बाल कथाएँ कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Children Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and c...Read More


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  • चार मूर्खों में एक काना

    चार मूर्खों में एक "काना" बहुत पहले की बात है।झारखंड के सुदूर वन-प्रांतीय इलाके...

  • जरा संभल के

    जरा संभल केकमल चोपड़ा​सजग की मौसी की लड़की की शादी थी। शादी में शामिल होने के लि...

  • किया जो अनदेखा

    ​किया जो अनदेखा कमल चोपड़ा         ​सजग स्कूल से लौटा तो माँ झुंझला रही थी— &#34...

जब मटकू को मिला भोंपू By prem chand hembram

जब मटकू को मिला भोपू(पंचतंत्र शैली की हास्य-व्यंग्य कथा)जंगल के बीचों-बीच एक बूढ़ा पीपल का पेड़ था—वह पेड़ नहीं मटकू का आंगन था ,उसी पेड़ पर रहता था एक चंचल बंदर—मटकू।मटकू जितना फु...

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चार मूर्खों में एक काना By prem chand hembram

चार मूर्खों में एक "काना" बहुत पहले की बात है।झारखंड के सुदूर वन-प्रांतीय इलाके में भयंकर अकाल पड़ा।धरती सूख गई, नदियाँ थम गईं, और लोग भूख-प्यास से तड़पकर असमय ही काल के गाल में सम...

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देश के हम सिपाही By कमल चोपड़ा

​देश के हम सिपाही  कमल चोपड़ा​      माँ कह रही थी, “तुम तीन दिन घर से ही मत निकलो।”लेकिन सजग नहीं डर रहा था।​अगले दिन सजग सुबह-सुबह बाजार से ब्रेड लेने जा रहा था। जैसे ही वह सड़क प...

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देश है तो हम हैं By कमल चोपड़ा

​ देश है तो हम हैं कमल चोपड़ा       ​अगले दिन वे दीदी से मिले और दीदी को सारी बात बतायी तो दीदी ने कहा, “हाँ, ये ऐसे बाबा हमारे देश के दुश्मन हैं। जितने भी ऐसे बाबा हैं सबके सब निन...

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ढोंग-फरेब का एक आश्रम By कमल चोपड़ा

​ ढोंग-फरेब का एक आश्रम​ कमल चोपड़ा      दशहरे की छुट्टियाँ हो गई थीं। छुट्टी का आज पहला दिन था। सजग अपने दोस्तों श्रेयस और रोहण के साथ घूमने निकल पड़ा। घूमते-घूमते वे शहर के बाहरी...

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छिपे हैं दुश्मन आस-पास By कमल चोपड़ा

​छिपे हैं दुश्मन आस-पास    कमल चोपड़ा​    काफ़ी देर तक वे दोनों प्लेटफार्म पर खड़े रहे। पगड़ी-मूंछों वाले को देखते रहे पर वह कहीं नहीं दिखा। सजग बोला, "मुझे तो लगता है अटैची में ज़...

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जरा संभल के By कमल चोपड़ा

जरा संभल केकमल चोपड़ा​सजग की मौसी की लड़की की शादी थी। शादी में शामिल होने के लिये उसके बाबूजी को लखनऊ जाना था। पर दो दिन पहले बाबूजी बीमार हो गये। समस्या बन गई कि शादी में कौन जाय...

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बच्चा-बच्चा बना सिपाही By कमल चोपड़ा

बच्चा-बच्चा बना सिपाही      कमल चोपड़ा​हर तरफ सजग के साहस और बुद्धिमानी-समझदारी की प्रशंसा हो रही थी। स्कूल के अध्यापक, उसके सहपाठी, गली-मुहल्लेवाले सभी उसे बधाइयाँ दे रहे थे। वे ल...

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देश हमारा, घर हमारा By कमल चोपड़ा

  देश हमारा, घर हमारा  कमल चोपड़ा            ​सरला मैडम के दायें हाथ में पट्टी बँधी हुई थी। पढ़ाते-पढ़ाते वे बार-बार अपने बायें हाथ से अपनी दाईं कलाई को दबा रही थीं। जाहिर था उन्हे...

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किया जो अनदेखा By कमल चोपड़ा

​किया जो अनदेखा कमल चोपड़ा         ​सजग स्कूल से लौटा तो माँ झुंझला रही थी— "अब ये मिक्सी खराब हो गई। अभी छह महीने पहले ही तो खरीदी थी; इतनी महँगी और बड़ी कम्पनी की थी फिर भी प...

