शानवी ने जल्दी-जल्दी अपना बैग पैक किया। कपड़े…ज़रूरी सामान…और कुछ यादें…लेकिन एक चीज़ उसने जानबूझकर पीछे छोड़ दी टुक-टुक। उसकी आँखें नम थीं…पर इस बार उसने खुद को रोने नहीं दिया।
वो बोली -
मुझे दूर जाना ही होगा…।
और वो घर छोड़कर चली गई।
दूसरी तरफ…कार्तिकेय…फिर से बिल्ली बन चुका था। वो उसी घर के कोनों में घूमता रहा। कभी दरवाज़े के पास बैठता…कभी उस बिस्तर पर जाता…जहाँ शानवी सोती थी। वो बार-बार म्याऊँ करता…लेकिन…अब कोई जवाब नहीं आता था। धीरे-धीरे वो बाहर निकल गया। सड़क पर…अकेला…भटकता हुआ। उसकी आँखों में आँसू थे।
वो बोला -
मैंने… सब खो दिया…।
Beckground में song चल रहा था -
सजदे में घर जो मांगा था, गई क्यों हो ऐसे जाना छोड़ के हमको।
तौबा है तुझको चाहा जो, नजर बद्दुआ है दोनों लगी हमको।
सजदे में घर जो मांगा था, गई क्यों हो ऐसे जाना छोड़ के हमको।
तौबा है तुझको चाहा जो, नजर बद्दुआ है दोनों लगी हमको।
तुम अगर....... आ...... आ.......
हम अगर ना गंवारा तुम्हे इस तरह हो गए,कि तुमसे जुदा होके हम.. तबाह हो गए.... तबाह हो गए....तबाह हो गए.....तबाह हो गए......।।
वो हर गुजरते इंसान को देखता....हर घर की खिड़की को…जैसे ढूँढ रहा हो 👉 अपना घर… अपनी शानवी।
🌫️ उधर…शानवी अब एक नए घर में थी। कमरा अलग…दीवारें अलग…लेकिन दिल… वही भारी। वो बिस्तर पर बैठी थी। हाथ में फोन। बस…खाली नजरों से स्क्रीन देख रही थी।
अचानक…उसकी नजर एक चीज़ पर पड़ी—
👉 Instagram account
जो उसने…सिर्फ टुक-टुक के लिए बनाया था। उसमें उसकी photos…videos…cute captions…“मेरा टुक-टुक ❤️”
शानवी की आँखें भर आईं। कुछ पल के लिए…उसका दिल पिघलने लगा।
वो बोली -
वो… सच में मुझे नुकसान नहीं पहुँचा रहा था…।
लेकिन अगले ही पल—
उसका दिमाग बोला—
उसने सच छुपाया था…
शानवी ने अचानक फोन दूर फेंक दिया।
वो बोली -
नहीं! मैं वापस नहीं जाऊँगी…।
उसकी आवाज़ गूँज उठी कमरे में। लेकिन…आँखों से आँसू बह निकले।
🌧️ दो टूटे हुए दिल
एक तरफ…👉 शानवी — जो खुद को दूर रख रही थी
दूसरी तरफ…👉 कार्तिकेय — जो उसे ढूँढ रहा था
दोनों एक-दूसरे से दूर…लेकिन दिल… अभी भी जुड़े हुए।
सड़क सुनसान थी। ठंडी हवा चल रही थी। एक कोने में… सफेद बिल्ली सिकुड़कर बैठी थी। वो कांप रही थी।दो दिन से कुछ ठीक से खाया नहीं था। उसके पंजे पर हल्की चोट थी। चलते वक्त दर्द होता था। फिर भी…वो हर गुजरते इंसान को देखती…
सोचती -
शायद… वो हो…
लेकिन…वो नहीं आई। धीरे-धीरे…उसकी आँखें बंद होने लगीं।
उधर…शानवी अपने कमरे में थी। फोन बार-बार हाथ में लेकर रख देती। दिल बेचैन था।तभी… एक notification आया।
👉 “Lost & Found Pets — Instagram”
उसने अनजाने में क्लिक किया। और…उसका दिल रुक गया।
😳 वो तस्वीर…एक पोस्ट थी—
ऊपर लिखा था -
ये बिल्ली किसी की लगती है।
घायल है। कोई पहचानता हो तो contact करें।
फोटो में…वही सफेद बिल्ली। वही आँखें। टुक-टुक। शानवी के हाथ काँप गए।
वो बोली -
नहीं…
उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।
वो बोली -
ये… ये मेरे कारण हुआ…
वो बिना सोचे-समझे उठी। चप्पल भी ठीक से नहीं पहनी। बस फोन उठाया…और दौड़ पड़ी।
दिल में बस एक ही आवाज़—
टुक-टुक… कुछ नहीं होगा तुम्हें…
वो उस जगह पहुँची। लोग खड़े थे। और ज़मीन पर…टुक-टुक पड़ा था। कमज़ोर…घायल…आँखें आधी बंद।
वो चीखी -
टुक-टुक!
