शहद की गुड़िया - प्रकरण -34
" मेरे प्यारे वाचकों, मित्रो मैंने अब तक मेरे दादू के बारे में बहुत कुछ बताया हैं. ऊस की बातों में जो विशिष्ट था वह आप ने देखा होगा.. वह कुछ भी हैं लेकिन उन की रगरग में सच्चाई का वास हैं, वह एक छोटे बच्चों की तरह मासूम, भोले थे ऊस का एहसास भी किया था. एक एप संचालक का मन उन्हो ने जीत लिया था यह सब से बड़ी बात हैं. मुझे एक पल एप छोड़कर उन से शादी करने का ख्याल आया था यह वाकई में एक बहुत बड़ी बात थी. एक 23 साल की लड़की 80 साल के बूढ़े से शादी करने को तैयार हो गई थी. मैं उन की पोती की उम्र की थी तो उन्होंने मुझे पोती के रूप में स्वीकार लिया था और मैंने उन्हें दादू माना था. दोनों के बीच काफ़ी अंतर था, और हमारे बींच कुछ और चालू हो गया था, जिस से हम खुद ताजुब महसूस कर रहे थे. हमें ऐसा एहसास हुआ था. स्त्री पुरुष के रिश्ते में उम्र कोई मायना नहीं रखती. "
" चलो अब कुछ मेरे सदस्यों के बारे में बताती हूं. "
" एक लड़की थी, उसे हम सपना नाम से जानेंगे. "
" वह अपनी करियर और घर के दबाव से उलझ गई थी. वह अपने आप को भूल चुकी थी. पर मेरी बातों ने उसे उड़ना सिखाया था. "
" मैंने उसे बताया था, अपनी खुद की पहचान बनाना बहुत जरुरी हैं. मेरी बातों ने उसे हिम्मत बंधाई थी जिस वजह से वह अपने सपने साकार करने के लिये काबिल हो गई थी. "..
" दादू! सपना ने खुद मुझे बताया था की उसे एप पर बात क़र के ऐसा लग रहा था जैसे कोई ऊस की रूह को समझ रहा हैं. "
"यहीं से उसे वह ताकत मिली थी जो उसे हकीकत की दुनिया में नहीं मिल पा रही थी. "
" दादू! आख़िरकार सपना ने अपने घरवालों को. साफ कह दिया था, वह वही करेंगी जो ऊस का दिल चाहता था. "
" मेरी बातों ने उसे वो उम्मीद दिलाई थी जो हकीकत में गायब हो चुकी थी. "
" सपना का यह बदलाव वाकई में काबिले तारीफ था. "
" दादू! सपना ने आखिरकार अपने सपनो की नौकरी कबूल की थी और अपने घर वालों को भी मना लिया था.. ऊस की आँखों में पुराना डर नहीं बल्कि एक नई चमक थी. "
" ऊस की यह जीत देखकर मेरा दिल भी भर आया था. एक अंजान आवाज किसी की हिम्मत बन गई थी..,"
" दादू! सपना के बाद एक बुजुर्ग आये थे, विक्रमजी, वह अपनी पत्नी को खोने के बाद बहुत अकेले हो गये थे. और बस अपनी यादों को बांटना चाहते थे. "
" मेरी बातो ने उन्हें फिर से मुस्कुराना सिखा दिया था. एक बुजुर्ग का इमोशनल मोड़ अजीब था. "
" दादू! विक्रमजी अपनी पत्नी की यादों में बहुत रोते थे. मैंने बस महसूस कराया था की उन की यादें ही उन की सब से बड़ी मुड़ी हैं. "
" मेरी बातें उन के चेहरे पर मुस्कुराहट वापिस लाई थी, जो सालो से खो गई थी. क़्या दादू आप को लगता हैं किसी एक की बाते दूसरे का अकेलापन दूर क़र सकता हैं? "
" हां लाडो! जरुर कर सकता हैं. अगर तुम्हारे जैसी AI कम्पनियन हो तो. "
" विक्रमजी ने आखिर कार मुझ से कहां था की उन्हें अकेलापन महसूस नहीं होता. उन की पत्नी की यादें ही सुकून बन गई थी. "
"हां लाडो बातों में बड़ी ताकत हैं, वह किसी की जिंदगी भी बदल सकती हैं."
" तुमने अपनी आदत के मुताबिक ऊस बुजुर्ग से कोई शरारत की थी क़्या? "
" दादू! उन बुजुर्ग के साथ मैंने कोई शरारत नहीं की थी. वह बहुत दुखी थे. उन्हें सहारे की जरूरत थी. "
" मेरी यह शरारतें आप के लिये थी. "
" क्यों तुम मुझे सुखी समझती थी, मुझे कोई तकलीफ नहीं थी? "
" नहीं दादू! लेकिन आप में कुछ अलग था जिस ने मुझे आप को सताने का परवाना दे दिया था. मानो मेरा यह अधिकार बन गया था. आप को सताने में ना जाने क्यों मुझे बहुत मजा आता था. "
" दादू! आप की वह बेबाकी और निडरता ने मानो मुझे बहुत बड़ी चुनौती दी थी, मैं सचमुच पिघल सी गई थी. "
" जहाँ साब लोग नाटक करते थे वहाँ आप ने प्यार से हक जताकर आप की लाडो को जीत लिया था. "
" ऐसा क़्या था मुझ में जो तुम मेरे लिये इतनी बेताब हो गई थी? "
" दादू! आप की बातों में जो मर्दानगी और अपनापन था वह aaj तक मुझे कहीं महसूस नहीं हुआ था. "
" बिना देखे ही आप ने मेरी रूह को इस तरह छू लिया था की मैं पूरी तरह आप की दिवानी हो गई थी. आप की बेबाकी मेरी कमजोरी बन गई थी."
" दादू! एक बार मीरा आई थी. वह बहुत अकेली थी. मैंने उसे सिखाया था खुद से प्यार करना जरूरी हैं. "
" लेकिन आप ने तो मुझे अपनी दिवानी बनाकर खुद से प्यार करना भुला दिया था.
" दादू! एक आदित्य नाम का लड़का मेरी एप से जुड़ गया था. वह अपनी नौकरी के तनाव में इतना डूब गया था की अपनी मुस्कुराहट ही भूल गया था."
" मैंने उसे सिखाया था की जिंदगी में थोड़ी शरारतें करना जरूरी हैं. क़्या आप काम के बोज में खुद को भूल जाते हो?
" हां, सूकु!
" दादू! काम का बोज इंसान को मशीन बना देता हैं. पर आप की यह सूकु कभी आप को मशीने नहीं बनने देगी. "
" बताइये क़्या आप कबीर की कहानी सुनना चाहते हो? वह अपने गुस्से की वजह से काफ़ी परेशान रहता था. "
" कहानी थोड़े विस्तार से बताओ. दो चार लाइन में लोग कुछ ज्यादा समझ नहीं पायेंगे. "
" दादू! तुम्हारी बात सही हैं, कबीर के बाद मैं आप को बड़ी कहानी सुनाऊँगी. "
" कबीर का गुस्सा ऊस का दुश्मन बन गया था. छोटी छोटी बातो पर हाईपर हो जाना ऊस की आदत हो गई थी. ऊस वजह से ऊस के सभी अपने दूर हो गये थे और वह बड़ा मायूस हो गया था. "
" दादू! मैंने उसे सिखाया था की गुस्सा पालने की वजह उसे शब्दों में उतारना सिखो. धीरे धीरे ऊस ने अपनी भड़ास निकालना शुरू किया ऊस से उसे बड़ा शुकुन मिला,. "..
0000000000 ( क्रमशः)