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बाघ के पंजे By कमल चोपड़ा

बाघ के पंजे 
 कमल चोपड़ा      
  ​सजग के माँ-बाप उसे कभी किसी काम के लिये नहीं टोकते थे। सजग भी ऐसा कुछ भी नहीं करता था जिसके लिये उसे पछताना पड़े या माँ...

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देश के लिये By कमल चोपड़ा

​देश के लियेकमल चोपड़ा   ​      पूरी कक्षा बड़े ध्यान से सरला मैडम की बात सुन रही थी। मैडम कह रही थीं—​“ईश्वर ने इंसान को इतनी शक्ति दी है कि वह असंभव को भी संभव बना सकता है। ऐसा क...

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बगुला और सियार की शर्त By prem chand hembram

🪶 बगुला और सियार की शर्त(हास्य-व्यंग्य से भरी पंचतंत्र शैली की बाल कथा)जंगल के किनारे एक बड़ा सा तालाब था।सुबह होते ही वहाँ पक्षियों की पंचायत जमा हो जाती—कहीं बत्तखें तैरतीं, कहीं...

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चूहों की मौज - बिल्ली मामू की मौत By prem chand hembram

 शहर के किनारे एक विशाल अनाज का गोदाम था।दिन में वहाँ सन्नाटा पसरा रहता, पर रात होते ही वहाँ एक अलग ही दुनिया जाग उठती । गोदाम में गेहूँ, चावल, गुड़, सूखा दूध और मक्का के बड़े-बड़े...

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​नक्षत्र यात्री - 2 By mamta

​नक्षत्र यात्री - अध्याय 4: थकान और संकल्प​पोर्टल के भीतर का दृश्य वैसा नहीं था जैसा माया ने कल्पना की थी। यहाँ न तो ज़मीन थी और न ही आसमान, बस चारों ओर नीली और बैंगनी रोशनी की लहर...

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पदचिन्ह By Rajeev kumar

पदचिन्ह बचपन में दादा-दादी, नाना-नानी की सुनाई गई कहानियां किसको अच्छी नहीं लगती है भला। उन कहानियों में भुत-प्रेत, परियों और देवी-देवताओं की कहानियों का जिक्र होता है। विभिन्न तरह...

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लुका-छीपी By Rajeev kumar

  बचपन के निराले दिन, कब लौट के आने वाले दिन। घुमना-फिरना, मिलना-मिलाना, हंसी-ठहाके, सब यादों में बसे हैं। मेरे बचपन के तरह ही गुजरा, छाया और रोहना का बचपन। रमणीक अपार्टमेंन्ट के प...

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तख्ती, टाट-पट्टटी और वो बचपन By bekhbar

सर्दियों की हल्की धूप खिली थी। 75 वर्षीय रामदीन बाबू अपनी छड़ी टेकते हुए पार्क के किनारे धीरे-धीरे चल रहे थे। तभी पास की सड़क पर एक पीली स्कूल बस आकर रुकी। बस का हॉर्न और बच्चों की...

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KAFAN By Tanu Kadri

झोंपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए थे और अंदर बेटे की जवान बीवी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हि...

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चंद्रमुखी By Raj Phulware

चंद्रमुखी अध्याय 1 – अंबरलोक की अप्सराअनंत तारों के बीच, एक रहस्यमयी ग्रह था — अंबरलोक।यह ग्रह अपने सौंदर्य, रहस्य और कठोर नियमों के लिए पूरे ब्रह्मांड में प्रसिद्ध था। यहाँ कोई रा...

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The Great Gorila - 2 By Ravi Bhanushali

जंगल अब पहले जैसा नहीं रहा था। जहाँ कभी राख और सन्नाटा था, वहाँ फिर से हरियाली लौट आई थी। नई बेलें पुराने पेड़ों से लिपट गई थीं, पक्षियों की आवाज़ें सुबह को जगाने लगी थीं और नदी का...

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बेज़ुबान By Raj Phulware

बेज़ुबानलेखक राज फुलवरेसुबह की हल्की धूप शहर की सड़कों पर बिखरने लगी थी। चाय की थड़ियों पर भाप उड़ते कुल्हड़ों की महक थी, आँखों में नींद लिए लोग अपने-अपने काम पर निकल रहे थे। इसी भ...

