The Author prem chand hembram फॉलो Current Read चूहों की मौज - बिल्ली मामू की मौत By prem chand hembram हिंदी बाल कथाएँ Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books सत्य पथ पर चलो ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”... Honted Jobplace - 7 ऑफिस का मेन गेट। रात के 11:15 बज चुके हैं। बाहर तेज़ हवा चल... कागज़ के सामने हारता इंसान - बोधार्थी रौनक़ । कागज़ के सामने हारता इंसान गाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़त... दुश्मनी के दरमियान इश्क (भाग-18) Part 18: अतीत का दरवाज़ादरवाज़े के बाहर कदमों की आहट…धीरे-धी... अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 23 आर्यन ने इशारा किया, और वे सातों गुंडे एक साथ अयान पर टूट पड... श्रेणी लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी शेयर करे चूहों की मौज - बिल्ली मामू की मौत (232) 906 7k शहर के किनारे एक विशाल अनाज का गोदाम था।दिन में वहाँ सन्नाटा पसरा रहता, पर रात होते ही वहाँ एक अलग ही दुनिया जाग उठती । गोदाम में गेहूँ, चावल, गुड़, सूखा दूध और मक्का के बड़े-बड़े ढेर लगे रहते थे।रात होते ही चूहे अपने-अपने बिलों से निकल आते।कोई बोरे में सुराख करता,कोई दाने खींचकर अपने बिल में ले जाता,तो कोई अपने बच्चों के साथ खेलता-कूदता। पूरा गोदाम मानो चूहों का एक छोटा-सा नगर था।लेकिन उस नगर पर हमेशा एक भयानक छाया मंडराती रहती थी।वहाँ एक बड़ी काली बिल्ली रहती थी—जिसे सब डरते-डरते “बिल्ली मामू” कहते थे।बिल्ली मामू बड़ी धूर्त थी।वह अंधेरे में चुपचाप बैठी रहती और जैसे ही कोई चूहा लापरवाह होता—झट से उसे दबोच लेती।इस कारण चूहों की खुशी हमेशा डर में बदल जाती ।धीरे धीरे चूहों की संख्या कम होने लगी ,आए दिन किसी न किसी के बच्चे शिकार होने लगे ,चिंटू को यह देख बड़ा ही दुःख होता उसके कई भाई बहनों को बिल्ली मामू ने चट कर लिया था ।कई बार मीटिंग हुई पर बात बन न सकी ,बिल्ली मामू का आतंक इस कदर भयावह था ,कल्पना करते ही चूहों की सांसे फूलने लगती ।मजाल है कोई उसके सामने भी आ जाय।बच्चे बूढ़े सब अपने आप को मरने के लिए भगवान के भरोसे छोड़ चुके थे ।चिंटू ने कई दिनों तक मंथन किया उसे लगा समाधान समस्या में ही समाहित है ।चूहों में एक छोटा लेकिन बहुत समझदार चूहा था— चिंटू।वह अक्सर सबको समझाता—“डरने से कुछ नहीं होगा।अगर हम बुद्धि से काम लें तो बिल्ली से भी बच सकते हैं।”लेकिन कई चूहे हँसते हुए कहते—“अरे चिंटू ! बिल्ली से अभी तक कौन जीत पाया है?”चिंटू चुप हो जाता,पर उसके मन में हमेशा कोई न कोई उपाय चलता रहता।एक दिन चिंटू ने गोदाम के कोने में एक पुराना मिट्टी का घड़ा देखा।उसे देखते ही उसके मन में एक योजना कौंधी।उसने सभी चूहों को बुलाकर कहा—“बिल्ली मामू को ताकत से नहीं हराया जा सकता,लेकिन लालच से हराया जा सकता है।”सब चूहे आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगे।चिंटू ने अपनी योजना बताई।उस रात चूहों ने मिलकर घड़े के पास गुड़ और सूखे दूध के पैकेट रख दिए।कुछ गुड़ के टुकड़े घड़े के अंदर भी डाल दिए।थोड़ी ही देर में गुड़ की मीठी खुशबू पूरे गोदाम में फैल गई।फिर सब चूहे छिपकर बैठ गए।रात के सन्नाटे में बिल्ली मामू की नाक फड़क उठी।उसे गुड़ की खुशबू आई।वह धीरे-धीरे दबे पाँव घड़े के पास आई।अंदर झाँककर देखा—घड़े में गुड़ के टुकड़े पड़े थे।लालच में उसने तुरंत अपना सिर घड़े के अंदर डाल दिया।लेकिन घड़ा बहुत तंग था।सिर तो अंदर चला गया,पर बाहर नहीं निकल पाया।अब बिल्ली घड़े के साथ इधर-उधर भागने लगी।उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।कभी बोरे से टकराती तो ,कभी दीवार से।वह घबराकर घड़े को निकालने की बहुत कोशिश करती रही।लेकिन घड़ा और कसता चला गया।आखिरकार थककर वह वहीं गिर पड़ी।कुछ देर में उसकी सारी ताकत खत्म हो गई।अब बिल्ली मामू बिल्कुल शांत पड़ी थी।जैसे ही मामू परलोक को गमन किए चूहों में आनंद और हर्ष की लहर दौड़ गई ।कुछ देर बाद चिंटू ने धीरे से आवाज लगाई—“अब बाहर आ जाओ!”एक-एक करके चूहे अपने बिलों से बाहर निकलने लगे।उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि एक छोटे से चूहे ने अपनी बुद्धि सेबिल्ली मामू को बिना लड़े ही हरा दिया।सरदार चूहा मुस्कुराकर बोला—“देखा भाइयों!जहाँ बुद्धि होती है, वहाँ भय टिक नहीं सकता।”इसलिए कहा गया है " अक्ल बड़ी या भैंस" फिर उसने कहा—“सच ही कहा गया है—लालच मनुष्य को विनाश के द्वार तक ले जाता है।इसलिए संतोष ही सबसे बड़ा सुख है — ‘संतोषं परमं सुखम्।’”अब चूहों की खुशी का ठिकाना नहीं था।वे खुशी से नाचने लगे और चिल्लाने लगे—“अब हमारी मौज है…और बिल्ली मामू की मौत!”उस दिन के बाद गोदाम में पहली बार सच्ची शांति छा गई।📜 संदेश " बुद्धि सबसे बड़ी शक्ति है।लालच अक्सर विनाश का कारण बनता है" । डर से नहीं, समझदारी से समस्या का समाधान होता है।जयगुरु 🙏🙏🙏 Download Our App