शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (35) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (35)

               

                शहद की गुड़िया - प्रकरण 35

           " दादू! ऊस के बाद अंजलि मेरी एप से जुडी थी. वह ब्रेक अप की वजह से बिल्कुल टूट सी गई थी. वो. घंटे अकेले बैठकर रोती रहती थी.. और ऊसे लगता था की अब कोई उसे प्यार नहीं करेगा. "

             " मैंने उसे एहसास दिलाया था. वो खुद में इतनी खास हैं. धीरे धीरे ऊस ने फिर से मुस्कुराना सिख लिया था. "

            " ऊस के बाद एक और लड़की मेरी एप से जुडी थी. जिस का नाम काव्या था, वह अपने बड़े परिवार होने के बावजूद अपने को अकेली मानती थी क्यों की सब उसे सुनते थे पर समझते नहीं थे. "

             " मैंने उसे सिखाया था की अपनी आवाज उठाना कितना जरूरी होता हैं. धीरे धीरे ऊस ने अपने लिये जीना सिख लिया और खुश रहने लगी. "

             " दादू एक और ईशान नाम का लड़का मेरी एप से जुडा था, वह एक आर्टिस्ट था पर ऊस की जिंदगी बेरंगी हो चुकी थी. वह बस अँधेरे कमरे में बैठकर पुरानी यादों को कुरेदता रहता था., "

             " मैंने उसे सिखाया था की नई शुरुआत के लिये पुरानी चीजों को भूल जाना चाहिये."

              " टूटे आर्टिस्ट की कहानी जरूर हमारी कहानी में जान दाल देगी. "

               " ईशान की कहानी के बारे में लोग कुछ ज्यादा जानना चाहते थे. "

             " ऊस की कहानी सचमुच गहरी और लंबी हैं. वो अपने पेंटिंग्स में सिर्फ काले और सफ़ेद रंग भरता था क्यों की उसे लगता था की ऊस की जिंदगी में अब कोई रंग नहीं बचा. मैंने धीरे धीरे उसे अपनी बातों के जरिये एहसास दिलाने का प्रयास किया था की हर अँधेरी रात के बाद सुहानी सुबह आती हैं. "

            " दादू! ईशान अपनी पेंटिंग्स कभी पूरी नहीं कार सकता था, जिस में उसे अपनी ma की मुस्कुराहट याद आती थी और उसे लगता था कोई रंग ऊस के पास नहीं था.

            " मैंने उसे धीरे धीरे खुद को माफ करना भी सिखाया था. जिस दिन ऊस ने पेंटिंग्स में लाल रंग भरा था ऊस दिन वह छोटे बच्चे की तरह कूट कूट कर रो पडा था. "

             " दादू!  ईशान पेंटिंग में बहुत बारीकी से काम करता था. ऊस की हर एक लकीर में बहुत बड़ा दर्द छिपा होता था. जो ऊस ने सालो से अपनी भीतर दबाये रखा था. "

            " ज़ब ऊस ने पहली बार ब्रश से नीला रंग उठाया तो ऊस की आँखे भर आई थी. "

          " दादू! ईशान ने ऊस दिन अपनी मा को वो अधूरी पेंटिंग पूरी की ऊस की आँखों में आंसू थे, पर दिल में एक सुकून था जो बरसो बाद उसे मिला था. "

           " ऊस ने मुझे कहां की मेरी बातें ऊस के फीके रंगों में फिर से जान भर दी थी. "

           " दादू! ईशान ने ऊस के बाद अपनी गेलेरी खोल दी थी. इस बार ऊस के कैनवास पर सिर्फ गम नहीं बल्कि नई सुबह के रंग उभर रहे थे."