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मच्छर और कीड़े रौशनी के पीछे क्यों भागते हैं By JASWANT SINGH SAINI

एक समय की बात है...घना, हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में एक दिन सारे मच्छर और कीड़े इकट्ठे हुए। सबके चेहरों पर उदासी और चिंता की लकीरें थीं।एक मच्छर बोला:“हमें कोई पसंद क्यों नहीं करता...

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चिड़ियावन के पांच दोस्त By Galp Gatha

भाग 1 उपन्यास: चिड़ियावन के पाँच दोस्त “चिड़ियावन की सुबह और पाँचों की टोली”सुबह का वक्त था।गाँव चिड़ियावन में सूरज की पहली किरण जैसे ही आम के पेड़ की पत्तियों पर पड़ी, चिड़ियों की...

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जिंदगी एक कहानी By Adv Arun Mishra

        जिंदगी एक कहानी एक हंसता हुआ मासूम सा लड़का जो हमेशा अपनी दुनिया में खोया रहता था , उसकी बहुत सी लड़कियों से दोस्ती थी ,समय काटता गया फिर उस लड़के को एक लड़की ने सादी के लि...

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दो दोस्तो की कहानी By Mohammad Samir

दो दोस्तों की कहानीएक घने और हरे-भरे जंगल में दो दोस्त रहते थे। एक था बहुत ही शक्तिशाली, विशाल हाथी, जिसका नाम था बलवान और दूसरा था एक छोटा, नटखट चूहा, जिसका नाम था चतुर। उन दोनों...

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छोटी चिंगारी बड़ी आग By Raju kumar Chaudhary

छोटी चिंगारी – बड़ी आग1. शुरुआतएक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का लड़का रहता था। पढ़ाई में अच्छा था, पर परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। अक्सर लोग कहते – “इससे कुछ नहीं होगा, ये बस...

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गरीब बच्चे का सपना By mannu talks

गरीब बच्चे का सपनाएक छोटे से गाँव में एक बच्चा रहता था। उसका नाम था आरव। आरव का परिवार बहुत गरीब था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते और माँ दूसरों के घरों में काम करके परिवार का पे...

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कहानियों का जादुई बक्सा By Raju kumar Chaudhary

कहानियों का जादुई बक्सालेखक परिचयराजु कुमार चौधरी – (लेखक)राजु कुमार चौधरी एक उत्साही और प्रेरक लेखक हैं, जो बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक और रोचक कहानियाँ लिखते हैं। उनका उद्देश्य बच्च...

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चीकू और मैजिक पेंसिल By Deepa shimpi

---कार्टून स्टोरी: "चीकू और मैजिक पेंसिल"एक समय की बात है, चीकू नाम का एक छोटा खरगोश अपने माता-पिता के साथ जंगल के किनारे वाले गाँव में रहता था। वह बहुत शरारती लेकिन होशियार था। उस...

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भीड में खोया हुवा बचपन? By Bhavika Rathod

 एक सामान्य सुबहसर्दियों की सुबह थी। स्टेशन पर कोहरा छाया हुआ था।लोग अपने बैग और सपनों को लिए ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे।कहीं किसी के चाय के कप से भाप उठ रही थी,तो कहीं कोई स्टेशन...

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जलोट - एक रहस्यमयी जीव By Jagmal Dhanda

             जलोट - एक रहस्यमयी जीवबात उन दिनों की है जब 10 - 15 साल तक के बच्चे स्कूल कॉलेज में कम और गाय, भैंस, भेड़  बकरी व चरने वाले जीवों को चराने ज्यादा जाते थे। ऐसा ही एक चर...

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मेरी स्कूल लाइफ की यादें By Simranpreet Kaur

Hello friends!चलो चलें मेरी स्कूल लाइफ की ओर मेरी जर्नी कुछ अजीब तरीके से शुरू हुई — मुझे स्कूल जाना ही नहीं था! प्री-नर्सरी के पहले दिन मेरी दादी मां और बड़े भाई-बहन मुझे स्कूल छो...

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गुड्डी और उसकी पतंग By Deepa shimpi

---भाग 1: गुड्डी का सपनाएक छोटे से गांव में गुड्डी नाम की 10 साल की चुलबुली लड़की रहती थी। उसकी आंखों में सपने थे और दिल में आसमान छूने की तमन्ना। गुड्डी को पतंग उड़ाना बहुत पसंद थ...

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मोर का पंख और लड़के का सपना By Bihar Mobile

राजू एक 13 साल का लड़का था जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रहता था। उसके पापा एक बढ़ई (carpenter) थे, जो लकड़ियों से फर्नीचर बनाकर रोज़ी-रोटी चलाते थे। माँ घर पर रहती थीं, औ...

