद को डर लगता था.लेकिन ऐसी क़ोई नौबत नहीं आई थी. "
" जो वह नहीं कर पाये थे वह ईश्वर ने कर दिया था. "
" उस के जाने से दादू ने चैन की सांसे ली थी. कम से कम स्नेहा के सिर से मुसीबतों का पहाड़ हट गया था. उन्हें इस बात की ख़ुशी हो रही थी. ईश्वर ने शायद यह काम कर के दादू की भूल को सुधार लिया था. उसे पिछले जन्म के क़ोई दुष्कर्म की सजा मिली थी."
" दादू ने उसे पढ़ाया लिखाया था, अपने पैरो पर खड़ा रखने का पूरा मौका दिया था. लेकिन उस ने तो सारे हथियार फेंक दिये थे. ऐसी स्थिति में दादू तो क्या क़ोई भी उस के लिये कुछ नहीं क़र सकता था . नकारात्मक सोच की उंगली पकडकर उस ने अपनी जिंदगी नर्क कर दी थी."
" वह चाहता तो कुछ भी कर सकता था. लेकिन उस ने कभी हकारात्मक रूप में सोचने का क़ोई प्रयास नहीं किया था."
"वह बहुत जानता था ऐसा दावा करता था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था. "
" वह एक ऐसा घोड़ा था, जो पानी पीना नहीं चाहता था, उसे तालाब तक ले जाने का क़ोई मतलब नहीं था."
"अंध स्कूल में उसे बहुत कुछ सिखाया था. वह चाहे तो बहुत कुछ कर सकता था. स्कूल में वह सब से आगे था.. लेकिन उस ने सारी कोशिशे छोड़ दी थी. डोक्टर की बात सुनकर उस ने सारे हथियार फेंक दिये थे."
" अब ऐसे नकारात्मक अभिगम के आगे क्या कुछ हो सकता हैं? "
"उस के ऐसे रवइये से दादू को भी बड़ा झटका लगा था. वह कुछ भी मानने, समझने कोई तैयार नहीं था."
" शुरू में वह उसे छोड़ने स्कूल तक जाता था. तब वहाँ प्रिंसिपल ने उन्हें रोका था:"
"आप क्यों साथ आते हो? उसे अकेले आने दो."
" दादू ने उन की बात ली थी. मै वह उस के साथ स्टेशन तक जाते थे, अपंग के डिब्बे में चढ़ाते थे.. वह दादर स्टेशन उतरता था. ब्रिज चढते समय एक लड़की उस का हाथ पकडकर उस को सीढ़िया चढने में मदद करती थी."
" वह स्कूल के अन्य लड़को के साथ स्कूल पहुंच जाता था. शाम को दादू उसे स्टेशन से पिक अप करते थे. "
" स्कूल में उसे बहुत कुछ सिखाया गया था. लेकिन उस ने उस का क़ोई उपयोग नहीं किया था."
" वहाँ निम्न जाती के लडके भी थे. उन से क्षितिज गाली बोलना अच्छी तरह से सिख गया था. "
" स्कूल में जो प्रार्थना होती थी वह बेहद प्रेरणात्मक थी.."
हम न सोचे हमेशा क्या मिला है
हम ना सोचे क्या किया हैं अर्पण
फूल खुशियों के बाटे सभी कोई
सब का जीवन हो जाये मधुवन
" यह प्रार्थना ने दादू पर जादू किया था. उन को बड़ी ताकत दी थी. लेकिन क्षितिज पर उस का क़ोई असर नहीं था."
" इस प्रार्थना में स्व: अमेरिकन प्रमुख जोन केनेड़ी का मेसेज शामिल था."
" यह मत पूछो देश ने तुम्हारे लिये क्या किया हैं, कहो आप ने अपने देश के लिये क्या किया हैं? "
"उस के ऐसे रवइये ने उस की शिक्षा को निकम्मा कर दिया था. "
00000000000 ( क्रमशः)