शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (73) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (73)

                 

                 शहद की गुड़िया- प्रकरण 73

           " सपनो के अभाव से गली, और जरूरी लगन की कमी से मैं मोहल्लेकी क्रिकेट से कभी दादू आगे बढ़ नहीं पाये थे. "

            " फिर भी क्लास के एक लडके की वजह से आंतर शालिय टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका मिला था.. ऊस ने दादू को बड़े लोगो के साथ खेलते हुए देखा था.. "

          " वह बहुत क्रिकेट खेले थे.. बडे लोगो के साथ कई मैच भी खेले थे.एक बार ग्यारहवे नंबर पर बेटिंग कर के  नाबाद 19 रन भी बनाये थे."

         "बोलिंग डिपार्टमेंट मे भी उन्होंने  अपना करिश्मा दिखाया था."

         "एक ओवर मे चार विकेट्स लेने का रेकॉर्ड दादू ने  दर्ज किया था. आंतर शालीय मेचो में  भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था. तीसरे नंबर पर बेंटिंग कर के उन्होंने 24 का योगदान दिया था. इतना ही नहीं एक ओवर मे दो विकेट्स भी लपक लिये थे."

        " अन्य दो मैच मे उन्होंने  50 से अधिक रन बनाये थे. इतना ही एक मैच में उन्होंने 7 विकेट्स भी लिये थे. पांच से ज्यादा बार  उन्होंने 20 से अधिक रन बनाये थे."

        " एक मैच मे उन्होंने विकेट कीपर की भूमिका निभाई थी और गिरकर बेटस मेन को स्टंप आउट किया था. यह देखकर एक क्लब के अध्यक्ष ने उन्हें अपनी क्लब ज्वाॉइन करने का ओफर भी दिया था."

         "उन्हें गलत फहमी हो गईं थी. वह अपने आप की ' ओल राउंडर '  मे गिनती करते थे. सलीम दुरानी, कपिल देव और गावसकर की तरह हर बोल में आक्रमक शोट मारने जाते थे, लेकिन शायद जरूरी ताकत का अभाव से वह कैच आउट हो जाते थे. "

        " उन्हें सही क्रिकेट के बारे में  क़ोई पक्की जानकारी नहीं थी.  बेटिंग, बोलिंग और फील्डिंग में जो कुछ किया था वह एक फ्लूक था. मानो एक अकस्मात था, बस हो गया था.."

           " उन मे बहुत कुछ कमी थी. विश्वास का अभाव था. जिस की वजह से उन्होंने जरूरी क़ोई चीज  में दयान नहीं दिया था. उसे सुधारने के बारे में कड़ी मेहनत  करना जरूरी नहीं समझा था. उस की वजह से वह कभी अच्छा क्रिकेटर नहीं बन पाये थे. "

            " यही कमी गायक बनने के सपने में आडे आई थी. "

            " अनन्या के घर मे लडके लड़की जमा होते थे. वह दादू को गाने का आग्रह करते थे. वह कैसा गाते थे.  उस के बारे में उन्हें क़ोई जानकारी नहीं थी. वह उन को मजाक के तौर पर गाने को बुलाते थे. जिस ने उन्होंने ऐसा मानने के लिये प्रेरित किया था : वो अच्छा गाते थे. "

           " शब्दों को अदलबदल कर के, गीत की भाषा बदलकर वह गीत गाने की कोशिश करते थे, जिस से काफ़ी रमुज पैदा होती थी. वह सुनने में लोगो को मजा आती थी .  इस लिये वह लोग उन्हें बुलाते थे. "

            " सुनने वाले खुश होते थे जिसेवह अपनी टेलेंट मानकर गलतफहमी में जीते थे. "

             " उन्होंने अपनी टीम के कप्तान की भूमिका भी निभाई थी. कई जाने माने खिलाड़ियों की तरह बेटिंग  शुरुआत की थी, शुरू में बोलिंग भी की थी. उन्होंने रवि शास्त्री की तरह हर नंबर पर बेटिंग की थी. शुरुआत भी की थी. दसवे नंबर पर भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था . "

               " फिल्मे देखने का उन का पागल शौक था."