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वृक्षारोपण By Deepa shimpi

Bing Writerवृक्षारोपण: एक नई शुरुआतगुजरात के एक छोटे से गाँव, हरितपुर, में रहने वाले किशोर, आरव, को प्रकृति से गहरा लगाव था। वह अक्सर गाँव के पास बहने वाली नदी के किनारे बैठकर पक्ष...

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दाग जो था ही नहीं By Dayanand Jadhav

गाँव सजनपुर, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था, एक ऐसा स्थान था जहाँ गलती की गूँज, सच्चाई से ज़्यादा तेज़ सुनाई देती थी। वहाँ की गलियाँ, वहाँ के लोग, सब जैसे एक परिवार का हिस्सा थे।...

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यमलोक का दरवाज़ाएक रहस्यमयी कथा By Aarti w

: रात के ठीक बारह बजे थे। नासिक के पास एक छोटे से गाँव, त्रिंबक, में भयंकर आंधी चल रही थी। बिजली कड़क रही थी और हवाएं जैसे किसी प्राचीन रहस्य को बाहर लाने पर तुली थीं। गांव का हर आ...

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रुद्र का जंगल By Ravina

बहुत दूर, ऊँचे पहाड़ों और घनी वादियों के बीच बसा था एक विशाल जंगल — सहस्त्रवन। यहाँ हर प्राणी स्वतंत्रता से रहता था। इस जंगल का राजा था एक बूढ़ा लेकिन बलवान शेर — रुद्र।रुद्र अब उम...

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काला संदूक By Dayanand Jadhav

महाराष्ट्र के एक छोटे-से कस्बे में स्थित एक पुराना संग्रहालय आज भी अनेक रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है। कभी यह एक राजमहल हुआ करता था। वर्षों से वहाँ एक भारी, काले रंग का लोहे का...

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हंस और कौवा By DINESH KUMAR KEER

हंस और कौवा की प्रवृत्तिएक समय की बात है, एक जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल का राजा था और सभी जानवर उसकी बात मानते थे। लेकिन शेर बहुत ही क्रूर था और वह अपने शिकार को मारने के लिए...

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सबका दोस्त रंजन By Dayanand Jadhav

पाँचवीं कक्षा में पढ़ने वाला रंजन सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि व्यवहार में भी अव्वल था। कोई झगड़ा हो या किसी को मदद की ज़रूरत — रंजन हर जगह मौजूद रहता। वह सबका दोस्त था, लेकिन यह...

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क्या उसे न्याय मिल पाएगा? By Dayanand Jadhav

प्रस्तावना कहते हैं कि जीवन में हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है, लेकिन कभी-कभी रात इतनी लंबी हो जाती है कि सवेरे का इंतजार भी मुश्किल हो जाता है। यह कहानी है राजेश की - एक ऐसे व...

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दरवाजे पर आई खबर By Dayanand Jadhav

प्रथम भाग: एक शांत शाम का अंत सर्दियों की वह रात कुछ अलग थी। शहर के पुराने मोहल्ले में स्थित श्रीधर बाबू का मकान, जो कभी हँसी-खुशी से गूंजता था, आज सन्नाटे में डूबा हुआ था। घड़ी की...

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सपनों की उड़ान By Dayanand Jadhav

आसमान में काले बादल घिर आए थे, जैसे प्रकृति भी रोहन के मन की उदासी को महसूस कर रही हो। वह अपनी छत पर खड़ा था, आंखों में आंसू और हाथ में पिता की दुकान का कर्ज चुकाने का नोटिस। "कैसे...

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जंगल का विदारक दृश्य: एकविनोदपूर्ण रहस्य By Dayanand Jadhav

हर साल की तरह इस बार भी "खोजीसंघ" ने जंगल में एक रोमांचक यात्रा का आयोजन किया। संघ के नेता, प्रोफेसर परमानंद पांडे, में एक अद्भुत प्रतिभा थी - वे हर चीज़ में रहस्य खोज निकालते थे।च...

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जंगल का बूढ़ा राजा By Ravina

समय सब पर भारी होता है। ताकत कभी हमेशा नहीं रहती. सम्मान, समझ और अनुभव भी शक्ति के बराबर होते हैं।मुख्य पात्र:शेर- रूद्रएक समय का वीर और जंगल का राजा, लेकिन अब बुढ़ापे के कारण कमज़...