शानवी दौड़कर उसके पास बैठ गई। उसे धीरे से अपनी बाँहों में उठा लिया। उसका छोटा सा शरीर…अब पहले जैसा गर्म नहीं था।
टुक-टुक ने धीरे से आँखें खोलीं। और… उसे देख लिया। उसकी आँखों में…दर्द भी था…और सुकून भी। शानवी रो रही थी।
वो बोली -
मैंने तुम्हें अकेला छोड़ दिया…मुझे माफ कर दो…।
टुक-टुक बस उसे देखता रहा।
जैसे कह रहा हो—
तुम आ गई… बस यही काफी है…।
शानवी तुरंत उसे लेकर 👉 Happy Paws Pet Care Center पहुँची। डॉक्टर ने उसे तुरंत अंदर ले लिया।
डॉक्टर बोले -
Condition weak है… पर हम कोशिश करेंगे…
शानवी बाहर बैठी थी। हाथ काँप रहे थे। आँखों में आँसू रुक नहीं रहे थे।
वो बोली -
तुम… वापस आ जाना…इस बार… मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगी…।
शानवी बैठी थी। हाथ में कार्तिकेय (टुक-टुक) की कमज़ोर बिल्ली वाली form थी। आँखों में आँसू, दिल भारी। वो धीरे-धीरे डॉक्टर के पास गई।
वो बोली -
Doctor… मैं चाहती हूँ…मेरे kitten के लिए कोई नया adopt करने वाला मिले। कोई ऐसा जो उसका ख्याल रखे…।
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
Doctor बोले -
समझ गया…पर ये नाज़ुक स्थिति है…थोड़े दिन हम यहाँ care करेंगे। फिर adopt कर सकते हैं।
शानवी का दिल टूट रहा था। वो जानती थी कि अगर वो कार्तिकेय के पास रहेगी…उसका दिल और उलझ जाएगा वो उसे प्यार करने लगी थी लेकिन… फिर भी दूर रहना ही सही था
वो बोली -
मैं… बहुत दूर जाऊँगी…शायद… ये मेरे लिए और उसके लिए बेहतर होगा…।
शानवी ने डॉक्टर से कहा—
Please… कोई अच्छा घर ढूँढिए। कोई ऐसा जो उसे प्यार दे…
लेकिन… मुझे इसके पास रहना मुश्किल है।
डॉक्टर ने सहमति में सिर हिलाया।
वो बोले -
ठीक है… हम कोशिश करेंगे…उसका नया घर मिलेगा…।
शानवी कमरे में अकेली बैठी थी। टुक-टुक बिस्तर पर सो रहा था।
उसका छोटा सा शरीर अभी भी कमज़ोर था लेकिन आँखों में… वो उसकी पहचान ले रहा था और शानवी जानती थी कि ये अभी भी वही इंसान है…
शानवी ने धीरे से कहा—
मैं दूर जाऊँगी…और तुम्हारे लिए… कोई नया घर ढूँढूँगी…ये शायद… सबसे सही कदम है।
लेकिन अंदर से…दिल का एक हिस्सा अभी भी उसे अपना मानता था। कार्तिकेय अब बिल्ली की रूप में था। लेकिन उसकी आँखों में…एक हल्की उदासी और अकेलापन साफ़ दिखाई दे रहा था।
डॉक्टर और शानवी ने मिलकर adopt का इंतजाम किया। एक लड़के ने टुक-टुक को अपनाया। नाम था पारितोष उम्र लगभग शानवी जितनी बिल्कुल अकेला, और बहुत प्यार करने वाला
शानवी ने सोचते हुए कहा—
ये सही है…अब तुम अकेले नहीं रहोगे…और मुझे भी दूर जाना होगा।
टुक-टुक (कार्तिकेय) ने पहली बार…थोड़ा डर दिखाया। उसके छोटे पंजे ने पारितोष की ओर झुककर उसे धीरे-धीरे छुआ। आंखें बड़ी और आश्चर्य भरी थीं
जैसे कह रहा हो—
मैं… ठीक रहूँगा ना?
पारितोष ने मुस्कुराकर उसे गोद में उठा लिया।
वो बोला -
चलो… अब मैं तुम्हारा ख्याल रखूँगा।
तुम डरा मत करना।
शानवी ने देखा…टुक-टुक अब धीरे-धीरे उसके पास से हट रहा था।
दिल थोड़ा टूट गया। आँखों में आँसू थे लेकिन उसने खुद को संभाला
वो बोली -
तुम सुरक्षित हो…यही मेरी सबसे बड़ी खुशी है।
पारितोष और टुक-टुक के बीच धीरे-धीरे पहली bonding शुरू हुई। टुक-टुक अब धीरे-धीरे नई surroundings को समझ रहा था पारितोष उसके लिए खाना लाया, पानी दिया, और उसे प्यार से सहलाया शानवी चुपचाप देख रही थी। दिल में हल्की राहत…और हल्की उदासी।
वो बोला -
अब… ये सही है…तुम्हारे लिए… ये सबसे अच्छा है।