                "बचपन मे एक फ़िल्म आई थी, जिस का नाम था."

                 " मुगले आजम "

                  " उस फ़िल्म की टिकिट के लिये वह घंटो भर कतार मे खड़ा रहे थे . टिकट तो नहीं मिला था. लेकिन टेंशन मे वह  दो रूपये की नोट चबा गये थे. "

                  " उस फ़िल्म के एक गीत ने सब को दीवाना कर दिया था."

                  छुप ना सकेंगा इश्क हमारा    

                   चारो तरफ हैं उनका नजारा

                  पड़दा नहीं ज़ब क़ोई खुदा से      

                  बन्दों से पड़दा करना क्या... ज़ब प्यार क्या ?

           " यह फ़िल्म उस दौर की सब से महंगी फ़िल्म थी."

            "जो सुपर हिट साबित हुई थी."

             "  एक ही थियटर मे सब से लंबी चली थी."

              "इस फ़िल्म मे अकबर की 'पृथ्वी राज कपूर ' ने और सलीम की ' दिलीप कुमार ' ने भूमिका निभाई थी. ज़ब की अनारकली की भूमिका मे मधुबाला ने अपना जोहर दिखाया था. "

          " फ़िल्म के अंत मे उसे लोहे की जंजीरो मे केद किया जाता हैं.  उस की शूटिंग के दौरान उस की सेहत के लिये बड़ा खतरा पैदा हुआ था और छोटी उम्र मे उस का इन्तेकाल हो गया था."

         " मधु बालाने सदा बहार कलाकार किशोर कुमार के साथ शादी की थी."

          " "उन के दो बडे भाई अशोक कुमार और अनूप कुमार भी फिल्मो मे काम करते थे. अपने बेटे को  लेकर किशोर कुमार ने ' दूर गगन की छाँव में ' फ़िल्म भी बनाई थी."

         " इस फ़िल्म में उन्होंने बहुत जिम्मेदारी निभाई थी. उन्होंने एक अभिनेता होने के अलावा निर्माता, निर्देशक, गीतकार, संगीत कार, गायक, कहानी और संवाद लेखक की विधविध जिम्मेदारी निभाई थी. साथ में अपने बेटे को उन्होंने ने इस फ़िल्म में गूंगे लडके की भूमिका दी थी. "

           " फ़िल्म के सभी गाने प्रचलित हुए थे. "

           " ऊस के बाद उन्होंने 'दूर का राही ' फ़िल्म भी बनाई थी, जिस में उन के बड़े भाई अशोक कुमार को एक अहम भूमिका में उतारा था. "

           " ऊस के पहले तीनो भाई यों ने ' चलती का नाम गाड़ी ' फ़िल्म में एक साथ काम किया था. यह एक कोमेड़ी फ़िल्म थी, जो काफ़ी मशहूर हुई थी. "

            " ऊस फ़िल्म में टीमों भाई लड़की से डरते थे.. ऊस में किशोर कुमार तो बाहर आ गये थे. लेकिन अशोक कुमार और अनूप कुमार लड़कियो से बहुत डरते थे. "

           " उन का एक गैरेज था. "

           " एक दिन देर रात बारिश में एक लड़की अपनी बिगड़ी हुई गाड़ी करने में वर्क शॉप में आती हैं. वह बारिश में पूरी तरह भीगी हुई होती हैं. किशोर कुमार उसे देखकर शरारती बन जाते हैं और गाने लगते हैं. "

            " एक लड़की भीगी भागी सी     

               सोती रातों में जागी थी,    

               मिली एक अजनबी से कोई     

          आगे ना पीछे तुम ही खो ये कोई बात हैं.

           " ऊस लड़की का रोल मधु बाला ने निभाया था.

                      00000000000  ( क्रमश