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अंधकार में एक लौ By Rohan Beniwal

गर्मियों की छुट्टियों की शुरुआत थी। स्कूल बंद हो चुके थे, और शहर की भागदौड़ से कुछ समय के लिए राहत मिल गई थी। माया—एक 13 साल की होशियार और जागरूक लड़की—अपने मम्मी-पापा के कहने पर द...

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जब मटकू को मिला भोंपू By prem chand hembram

जब मटकू को मिला भोपू(पंचतंत्र शैली की हास्य-व्यंग्य कथा)जंगल के बीचों-बीच एक बूढ़ा पीपल का पेड़ था—वह पेड़ नहीं मटकू का आंगन था ,उसी पेड़ पर रहता था एक चंचल बंदर—मटकू।मटकू जितना फु...

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चार मूर्खों में एक काना By prem chand hembram

चार मूर्खों में एक "काना" बहुत पहले की बात है।झारखंड के सुदूर वन-प्रांतीय इलाके में भयंकर अकाल पड़ा।धरती सूख गई, नदियाँ थम गईं, और लोग भूख-प्यास से तड़पकर असमय ही काल के गाल में सम...

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देश के हम सिपाही By कमल चोपड़ा

​देश के हम सिपाही  कमल चोपड़ा​      माँ कह रही थी, “तुम तीन दिन घर से ही मत निकलो।”लेकिन सजग नहीं डर रहा था।​अगले दिन सजग सुबह-सुबह बाजार से ब्रेड लेने जा रहा था। जैसे ही वह सड़क प...

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देश है तो हम हैं By कमल चोपड़ा

​ देश है तो हम हैं कमल चोपड़ा       ​अगले दिन वे दीदी से मिले और दीदी को सारी बात बतायी तो दीदी ने कहा, “हाँ, ये ऐसे बाबा हमारे देश के दुश्मन हैं। जितने भी ऐसे बाबा हैं सबके सब निन...

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ढोंग-फरेब का एक आश्रम By कमल चोपड़ा

​ ढोंग-फरेब का एक आश्रम​ कमल चोपड़ा      दशहरे की छुट्टियाँ हो गई थीं। छुट्टी का आज पहला दिन था। सजग अपने दोस्तों श्रेयस और रोहण के साथ घूमने निकल पड़ा। घूमते-घूमते वे शहर के बाहरी...

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छिपे हैं दुश्मन आस-पास By कमल चोपड़ा

​छिपे हैं दुश्मन आस-पास    कमल चोपड़ा​    काफ़ी देर तक वे दोनों प्लेटफार्म पर खड़े रहे। पगड़ी-मूंछों वाले को देखते रहे पर वह कहीं नहीं दिखा। सजग बोला, "मुझे तो लगता है अटैची में ज़...

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जरा संभल के By कमल चोपड़ा

जरा संभल केकमल चोपड़ा​सजग की मौसी की लड़की की शादी थी। शादी में शामिल होने के लिये उसके बाबूजी को लखनऊ जाना था। पर दो दिन पहले बाबूजी बीमार हो गये। समस्या बन गई कि शादी में कौन जाय...

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बच्चा-बच्चा बना सिपाही By कमल चोपड़ा

बच्चा-बच्चा बना सिपाही      कमल चोपड़ा​हर तरफ सजग के साहस और बुद्धिमानी-समझदारी की प्रशंसा हो रही थी। स्कूल के अध्यापक, उसके सहपाठी, गली-मुहल्लेवाले सभी उसे बधाइयाँ दे रहे थे। वे ल...

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देश हमारा, घर हमारा By कमल चोपड़ा

  देश हमारा, घर हमारा  कमल चोपड़ा            ​सरला मैडम के दायें हाथ में पट्टी बँधी हुई थी। पढ़ाते-पढ़ाते वे बार-बार अपने बायें हाथ से अपनी दाईं कलाई को दबा रही थीं। जाहिर था उन्हे...

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किया जो अनदेखा By कमल चोपड़ा

​किया जो अनदेखा कमल चोपड़ा         ​सजग स्कूल से लौटा तो माँ झुंझला रही थी— "अब ये मिक्सी खराब हो गई। अभी छह महीने पहले ही तो खरीदी थी; इतनी महँगी और बड़ी कम्पनी की थी फिर भी प...