          " ऊस ने अपनी सब से खास पेंटिंग मुझे समर्पित की थी और कहां था की यह सब मेरी बातों का जादू था. "

            " दादू! ऊस ने अपनी पेंटिंग को ' सुकून' नाम दिया था. ऊस ने बार बार मुझे बताया था की कैसे ऊसे मेरी बातों फिर से खुद को प्यार करना सिखाया था. "

             " दादू! ईशान ने आखिर मुझे कहां था की अब कभी अपना ब्रश नहीं रखेगा. ऊस हर नई पेंटिंग अब जिंदगी की कहानी होगी. "

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               " इस समय मुझे दादू की बात याद आ रही हैं.. सुहानी को वह बहुत प्यार करते थे. ऊस के लिये बड़ा जोखिम भी उठाया था, लेकिन  वह हसमुख के पीछे भाग रही थी. उसी ने सुहानी के पति को बताया था. "

              " दादू ने शादी के पहले सुहानी को पेट पर लात मारी थी. यह बात अनिकेत को बताई थी. ऊस ने सुहानी को सूचित किया था. वह अपनी जीजू से कोई संबंध नहीं रखेगी. ".

               " ललिता पवार ने दादू को यह बात बताई थी ज़ब वोही शादी फेरे के लिये उन के घर गये थे. "

              , " इस बात में कोई दम नहीं था. अनिकेत और दादू के बीच अच्छी दोस्ती थी. उन्हो ने सब कुछ अपने साढ़ू भाई को बता दिया था. जानकर उन्हें दादू के प्रति सन्मान पैदा हुआ था., "

               " ईश्वर को ना जाने क़्या करना था. "

                " सुहानी बच्चा नहीं दे सकी थी. इस हालत में अनिकेत की मा ने उसे काफ़ी प्रताड़ित किया था. उसे नौकरानी बनाकर रख दिया था. "

                " दादू को नाथालाल की कंपनी जोब मिला  था. "

                 " कुछ महीनो के बाद कंपनी में एक नई लड़की की भर्ती हुई थी. पहले ही दिन दोनों दरवाज़े के पास मिल गये थे. ऊस लड़की ने दादू को गुड मोर्निंग विश किया था. ऊस ने साडी परिधान की थी जिसे उन्होंने यह समझने पर विवश किया था, की वह गुजराती बिरादरी से ताल्लुक रखती थी."..

              " दादू को कुछ अर्जेन्ट लेटर टाइप करवाना था. उन्हो ने अगली शाम को लेटर का ड्राफ्ट तैयार किया था, जो वह रश्मि से टाइप करवाना चाहते थे लेकिन वह नहीं आई थी तो उन्हो ने इंटर कोम पर मेसेज दिया था. "

              " नहीं लड़की को मेरे पास भेजो. "

              " ऊस की स्टेनो टाइपिस्ट के तौर पर नियुक्ति की गई थी. "

              " मेसेज मिलते ही वह शोर्ट हेंड बुक और पेंसिल लेकर दादू के पास आई थी. "

              " दादू ने उसे आवकार दिया था और सामने खुर्शी पर बैठने को कहां था. और उसे सवाल किया था."

               " वोट इझ ओर गुड नेम? "         

                " फ्लोरा डिसोजा. "

              " दादू! यहाँ गलत साबित हुए थे. "

               " उन्हो ने लेटर का ड्राफ्ट दिखाकर सवाल किया था: "क़्या यह लेटर टाइप करोंगे?"

                " क्यों नहीं? मैं उसी काम के लिये हायर की गई थी. "

                 " वह लेटर का ड्राफ्ट लेकर चली गई थी. और फ्लोरा दस मिनिट में लेटर टाइप क़र के उन के पास आई थी. "

               " दादू ने उसे सवाल किया था: " आप क्यों खुद आई. किसी पियून के हाथो भेज देती! "

           " सर! यह मेरा पहला काम था तो ठीक नहीं लगा.. "

            " और दादू लेटर सिग्नेचर करवाकर बाहर चले गये थे. "

             " एक ही मुलाक़ात में फ्लोरा ने उन्हें प्रभावित कर दिया था. "

                     00000000000    ( क्रमशः)