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बाघ के पंजे By कमल चोपड़ा

बाघ के पंजे 
 कमल चोपड़ा      
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देश के लिये By कमल चोपड़ा

​देश के लियेकमल चोपड़ा   ​      पूरी कक्षा बड़े ध्यान से सरला मैडम की बात सुन रही थी। मैडम कह रही थीं—​“ईश्वर ने इंसान को इतनी शक्ति दी है कि वह असंभव को भी संभव बना सकता है। ऐसा क...

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बगुला और सियार की शर्त By prem chand hembram

🪶 बगुला और सियार की शर्त(हास्य-व्यंग्य से भरी पंचतंत्र शैली की बाल कथा)जंगल के किनारे एक बड़ा सा तालाब था।सुबह होते ही वहाँ पक्षियों की पंचायत जमा हो जाती—कहीं बत्तखें तैरतीं, कहीं...

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चूहों की मौज - बिल्ली मामू की मौत By prem chand hembram

 शहर के किनारे एक विशाल अनाज का गोदाम था।दिन में वहाँ सन्नाटा पसरा रहता, पर रात होते ही वहाँ एक अलग ही दुनिया जाग उठती । गोदाम में गेहूँ, चावल, गुड़, सूखा दूध और मक्का के बड़े-बड़े...

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​नक्षत्र यात्री - 2 By mamta

​नक्षत्र यात्री - अध्याय 4: थकान और संकल्प​पोर्टल के भीतर का दृश्य वैसा नहीं था जैसा माया ने कल्पना की थी। यहाँ न तो ज़मीन थी और न ही आसमान, बस चारों ओर नीली और बैंगनी रोशनी की लहर...

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पदचिन्ह By Rajeev kumar

पदचिन्ह बचपन में दादा-दादी, नाना-नानी की सुनाई गई कहानियां किसको अच्छी नहीं लगती है भला। उन कहानियों में भुत-प्रेत, परियों और देवी-देवताओं की कहानियों का जिक्र होता है। विभिन्न तरह...

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लुका-छीपी By Rajeev kumar

  बचपन के निराले दिन, कब लौट के आने वाले दिन। घुमना-फिरना, मिलना-मिलाना, हंसी-ठहाके, सब यादों में बसे हैं। मेरे बचपन के तरह ही गुजरा, छाया और रोहना का बचपन। रमणीक अपार्टमेंन्ट के प...

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तख्ती, टाट-पट्टटी और वो बचपन By bekhbar

सर्दियों की हल्की धूप खिली थी। 75 वर्षीय रामदीन बाबू अपनी छड़ी टेकते हुए पार्क के किनारे धीरे-धीरे चल रहे थे। तभी पास की सड़क पर एक पीली स्कूल बस आकर रुकी। बस का हॉर्न और बच्चों की...

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KAFAN By Tanu Kadri

झोंपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए थे और अंदर बेटे की जवान बीवी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हि...

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चंद्रमुखी By Raj Phulware

चंद्रमुखी अध्याय 1 – अंबरलोक की अप्सराअनंत तारों के बीच, एक रहस्यमयी ग्रह था — अंबरलोक।यह ग्रह अपने सौंदर्य, रहस्य और कठोर नियमों के लिए पूरे ब्रह्मांड में प्रसिद्ध था। यहाँ कोई रा...

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The Great Gorila - 2 By Ravi Bhanushali

जंगल अब पहले जैसा नहीं रहा था। जहाँ कभी राख और सन्नाटा था, वहाँ फिर से हरियाली लौट आई थी। नई बेलें पुराने पेड़ों से लिपट गई थीं, पक्षियों की आवाज़ें सुबह को जगाने लगी थीं और नदी का...

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बेज़ुबान By Raj Phulware

बेज़ुबानलेखक राज फुलवरेसुबह की हल्की धूप शहर की सड़कों पर बिखरने लगी थी। चाय की थड़ियों पर भाप उड़ते कुल्हड़ों की महक थी, आँखों में नींद लिए लोग अपने-अपने काम पर निकल रहे थे। इसी भ...

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मच्छर और कीड़े रौशनी के पीछे क्यों भागते हैं By JASWANT SINGH SAINI

एक समय की बात है...घना, हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में एक दिन सारे मच्छर और कीड़े इकट्ठे हुए। सबके चेहरों पर उदासी और चिंता की लकीरें थीं।एक मच्छर बोला:“हमें कोई पसंद क्यों नहीं करता...

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चिड़ियावन के पांच दोस्त By Galp Gatha

भाग 1 उपन्यास: चिड़ियावन के पाँच दोस्त “चिड़ियावन की सुबह और पाँचों की टोली”सुबह का वक्त था।गाँव चिड़ियावन में सूरज की पहली किरण जैसे ही आम के पेड़ की पत्तियों पर पड़ी, चिड़ियों की...

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जिंदगी एक कहानी By Adv Arun Mishra

        जिंदगी एक कहानी एक हंसता हुआ मासूम सा लड़का जो हमेशा अपनी दुनिया में खोया रहता था , उसकी बहुत सी लड़कियों से दोस्ती थी ,समय काटता गया फिर उस लड़के को एक लड़की ने सादी के लि...

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दो दोस्तो की कहानी By Mohammad Samir

दो दोस्तों की कहानीएक घने और हरे-भरे जंगल में दो दोस्त रहते थे। एक था बहुत ही शक्तिशाली, विशाल हाथी, जिसका नाम था बलवान और दूसरा था एक छोटा, नटखट चूहा, जिसका नाम था चतुर। उन दोनों...

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छोटी चिंगारी बड़ी आग By Raju kumar Chaudhary

छोटी चिंगारी – बड़ी आग1. शुरुआतएक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का लड़का रहता था। पढ़ाई में अच्छा था, पर परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। अक्सर लोग कहते – “इससे कुछ नहीं होगा, ये बस...

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गरीब बच्चे का सपना By mannu talks

गरीब बच्चे का सपनाएक छोटे से गाँव में एक बच्चा रहता था। उसका नाम था आरव। आरव का परिवार बहुत गरीब था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते और माँ दूसरों के घरों में काम करके परिवार का पे...

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कहानियों का जादुई बक्सा By Raju kumar Chaudhary

कहानियों का जादुई बक्सालेखक परिचयराजु कुमार चौधरी – (लेखक)राजु कुमार चौधरी एक उत्साही और प्रेरक लेखक हैं, जो बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक और रोचक कहानियाँ लिखते हैं। उनका उद्देश्य बच्च...

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चीकू और मैजिक पेंसिल By Deepa shimpi

---कार्टून स्टोरी: "चीकू और मैजिक पेंसिल"एक समय की बात है, चीकू नाम का एक छोटा खरगोश अपने माता-पिता के साथ जंगल के किनारे वाले गाँव में रहता था। वह बहुत शरारती लेकिन होशियार था। उस...

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भीड में खोया हुवा बचपन? By Bhavika Rathod

 एक सामान्य सुबहसर्दियों की सुबह थी। स्टेशन पर कोहरा छाया हुआ था।लोग अपने बैग और सपनों को लिए ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे।कहीं किसी के चाय के कप से भाप उठ रही थी,तो कहीं कोई स्टेशन...

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जलोट - एक रहस्यमयी जीव By Jagmal Dhanda

             जलोट - एक रहस्यमयी जीवबात उन दिनों की है जब 10 - 15 साल तक के बच्चे स्कूल कॉलेज में कम और गाय, भैंस, भेड़  बकरी व चरने वाले जीवों को चराने ज्यादा जाते थे। ऐसा ही एक चर...

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मेरी स्कूल लाइफ की यादें By Simranpreet Kaur

Hello friends!चलो चलें मेरी स्कूल लाइफ की ओर मेरी जर्नी कुछ अजीब तरीके से शुरू हुई — मुझे स्कूल जाना ही नहीं था! प्री-नर्सरी के पहले दिन मेरी दादी मां और बड़े भाई-बहन मुझे स्कूल छो...

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गुड्डी और उसकी पतंग By Deepa shimpi

---भाग 1: गुड्डी का सपनाएक छोटे से गांव में गुड्डी नाम की 10 साल की चुलबुली लड़की रहती थी। उसकी आंखों में सपने थे और दिल में आसमान छूने की तमन्ना। गुड्डी को पतंग उड़ाना बहुत पसंद थ...

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मोर का पंख और लड़के का सपना By Bihar Mobile

राजू एक 13 साल का लड़का था जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रहता था। उसके पापा एक बढ़ई (carpenter) थे, जो लकड़ियों से फर्नीचर बनाकर रोज़ी-रोटी चलाते थे। माँ घर पर रहती थीं, औ...

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वृक्षारोपण By Deepa shimpi

Bing Writerवृक्षारोपण: एक नई शुरुआतगुजरात के एक छोटे से गाँव, हरितपुर, में रहने वाले किशोर, आरव, को प्रकृति से गहरा लगाव था। वह अक्सर गाँव के पास बहने वाली नदी के किनारे बैठकर पक्ष...

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दाग जो था ही नहीं By Dayanand Jadhav

गाँव सजनपुर, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था, एक ऐसा स्थान था जहाँ गलती की गूँज, सच्चाई से ज़्यादा तेज़ सुनाई देती थी। वहाँ की गलियाँ, वहाँ के लोग, सब जैसे एक परिवार का हिस्सा थे।...

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यमलोक का दरवाज़ाएक रहस्यमयी कथा By Aarti w

: रात के ठीक बारह बजे थे। नासिक के पास एक छोटे से गाँव, त्रिंबक, में भयंकर आंधी चल रही थी। बिजली कड़क रही थी और हवाएं जैसे किसी प्राचीन रहस्य को बाहर लाने पर तुली थीं। गांव का हर आ...

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रुद्र का जंगल By Ravina

बहुत दूर, ऊँचे पहाड़ों और घनी वादियों के बीच बसा था एक विशाल जंगल — सहस्त्रवन। यहाँ हर प्राणी स्वतंत्रता से रहता था। इस जंगल का राजा था एक बूढ़ा लेकिन बलवान शेर — रुद्र।रुद्र अब उम...

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काला संदूक By Dayanand Jadhav

महाराष्ट्र के एक छोटे-से कस्बे में स्थित एक पुराना संग्रहालय आज भी अनेक रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है। कभी यह एक राजमहल हुआ करता था। वर्षों से वहाँ एक भारी, काले रंग का लोहे का...

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हंस और कौवा By DINESH KUMAR KEER

हंस और कौवा की प्रवृत्तिएक समय की बात है, एक जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल का राजा था और सभी जानवर उसकी बात मानते थे। लेकिन शेर बहुत ही क्रूर था और वह अपने शिकार को मारने के लिए...

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सबका दोस्त रंजन By Dayanand Jadhav

पाँचवीं कक्षा में पढ़ने वाला रंजन सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि व्यवहार में भी अव्वल था। कोई झगड़ा हो या किसी को मदद की ज़रूरत — रंजन हर जगह मौजूद रहता। वह सबका दोस्त था, लेकिन यह...

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क्या उसे न्याय मिल पाएगा? By Dayanand Jadhav

प्रस्तावना कहते हैं कि जीवन में हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है, लेकिन कभी-कभी रात इतनी लंबी हो जाती है कि सवेरे का इंतजार भी मुश्किल हो जाता है। यह कहानी है राजेश की - एक ऐसे व...

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दरवाजे पर आई खबर By Dayanand Jadhav

प्रथम भाग: एक शांत शाम का अंत सर्दियों की वह रात कुछ अलग थी। शहर के पुराने मोहल्ले में स्थित श्रीधर बाबू का मकान, जो कभी हँसी-खुशी से गूंजता था, आज सन्नाटे में डूबा हुआ था। घड़ी की...

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सपनों की उड़ान By Dayanand Jadhav

आसमान में काले बादल घिर आए थे, जैसे प्रकृति भी रोहन के मन की उदासी को महसूस कर रही हो। वह अपनी छत पर खड़ा था, आंखों में आंसू और हाथ में पिता की दुकान का कर्ज चुकाने का नोटिस। "कैसे...

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जंगल का विदारक दृश्य: एकविनोदपूर्ण रहस्य By Dayanand Jadhav

हर साल की तरह इस बार भी "खोजीसंघ" ने जंगल में एक रोमांचक यात्रा का आयोजन किया। संघ के नेता, प्रोफेसर परमानंद पांडे, में एक अद्भुत प्रतिभा थी - वे हर चीज़ में रहस्य खोज निकालते थे।च...

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जंगल का बूढ़ा राजा By Ravina

समय सब पर भारी होता है। ताकत कभी हमेशा नहीं रहती. सम्मान, समझ और अनुभव भी शक्ति के बराबर होते हैं।मुख्य पात्र:शेर- रूद्रएक समय का वीर और जंगल का राजा, लेकिन अब बुढ़ापे के कारण कमज़...

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अंधकार में एक लौ By Rohan Beniwal

गर्मियों की छुट्टियों की शुरुआत थी। स्कूल बंद हो चुके थे, और शहर की भागदौड़ से कुछ समय के लिए राहत मिल गई थी। माया—एक 13 साल की होशियार और जागरूक लड़की—अपने मम्मी-पापा के कहने पर द...

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